साक्षात्कार के इस अंतिम भाग में फ़्रेडरिक आर्मेंट क्रिस्टीन जोन्स के साथ दुनिया में शांति को बढ़ावा देने के बारे में बात करना जारी रखते हैं। वे दोनों दुनिया भर में हो रही चेतना की जागृति और मानवता के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन की कगार पर पहुँचने की आवश्यकता पर चर्चा करते हैं जहाँ से हम अस्तित्व के उच्चतर स्तर पर तेज़ी से पहुँच सकें।
प्र. - दाजी ने हाल ही में संस्कृत शब्द ध्यान के बारे में बात की और उन्होंने कहा कि ‘धी’ का अर्थ है परम ज्ञान और ‘यान’ एक वाहन है। मुझे यह रहस्योद्घाटन हुआ कि इस वाहन के द्वारा मानवता अब परम ज्ञान प्राप्त कर सकती है।
हाँ, वाहन सही है। यह थोड़ा आशावादी हो सकता है, लेकिन मुझे लगता है कि संसार में मानवता का एक प्रयोजन है और वह है चेतना का विस्तार व विकास करना और उसमें पूर्णता प्राप्त करना।
प्र. - चेतना के विचार को सभी आध्यात्मिक समूह महत्व दे रहे हैं। मार्च माह में हमने भारत में एक वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव आयोजित किया था जिसमें भाग लेने के लिए विभिन्न आध्यात्मिक धर्मों और परंपराओं के हज़ारों लोग आए और बहुत से लोग अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल हुए। इसमें एक महत्वपूर्ण परिवर्तन बिंदु यह है कि चेतना के इस विचार में सभी योगदान दे रहे हैं। यह पृथ्वी पर रहने वाले सभी मनुष्यों में अनुनादित हो रहा है।
हम तरंग-पथक बनाते हैं - ऐसे तरीके जिनसे हम एक ही समय में योगदान कर सकते हैं और उसका लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। शांति के अंतर्राष्ट्रीय शहरों का विचार एक तरंग-पथक है और सभी समुदाय प्रस्तावित शांति के अंतर्राष्ट्रीय शहरों का शांति के आदर्श शहर के रूप में उपयोग कर सकते हैं। दुनिया का कोई भी शहर वास्तव में पूर्णतया शांति का शहर नहीं है। लेकिन समुदाय को बेहतर बनाने के लिए शांति के शहर के आदर्श का उपयोग किया जा सकता है जिसमें समुदाय के परिवारों के लिए सुरक्षा, समुदाय के लिए समृद्धि और उस समुदाय में रहने वाले सभी लोगों के लिए जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित हो।
शांति की हमारी यही परिभाषा है जिसके अनुसार सुरक्षा, समृद्धि और जीवन की गुणवत्ता को सर्वसम्मत महत्व दिया जाता है। सुरक्षा, समृद्धि और जीवन की गुणवत्ता की इस परिभाषा पर हमें कभी कोई विरोध नहीं मिला। चाहे वह सूडान हो, कोलंबिया हो, चीन हो या कैनेडा, सभी इस दिशा में काम कर रहे हैं, क्योंकि सभी का एक परिवार है और सभी किसी न किसी समुदाय के सदस्य हैं।
इसलिए इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस संस्था हर समुदाय में एक बुनियादी ढाँचा तैयार करती है ताकि समुदाय का स्थानीय विकास एवं उसका लोकतंत्रीकरण हो सके और दुनिया को इस बात के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके कि परिवारों और लोगों के लिए क्या सबसे अच्छा है। इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस का यही उद्देश्य है और यह संस्था इस दिशा में बहुत अच्छी तरह से काम कर रही है।

प्र. - मैं पिछले सप्ताह एक आश्रयस्थल में थी और मैं उन लोगों से बहुत प्रभावित हुई जो सभा में भाग ले रहे थे। मुझे लगा मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मैं इतने सारे लोगों के साथ जुड़ सकती हूँ जो इतने अच्छे काम कर रहे हैं। आपने अपने एक पॉडकास्ट में कहा था कि दुनिया के 95% लोग अच्छे हैं। वे कामकाजी लोग हैं जो अपने परिवारों की देखभाल करने की कोशिश कर रहे हैं। अलग-अलग समुदाय भी ज़बरदस्त काम कर रहे हैं - पारस्परिक प्रेम और शांति को बढ़ावा दे रहे हैं जो हम सभी चाहते हैं।
