जे फ़्रेड आर्मेंट  संसार में शांति बढ़ाने के बारे में क्रिस्टीन जोन्स के साथ अपनी बातचीत को जारी रखते हैं। यहाँ मुख्य रूप से वे रिश्तोंसमाज और प्रेम के महत्व के बारे में बात कर रहे हैं जो विश्व शांति की बुनियाद है।

 

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प्र. - पिछले वर्ष पतझड़ के समय, दाजी से वार्तालाप के दौरान आपने कहा था, “15 वर्ष और 400 शांतिपूर्ण शहरों की स्थापना के बाद भी मुझे वास्तव में कहीं भी कुछ खास शांति नज़र नहीं आ रही है। मुझे अपने काम में कभी-कभी निराशा महसूस होती है।” दाजी ने जवाब दिया था, “हम शांति के लिए संकल्प लेते हैं, जिसका सुझाव मूल रूप से
श्री रामचंद्रजी (बाबूजी) ने दिया था। उन्होंने इसे ‘सार्वभौमिक प्रार्थना’ कहा। उन्हें एक बोध हुआ कि सभी को स्थानीय समयानुसार रात 9 बजे एक साथ बैठना चाहिए।”

हमने एक आधुनिक प्रारूप तैयार किया - शांति के लिए एक सार्वभौमिक संकल्प ताकि हर कोई इसमें शामिल हो सके। दाजी ने कहा कि इन सभी शांतिमय शहरों को शांति के इस संकल्प में हमारे साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करें - एक ही समय जब हम सब केवल 15 मिनट के लिए एक साथ जुड़ते हैं।

इसके लिए उन्होंने ‘एग्रेगोर’ शब्द का प्रयोग किया, विचार का एक स्वरूप जो कुछ लोगों के समूह को एक साथ जोड़कर रखता है। जैसे-जैसे विचार एग्रेगोर में जुड़ते जाते हैं, यह बढ़ता जाता है और इस एग्रेगोर के प्रवाह से जुड़ने वाले लोग उस समूह का ज्ञान भी प्राप्त कर सकते हैं। यद्दपि आप एग्रेगोर के इस विचार से भली भाँति परिचित हैं, अपनी पुस्तक ‘द फिज़िक्स ऑफ़ स्पिरिट’ में आप एक अलग शब्द ‘वेवगाइड’ यानी तरंग पथक का प्रयोग करते हैं। शायद यही कारण है कि दाजी ने शांतिमय शहरों को शांति के संकल्प में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। जब किसी समूह में एक समय पर एक ही विचार लिया जाता है तब तरंग पथक उस सामंजस्य के भाव को प्रसारित करता है जिसकी हम सभी आशा करते हैं।

क्या आप इसे सरल भाषा में समझा सकते हैं?

हाँ, तरंग पथक एक संरचना है जो तरंगों को निर्देशित करती है। वे हर समय हर किसी के आसपास मौजूद होती हैं। तरंग पथक एक तार की तरह है जिसका प्लग लगाने पर करंट उस तार के माध्यम से प्रवाहित होने लगता है। यह तरंगों को निर्देशित करता है। और जब आप एक तरंग को निर्देशित करते हैं तब अन्य तरंगों को उसमें जोड़कर उनकी आपस में अनुरूपता को बढ़ा सकते हैं। यह अनुरूप तरंग बहुत अधिक शक्तिशाली हो जाती है। उदाहरण के लिए, मध्ययुगीन चर्च में ऊँची-ऊँची मीनारें और ऊँचे मंच हुआ करते थे ताकि सब कुछ आसमान की ओर उठे। हम चर्च के भीतर भी तरंग पथक बनाते हैं। इसके आलावा, हम जो भी गतिविधि करते हैं उसमें भी तरंग पथक बनाते हैं। जीवनसाथी के तरंग पथक के कारण आप प्रेम करते और प्रेम पाते हैं। इसका तात्पर्य है कि आपका जीवनसाथी आपके प्यार के लिए एक तरंग पथक है ताकि इसका विस्तार किया जा सके, दोहराया जा सके और इसकी तीव्रता को बढ़ाया जा सके और एक ही समय पर संसार और स्वयं पर इसका प्रभाव उत्पन्न किया जा सके।

