सुलोचना संतोष एक युवा और प्रेरित लेखिका हैं जो हमें समुद्र और पर्यावरण की देखभाल करने की आवश्यकता की याद दिलाती हैं। आप बदलाव लाने के लिए क्या कर रहे हैं?

निवार के दिन देर तक सोने के लिए होते हैं, आराम करने के लिए होते हैं। ये ऐसे दिन होते हैं जब आप (उम्मीद है) बिस्तर में ही बैठे हुए अपना पसंदीदा नाश्ता खाते हैं। ये ऐसे दिन नहीं होते जब आप सुबह 5 बजे उठकर समुद्र तट की सफ़ाई में भाग लेते हैं।

नमस्ते! मैं ‘रिवर’ (नदी) हूँ और मेरी उम्र 12 वर्ष है। मेरा परिवार ‘सेव द सीज़’ (समुद्र बचाओ) अभियान चलाता है। कितना उबाऊ लगता है! मैं जानती हूँ! और हाँ, वास्तव में मेरा नाम ‘रिवर’ है। मेरी बड़ी बहन का नाम (मेरे अनुसार) और भी बुरा है। यह ‘ओशन’ (समुद्र) है। अजीब बात यह है कि उसे वास्तव में अपना नाम पसंद है। नहीं, वह अजीब नहीं है, वह लोगों को खुश करने वाली है। हाल ही में, समुद्र बचाने और ऐसी ही अन्य बातों को लेकर उस पर जुनून सवार हो गया है। मेरे माता-पिता बहुत उत्साहित हुए जब मेरी बहन ने उनसे कहा कि वह इस वर्ष उनके अभियान में मदद करेगी। उन्होंने तय किया कि वे आगामी शनिवार को अपने अभियान में उसका स्वागत करने के लिए समुद्र तट की सफ़ाई को एक उत्सव के रूप में मनाएँगे।

चलिए, सीधे ‘बी-डे’ यानी ‘बीच-डे’ (समुद्र तट पर जाने का दिन) पर आते हैं। शुरू से ही यह काम मेरे लिए रस्साकशी की तरह था। मैंने सुबह उठने से बिलकुल मना कर दिया और तब मेरे माता-पिता ने मेरी बहन, ओशन, पर मुझे मनाने की ज़िम्मेदारी छोड़ दी। मैं बस इतना कह सकती हूँ कि सुबह के 5 बजे थे और उसे यह उम्मीद करनी ही नहीं चाहिए थी कि वह मुझे इतनी सुबह उठाने में सफल हो पाएगी। उसके कहने पर अंततः जब मैं उठ गई, तब हमारे माता-पिता समुद्र तट पर काम करने से पहले हमें शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए वहाँ तक पैदल ही ले गए। क्या आप मेरी व्यथा समझ सकते हैं?

अब असली संघर्ष शुरू हुआ। जैसे ही हम समुद्र तट पर पहुँचे, मैंने अपने माता-पिता से कहा कि मैं दूर एक कोने में अकेले ही काम करूँगी। उन्होंने कोशिश की कि हम सभी साथ मिलकर काम करें, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि वे एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे यानी वे इस प्रयास में सफल नहीं हो पाएँगे और उन्होंने हार मान ली। एक बार जब मैं समुद्र तट के अपने कोने में पहुँच गई तो मैंने अपने आप से कहा, “बहुत बढ़िया! अब मैं समुद्र तट की सफ़ाई करने के बजाय पानी में मस्ती कर सकती हूँ।”

 

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जैसे ही मैंने ठंडे पानी में प्रवेश किया, मैंने एक अश्वमीन (seahorse) को प्लास्टिक की थैली में फँसा हुआ देखा। उस पल मुझे अपराधबोध की पीड़ा महसूस हुई। मैं उस बेचारे अश्वमीन को तकलीफ़ में नहीं छोड़ सकती थी और मुझे किसी तरह उसकी मदद करनी थी। इसलिए, मैं तैरकर थैली के नीचे गई, उसकी गाँठ खोली और अश्वमीन को आज़ाद कर दिया।

जैसे ही मैं वहाँ से जाने के लिए मुड़ी, मैंने एक कर्कश, ऊँची आवाज़ सुनी, “धन्यवाद, आपने मुझ पर दया की। आप जैसे लोगों की वजह से ही मुझे अभी भी मानवता पर थोड़ा भरोसा है।”

मैं डर गई और हकलाते हुए बोली, “तुम बोल सकते हो?”

