संज्ञानात्मक विकास के लिए ब्राइटर माइंड्स का मार्ग अपनाएँ
शिक्षा के लगातार विकसित हो रहे परिदृश्य में ब्राइटर माइंड्स कार्यक्रम एक परिवर्तनकारी अवसर के रूप में उभरा है जो बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ाने और उनमें अवलोकन करने की क्षमता विकसित करने के लिए बनाया गया है। ब्राइटर माइंड्स में बौद्धिक और व्यक्तिगत विकास को तेज़ करने के लिए अत्याधुनिक सिद्धांतों को व्यावहारिक तकनीकों के साथ एकीकृत किया गया है। कनाडाई युवा येगनेह हसानी अपना अनुभव बताती है कि कैसे ब्राइटर माइंड्स ने उसके जीवन को रूपांतरित कर दिया है।
मेरा नाम येगनेह है, मैं 14 साल की हूँ और 7 साल की उम्र में मेरे माता-पिता ने मेरी शैक्षिक यात्रा को बेहतर बनाने के लिए ब्राइटर माइंड्स से मेरा परिचय कराया। प्रारंभ में, मैं रविवार को चार घंटे कक्षा में बिताने के लिए अनिच्छुक थी क्योंकि मैं अपने दोस्तों के साथ पार्क में खेलना अधिक पसंद करती थी। फिर भी, एक सामाजिक व्यक्ति होने के नाते अन्य बच्चों से मिलने और दोस्त बनाने के अवसर से प्रेरित होकर मैंने कार्यक्रम में नामांकन करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से मेरे रूपांतरण की शुरुआत हुई।
पहले दिन, प्रशिक्षकों ने हमें 10 साल की एक लड़की का आँखों पर पट्टी बाँधकर विभिन्न प्रतिभाओं को प्रदर्शित करते हुए एक वीडियो दिखाया। वह अपनी पीठ के पीछे प्लास्टिक की गेंदों को छूकर उनका रंग पहचान लेती थी और बिना देखे ही रंग बता देती थी। इसे एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया था, यह दिखाने के लिए कि हम क्या हासिल कर सकते हैं। समय के साथ मुझे यह समझ आ गया कि इस कार्यक्रम के लिए बहुत निष्ठा, अभ्यास और लगन की आवश्यकता थी। यह अत्यधिक मेहनत की अपेक्षा वाला कार्यक्रम था जिसमें मेरा बहुत समय लगने वाला था।
अभ्यास के समय को आकर्षक और परस्पर संवादात्मक बनाने से संज्ञानात्मक कार्य में सुधार होगा और आपका जुड़ाव बढ़ेगा।
पाठ्यक्रम में विभिन्न अभ्यास करना, संगीत सुनना और सत्रों में भाग लेना शामिल था। धीरे-धीरे मुझे इसका सही मतलब समझ में आने लगा कि जब तक आप किसी चीज़ के लिए भरपूर प्रयास नहीं करते तब तक आपको परिणाम नहीं मिल सकते। मेरे जैसे अधिकांश सात-वर्षीय बच्चे अपने मन के पूरे सामर्थ्य का उपयोग करने के आदी नहीं होते हैं। यही कारण है कि इस कार्यक्रम ने मुझे कई तरह से चुनौती दी। इसने मेरी ताकत और कमज़ोरियों दोनों की परीक्षा ली जिससे मैं अधिक दृढ़ और प्रभावी बन गई। हालाँकि मेरे माता-पिता, शिक्षकों और साथियों को मेरी प्रगति स्पष्ट दिखाई दे रही थी, फिर भी इस पर कायम रहने और उन्हीं अभ्यासों को निरंतर करते रहने के संघर्ष ने मुझे अत्यधिक अधीर बना दिया।
