जेमिना वॉट्सटीन बता रही हैं कि किस प्रकार कला तीसरी संस्कृति के बच्चों के लिए उपचारात्मक और परिवर्तनकारी हो सकती है। ये ऐसे लोग हैं जो अपने प्रारंभिक वर्षों में कई जगहों पर रहते हैं।

प कहाँ से हैं?

जब मैं इक्कीस-बाइस साल की थी, उस समय इस प्रश्न का उत्तर देना आसान था। लेकिन अब मेरी उम्र लगभग पैंतालीस वर्ष है और मैं जर्मनी, थाईलैंड तथा अमेरिका में रह चुकी हूँ। इसलिए अब इसका उत्तर देना इतना आसान नहीं है।

मेरे बच्चों के लिए जो अब तक आठ अलग-अलग ‘घरों’ में रह चुके हैं, यह प्रश्न चिंता पैदा कर सकता है। आमतौर पर वे थोड़ी देर चुप रहकर प्रश्नकर्ता को ऊपर से नीचे तक देखते हैं और तय करते हैं कि उसे वास्तव में कितना बताया जाए।

तीसरी संस्कृति के बच्चे (Third Culture Kid - TCK) शब्दों का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 1963 में हुआ। तीसरी संस्कृति के बच्चे उन किशोरों को कहा जाता था जो अपने विकास के महत्वपूर्ण वर्षों में अपने माता-पिता के मूल देश से अलग किसी दूसरे देश में बिताते थे। समय बीतने के साथ-साथ इस परिभाषा का विस्तार हुआ है और ‘कैमिलियन’ (आसानी से परिस्थिति के अनुकूल बनने वाले), ‘ग्लोबल नोमैड’ (वैश्विक खानाबदोश) और ‘मिलिट्री ब्रैट’ (फौजी बच्चा) जैसे नए नाम भी सुनने में आए हैं। नाम कोई भी दे दिया जाए लेकिन जो बच्चे विभिन्न संस्कृतियों में बड़े हुए हैं, उनके लिए इस प्रश्न का कि “आप कहाँ से हैं?” शायद ही कोई आसान जवाब होता है।

आज 22 करोड़ से ज़्यादा लोग उन देशों में रहते हैं जो उनके अपने नहीं हैं और तीसरी संस्कृति के बच्चों की यह विशाल ‘भ्रमणशील प्रजाति’ इस धरती पर पाँचवें सबसे बड़े राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करती है। तीसरी संस्कृति के बच्चों के रूप में बड़े होने के नाते उनमें कुछ विशेष गुण भी आ जाते हैं जैसे दो भाषाएँ जानना, सांस्कृतिक जागरूकता और नए माहौल में आसानी से ढलने की क्षमता। लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी आती हैं जैसे अपनी स्पष्ट पहचान विकसित करने में कठिनाई, जुड़ाव महसूस करने में संघर्ष, जीवनभर की दोस्ती बनाने में दिक्कत और उस एक आसान सवाल कि “आप कहाँ से हैं?” का जवाब देने में दिक्कत।

हाल ही में हुए एक अध्ययन, ‘द पावर ऑफ़ द विज़ुअल आर्ट्स टू एक्सप्लोर हू वी आर एंड व्हेयर वी कम फ़्रॉम - ए क्वालिटेटिव फ़िनोमेनोलॉजिकल स्टडी’, से मैंने यह जाना कि दो साल का हाई स्कूल दृश्य कला (visual art) का पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद तीसरी संस्कृति के बच्चे अपनी पहचान के बारे में कैसा महसूस करते हैं। मेरा शोध तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित था - तीसरी संस्कृति के बच्चे कौन हैं, इन बच्चों के विषय क्या हैं और दृश्य कला की शिक्षा के माध्यम से इन बच्चों की सहायता करना।

संक्षेप में - तीसरी संस्कृति के बच्चे अक्सर जगह बदलते रहते हैं। बड़े होने के दौरान कई अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों में जाते हैं और स्कूल तथा घर में अलग-अलग भाषाएँ बोल सकते हैं। हालाँकि यह जीवनशैली रोमांचक लग सकती है लेकिन यह भावनात्मक रूप से जटिल हो सकती है। तीसरी संस्कृति के बच्चों के लिए यह बात सामान्य हो सकती है कि उन्हें सहसा बताया जाए कि स्कूल वर्ष के अंत में वे वहाँ से स्थानांतरित हो जाएँगे। फिर वही सिलसिला शुरू होता है - सामान बाँधना, मित्रों और परिचितों को अलविदा कहना, अनजानी दुनिया के लिए तैयार होना और अंततः किसी नई जगह पहुँचना। नई गंध, नए स्वाद, नए रीति-रिवाज़ों का अनुभव करना इन बच्चों के लिए सामान्य होता है। वे एक नए स्कूल में शुरुआत करते हैं, अक्सर एक दिलचस्प ‘नए बच्चे’ के रूप में। वे नए दोस्त बनाते हैं और नए परिवेश में सहज महसूस करने ही लगते हैं कि छह महीने बाद यह चक्र फिर से शुरू करने का समय आ जाता है। फिर वही बातें दोहराई जाती हैं।


