निरूप प्रभाकर टेनेसी के नैशविल शहर में 615चटनी नामक रेस्टोरेंट के मालिक हैं। 615चटनी की शुरुआत एकमात्र भारतीय फ़ूड ट्रक के रूप में हुई थी जिसमें शाकाहारी, वीगन और ग्लूटेन-मुक्त दक्षिण भारतीय भोजन मिलता था। निरूप का ध्येय था कि दक्षिण भारत के व्यंजनों को अमेरिका में लाया जाए। उनका मानना है कि सफलता के लिए ग्राहक की सेवा ही मुख्य घटक है। उनके ग्राहकों और कर्मचारियों की राय उनके लिए महत्वपूर्ण होती है। हार्टफुलनेस वेलनेस टीम द्वारा लिया गया उनका साक्षात्कार प्रस्तुत है।
प्र. - क्या आप भारत से अमेरिका तक की अपनी यात्रा के बारे में बताएँगे और 615 चटनी की शुरुआत कैसे हुई?
मेरे पिताजी कहते थे कि आप किसी अन्य चीज़ के बिना जीवित रह सकते हैं लेकिन भोजन के बिना जीवित नहीं रह सकते। इस बात ने मुझे भोजन परोसने की महान कला को अपनाने और सभी के लिए अच्छा भोजन सुलभ बनाने के लिए प्रेरित किया। मेरे भोजन व्यवसाय की यात्रा परिवार से मिलने, दावत की तरह खाना खाने और अपने सभी भाई-बहनों, चाचा-चाची, मौसा-मौसी आदि के साथ प्रेम और स्नेहपूर्ण संबंध स्थापित करने के साथ शुरू हुई।
प्रतिदिन मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि भोजन प्रेमपूर्वक परोसा जाए और मैं उम्मीद करता था कि अगला दिन पहले दिन से बेहतर होगा। मेरा जन्म और पालन-पोषण तमिलनाडु में हुआ। उसके बाद वर्ष 2008 में मैं अमेरिका आ गया और टैनेसी पहुँच गया। दोनों ही राज्यों के प्रारंभिक अक्षर TN हैं। इस तरह 615चटनी की शुरुआत हुई।
मेरा मुख्य ध्येय है कि अमेरिका के दक्षिणी भाग में शुद्ध दक्षिण भारतीय भोजन उपलब्ध कराऊँ तथा उसे एक खास तरीके से अच्छी ग्राहक सेवा के साथ दूँ। मैं अपने ग्राहकों से समानुभूति रखता हूँ और यह ध्यान रखता हूँ कि मेरे कर्मचारी खुशी से भोजन परोसें।
प्र. - आप अपनी सेवा के माध्यम से जिस प्रकार अपने ग्राहकों से जुड़ते हैं, वह दिलचस्प है। फिर अपने रेस्टोरेंट में सीटों की संख्या कम करने का क्या कारण है?
शुरुआत में यह व्यापार एक फ़ूड ट्रक के रूप में था और मैं शाकाहारी, वीगन और ग्लूटेन-मुक्त भोजन खिलाता था जो और कुछ नहीं बल्कि दक्षिण भारतीय भोजन के मूल व्यंजन हैं - इडली, दोसा, वड़ा और पोंगल।
ग्लूटेन-मुक्त भोजन भविष्य का भोजन है, इसलिए ग्राहक जैसा चाहते थे, मैं वैसी ही चीज़ें बना सका। वर्ष 2019 में हमने एक पक्की इमारत में अपना काम शुरू किया। कुछ वर्षों में ही तेज़ तूफ़ान से पूरे क्षेत्र में भारी तबाही हुई और उसके बाद कोविड-19 महामारी शुरू हो गई।
कोविड ने कुछ नए तरह से सोचने में हमारी मदद की। मैं दूसरी जगह चला गया और सीटों की संख्या कम कर दी। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता था कि जितना हो सके उतने अधिक से अधिक अतिथियों को बिठा सकूँ और साथ ही मैं हर व्यक्ति के साथ बात कर सकूँ।
व्यापार में रिश्ते ही सब कुछ हैं। और जब बात भोजन संबंधी व्यवसाय की हो तब
अतिथि-सत्कार सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। तमिल में हम कहते हैं ‘विरुंतोंबल’ (kindness in welcoming) और अतिथियों का सत्कार करना हम दक्षिण भारतीयों के DNA में है। दक्षिण अमेरिका में दक्षिण भारत जैसा अतिथि-सत्कार करने में मैं बहुत सहज महसूस करता हूँ। कुछ समय से आतिथ्य उद्योग में अतिथि-सत्कार लगभग समाप्त हो गया है। हमें इसे पुनः स्थापित करना है।