इसलिए समाज में हार्टफुलनेस केंद्र तरंग पथक हैं। आप हार्टफुलनेस केंद्रों में ध्यान सीखने के लिए आते हैं और संबंध भी बनाते हैं। इसलिए मैं हार्टफुलनेस केंद्रों को समाज के दिल और तरंग पथक के रूप में देखता हूँ। समाज को एक दिल की, इस तरंग पथक की ज़रूरत है। मैं दुनिया भर के हार्टफुलनेस केंद्रों के शांतिमय शहर बनने को लेकर बहुत उत्साहित हूँ क्योंकि आप पहले से ही अपने समुदाय में शांति लाने के लिए काम कर रहे हैं।

 

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शांतिमय शहरों का आदर्श कुछ ऐसा है जिसके संदर्भ में सभी हार्टफुलनेस केंद्र अपनी कहानी बता पाएँगे कि वे समाज को किस प्रकार एक सकारात्मक तरीके से प्रभावित कर रहे हैं। जब कभी कोई सामुदायिक आयोजन होता है, आप पेड़ लगाते हैं या किसी ऐसे बच्चे को पुरस्कार देते हैं जो सुंदर कलाकृति बनाता है तब समाज उससे प्रभावित होता है। इसलिए अगर हार्टफुलनेस केंद्रों में एग्रेगोर का यह विचार है तो सहसा हमें शांति के लिए काम करने का तरीका मिल जाता है।

लोगों को अपने समुदायों में काम करने का कोई न कोई तरीका चाहिए होता है और समुदाय के सभी अलग-अलग पक्ष, जैसे सरकार, पुस्तकालय आदि शांतिमय शहर के आदर्शों को अपनाकर साथ मिलकर काम कर सकते हैं। हार्टफुलनेस केंद्र उस प्रयास का केंद्र बन सकते हैं।

प्र. - आपने अभी-अभी बताया कि आध्यात्मिक तरंग पथक पारस्परिक प्रेम के माध्यम से उद्देश्य प्रदान करते हैं। ध्यान, अनुष्ठान और पूजा जैसी आध्यात्मिक क्रियाएँ ऊर्जा संबंधी पारस्परिक क्रियाएँ हैं जो हमें स्वयं से आगे बढ़कर एकता की भावना का अनुभव करने में मदद करती हैं। एक तरंग पथक ऊर्जा के न्यूनतम नुकसान के साथ तरंगों - जैसे विद्युत् चुंबकीय या ध्वनि तरंगों - की वृद्धि को निर्देशित करता है। यह ऊर्जा को एक विशेष पथ पर ले जाता है। मुझे यह बहुत अच्छा लगता है।

तरंग पथक विनाशकारी भी हो सकते हैं। इसलिए हमें अपने तरंग पथक को इस समझ के साथ बनाना चाहिए कि वे हमारी ऊर्जा को उचित दिशा प्रदान करें। यदि आप विनाशकारी तरंग पथक चुनते हैं तो पथ के अंत में विनाश ही होगा। यदि आप अपने तरंग पथक को समाज पर सकारात्मक प्रभाव के रूप में बनाते हैं तभी परिणाम सकारात्मक होगा।


लोगों को अपने समुदायों में काम करने का कोई न कोई तरीका चाहिए होता है और समुदाय के सभी अलग-अलग पक्षजैसे सरकारपुस्तकालय आदि शांतिमय शहर के आदर्शों को अपनाकर साथ मिलकर काम कर सकते हैं।


प्र. - दाजी ने हाल ही में कहा है, “चीज़ों को उत्तमता से करने की आपकी तत्परता आपको आगे ले जाती है।” इसलिए जो भी हम शुरू करते हैं उसमें पूर्णता होनी चाहिए और निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए। अपने काम में उत्तमता लाने की प्रवृत्ति तभी आएगी जब हमें खुद पर गर्व होगा। यह अहं का सकारात्मक उपयोग है। जिस तरह अहं का उपयोग सकारात्मक या नकारात्मक, किसी भी दिशा में किया जा सकता है वैसे ही इन तरंग पथकों का भी किसी भी दिशा में उपयोग किया जा सकता है।

हाँ, हमें यह देखना होगा कि हम क्या करते हैं और हम ऊर्जा के रूप में कौन हैं। यदि हम कोई काम आधा-अधूरा करते हैं तो ऊर्जा का क्षय होता है जबकि अगर हम उसे पूरा करते हैं तो ऊर्जा स्थानांतरित हो जाती है। दाजी ने जो कहा वह बहुत कुछ प्रकट करता है क्योंकि यह हमें अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है।

