यदि आप स्वयं से एकरूप नहीं हैं तो दूसरों के साथ मिलजुल कर भी काम नहीं कर सकते। सबसे पहले दिल से काम करना सीखें, फिर एकजुट होकर और अंततः एक दिल होकर काम करना सीखें।
दाजी
February 27th 2025
यह संसार संभावनाओं का संसार है। निःसंदेह, एक संभावित घटना होने की यहाँ पूरी संभावना है, लेकिन सबसे अनोखी बात यह है कि यहाँ एक असंभावित घटना के संभव होने की भी संभावना है।
लालाजी
February 26th 2025
स्थायी सुख प्राप्त करने के लिए हमें अपने अंतस की गहराई में झाँकने की ज़रूरत है। यह केवल जीवन के आंतरिक और बाह्य पक्षों का संतुलन है।
दाजी
February 25th 2025
नियति का पहला सिद्धान्त यह है कि हम इसे केवल वर्तमान में ही बदल सकते हैं। अतीत तो बीत चुका है इसलिए इसे बदला नहीं जा सकता।
दाजी
February 24th 2025
अधिकाधिक प्रेम करने से प्रेम घटता नहीं बल्कि हमें और अधिक प्रेम मिलता जाता है।
चारीजी
February 23rd 2025
अहंंकार एक ब्लैक होल की तरह होता है जो हमारी चेतना पर अत्यधिक गुरुत्वीय खिंचाव डालता है। यह उसे विकसित नहीं होने देता।
दाजी
February 22nd 2025
मन की गतिविधियों को नियंत्रित करने का सही तरीक़ा यह है कि उसे किसी नेक ख़याल पर टिका दिया जाए, बिलकुल उसी तरह जैसे कि हम ध्यान में करते हैं।
बाबूजी
February 21st 2025
चुनौतियों को सहर्ष स्वीकार करें और फिर देखें कि कैसी खूबसूरती उभरती है।
दाजी
February 20th 2025
इस ब्रह्माण्ड में परिवर्तन ही एकमात्र शाश्वत वस्तु है।
चारीजी
February 19th 2025
ध्येय प्राप्ति की ओर बढ़ाया गया प्रत्येक छोटा क़दम हमारी इच्छा शक्ति को और अधिक दृढ़ बनाता है।
दाजी
February 18th 2025
अधिकाधिक विनीत होते जाने से हमारी चेतना को अनंत तक विस्तार करने का अवसर मिलेगा।
दाजी
February 17th 2025
पारिवारिक जीवन हमें दूसरों से प्रेम करना सिखाता है।
बाबूजी
February 16th 2025
व्यक्तिगत रूपान्तरण की किसी भी प्रक्रिया में आत्म-स्वीकृति एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण मनोभाव होता है।
दाजी
February 15th 2025
हृदय की आंतरिक प्रेरणा को सक्रिय रूप से विकसित करने का चयन करना ही हार्टफुलनेस है।
दाजी
February 14th 2025
प्रेम उच्चतम लक्ष्य के रास्ते को सुगम बना देता है।
बाबूजी
February 13th 2025
आश्वस्त मौन और समयसर जागरूकता में ही हृदय बात करता है।
दाजी
February 12th 2025
इंसान के रूप में हम सभी अपूर्ण हैं। जब कोई दो अपूर्ण लोग बातचीत करते हैं तब वहाँ मनमुटाव होना स्वाभाविक है।
दाजी
February 11th 2025
हम चाहें तो केवल अपने लिए कोई दीप जला सकते हैं लेकिन उसकी रोशनी से यह आग्रह नहीं कर सकते कि वह केवल मेरे लिए ही प्रज्वलित हो।
चारीजी
February 10th 2025
क्रोध को बाहर प्रकट न करें बल्कि स्वयं में परिवर्तन लाने के लिए अपनी ओर मोड़ दें।
दाजी
February 9th 2025
जीवन को संतुलित करने का प्रयास करने के बजाए इसे समाहित करें।
दाजी
February 8th 2025
प्रेम आत्मा का सर्वाधिक उत्कृष्ट भोजन है। यह दिन-प्रतिदिन परिष्कृत होता जाता है और हमारे पूरे अस्तित्व में समा जाता है।
बाबूजी
February 7th 2025
अगर कोई ऐसा क़ाबिल गुरु मिल जाए जो अंदर के विष को बाहर निकाल दे तो केवल अमृत ही शेष बचेगा।
बाबूजी
February 6th 2025
हर कार्य में अपने हृदय का संपूर्ण प्रेम उँड़ेल दें।
दाजी
February 5th 2025
अहं के साथ अगर मनमुटाव का भी भ्रम हो तो वहाँ भय उत्पन्न होता है।
लालाजी
February 4th 2025
अज्ञानी व्यक्ति का ध्यान फूल, पत्ती आदि में ही लगा रहता है वह फल को खा भी सकता है और नहीं भी जबकि ज्ञानी केवल फल खाने में रुचि रखता है वह बाकी चीज़ों पर ध्यान नहीं देता।
लालाजी
February 3rd 2025
ज्ञान निस्संदेह रोशनी है लेकिन यह स्वयं में सब कुछ नहीं है। यह तो अपने ध्येय तक पहुँचने का एक साधन मात्र है। रात में हम केवल दिया जलाने के लिए रोशनी नहीं करते बल्कि इसलिए करते हैं ताकि उस रोशनी में कुछ काम कर सकें। यही इसका मकसद है।
लालाजी
February 2nd 2025
सार रूप में हम एक ही हैं या यूँ कहें कि संपूर्ण सृष्टि एक ही प्रतीत होती है। रूपों में विभिन्नता हमारे संयोजन और क्रिया-कलापों के कारण अस्तित्व में आई है।
लालाजी
February 1st 2025
जो विकर्षण में आकर्षण और आकर्षण में विकर्षण देख पाते हैं वही संत कहलाते हैं और यही है उनकी मुक्ति।