दाजी बता रहे हैं कि कैसे किसी जिज्ञासु की आंतरिक यात्रा उसको एक पाने वाला बनने में रूपांतरित कर देती है। वे अंतर्मुखी होकर अपने भीतर अनंत को पुनः खोजने के लिए इस नव वर्ष का आह्वान कर रहे हैं।
एक पर्वतारोही ने एक बार मुझसे ऐसा कुछ कहा था जिसे मैं कभी नहीं भूला। उसने कहा था कि किसी भी पहाड़ पर चढ़ते हुए सबसे खतरनाक क्षण वह नहीं होता जब आप ऊपर चढ़ने के लिए संघर्ष करते हैं या कम हवा में साँस लेने के लिए हाँफ रहे होते हैं बल्कि तब होता है जब आप रुककर पीछे मुड़कर देखते हैं कि आप कितनी दूर आ गए हैं और फिर तय करते हैं कि बस अब और नहीं।
अब जब हम एक और नव वर्ष की दहलीज़ पर खड़े हैं, मैं आपसे एक अलग प्रकार की यात्रा के बारे में बात करना चाहता हूँ। यह स्वास्थ्य या वित्त संबंधी सामान्य संकल्पों के बारे में नहीं है बल्कि यह एक निमंत्रण है उस सबसे विलक्षण और रोमांचक अनुभव के लिए जो एक मनुष्य के लिए संभव है – भीतर अपने केंद्र की ओर यात्रा।
प्रारंभिक बिंदु
प्रत्येक यात्रा कहीं-न-कहीं से शुरू होती है। हममें से अधिकांश के लिए वह कहीं-न-कहीं एक शांत बैचेनी है, एक एहसास है कि वर्तमान में हम जो अनुभव कर रहे हैं, जीवन में उससे अधिक भी कुछ होना चाहिए। शायद आपने भी यह किसी अनपेक्षित शांति या दो विचारों के मध्य के अंतराल में महसूस किया हो। यह बेचैनी कोई समस्या नहीं है जिसे हल किया जाना है, बल्कि एक पुकार है जिस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
मेरे गुरु बाबूजी ने इसके बारे में बहुत अच्छा लिखा है। वे कहते हैं कि आत्मा बंधनों से मुक्त होने के लिए तरस रही है। यह बंधन क्या है? यह ज़ंजीरें या जेल की दीवारें नहीं हैं। यह परत-दर-परत आवरणों का जमा होना है जो समय के साथ हमारे अंतरतम अस्तित्व के चारों ओर इकट्ठा हो गए हैं। इनमें से कुछ सुखदायी आवरण हैं जिन्हें हमने अपनी इच्छा से ओढ़ा है। दूसरे सघन और भारी हैं जो चोट, निराशा या अचेतन जीवन के कारण पड़ने वाले भार से जमा हुए हैं। चाहे जैसे भी जमा हुए हों, वे हमारे भीतर के प्रकाश को धुंधला कर देते हैं।
आंतरिक यात्रा एक-एक करके इन आवरणों को हटाने की एक प्रक्रिया है जब तक कि आत्मा बिना बाधित हुए प्रकाशमान नहीं होती।
मार्ग को समझने के तीन तरीके
इस यात्रा को समझने के लिए मैं आपको तीन तरीके बताता हूँ। प्रत्येक तरीका एक ही सच्चाई के अलग पहलू को प्रकाशित करता है।
चढ़ाई -
पहली चढ़ने की छवि है। कल्पना कीजिए कि आप पहाड़ों से घिरी एक घाटी में रहते हैं। घाटी आरामदायक है। आप वहाँ के प्रत्येक रास्ते, पेड़ और नदी को जानते हैं। लेकिन कभी-कभी जब बादल छँटते हैं तब आपको दूर प्रकाश में नहाई हुई चोटियों की झलक दिखाई देती है और उन्हें देखकर आपके भीतर कुछ हलचल सी होती है।
आध्यात्मिक यात्रा इस घाटी से उस चोटी तक चढ़ाई करने के समान है। हार्टफुलनेस में हम हृदय क्षेत्र से प्रारंभ करके मनस क्षेत्र होते हुए केंद्रीय क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने की बात करते हैं। ये कोई भौतिक स्थान नहीं हैं बल्कि चेतना की अवस्थाएँ हैं और प्रत्येक अगली अवस्था पिछली अवस्था से अधिक सूक्ष्म होती है। जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ते जाते हैं, कुछ अद्भुत होता है। वायु महीन और अधिक निर्मल होती जाती है। घाटी में जो ठोस और स्पष्ट लगता था, वह धुंध के रूप में प्रकट होता है। आप जो सोचते थे कि आप जानते हैं, वह वास्तविक अनुभव में कुछ अलग ही होता है।
