डॉ.प्रसाद वेलुतनारसुंदर त्वचा और समग्र स्वास्थ्य के लिए सरलआयुर्वेदिक नुस्खे बता रहे हैं जिसमें वे मुख्यतः त्वचा को स्वस्थ रखने में उपयोगी तेल और जड़ी-बूटियों के बारे में बात कर रहे हैं।

 

त्वचाके लिए कुछ आयुर्वेदिक तेल

सामान्यतः, त्वचा के लिए रोज़मर्रा के इस्तेमालमें नारियल औरजैतून के तेल, तिल केतेल से बेहतरमाने जाते हैं।नारियल का तेल सभी प्रकारकी त्वचा केलिए उपयोग कियाजा सकता है।केरम’ उन तेलोंको कहते हैंजिनका आधार नारियलका तेल होताहै औरतैलम’ उन तेलों कोकहते हैं जिनकाआधार तिल का तेल होताहै।

कुंकुमादितैलम - केसर से युक्त यहतेल त्वचा कीरंगत और चमक निखारता है। यह सभी प्रकारके लोगों कीत्वचा, खासकर कफऔर वात प्रकृतिके लोगों केलिए उपयोगी है।

इलादितैलम और केरम - इस तेल में ऐसी जड़ी-बूटियों का मिश्रणहोता है जो त्वचा केरंग में परिवर्तन, एलर्जी, दाग-धब्बे, फंगल (fungal) संक्रमण और अन्य त्वचा रोगोंका उपचार करनेमें मदद करतीहैं। यह त्वचाको सूखा बनासकता है, इसलिएदैनिक उपयोग केलिए उपयुक्त नहींहै।

नाल्पामरादितैलम और केरम - नाल्पामरादि का मतलबहै चार फाइकसजिन्हें पीपल और बरगद केनाम से जाना जाता है।ये त्वचा कीसफ़ाई के लिए जाने जातेहैं और इनका उपयोग धूप-दाह (sunburn), चहरे परझाइयों (hyper-pigmentation), त्वचा केमलिनकिरण (रंग मेंबदलाव) और खाज (eczema) के उपचार केलिए भी होता है। इसेनियमित रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं औरयह शिशुओं केलिए भी उपयुक्तहै।

दिनेसवल्यादितैलम और केरम - दिनेसवल्ली एक लालबेल है जो लगभग पूरेभारत में पाई जाती है।इसकी छाल का उपयोग तेलबनाने के लिए किया जाताहै। यह घाव, त्वचा केरंग और रंगत में सुधार, छोटी-मोटी फुंसियोंके उपचार, एलर्जी, दाद, फोड़े, छालरोग (सोरायसिस), खाज (eczema) में और डंक यामच्छर के काटनेसे होने वालीखुजली को नियंत्रितकरने में काफ़ीउपयोगी है। 

दुर्वाडीतैलम और केरमयह एक ऐसा तेल हैजो दुर्वा यादूब घास से बनता है।यह मामूली कटजाने, जलन और घावों कोठीक करने मेंमदद करता है।यह तेल त्वचाका रंग निखारताहै और जलन खुजलीको ठीक करताहै। इसका उपयोगघाव के निशानको ठीक कर त्वचा कारंग पुनः प्राप्तकरने में भी किया जासकता है। चूँकिइसकी प्रकृति ठंडीहै इसलिए यहपित्त-प्रकार कीत्वचा के लिए उपयुक्त है।

त्वचाके लिए कुछ जड़ी-बूटियाँ

 

हल्दी

यहविषहर, एंटी-एलर्जिकऔर एंटी-ऑक्सीडेंटकी तरह काम करती है।त्वचा पर लगानेसे यह त्वचा-रोगों सेबचाव और उनका उपचार करनेपर तथा त्वचाके रंग और चमक कोनिखारने पर सीधा प्रभाव डालतीहै। इसे खायाभी जा सकता है।