अमेरिका में हर जगह लोगों में मतभेद देखने को मिलता है। कोई एक तरफ़ जा रहा है तो कोई दूसरी तरफ़। लेकिन, प्रेम भाव ही उन मतभेदों को दूर कर सकता है।
आप राजनीतिक विचारधारा के चाहे एक तरफ़ हों या दूसरी तरफ़, दोनों पक्ष शांति के लिए काम कर रहे हैं, दोनों पक्ष सुरक्षा चाहते हैं और दोनों पक्ष समृद्धि और जीवन की गुणवत्ता चाहते हैं। यह उन तरंग-पथकों पर निर्भर करता है जिन्हें हर कोई चुन रहा है। इसलिए ऊर्जा के स्तर को देखें। एक समुदाय के पास भी दिल होता है और वह दिल उस समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिध्वनि के साथ धड़कता है। इसीलिए हार्टफुलनेस केंद्र इतने महत्वपूर्ण हैं - आप दिल से शुरू करते हैं और वहीं से आगे बढ़ते हैं। समुदाय को दिल की ज़रूरत होती है। मैं इस बात को लेकर बहुत उत्साहित हूँ कि अधिक से अधिक हार्टफुलनेस केंद्र शांति के शहर बन रहे हैं।
इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस संस्था हर समुदाय में एक बुनियादी ढाँचा तैयार करती है ताकि समुदाय का स्थानीय विकास एवं उसका लोकतंत्रीकरण हो सके और दुनिया को इस बात के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके कि परिवारों और लोगों के लिए क्या सबसे अच्छा है। इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस का यही उद्देश्य है और यह संस्था इस दिशा में बहुत अच्छी तरह से काम कर रही है।
प्र. - दाजी ने कहा कि हम दुनिया को बदलने या बचाने के लिए नहीं आए हैं; हम यहाँ एक केंद्र बनाने के लिए आए हैं ताकि सार्वभौमिक नियम उसके इर्द-गिर्द काम कर सकें। आत्मा की भौतिकी के बारे में आपकी पुस्तक इस तथ्य को प्रतिपादित करती है कि हमें सक्रिय रूप से हृदय पर केंद्रित रहना चाहिए। प्रकृति के सिद्धांत, जिनके बारे में आप लिखते हैं, वे स्वतः एक शांतिपूर्ण आत्मा के इर्द-गिर्द निरूपित होने लगते हैं।
यह कुछ भी हो सकता है - लोग प्रेम करते हैं; वे प्रेम को कैसे व्यक्त और प्राप्त करते हैं, यह उनकी समझ पर निर्भर करता है। इसका संबंध आत्मा और मानव अंग हृदय से है। हम खुद को केंद्रित कर सकते हैं और प्रेम प्राप्त करने और देने के लिए प्रयास कर सकते हैं।
प्र. - हम शांति का शहर बनाने के लिए लोगों का कैसे मार्गदर्शन कर सकते हैं? मैं उनकी मदद करना चाहती हूँ।
यह अच्छा है। लोगों को सहायकों की ज़रूरत है। प्रत्येक शहर में समुदाय का एक सहायक होता है जो संपर्क व्यक्ति होता है। पूरे विश्व में वस्तुतः हज़ारों सहायक हैं। मुझे लगता है कि हार्टफुलनेस केंद्रों को इस बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। हम कोई शुल्क नहीं लेते हैं, लेकिन लोग दान दे सकते हैं। हम चाहते हैं कि केन्या का सबसे छोटा गाँव भी वह सब कर पाए जो अमेरिका का सबसे बड़ा शहर कर सकता है।
मैं आपको युगांडा के शरणार्थी शिविर ‘एन ए सी ए वैली’ के बारे बताता हूँ। यह शिविर वर्ष 1959 से मौजूद है और इसमें विभिन्न देशों के शरणार्थी हैं। यह वस्तुतः एक शहर है, इसलिए हमने इसे शांति का शहर बनाने के लिए खोल दिया। अब शिविर के भीतर 80 अलग-अलग गाँवों में 13 शांति के शहर हैं। और अब ‘एन ए सी ए वैली’ शरणार्थी शिविर में सभी शांति के शहरों को समन्वित करने के लिए एक अभियान चल रहा है। ऑबर्न, डेनमार्क, जो शांति का 400वाँ शहर है, उनकी सहायता कर रहा है। इसलिए हम शहर-दर-शहर सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। यह केवल समुदाय ही नहीं बल्कि ऐसे क्षेत्र हैं जो शांति के शहरों के आधार का विस्तार करते हैं। ये शहर फिर साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
