जी हाँ, आप कर सकते हैं!
दाजी कुछ सरल अभ्यास बता रहे हैं जो आपको अपने विचारों एवं चिंताओं के भंवर से बाहर निकलने में और अपने शरीर से तथा बाहरी दुनिया से पुनः जुड़ने में मदद करेंगे। ये खेल की तरह हैं और इन्हें अकेले अथवा मित्रों या परिवार के साथ किया जा सकता है। ये सभी अभ्यास तनाव को दूर करने में अत्यंत उपयोगी हैं।
प्रिय मित्रों,
जैसे-जैसे हमारा जीवन व्याकुलता, अनिश्चितता और तनाव की अनुभूतियों के कारण अत्यधिक जटिल होता हुआ प्रतीत होता है, हमारे विचारों को भी नियंत्रित करना कठिन होता जाता है। हम अपने आस-पास की किसी भी बुरी खबर को सुनकर बेबस महसूस कर सकते हैं। हम किसी न किसी बुरी आदत से जूझ रहे हो सकते हैं - जैसे हमारा फ़ोन, इंटरनेट, खाद्य पदार्थ, नशीली वस्तुएँ या अपने पारिवारिक जीवन या व्यावसायिक जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियाँ।
ऐसे में कभी-कभी जो चीज़ हमारी सहायता कर सकती है वह है जीवन को थोड़ा सा पुनर्व्यवस्थित करना। कुछ सरल अभ्यास हमारे मन की दिशा बदल देते हैं और उसे उन अंतहीन विचारों से दूर करते हैं जो हमारे संतुलन को बिगाड़ देते हैं तथा दैनिक जीवन में पनपने की क्षमताओं को बाधित करते हैं।
स्पर्श और गतिशीलता हमारे मन को दिमाग से निकालकर शरीर के अंदर लाने के बेहतरीन तरीके हैं। इसलिए यहाँ पुनर्व्यवस्थित होने के लिए कुछ सरल अभ्यास दिए जा रहे हैं। इन्हें आप स्वयं भी कर सकते हैं और दोस्तों या परिवार के साथ भी कर सकते हैं। इनसे प्रसन्नता मिलती है, हँसी आती है और हल्केपन की अनुभूति होती है जिससे जीवन के बारे में अलग नज़रिया मिलता है। कृपया इन अभ्यासों को अपनी सुविधानुसार करें और इस बात के प्रति सतर्क रहें कि आपका शरीर कितना अभ्यास सरलता से कर सकता है।
शुरुआती कसरत
अपने पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखकर खड़े हो जाएँ, पंजे सामने की ओर हों और अपने हाथों को झुलाते हुए धीरे-धीरे अपना शरीर दाईं ओर फिर बाईं ओर मोड़ें। इसे थोड़ी देर तक दोनों तरफ़ करें। इससे आपका शरीर ढीला होगा और आप आराम महसूस करेंगे।
कुछ सरल अभ्यास हमारे मन की दिशा बदल देते हैं और उसे उन अंतहीन विचारों से दूर करते हैं जो हमारे संतुलन को बिगाड़ देते हैं तथा दैनिक जीवन में पनपने की क्षमताओं को बाधित करते हैं। |

बच्चे की तरह बन जाएँ
गाय की तरह अपने दोनों हाथों और दोनों पैरों पर चलें।
बच्चे की तरह घुटनों के बल चलकर आगे बढ़ें।

कूदें!
अपने पैरों के पंजों पर संतुलन करते हुए खड़े-खड़े कूदें।
पूर्व दिशा की ओर मुड़कर पाँच बार कूदें।
उत्तर दिशा की ओर मुड़कर पाँच बार कूदें।
पश्चिम दिशा की ओर मुड़कर पाँच बार कूदें।
दक्षिण दिशा की ओर मुड़कर पाँच बार कूदें।
इस क्रम को कुछ बार दोहराएँ।

ऊपर की ओर देखें
बाहर निकलकर ऊपर आकाश की ओर देखें।
सतर्कता से गौर करें कि आपको क्या दिखाई दे रहा है, जैसे पेड़ों के शिखर, पक्षी, बादलों की आकृतियाँ या चिमनियों के शिखर।
ऊपर देखने से आपके मस्तिष्क का निचला हिस्सा सिकुड़ जाता है जिसका आपके शरीर पर संतुलनकारी प्रभाव होता है। बाहर जाने से आप बाहरी दुनिया से जुड़ते हैं और आपके दृष्टिकोण में व्यापकता आ जाती है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि जब हम उल्टे चलते हैं तब हमारी तंत्रिका संबंधी गतिविधियों में फ़र्क आ जाता है। जब हम उल्टे चलते हैं तब हमारा अग्र मस्तिष्क (prefrontal cortex), जो संज्ञानात्मक क्षमताओं, जैसे निर्णय लेने, में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से सक्रिय हो जाता है। इससे कुछ शारीरिक लाभ भी हो सकते हैं जो पीठ दर्द इत्यादि में राहत दिला सकते हैं। |
उल्टे चलें
ऐसा स्थान चुनें जहाँ आप किसी व्यक्ति या वस्तु से न टकरा जाएँ।
धीरे-धीरे करके शुरुआत करें, पाँच कदम आगे चलें और पाँच कदम उल्टे चलें।
जैसे-जैसे आपका आत्मविश्वास बढ़ने लगे आप अपनी गति और दूरी बढ़ा लें।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि जब हम उल्टे चलते हैं तब हमारी तंत्रिका संबंधी गतिविधियों में फ़र्क आ जाता है। जब हम उल्टे चलते हैं तब हमारा अग्र मस्तिष्क (prefrontal cortex), जो संज्ञानात्मक क्षमताओं, जैसे निर्णय लेने, में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से सक्रिय हो जाता है। इससे कुछ शारीरिक लाभ भी हो सकते हैं जो पीठ दर्द इत्यादि में राहत दिला सकते हैं।
मैं आशा करता हूँ कि हार्टफुलनेस ध्यान और सफ़ाई के दैनिक अभ्यास के साथ-साथ ऐसे कुछ अभ्यासों द्वारा आपके हृदय और मन को शांति तथा आत्मविश्वास की प्राप्ति होगी।
आप सभी को अनेक शुभकामनाएँ,
दाजी

