भावना खेमलानी डिजिटल डिटॉक्स (डिजिटल उपकरणों से दूर होना) और उसके लिए प्रेरणा की निरंतर आवश्यकता के बारे में लिखती हैं। हमें अपना तनाव दूर करने और अपने आप से पुनः जुड़ने के लिए डिजिटल उपकरणों से दूर होने की आवश्यकता है।
शहर की तेज़ रफ़्तार से दूर ‘बीन्स एंड ब्रू’ नामक एक अनूठा कैफ़े था। वहाँ के वातावरण में लोगों की बातचीत की धीमी गुनगुनाहट व्याप्त थी। साथ ही दालचीनी पेस्ट्री की हल्की सुगंध के साथ ताज़ी पिसी हुई कॉफ़ी की महक भी थी। लेकिन न तो ऐलेक्स ने और न ही माइना ने इस पर कोई ध्यान दिया। वे हमेशा की तरह अपनी कोने की मेज़ पर बैठे थे, जहाँ एडिसन बल्बों की गर्म रोशनी उन पर पड़ रही थी। दोनों की नज़रें अपने-अपने लैपटॉप के स्क्रीन पर केंद्रित थीं और उनकी उंगलियाँ यंत्रवत् चल रही थीं।
माइना ने ज़ोर से आह भरी और फिर थोड़ा सा ऊपर देखते हुए अपनी अधिसूचनाओं (notifications) की सूची पर नज़र दौड़ाई। सहसा उसके मुँह से निकला, “मैं कसम खाती हूँ, यदि मुझे एक और स्लैक (एक वेबसाइट) संदेश मिला तो मैं वास्तव में अपना फ़ोन उस गमले में फेंक दूँगी।” उसने कोने में रखे हुए एक छोटे से मॉन्स्टेरा पौधे की ओर इशारा किया जिसके पत्तों का रुख सूरज की रोशनी की ओर था।
ऐलेक्स मुस्कुराया, लेकिन उसने अपनी आँखें लैपटॉप से नहीं हटाईं। वह बोला, “मैं तुम्हारी भावनाएँ समझ सकता हूँ। आज सुबह उठकर मैंने बावन नई ईमेल देखीं, वह भी रविवार को। ऐसा कौन करता है?”
माइना ने उपहास करते हुए कहा, “ज़ाहिर है, तुम्हारी कंपनी एवं मेरी कंपनी ऐसा करती हैं। और इस धरती पर काम से लदा हर व्यक्ति भी यही करता है। उन्हें समझ नहीं आता कि सप्ताहांत का क्या मतलब है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के आने से वे अब हमसे और अधिक तेज़ी से काम करने की उम्मीद करते हैं।” वह अपनी कनपटियों को मलते हुए पीछे की ओर झुकी और बोली, “ऐसा लगता है कि दुनिया ने सामूहिक रूप से तय कर लिया है कि सप्ताहांत अब होते ही नहीं हैं।”
ऐलेक्स ने आखिरकार अपनी नाक को मलते हुए हल्के से अपना लैपटॉप बंद कर दिया और कहने लगा, “सच में! मुझे याद भी नहीं है कि काम से कुछ समय के लिए अवकाश लेना वास्तव में कैसा होता है। जब मैं छुट्टी लेता हूँ तब भी मैं ईमेल देखने लगता हूँ कि कोई ज़रूरी बात न हो।”