ऐसा करने से दो शहरों, फिर चार शहरों, फिर एक क्षेत्र के बीच जुड़ाव बन जाता है और यह पूरी दुनिया में हो रहा है। इसलिए हार्टफुलनेस केंद्र बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये एक ऐसा मार्ग प्रशस्त करते हैं जो इस नेटवर्क को दुनिया भर के अन्य शहरों तक फैला सकता है। रात 9 बजे आपका वैश्विक ध्यान इस शहर-दर-शहर समन्वय के माध्यम से अन्य शहरों तक फैल सकता है। इसलिए हार्टफुलनेस केंद्रों के शांति के शहर बनने के बहुत सारे कारण हैं। यह विस्तार सिर्फ़ समुदाय के भीतर ही नहीं बल्कि समुदाय से परे भी हो सकता है।
प्र. - यह बात शुरू से ही स्पष्ट थी कि ‘सिटीज़ ऑफ़ पीस’ कोई विशेष कार्यसूची-संचालित संगठन नहीं है। मुझे यह बात बहुत भाई। इससे इसका लक्ष्य और भी स्पष्ट हो जाता है।
इसीलिए मैं अपनी आध्यात्मिकता को इससे अलग रखता हूँ। इसीलिए मैं अपनी किताबों को इससे अलग रखता हूँ। मैं ‘सिटीज़ ऑफ़ पीस’ वेबसाइट पर अपने बारे में कुछ भी पोस्ट नहीं करता हूँ क्योंकि मैं कोई प्रख्यात व्यक्ति नहीं बनना चाहता या संसार के बारे में अपने विचार किसी पर थोपना नहीं चाहता। हम सिर्फ़ लोगों को उनके उद्देश्यों को पूरा करने हेतु काम करने के लिए एक साधन, एक तरंग-पथक प्रदान कर रहे हैं।
प्र. - मुझे इस बात पर आश्चर्य हुआ कि मैं आपके बारे में कितना कम जानती थी। ऐसा लगता है कि यह काम व्यक्तिगत नहीं है। मेरी सोच में कुछ बदलाव हुआ है। एक आत्मा के रूप में जो मैं इस संसार में करने के लिए आई हूँ, यह बस उसका स्वाभाविक विकास है।
इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस संस्था का उद्देश्य यही है - अन्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए साधन प्रदान करना। जब आप लोग इस प्रयास में सहायता करेंगे तो यह बहुत अच्छा होगा।
प्र. - क्या आप मानते हैं कि वैश्विक रूप से चेतना की जागृति हो सकती है जिससे मानवता को शांति प्राप्त हो सकती है?
निस्संदेह, इस समय हम कुछ गंभीर अस्तित्व संबंधी खतरों का सामना कर रहे हैं और हमने प्रगति करने के लिए विकास पर भरोसा किया है। विकास की भौतिकी उन अवधारणाओं में से एक है जिस पर मैं काम कर रहा हूँ। लेकिन हमें इस कार्य में तेज़ प्रगति की ज़रूरत है और इस ज़रूरत के प्रति जागरूकता से ही हमारी प्रगति तेज़ हो पाएगी क्योंकि हम अत्यधिक रचनात्मक हैं।
हम इसे चाहे दिल से करें या दिमाग से या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके करें क्योंकि यह हमारी रचनात्मकता का हिस्सा है, हम तीव्र प्रगति के लिए तैयार हैं। मेरा मानना है कि अगर यह प्रत्यक्ष है कि हमारे सामने अस्तित्व संबंधी खतरे हैं तो लोग उन खतरों को पार करने के लिए भरसक प्रयत्न करेंगे। हम जागृति प्राप्त करेंगे और सीमित अस्तित्व के बजाय पूरे अस्तित्व को प्रकट करेंगे। मेरा मानना है कि पहले से ही लोगों में जागृति है, लेकिन हमें और अधिक की आवश्यकता है और हमें इसे उस स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है जहाँ हमारे विकास में बहुत तेज़ी आ जाए।
मुझे लगता है कि दाजी की टिप्पणी के बाद और फिर आपकी किताब पढ़ने के बाद मेरे साथ भी यही हुआ; मेरे अंदर चेतना के क्रमिक विकास में तेज़ी आई। ऐसा बहुत से लोगों के साथ हो रहा होगा।
मैं हमेशा आशावादी रहता हूँ और आप भी। शायद इसीलिए हम टीम का हिस्सा बन पाए।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

जे. फ़्रेडरिक आर्मेंट
फ़्रेड एक लेखक, शिक्षक तथा इंटरनेशनल सिटीज़ ऑफ़ पीस के संस्थापक व अध्यक्ष... और पढ़ें