चढ़ाई के लिए वास्तव में प्रयास की ज़रूरत होती है। लेकिन प्रयास से भी अधिक, इसके लिए उन चीज़ों को पीछे छोड़ने की इच्छा होनी चाहिए जिनका आपके इस महान उद्देश्य में कोई उपयोग नहीं हैं। आप घाटी से सारी संपत्ति को शिखर पर नहीं ले जा सकते। कुछ चीज़ों को रास्ते में ही छोड़ना पड़ता है।

प्रकटीकरण -
इस यात्रा को समझने का दूसरा तरीका प्रकटीकरण के द्वारा है। उस फूल के बारे में सोचिए जो प्रातः काल के सूर्य के सामने एक-एक पंखुड़ी को खोलता जाता है। वह न तो संघर्ष करता है और न ही जोर लगाता है। वह केवल अपने संपूर्ण अस्तित्व के साथ प्रकाश को प्रतिक्रिया देता है और इस प्रतिक्रिया में वह वही बन जाता है जो हमेशा से उसे बनना था।
हमारी आध्यात्मिक संरचना में ऊर्जा के केंद्र होते हैं जो चक्र कहलाते हैं। वे ठीक इसी तरह से उजागर होते हैं। प्रत्येक केंद्र का अपना एक गुण होता है और उसका अपना उपहार होता है। पहला चक्र स्वीकार्यता लाता है और दूसरा चक्र शांति। फिर प्रेम, साहस और स्पष्टता आते हैं। जैसे-जैसे ये चक्र खुलते जाते हैं, हम कुछ अलग नहीं बनते, हम स्वयं में अधिक पूर्ण होते जाते हैं तथा उन गुणों को प्रकट करने लगते है जो हमारे अंदर हमेशा से विद्यमान थे लेकिन सुप्तावस्था में थे जैसे बीज अंकुरण के लिए वसंत ऋतु की प्रतीक्षा कर रहे हों।
प्रकटीकरण के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। लेकिन ध्यान-अभ्यास, स्थिरता और सबसे महत्वपूर्ण रूप से एक ऐसे गुरु की उत्प्रेरक उपस्थिति से, जो आपसे पहले उस पथ पर चल चुका हो, इसे आमंत्रित किया जाता है।
रूपांतरण -
तीसरा तरीका संभवतया सबसे व्यक्तिगत है - जिज्ञासु से पाने वाला बन जाने की यात्रा।
यह यात्रा जिज्ञासा से आरंभ होती है - आप ध्यान के बारे में सुनते हैं या कोई हार्टफुलनेस का ज़िक्र करता है। कुछ आपके भीतर गहराई से महसूस होता है हालाँकि आप निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि ऐसा क्यों होता है। आप एक जिज्ञासु प्रतिभागी होते हैं और स्थिति को परख रहे होते हैं।
शीघ्र ही आप परिवर्तनों का संज्ञान लेना शुरू करते हैं - शांति का अधिक एहसास, पुराने मनमुटावों का नरम पड़ना, अप्रत्याशित प्रसन्नता के क्षण। यह इस बात का संकेत है कि अभ्यास कार्य कर रहा है। अब आप मात्र जिज्ञासु नहीं रहे, बल्कि वास्तव में रुचि लेने लगे हैं। आप यह समझने लगते हैं कि ये परिवर्तन आकस्मिक नहीं हैं। इनके पीछे एक बुद्धिमत्ता है, एक अदृश्य शक्ति काम कर रही है। यह समझ लेना, कि आपके रूपांतरण के पीछे एक गुरु या आध्यात्मिक रूपांतरण-कर्ता हैं, निर्णायक मोड़ का संकेत है।
यहाँ से आगे आपकी यात्रा गहरी हो जाती है। भक्ति स्वाभाविक तौर पर उभरती है - किसी बाध्यता के रूप में नहीं बल्कि कृतज्ञता के रूप में। आप स्वयं अभ्यास की ओर उन्मुख हो जाते हैं, इसलिए नहीं कि आपको करना चाहिए बल्कि इसलिए कि आप करना चाहते हैं। परिवर्तन होते रहते हैं जो और अधिक सूक्ष्म एवं गहरे होते जाते हैं जब तक कि एक दिन आप कुछ असाधारण अनुभव नहीं करते। अब आप परिवर्तित नहीं हो रहे हैं। आप एक ऐसी अवस्था में पहुँच गए हैं जो अपरिवर्तनीय, स्थिर व अचल है।
लेकिन यह भी अंत नहीं है। एक समर्थ गुरु आपको इस अवस्था से भी आगे ले जाएगा जहाँ पर शब्द विफल हो जाते हैं और मात्र अनुभव ही बोलता है।
संकल्प जो मायने रखता है -
