डॉ. सब्बू किशोर बताते हैं कि विटामिन बी12 की कमी का प्रभाव बहुत व्यापक है, लेकिन अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। यह कमी तंत्रिका-तंत्र के स्वास्थ्य, हृदय एवं रक्त-वाहिकाओं संबंधी जोखिम और समग्र स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
विटामिन बी12 की कमी धीरे-धीरे दुनिया भर में, विशेषकर भारत में, सबसे व्यापक पोषण संबंधी कमियों में से एक बनती जा रही है। विटामिन बी12 मस्तिष्क के कार्य, नसों के स्वास्थ्य, रक्त बनने और हृदय की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है, फिर भी अक्सर इस पर तब तक ध्यान नहीं दिया जाता जब तक कि गंभीर क्षति नहीं हो जाती। बहुत से लोग विटामिन बी 12 की कमी के साथ वर्षों तक जीते रहते हैं बिना यह जाने कि उनकी थकान, याददाश्त की समस्याओं या झनझनाहट का कारण पोषक तत्वों की कमी है।
यह समस्या कितनी व्यापक है?
लगभग हर तीन में से एक या हर दो में से एक भारतीय वयस्क के शरीर में बी12 का स्तर कम या निम्न सीमा पर होता है। यह समस्या सिर्फ़ बुज़ुर्गों तक ही सीमित नहीं है। अब युवा व्यवसायी, छात्र और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। आधुनिक खान-पान, तनाव, पाचन संबंधी समस्याएँ और लंबे समय तक चलने वाली दवाएँ इस चलन को बढ़ा रही हैं।
सबसे ज़्यादा खतरा किसे है?
बी12 पशु-आधारित भोजन में पाया जाता है। शाकाहारी और वीगन लोगों को विशेष खतरा होता है। बुज़ुर्ग, मधुमेह के वे मरीज़ जो मेटफ़ॉर्मिन या एसिड कम करने वाली दवाएँ लेते हैं, पेट की बीमारियों वाले, शराब पीने वाले, गर्भवती महिलाएँ या दीर्घकालिक तनाव वाले लोग - इन सब को भी ज़्यादा खतरा होता है।

विटामिन बी12 इतना ज़रूरी क्यों है?
विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने और माइलिन आवरण बनाकर नसों की सुरक्षा करने के लिए बहुत ज़रूरी है। यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य, याददाश्त, मनोभाव और ऊर्जा में सहायक है। इसका एक ज़रूरी काम होमोसिस्टीन (एक अमीनो एसिड) को नियंत्रित करना है, जो अधिक होने पर रक्त-वाहिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।
होमोसिस्टीन - मस्तिष्क आघात की गुप्त कड़ी
जब विटामिन बी12 का स्तर कम होता है तब रक्त में होमोसिस्टीन जमा होने लगता है। बढ़े हुए होमोसिस्टीन से रक्त-वाहिकाओं की अंदर की परत को नुकसान पहुँचता है, रक्त में थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है और धमनियाँ तेज़ी से सख्त होने लगती हैं। इससे मस्तिष्क आघात और हृदय रोग का खतरा बहुत बढ़ जाता है। यह खतरा कभी-कभी उन युवाओं को भी होता है जिनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप या धूम्रपान जैसे पारंपरिक जोखिम के कारक नहीं होते हैं।
तंत्रिका-तंत्र संबंधी लक्षण - अक्सर चेतावनी का पहला संकेत
रक्त की कमी होने से पहले तंत्रिका-तंत्र से संबंधित लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें झनझनाहट, सुन्नपन, जलन, संतुलन में दिक्कत, थकान, कमज़ोर याददाश्त, मनोभाव में बदलाव, अवसाद और नींद की समस्याएँ जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। यदि इसका इलाज न किया जाए तो तंत्रिका-तंत्र और मस्तिष्क को स्थायी नुकसान हो सकता है।
विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने और माइलिन आवरण बनाकर नसों की सुरक्षा करने के लिए बहुत ज़रूरी है। यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य, याददाश्त, मनोभाव और ऊर्जा में सहायक है। इसका एक ज़रूरी काम होमोसिस्टीन (एक अमीनो एसिड) को नियंत्रित करना है, जो अधिक होने पर रक्त-वाहिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।

क्यों विटामिन बी12 की कमी पर सामान्यतः ध्यान नहीं जाता?