यही कारण है कि जो अतिथि हमारे यहाँ भोजन करने के लिए आते हैं, मैं उनसे जुड़ पाता हूँ। सीटों की संख्या कम करने से मुझे हर अतिथि के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। हाँ, हर व्यक्ति का नाम याद रखना मुश्किल है लेकिन मेरे रेस्टोरेंट का हर कर्मचारी हर ग्राहक को जानता है और हम मानते हैं कि हर ग्राहक एक विशिष्ट अतिथि है। यहाँ पर सभी के साथ एक समान व्यवहार किया जाता है और हर व्यक्ति एक जैसा ही भोजन करता है।
‘615 चटनी’ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रेम से परोसा गया अच्छा भोजन सभी लोगों को उपलब्ध हो।
प्र. - बहुत अच्छा सिद्धांत है! जैसा कि भारतीय संस्कृति में हम कहते हैं, ‘अतिथि देवो भव,’ हमें हृदय से देना सीखना होगा। नैशविल वॉएजर पत्रिका में एक बार आपने लिखा था, “जितना ज़्यादा भला कर सको, करो। यदि आप भला नहीं कर सकते तो कम से कम बुरा तो मत करो।” आपको यह कहने के लिए किस बात ने प्रेरित किया?
मेरे पिता हमेशा यह कहा करते थे। मैं इसका कारण तो नहीं बता सकता लेकिन यह बात मेरे हृदय की गहराई में उतर गई। मैं जो कुछ भी करता हूँ उसमें यह सुनिश्चित करता हूँ कि उसका परिणाम अच्छा निकले।

हर व्यक्ति की परिस्थितियाँ अलग होती हैं। हर कोई वैसी ही परिस्थिति में नहीं हो सकता जिसमें आप हैं। मेरे पिताजी बैंकर थे और वे एक शब्द का प्रयोग बहुधा किया करते थे – समानुभूति रखना। खुद को उनके स्थान पर रखकर देखो कि वे किन परिस्थितियों से गुज़र रहे हैं।
अपनी परिस्थिति के बावजूद वे तुम्हारे रेस्टोरेंट तक चल कर आए हैं। उन्होंने कम से कम दस बार तुम्हारे रेस्टोरेंट को देखा होगा। उन्होंने तुम्हारे बारे में सुना है, तुम्हारी तस्वीरें देखी हैं और जो भोजन तुम उन्हें दे रहे हो, उसे वे घर में भी पका सकते हैं। ऐसी कौन सी चीज़ है जो तुम्हारे रेस्टोरेंट को विशेष बनाती है? तुम्हारे भोजन में क्या विशेष है? तब मुझे एहसास हुआ कि ग्राहकों की सेवा ही रेस्टोरेंट की विशिष्टता होनी चाहिए। जो भी आता है, वह जैसी भी परिस्थिति में हो, हम यह सुनिश्चित करें कि हम अपना सर्वोत्तम दें। और यह भी निश्चित करें कि सभी अच्छा भोजन करें, उन्हें वहाँ बैठकर अच्छा लगे और वे पूरा समय खुश रहें।
इसके लिए हमें अच्छी सामग्री, अच्छे रसोइयों और कर्मचारियों को काम करने के लिए अच्छा वातावरण प्रदान करने की आवश्यकता होती है। अच्छी सामग्री प्राप्त कर पाना आसान नहीं है और कभी आपका रसोइया ही नाराज़ हो सकता है। कभी किसी ग्राहक को लगता है कि खाने में मसाला अधिक है। और जब वह भोजन रसोई में वापस आता है तब रसोइए को यह कहना चाहिए, “मुझे खेद है। चलिए मैं उनके लिए दूसरा बना देता हूँ।” यह काम ऐसा ही है।
यह देने और लेने से संबंधित है। जब मेरे पिताजी ने कहा, “जितना कर सकते हो उतने अच्छे काम करो और अगर अच्छा नहीं कर सकते तो बुरा भी मत करो,” तब उसका अभिप्राय यही था। जब भोजन रसोई में वापस आता है तब मेरा रसोइया उद्विग्न होकर यह कह सकता है, “क्या बात करते हैं? यह तो मेरे लिए बिलकुल मसालेदार नहीं है। वे ऐसा क्यों कर रहे हैं?” लेकिन गलती हुई है तो उसे फ़ौरन सुधार लेना चाहिए। यह एक ऐसे खेल की तरह है जिसमें सभी जीतना चाहते हैं लेकिन यदि उनमें समानुभूति नहीं है तो कोई भी नहीं जीत सकता।
प्र. - अगर सामग्रियों की बात करें तो आम जनता के लिए रेस्टोरेंट चलाना एक चुनौतीपूर्ण काम है। आप खाद्य पदार्थों की आपूर्ति-श्रृंखला को कैसे बनाए रखते हैं?