यह सुनकर माइना के मुँह से एक रूखी सी हँसी निकली। वह बोली, “मेरे साथ भी ऐसा ही है। मेरा दिमाग कभी भी काम करना बंद नहीं करता। सुबह उठकर सबसे पहले मैं क्या करती हूँ? अपना फ़ोन चेक करती हूँ। सोने से पहले आखिरी काम क्या करती हूँ? अपना फ़ोन चेक करती हूँ। मैं फ़िल्म देखते हुए भी ट्विटर पर स्क्रॉल किए बिना नहीं रह सकती। ऐसा लगता है जैसे मेरे हाथ इसके आदी हो गए हैं।”
ऐलेक्स ने अपने कॉफ़ी कप के किनारे पर अपना अंगूठा फेरते हुए एक आह भरी। वह कहने लगा, “मैंने कहीं पढ़ा था कि हम अपने दिमाग को इस प्रकार ढाल रहे हैं कि वह विकर्षणों की लालसा करने लगे। हर बार जब हम कार्य बदलते हैं, सूचनाएँ देखते हैं या बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करते हैं तब इन सबसे हम अपने दिमाग की लगातार उत्तेजना पाने की आदत को बढ़ावा देते हैं। यह स्थिति खराब होती जा रही है।”

माइना ने भौंहें सिकोड़ते हुए कहा, “इससे बहुत कुछ समझ में आता है। मैं एक चीज़ पर कुछ मिनटों से ज़्यादा ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती हूँ। एक पल मैं किसी अभियान पर काम कर रही होती हूँ, अगले पल मैं किसी बिल्ली का वीडियो देख रही होती हूँ, फिर किसी व्यर्थ के संदेश का उत्तर दे रही होती हूँ, फिर कोई बेकार ईमेल देख रही होती हूँ जिसका मुझे जवाब भी देने की ज़रूरत नहीं होती।”
ऐलेक्स ने एक कड़वाहट भरी हँसी छोड़ते हुए कहा, “और यह हमारे तनाव स्तर पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। मैं चाहे कितने घंटे भी सो लूँ, लेकिन हमेशा जागने पर थका हुआ ही रहता हूँ। मेरा मन कभी वास्तव में आराम नहीं करता। मैं तनावग्रस्त रहता हूँ और अपने लिए समय नहीं निकाल पाता हूँ।”
माइना ने उसे एक पल के लिए ध्यान से देखा, उसके मन में एक विचार उभर आया। उसने ऐलेक्स से पूछा, “क्या तुमने कभी डिजिटल डिटॉक्सिंग के बारे में सुना है?”
ऐलेक्स ने आश्चर्य भाव से कहा, “तुम्हारा मतलब है, जैसे, एक हफ़्ते के लिए इंस्टाग्राम हटा देना?”
“सिर्फ़ इतना ही नहीं। कुछ लोग स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहते हैं; कोई ईमेल नहीं, कोई सोशल मीडिया नहीं, कोई बेवजह स्क्रॉलिंग नहीं। वे स्क्रीन टाइम को वास्तविक आराम से बदल देते हैं, जैसे पढ़ना, टहलना, लिखना, योगाभ्यास करना, माइंडफुलनेस का अभ्यास करना आदि।”
ऐलेक्स ने तिरछी नज़र से देखा और पूछा, “माइंडफुलनेस का अभ्यास करना? जैसे, ध्यान करना?”