हीमोग्लोबिन का सामान्य स्तर विटामिन बी12 की कमी को खारिज नहीं करता। जब रक्त जाँच का परिणाम सामान्य हो तब भी बी12 की कमी हो सकती है। लक्षणों को अक्सर तनाव, उम्र बढ़ने या जीवनशैली का हिस्सा मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है जिससे लगातार कमी होती जाती है और स्वास्थ्य बिगड़ता जाता है।
विटामिन बी12 का स्तर जाँचने का सही तरीका
रक्त की एक सामान्य जाँच से बी12 का स्तर कम होने का पता चलता है लेकिन परिणामों को ध्यान से समझने की ज़रूरत होती है। इसके लक्षण सामान्य श्रेणी के निम्न स्तर पर भी दिख सकते हैं। सीरम होमोसिस्टीन को मापना मददगार होता है, क्योंकि सीरम का उच्च स्तर कार्यशीलता में कमी और रक्त-वाहिनी संबंधी बीमारी के खतरे का संकेत देता है। मिथाइलमेलोनिक एसिड (MMA) जाँच से कोशिकाओं में बी12 की कमी की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है, विशेषकर जब परिणाम पूरी तरह सामान्य न हों।
कमी को दूर करना
इसका उपचार बी12 कमी की गंभीरता और लक्षणों की मौजूदगी पर निर्भर करता है। हल्की से मध्यम कमी को निगलने या जीभ के नीचे रखने वाली विटामिन बी12 की गोलियों के रूप में दवा की अधिक खुराक देकर ठीक किया जा सकता है। इसके लिए मिथाइलकोबालामिन के रूप में दवा सबसे उपयुक्त मानी जाती है। गंभीर कमी या तंत्रिका संबंधी बीमारियों के लक्षणों वाले व्यक्तियों में शुरू में विटामिन बी12 के इंजेक्शन देने की सलाह दी जाती है, जिसके बाद निरंतर उपचार की सलाह दी जाती है। होमोसिस्टीन के स्तर को सामान्य करने के लिए संबंधित फ़ोलेट (बी9) और विटामिन बी6 की कमी को ठीक करना भी आवश्यक है।
इलाज से बेहतर है बचाव
नियमित जाँच बचाव की कुंजी है। बुज़ुर्गों, शाकाहारी, मधुमेह-ग्रस्त लोगों और लंबे समय तक दवा लेने वाले व्यक्तियों को समय-समय पर बी12 और होमोसिस्टीन की जाँच करानी चाहिए। जागरूकता मदद करती है लेकिन पूरक आहार अक्सर ज़रूरी होते हैं।
ज़रूरी संदेश
विटामिन बी12 की कमी आम है। यह चुपचाप आने वाली और गंभीर समस्या है जो ऊर्जा, मस्तिष्क, तंत्रिकाओं और रक्त-वाहिकाओं को प्रभावित करती है। बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन इसे मस्तिष्क आघात और दिल की बीमारी से जोड़ता है। शुरुआती पहचान और उपचार लक्षणों को ठीक कर सकता है और नुकसान को रोक सकता है। बी12 पर आज ध्यान देना भावी स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
विटामिन बी12 की कमी आम है। यह चुपचाप आने वाली और गंभीर समस्या है जो ऊर्जा, मस्तिष्क, तंत्रिकाओं और रक्त-वाहिकाओं को प्रभावित करती है। बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन इसे मस्तिष्क आघात और दिल की बीमारी से जोड़ता है। शुरुआती पहचान और उपचार लक्षणों को ठीक कर सकता है और नुकसान को रोक सकता है। बी12 पर आज ध्यान देना भावी स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
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