अश्वमीन ने बड़ी निराशा से मेरी ओर देखा और आह भरते हुए बोला, “बेशक, मैं बात कर सकता हूँ। मुझे हमेशा से पता था कि मनुष्य अज्ञानी जीव हैं।”

मैं ठीक से समझ नहीं पा रही थी कि क्या हो क्या रहा था, फिर भी मैंने उससे पूछा, “कृपया रुकें। क्या समुद्र हमेशा से इतना प्रदूषित था?”
समुद्रों का प्रदूषण पूरी दुनिया में स्पष्ट रूप से 1400 के दशक के अंत में दिखाई देने लगा। हालाँकि कई लोगों ने कभी-कभी प्रदूषण को लेकर विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन इसे केवल 1960 और 1970 के दशक के आसपास एक वास्तविक खतरे के रूप में माना गया।” “क्या पूरी दुनिया में ऐसा ही है?”
हाँ, जैसे अपवाह (runoff) और व्हेल शिकार एशिया के जल प्रदूषण के खतरे हैं, वैसे ही भयानक तेल रिसाव ज़्यादातर मध्य पूर्वी देशों और अमेरिका के हैं। जहाँ तक अत्यधिक मछली पकड़ने, कूड़ा फेंकने और कचरा फेंकने की बात है, तो इसके लिए आप सभी दोषी हैं।”

ओह! मैं सभी की ओर से ईमानदारी से माफ़ी माँगती हूँ। हम इसमें मदद के लिए क्या कर सकते हैं?”
समुद्र सभी पारिस्थितिकी तंत्रों का जन्मस्थान है क्योंकि जीवन की उत्पत्ति यहीं पर हुई थी। इसलिए, उन्हें बचाकर हम मूल रूप से अपने आप को ही बचा रहे हैं। अच्छी बात यह है कि बहुत से लोग यह समझने लगे हैं कि समुद्रों को बचाने की ज़रूरत है। तो, यदि हम सब मिलकर अपने समुद्रों को बचाने का प्रयास करें तो भविष्य के लिए अभी भी उम्मीद हो सकती है।

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रिवर, बिस्तर से उठो! हमें देर हो जाएगी!”
रुको, क्या कहा? क्या हम अभी-अभी समुद्र तट की सफ़ाई करके नहीं आए हैं?” मैंने असमंजस में पूछा।
क्या कह रही हो? रिवर, अगर तुम तुरंत नहीं उठी तो हमें बहुत देर हो जाएगी!”
मैं झट से यह कहते हुए - “ठीक है, ठीक है, मैं उठ गई हूँ” - बिस्तर से उठी और तैयार होने लगी।

आह, तो क्या यह सब एक सपना था?

रिवर, यह तुम्हारा सबसे ऊर्जावान रूप है जो मैं अब देख रहीं हूँ,” मेरी बहन, सेनापति ओशन, ने मज़ाक करते हुए कहा। आज कोई संघर्ष नहीं था।

जब मैं अपने सपने के बारे में सोच रही थी तब मेरे मन में यह विचार आया–

 

शानदार, चमकता हुआ समुद्र,

ज्ञान और सुंदरता में असीम,

अपनी प्रचुरता और विविधता के माध्यम से,

कभी देना बंद नहीं करता।

हमें वह सब देता है जो उसके पास है,

तो, बताओ, हम कब उसे वापस देंगे?

हे माँ समुद्र, मैं आपको नमन करती हूँ,

कृतज्ञता, विनम्रता और क्षमायाचना के साथ।

 

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सुलोचना संतोष

सुलोचना संतोष

सुलोचना भारत के चेन्नई शहर से है। वह हार्टफुलनेस इंटरनेशनल स्कूल, ... और पढ़ें

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