तीसरी संस्कृति के बच्चों के रूप में बड़े होने के नाते उनमें कुछ विशेष गुण भी आ जाते हैं जैसे दो भाषाएँ जाननासांस्कृतिक जागरूकता और नए माहौल में आसानी से ढलने की क्षमता।


समय के साथ बार-बार जगह बदलने से समस्या भी होती है। “आप कहाँ से हैं?” का जवाब देना मुश्किल होता जाता है। तीसरी संस्कृति के बच्चे उन अनुभवों को लेकर चलते हैं जिन्हें उन लोगों को समझाना मुश्किल हो सकता है जिन्होंने कभी इस तरह से जीवन नहीं जिया है। इसमें कला एक सेतु का काम कर सकती है। दृश्य कला की खूबसूरती यह है कि इसमें गहन भावनाओं, यादों या पहचान को व्यक्त करने के लिए शब्दों की ज़रूरत नहीं होती। अपने अध्ययन में मैंने पाया कि जिन छात्रों ने एक खोज-आधारित कला के पाठ्यक्रम में भाग लिया और कार्यक्रम के अंत में अपने काम का प्रदर्शन किया, उन्होंने ऐसी कृतियाँ बनाईं जिन पर उन्हें गर्व था और जो अक्सर उनकी बहु-सांस्कृतिक परवरिश को विशिष्ट रूप से दर्शाती थीं। एक युवा कलाकार ने अपनी कृति को ‘बहु-सांस्कृतिक गुलदस्ता’ बताते हुए कहा कि फूल अंतर-सांस्कृतिक और अंतर्राष्ट्रीय होने की सुंदरता को दर्शाते हैं। एक अन्य ने सम्मान स्वरूप उन सभी स्थानों का चित्रण किया जहाँ-जहाँ वह रहा था।

तो, आप कहाँ से हैं? इस प्रश्न को लेकर आप क्या सोचते हैं? इसका कोई एक उत्तर नहीं है और शायद यही बात मायने रखती है। हम में से कई लोगों के लिए, ‘घर’ नक्शे पर कोई एक जगह नहीं है बल्कि यादों और दिल के साथ जुड़े पलों, दोस्ती और संस्कृतियों का एक संग्रह है।

जब कोई मुझसे पूछता है कि मैं कहाँ से हूँ तब मैं कभी-कभी मुस्कुरा देती हूँ और सोचती हूँ कि वे कितना जानना चाहते हैं। यदि यह संक्षिप्त बातचीत है तो मैं कहती हूँ कलामाज़ू से हूँ। लेकिन यदि वे वास्तव में सुनना चाहते हैं तो हम थोड़ी देर तक बातचीत कर सकते हैं और मैं पूछती हूँ कि क्या वे सहज होकर सुनने के लिए तैयार हैं।

यदि आप तीसरी संस्कृति के बच्चे हैं या आप किसी ऐसे व्यक्ति से प्यार करते हैं जो तीसरी संस्कृति से है तो याद रखें कि आप अकेले नहीं हैं। आप एक विशाल व भ्रमणशील जाति के सदस्य हैं, जो एक बहुत बड़ा समूह है और जो बढ़ता ही जा रहा है। हर साझा की गई कहानी, हर कलाकृति के साथ हम मिलकर अपनेपन का भाव बनाते हैं और जहाँ भी जाते हैं यह भाव हमारे साथ चलता है।

 

बच्चे

हमें खुशी यूँ ही नहीं मिल जाती। हमें खुशी को चुनना पड़ता है और उसे हर दिन चुनते रहना होता है।

नॉर्मन विंसेंट पील


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जेमिना वॉटस्टीन

जेमिना वॉटस्टीन

जेमिना 17 वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कला शिक्षक रही हैं और इस समय वे इंटरनेशनल एजुकेशनल लीडरशिप में पी.एच.डी. कर रही हैं। जेमिना छात्रों को पूछताछ आधारित अनुभव दिलाती हैं ताकि... और पढ़ें

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