इसेखाने में भी मिलाया जासकता है और कैप्सूल के रूप में भीलिया जा सकता है। हालही के अध्ययनोंसे मालूम हुआहै कि हल्दीमें पाए जानेवाला तत्व, कर्कुमिनमें कैंसर-रोधीगुण होते हैं।दाग-धब्बों कोहटाने और गोरापनलाने के लिए इसे क्रीमया गुलाबजल केसाथ लेप बनाकरत्वचा पर लगायाजा सकता है।हल्दी एक गर्म तासीर कीजड़ी-बूटी है, इसलिए पित्त प्रकृतिवाले लोगों कोत्वचा पर इसका इस्तेमाल करते समयथोड़ा सतर्क रहनाचाहिए।

neem.webp

नीम

यहप्रबल रोगाणुरोधी औरविषरोधी है जिसे खाया भीजा सकता है और त्वचापर लगाया भीजा सकता है।यह रक्त को शुद्ध करताहै और एक एंटी-ऑक्सीडेंटहै। इसका उपयोगत्वचा रोगों, फ़ंगलसंक्रमणों और एलर्जीके इलाज मेंकिया जा सकता है। इससेछाले और घाव भी भरसकते हैं। हल्दीऔर नीम को मिलाकर बहुतसारी त्वचा कीसमस्याओं में उन्हेंखाया और लेप के रूपमें उपयोग कियाजाता है।

aloe-vera.webp

घृतकुमारी (aloevera) — 

यहएक ठंडी तासीरवाला त्वचा कीसफ़ाई के लिए उपयोगी पौधाहै। यह पित्तको कम करता है। इसेमुँहासों, मासिक धर्मकी समस्याओं, कटनेया जलने से होने वालेघावों इत्यादि केलिए उपयोग कियाजाता है। यह ग्रहण करनेऔर त्वचा परलगाने दोनों तरहसे उपयोगी है।त्वचा पर लगानेसे एलोवेरा जलन, कटने या जलने पर होनेवाले घावों, त्वचापर धब्बों, त्वचाके सूखेपन आदिके लिए फ़ायदेमंदहै। वहीं ग्रहणकरने पर यह एक एंटी-ऑक्सीडेंट, विषरोधी काकाम करता है और पेटसाफ़ करने के लिए बहुतउपयोगी है।

saffron.webp

केसर

इसेदूध, चंदन पाउडरया गुलाब जलके साथ त्वचापर लगाने सेत्वचा की रंगत और चमकनिखरती है। इसे खाने सेकामोत्तेजना पाचनमें सुधार आताहै, रोग-प्रतिरक्षाबढ़ती है। यह ऊतकों मेंहुए नुकसान कोठीक करने मेंभी कारगर है।

sandalwood.webp

चंदन — 

एकठंडक प्रदान करनेवाला पौधा है जो पित्तको कम करता है। जबइसे ग्रहण कियाजाता है या त्वचा परलगाया जाता है तो यहत्वचा के रंग को निखारताहै। यह विषरोधीहोता है और सूजन कोकम करता है यहरक्त को शुद्धकरता है, शरीरका पोषण करताहै, थकान मिटाताहै, अनिद्रा दूरकरता है और तनाव वचिंता को भी कम करताहै। चंदन का इत्र केरूप में भी इस्तेमाल होता है और साथही यह ठंडक भी प्रदानकरता है।

कलाकृति - लक्ष्मी गद्दाम 


Comments

डॉ. प्रसाद वेलुतनार

डॉ. प्रसाद वेलुतनार

डॉ. प्रसााद ने केरला से आयुर्वेदााचाार्यय चिकित्सा की डिग्री प्रााप्त की। 22 वर्षों के अपने व्याावसाायिक कार्यकाल के दौराान उन्होंंने भाारत, मॉरिशस, मलेशिया, रूस एवंं मिस्र मेंं कार्य किया है। इस भाारतीय ज्ञाान को मिस्र मेंं ले जााने व फ... और पढ़ें

उत्तर छोड़ दें