घंटों के अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बाद अभ्यास मेरी आदत बन गया। अब मेरे पिता को मुझे अभ्यास करने के लिए याद दिलाने की आवश्यकता नहीं थी, मेरी माँ को मुझे सत्रों के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता नहीं थी और मुझे लंबे घंटों के अभ्यास का डर भी नहीं रहा। इसके बजाय, मैं अभ्यास करने के लिए उत्सुक रहती थी, अपने पिता से पूछती थी कि क्या वे आकर मेरी परीक्षा लेंगे। मैं सत्रों में भाग लेने को लेकर उत्साहित थी और अपनी माँ से जल्दी पहुँचने के लिए कहती थी ताकि मैं कक्षा में सबसे पहले पहुँच सकूँ। मैं नए कौशल विकसित करने और अपनी क्षमताओं को बेहतर करने का अवसर पाने के लिए आभारी थी।

जैसे-जैसे वर्ष बीतते गए, मैं बड़ी होती गई और शैक्षणिक योग्यतानुसार आगे बढ़ती गई। प्रत्येक कक्षा पिछले से थोड़ी अधिक चुनौतीपूर्ण होती गई। कई बच्चे ऐसे में अभिभूत होने लगते हैं और भावनात्मक रूप से थकावट महसूस करते हैं। मैंने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है। ऊर्जा से भरपूर एक बहिर्मुखी बच्चे के रूप में, मैं अक्सर विचलित हो जाती थी और थोड़ी-थोड़ी देर में मेरा ध्यान भटकने लगता था। इससे कक्षा में केंद्रित रहना, दिए गए कार्य को पूरा करना और पढ़ाए जा रहे विषयों को समझना मुश्किल हो रहा था।

ब्राइटर माइंड्स में दाखिला लेने के बाद सबसे पहले मेरे व्यवहार में बदलाव पर मेरे शिक्षकों का ध्यान गया। केवल तीन सप्ताह के भीतर मुझमें ज़बरदस्त सुधार हुआ। सहसा मैं प्रश्नों के उत्तर दे रही थी, बिना किसी भटकाव के अपना काम पूरा कर रही थी और मेरी परीक्षाओं के अंक काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहे थे। पाँचवें सप्ताह तक पहुँचते-पहुँचते मेरे परिवार और दोस्तों का भी ध्यान मेरी प्रगति की ओर जाने लगा और मुझ में इतना अधिक सुधार देखकर वे आश्चर्यचकित रह गए।
मेरे विकास में सहयोग देने वाले निम्नलिखित प्रमुख तत्वों के बिना इनमें से कुछ भी संभव नहीं होता -
एक महत्वपूर्ण स्तंभ है सहयोग। अभिभावकों के पर्याप्त सहयोग के बिना हमारी प्रगति में कठिनाई आ सकती है।
धैर्य और अनुशासन भी ज़रूरी हैं। माता-पिता को यह समझने की ज़रूरत है कि परिणाम दो सत्रों में ही सामने नहीं आते हैं। धैर्य और निरंतर प्रयास से प्रगति होती है। बच्चों को भी यह समझना होगा कि विकास में समय लगता है। लगन और अभ्यास से ही अच्छे परिणाम मिलेंगे।
प्रतिदिन अपने बच्चे के साथ माता-पिता के अभ्यास करने से ही सर्वोत्तम परिणाम मिलेंगे। ब्राइटर माइंड्स संगीत के साथ जुड़ने, मस्तिष्क के व्यायाम करने और सभी सत्रों में एकसाथ भाग लेने से संज्ञानात्मक विकास बेहतर होगा और आपका संबंध मज़बूत होगा। बच्चे अक्सर शुरुआत में गतिविधियों का विरोध करते हैं, इसलिए अभ्यास के समय को आकर्षक और परस्पर संवादात्मक बनाने से संज्ञानात्मक कार्य में सुधार होगा और आपका जुड़ाव बढ़ेगा।
इन प्रमुख बातों को ध्यान में रखने से आप और आपका बच्चा किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम बन जाएँगे। याद रखें, हम मिलकर बच्चों की अगली पीढ़ी को पोषित कर रहे हैं।

