प्रमुख कहानियां
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अपनी देखभाल

अपने अंदर छिपे बच्चे के साथ पुनः जुड़ें

डॉ. जोज़ेफ़ हॉवेल   अमेरिका में ‘द इंस्टीट्यूट फ़ॉर कॉन्शियस बीइंग’ के संस्थापक हैं। वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव में अपने मुख्य भाषण के दौरान उन्होंने एक अभ्यास सिखाया ताकि दर्शकों को अपन

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कार्यक्षेत्र

अकेला रेंजर

डॉ. इचक अडीज़ेस विकास और समृद्धि के लिए और संबंधित सभी लोगों की देखभाल करने हेतु मिलकर काम करने के लिए एक आश्चर्यजनक समाधान प्रस्तुत करते हैं। नेतृत्व की जटिलताओं से निपटने में, अधिकारी

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कार्यक्षेत्र

आपकी नींद कितनी अच्छी है?

पिछले महीने के लेख को जारी रखते हुए स्टैनिस्लस लजूजी हमारी नींद के पैटर्न के बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं और बता रहे हैं कि वास्तव में अच्छी नींद का नित्यक्रम बनाने के लिए क्या

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मई 2024 अंक

एकता ही मार्ग है

प्रिय पाठकों,

14 से 17 मार्च 2024 को कान्हा शांतिवनम् में लगभग 60,000 लोग एक अंतर्धार्मिक सभा के लिए एकत्रित हुए थे जिसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट ने आयोजित किया था। इसमें अनेक देशों से लगभग 300 संस्थाओं और विभिन्न आध्यात्मिक व धार्मिक मान्यताओं एवं पद्धतियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

वहाँ विस्तृत वार्ताएँ व छोटे समूहों में चर्चाएँ, प्रदर्शनियाँ व स्टॉल, सबके लिए एक-दूसरे की पद्धतियों का अनुभव करने के अवसर व गतिविधियाँ, संगीत प्रदर्शन और सामूहिक ध्यान सत्र हुए। सभी प्रतिभागियों ने भोजन, आवास व कान्हा शांतिवनम् में मिलने वाली अन्य सुविधाओं का मिलकर उपभोग किया और इस आयोजन से अपने व एक-दूसरे के बारे में गहरी समझ प्राप्त की। यह वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों व पृष्ठभूमियों से आने वाले लोगों के बीच सामंजस्य, शांति व हार्दिक संबद्धता विकसित करने का एक अवसर था। और यह कारगर भी साबित हुआ। हार्टमैथ इंस्टिट्यूट के डॉ. रोलिन मैक्रेटी और उनकी टीम ने सम्मलेन के अंतिम दिवस की सुबह के सामूहिक ध्यान के दौरान प्रतिभागियों के हृदयों के बीच की संबद्धता मापने के लिए परिसर में कुछ उपकरण लगाए थे और उसके परिणाम इस प्रकार हैं –

वैश्विक आध्यात्मिकता महोत्सव में ध्यान

कान्हा शांतिवनम् (हैदराबाद, भारत) में हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के मुख्यालय पर आयोजित वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव। 17 मार्च को भारतीय समय के अनुसार सुबह 9:40 पर शुरू हुए ध्यान के दौरान। लगभग 60,000 प्रतिभागी।

जब हम एकसाथ ध्यान करने बैठते हैं, हमें अत्यधिक जुड़ाव महसूस होने लगता है जो हमारे बीच की बाधाओं को खत्म करता जाता है। न केवल हमने इसे अपने अंदर उत्सव के दौरान महसूस किया बल्कि हार्टमैथ के उपकरणों के आँकड़ों ने भी यह साबित किया कि हृदयों के बीच बढ़ती संबद्धता काफ़ी अधिक थी। डॉ. मैक्रेटी इस माह के अपने लेख में इसी विषय पर और अधिक जानकारी दे रहे हैं।

हम दाजी से प्रेम के विषय में, जोज़ेफ़ हॉवेल से अपने अंदर के बच्चे से जुड़ने के बारे में, गौर गोपाल दास से समस्याओं को सुलझाने के बारे में, नीलाक्षी राजखोवा से वसुधैव कुटुंबकम पर, श्रवण बांदा से पर्यावरण के माध्यम से शांति विकसित करने के बारे में, आर्यन अरोड़ा से अपनी प्रेरणा स्वयं बनने के बारे में, सिद्धार्थ काक से रचनात्मकता के बारे में और सारा बब्बर से समय के मूल्य के बारे में जानेंगे। और विशेष रूप से राष्ट्रमंडल की महासचिव, माननीया पेट्रिशिया स्कॉटलैंड दाजी को विशेष सम्मान दे रही हैं।

इतने वर्षों में अनेक अंतर्धार्मिक सभाएँ हुई हैं जिनमें सबसे पहले प्रसिद्ध 'विश्व धर्म महासभा' का आगाज़ 11 सितंबर 1893 को हुआ था जिसे वैश्विक अंतर्धार्मिक अभियान की जन्मस्थली भी कहा जाता है। कार्यक्रम के पहले दिन ही स्वामी विवेकानंद ने दर्शकों को ‘अमेरिका के भाइयों व बहनों’ कहकर संबोधित किया था। इस पर लोगों ने खड़े होकर तालियाँ बजाई थीं। अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा था कि किस प्रकार, “इस महासभा ने पूरे विश्व को साबित किया है कि पवित्रता, शुद्धता व उदारता संसार के किसी चर्च की विशेष संपत्ति नहीं हैं तथा हर व्यवस्था में अतिमहान चरित्र के स्त्री-पुरुष पैदा हुए हैं।”

अब वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव अंतर्धार्मिक सहकार्यता को एक नए स्तर पर ले गया है जहाँ दाजी सभी को एकसाथ मिलकर काम करने के लिए और उसके लिए कार्य-क्षेत्र विकसित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बाकि हम सभी पर निर्भर करता है। क्या हम विभाजनों और मतभेदों पर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय सामंजस्य व सहकार्यता पर केंद्रित रह सकते हैं? जब हम ऐसा करेंगे तब हमारी पृथ्वी और इसकी प्रजातियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। हमारी चेतना हमारे द्वारा पैदा की जाने वाली नकारात्मकता और विवादों के बोझ तले नहीं दबी रहेगी; वह मुक्त होगी ताकि हमारे व्यक्तिगत मतभेदों के परे जाकर सार्वभौभिक चेतना में विलय हो सके। मानवता में यह करने का सामर्थ्य है और कल्पना करें कि तब हम क्या सृजित करेंगे!

पढ़ने का आनंद लें,

संपादकगण

प्रेरणा

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रचनात्मकता

अपनी प्रेरणा स्वयं बनें

आर्यन अरोड़ाएक युवा अभिनेता,संगीतकार और संगीत रचनाकार हैं। वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव के दौरानप्रज्ञा मिस्राने उनका साक्षात्कार लिया। इस साक्षात्कार मे ...,

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