हम सामग्री सीधे भारत से मंगवाते हैं। साथ ही मुझे अटलांटा में एक आयातकर्ता मिल गया है जो यह गारंटी देता है कि वह खाद्य सामग्री की आपूर्ति एक महीने के अंदर करेगा। जब सामग्री ताज़ी होती है तो भोजन भी स्वादिष्ट होता है, चाहे आप घर में बनाएँ या रेस्टोरेंट में। अगर सामग्री ताज़ी है तो भोजन में स्वाद आ जाता है।
उसके बाद रसोइए द्वारा प्रेम से बनाने की बात आती है। हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि काम करने वाला हर व्यक्ति प्रसन्नचित्त रहे और अपने काम में आनंद ले। जब आप अपने काम को पसंद करने लगते हैं तब अंततः आप वही काम करेंगे जिसे आप पसंद करते हैं। जब ऐसा होता है तब कोई कर्मचारी या प्रबंधक खुशी से कहेगा, “मेरे अतिथि भोजन का आनंद ले रहे हैं। मेरे रसोइए अच्छा भोजन बना रहे हैं। तब मुझे दुखी होने की क्या ज़रूरत है?”
मैं यह कहना चाहता हूँ कि जब आप भोजन परोसें तब आप उसे अपने हृदय से परोसें।
प्रत्येक अतिथि या ग्राहक सिर्फ़ धन कमाने का साधन नहीं है। वे आपका परिवार हैं। भोजन एक ऐसा माध्यम है जिससे आप लोगों के साथ जुड़ सकते हैं, उन्हें हँसा सकते हैं, खुशी और हल्केपन का अनुभव करा सकते हैं। उसके बाद जब वे आपके रेस्टोरेंट के बाहर जाएँगे तब वे अपने समग्र अनुभव के बारे में बात करेंगे, सिर्फ़ भोजन या वेटर या सिर्फ़ रोबोट
के बारे में नहीं जो मेरे रेस्टोरेंट में भोजन परोसता है। महामारी ने अलग तरह से सोचने में हमारी मदद की, इसलिए मैंने रोबोट को शामिल कर लिया।
प्र. - यह तो अद्भुत है। इसके पहले कि हम यह साक्षात्कार समाप्त करें, आप हमारे पाठकों के लिए क्या कहना चाहेंगे?
यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक व्यक्ति को भोजन उपलब्ध हो। यह कहने का कोई औचित्य नहीं है, “यह अच्छा भोजन है, इसलिए मुझे ज़्यादा पैसे लेने पड़ेंगे।” यह सब कुछ गुणवत्ता और मात्रा के बारे में है न कि केवल मात्रा और मूल्य के बारे में। हमें भोजन को सभी लोगों के लिए उपलब्ध एवं प्राप्य बनना चाहिए और अच्छे भोजन के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं लेना चाहिए।
मैं यह कहना चाहता हूँ कि जब आप भोजन परोसें तब आप उसे अपने हृदय से परोसें।