मैं न्यूनतम प्रयास और तत्परता की अवधारणा पर काम कर रहा हूँ – तत्परता जीवन है और न्यूनतम प्रयास मृत्यु की ओर ले जाता है। न्यूनतम प्रयास से अव्यवस्था होती है और ऊर्जा का विघटन होता है। यह आलस्यपूर्ण दिनचर्या से संबंधित है। यदि आप सोफ़े पर बैठे रहते हैं और अपने समाज में काम नहीं करते तो आपकी ऊर्जा नष्ट हो जाएगी। यदि आप उठकर काम में व्यस्त हो जाते हैं तो जीवन का, सुंदरता का सृजन होता है। इसी तरह लोग शानदार चित्र बनाते हैं, महान लेखक बनते हैं, घोड़ों की सवारी करते हैं, अपने कुत्तों के साथ घूमते हैं और प्रकृति में विचरण करते हैं। ये सभी खूबसूरत चीज़ें इसलिए होती हैं क्योंकि हममें इस विचार को पूरा करने की तत्परता होती है कि आत्मा हमसे बाहर आती है और यह हमारे अंदर ही वापस जाती है। यह ऊर्जा रूपी सभी चीज़ों का पारस्परिक सत्य है।

 

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प्र. - जब दाजी ने शांति के संकल्प में भाग लेने के तरीके के बारे में बताया तब मेरे अंदर कुछ बदल गया। मुझे एहसास हुआ कि मैं वास्तव में कार्य पूरा करने से ज़्यादा केवल कार्य के होने की आशा कर रही थी और यह शांति के संकल्प में बाधा डाल रहा था। आपने अपनी किताब में प्रेरणा के लिए अंग्रेज़ी शब्द, इंस्पिरेशन के लैटिन मूल के बारे में लिखा है – ‘श्वास के साथ दिव्य चिंगारी को अचानक और तुरंत अंदर लेना जिससे हमें रचनात्मक उद्देश्य मिलता है।’ अपने उद्देश्य को पूरा करना केवल सार्वभौमिक प्रेम की ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाना ही है। तो दाजी के चीज़ों को उत्तमता से करने की इच्छा के बारे में विचार और आपके विचार कि उद्देश्य सार्वभौमिक प्रेम की ऊर्जा के साथ तालमेल में रहता है, से मुझे एक नई समझ मिली जिसने शांति के सार्वभौमिक संकल्प के प्रति मेरे दृष्टिकोण को बदल दिया। मुझे महसूस होने लगा कि दुनिया में शांति पहले से ही स्थापित हो चुकी है।

तो मेरा प्रश्न यह है कि क्या आपको लगता है कि शांति को लेकर आपका सपना पहले ही साकार हो चुका है?

हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपने विचारों को प्रत्यक्ष रूप प्रदान करता है, इसलिए मेरा मानना है कि यह हमारा प्रत्यक्षीकरण है और मैं शांति स्थापित करने की कोशिश करता हूँ। मैंने कुछ संस्थाओं की स्थापना की है, कुछ किताबें लिखी हैं लेकिन मैं उन चीज़ों पर कोई गर्व नहीं करता क्योंकि विचार यह है कि हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। मेरी तरंग आपकी तरंग के साथ सामंजस्य में है क्रिस्टीन, इसलिए हम साथ हैं और इसीलिए मैं मुस्कुरा सकता हूँ। दुनिया में सभी बुरी खबरों के साथ, अगर हम इस विचार से उलझ गए कि केवल आशा ही की जा सकती है तो इसका तात्पर्य है कि हमने पहले ही हार मान ली है। मनुष्य के रूप में हमें बहुत सारे उपहार दिए गए हैं। हमें बस शांत रहकर अपने तरीके से जितना हो सके उतना काम करने की ज़रूरत है। मुझे लगता है कि इसी तरह मानवता हमारी चेतना को विकसित करेगी। और जब हम अपनी चेतना को विकसित करेंगे तब सब ठीक हो जाएगा।

..... अगले अंक में जारी है।


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जे. फ़्रेडरिक आर्मेंट

जे. फ़्रेडरिक आर्मेंट

फ़्रेड एक लेखक, शिक्षक तथा इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस के संस्थापक व अध्यक्ष... और पढ़ें

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