ड्रू डी. वेस्ट की मौलिक एवं अप्रकाशित कविता

 

चयनित शांति 

का अपना ही तरीका होता है हमें ढालने का

निश्चित रूप से, इसने मुझे तो ढाला है।

जैसे नदी में एक चट्टान

जिस पर सैकड़ों वर्षों से जल की धारा पड़ती है

यह हमारी रूक्षता को कोमल बनाती जाती है,

यदि हम ऐसा करने दें।

मुझे लगता था जैसे मैं खुद को जानता हूँ

लेकिन जब मैंने सबसे पहले शांति का अनुभव किया,

उस अजनबी को मुश्किल से ही बर्दाश्त कर पाया!

मैं केवल अपनी सतह को जानता था।

लेकिन कई पलों तक शांत रहने के बाद,

मैंने उन बारीकियों को सराहना सीखा जो न जाने कब से अनदेखी थीं।

मैंने इस तथ्य के प्रति अचंभित होना सीखा

कि मेरा भी अस्तित्व है।

जब मैं इस प्रकटन के अनुभव से बचने की कोशिश करता हूँ,

तब मैं अजनबी बन जाता हूँ।

जब मैं इसका स्वागत करता हूँ, स्वीकार करता हूँ,

तब यह उमड़-उमड़ कर आता है,

और मैं युद्ध क्षेत्रों के बीच भी अपने आस-पास शांति बना पाता हूँ।

शांति का चयन मैंने कब से किया है?

मैं नहीं जानता -

लेकिन सैकड़ों वर्षों तक बने रहने की आशा करता हूँ।


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ड्रू वेस्ट

ड्रू एक कवि, लेखक और ‘द यूनाइटेड मेथोडिस्ट चर्च’ में पादरी हैं। उन्हें वैश्विक ध्यानश... और पढ़ें

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