जैसे-जैसे हम एक और नव वर्ष की तरफ़ बढ़ रहे हैं, मैं आपको एक संकल्प लेने का सुझाव देना चाहूँगा जो सामान्य संकल्पों से अलग है। अधिकतर संकल्प कुछ ज़्यादा या कम करने के बारे में होते हैं। मैं आपको गहराई में जाने का संकल्प लेने के लिए कह रहा हूँ।
जटिलता में गहराई लाने के लिए नहीं बल्कि सरलता में गहराई लाने के लिए। अधिग्रहण में गहराई लाने के लिए नहीं बल्कि छोड़ देने में गहराई लाने के लिए। दुनिया के शोर में गहराई से शामिल होने के लिए नहीं बल्कि अपने केंद्र की शांति में गहराई से जाने के लिए।
इस संकल्प के लिए इच्छाशक्ति या अनुशासन की उस तरह से आवश्यकता नहीं है जैसा कि सामान्यतः हम सोचते हैं। इसमें मात्र इच्छा की आवश्यकता है - प्रतिदिन सुबह ध्यान में बैठने की इच्छा, प्रतिदिन शाम को दिनभर की समस्त छापों को साफ़ करने की इच्छा, प्रार्थना के द्वारा अपने से किसी उच्चतर से जुड़ने की इच्छा।
सच्चाई के साथ किए गए ये सरल अभ्यास आपको आपकी कल्पना से भी आगे ले जाएँगे। यह प्रारंभिक प्रेरणा है जो यात्रा को गति देती है।
अनंत यात्रा
आंतरिक यात्रा के बारे में एक विलक्षण सत्य है - यह कभी भी समाप्त नहीं होती, फिर भी प्रत्येक क्षण संपूर्ण हो सकता है। प्रत्येक कदम एक मंज़िल और एक प्रवेश मार्ग दोनों ही है। प्रत्येक अंतर्दृष्टी एक उत्तर और एक नया प्रश्न दोनों ही है।
यह निराशाजनक नहीं बल्कि मुक्तिदायक है। इसका अर्थ है कि हमेशा खोजने के लिए, बनने के लिए और अनुभव करने के लिए बहुत कुछ बाकी है। यात्रा अपने आप में एक आनंद है। चढ़ाई अपने आप में ही शिखर है।
तो, जब आप आने वाले वर्ष के लिए संकल्प तय करेंगे तब आप इस बात पर विचार करें –
यदि आपका संकल्प कुछ पाने के लिए नहीं बल्कि कुछ खोजने के लिए हो तो कैसा होगा? यदि आप अपनी सूची में एक और काम जोड़ने के बजाय उन आवरणों को घटाने के लिए प्रतिबद्ध हों जो आपके वास्तविक स्वरूप को ढक रहे हैं तो कैसा होगा?
कैसा हो यदि इस नव वर्ष में आप आंतरिक यात्रा शुरू करें?
एक आमंत्रण
पर्वत यानी लक्ष्य भी है, मार्ग भी है, गुरु भी रास्ता ढूँढने में आपकी मदद करने के लिए तैयार हैं। बस आपके पहला कदम उठाने की देरी है।
आंतरिक यात्रा के बारे में एक विलक्षण सत्य है - यह कभी भी समाप्त नहीं होती, फिर भी प्रत्येक क्षण संपूर्ण हो सकता है। प्रत्येक कदम एक मंज़िल और एक प्रवेश मार्ग दोनों ही है। प्रत्येक अंतर्दृष्टी एक उत्तर और एक नया प्रश्न दोनों ही है।
वह पहला कदम उतना ही सरल हो सकता है जितना कि सुबह उठकर शांति से बैठकर कोमलता से अपना ध्यान अपने हृदय की तरफ़ मोड़ना और ध्यान के दौरान अपने अस्तित्व की गहराई में उतर जाना।
या वह पहला कदम हार्टफुलनेस अभ्यासों की अधिक जानकारी प्राप्त करना और एक ऐसे प्रशिक्षक के साथ जुड़ना हो सकता है जो आपको प्राणाहुति का परिचय दे सके। यह ऐसा विलक्षण योग सिद्धांत है जो आंतरिक रूपांतरण को इस तरह से तेज़ करता है जो अकेले आत्म-प्रयास से संभव नहीं है।
जैसे भी शुरू करें, बस शुरू कर दें। यह यात्रा आपका इंतज़ार कर रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपके अंदर, आपके अस्तित्व के केंद्र में जो मौजूद है, वह आपके हर प्रयास के लायक है।
आशा करता हूँ कि यह नव वर्ष ऐसा वर्ष हो जब आप अंदर की ओर मुड़ें और भीतर के अनंत को खोजें।
प्रेम सहित,
दाजी
यह यात्रा आपका इंतज़ार कर रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपके अंदर, आपके अस्तित्व के केंद्र में जो मौजूद है, वह आपके हर प्रयास के लायक है।