“हाँ,” माइना ने सिर हिलाया, “या सिर्फ़ मौजूद रहना। एक साथ सौ चीज़ों के बारे में न सोचना, बस उपस्थित होना। प्रकृति से फिर से जुड़ना या प्रकृति के साथ समय बिताना।”
ऐलेक्स ने धीरे से साँस छोड़ी और अपने फ़ोन को ऐसे देखने लगा जैसे उसे पहली बार देख रहा हो। “यह करना मुश्किल लगता है।”
“लेकिन यह करना अच्छा भी तो है, है न?” माइना ने मुस्कुराते हुए कहा, “कल्पना करो कि तुम वास्तव में अपना फ़ोन देखे बिना अपनी कॉफ़ी का आनंद ले रहे हो; कोई किताब पढ़ रहे हो या कुछ लिख रहे हो या बाग में बैठे हो या तैराकी कर रहे हो; कुछ दोस्तों से मिलकर खेल खेल रहे हो या ज़ुम्बा कर रहे हो या बोर्ड गेम खेल रहे हो। तुम्हारे पास न कोई फ़ोन है, न लैपटॉप और कुछ समय के लिए नेटफ्लिक्स, या यूट्यूब भी नहीं। तब शायद तुम अच्छी नींद लेते हो और सही आहार लेते हो।”
ऐलेक्स अपना सिर थोड़ा एक तरफ़ झुकाकर माइना की बात पर विचार करने लगा। “मुझे लगता है कि ऐसा करने में शायद मुझे थोड़ी परेशानी होगी, लेकिन ठीक है।”
माइना ने हँसकर कहा, “चलो, इसे करके देखते हैं - डिजिटल डिटॉक्स का एक छोटा सा प्रयास - अभी, इसी वक्त। बस एक घंटे के लिए विराम लेते हैं। हम तरोताज़ा होने के लिए 15 मिनट की झपकी ले सकते हैं। बाद में पैदल किसी दूसरे कैफ़े में खाने के लिए जाएँगे। यह एक छोटी सैर की तरह होगा। इस दौरान हम अपने फ़ोन नहीं देखेंगे। बस एक घंटे के लिए इसे करके देखते हैं।”
ऐलेक्स ने थोड़ी हैरानी से पूछा, “मतलब, अपने फ़ोन दूर रख दें? न ईमेल देखें, न ही सूचनाएँ?”
माइना ने उत्तर दिया, “हाँ। बस हम दोनों साथ बैठेंगे, कॉफ़ी पिएँगे, अच्छा खाना खाएँगे और यात्राओं, किताबों या माइंडफुलनेस पर आराम से बातचीत करेंगे।”
ऐलेक्स ज़रा झिझक रहा था। उसकी उंगलियाँ उसके फ़ोन पर मचल रही थीं, जैसे कोई व्यसनी अचानक अपनी आदत छोड़ देने के बारे में सोच रहा हो। आखिरकार, उसने एक गहरी साँस लेकर फ़ोन को मेज़ पर उल्टा रख दिया और बोला, “ठीक है। लेकिन यदि मैं अधीरता में हिलने-डुलने लगूँ तो तुम ज़िम्मेदार हो।”
माइना मुस्कुराई और उसने भी वही किया। “ठीक है।”
एक पल के लिए उनके बीच की चुप्पी अजीब लगी, क्योंकि वे दोनों इस तरह खाली बैठने के आदी नहीं थे। लेकिन फिर स्थिति कुछ बदली और वे बातें करने लगे। सच में बातें करने लगे।
वे कॉलेज की पुरानी यादों पर हँसे, उन्होंने पिज़्ज़ा पर अनानास को लेकर चर्चा की, यात्रा की कहानियाँ साझा कीं जिनका उनके काम से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने अपनी कॉफ़ी का स्वाद लिया, पिज़्ज़ा ऑर्डर किया, अपने हाथों में कप की गर्माहट, एस्प्रेसो कॉफ़ी की कड़वाहट, हवा में घुली दालचीनी की हल्की मिठास को महसूस किया। अनानास के साथ पिज़्ज़ा खाना उनके लिए खुशी की बात थी। फिर उन्होंने पाँच मिनट के लिए अपनी आँखें बंद कर लीं और उस पल में बने रहने की कोशिश की।
इतने वर्षों में पहली बार वे पूरी तरह से उपस्थित थे।
वह एक घंटे का विराम लेना उनकी आदत बन गया। धीरे-धीरे वे अपने जीवन में अधिक सचेत क्षणों को शामिल करने लगे - बिना फ़ोन के सुबह की सैर करना, बिना फ़ोन या टीवी के रात का भोजन करना और पूरे सप्ताहांत को वास्तविक जीवन के अनुभवों के लिए समर्पित करना।
जैसे-जैसे वे अपनी स्क्रीन से दूर होने लगे, उन्होंने खुद को एक-दूसरे से, दुनिया से और सबसे महत्वपूर्ण रूप से स्वयं से पुनः जुड़ते हुए पाया।
इस तरह वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे पाए और कार्य जीवन में बेहतर समय प्रबंधन कर पाए।


