Photo reference: जोश और तारा, एलोरा की गुफाएँ, भारत
Photo reference: बैंकॉक, थाईलैंड
जोश बुलरिस एक फ़ोटोग्राफ़र हैं जो फ़ोटोग्राफ़ी के लिए यात्राएँ करते हैं। बुद्ध प्रोजेक्ट के लिए थाईलैंड जाने से पहले उन्हें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें अपनी यात्राओं के लिए अपना जीवनसाथी मिल जाएगा। यह जोश और तारा की कहानी है जिसके तार फ़ोटोग्राफ़ी और बुद्ध से जुड़े हुए हैं।
वर्ष 2014 में मेरी माँ के निधन के बाद मैंने बुद्ध प्रोजेक्ट नामक एक केंद्रित फ़ोटोग्राफ़ी परियोजना शुरू करने का फ़ैसला किया। इसका उद्देश्य दुनिया की कुछ सबसे दिलचस्प एवं अनोखी मूर्तियों व मंदिरों की खोज करना और उनके सार को तस्वीरों में कैद करना था। मुझे एशिया में यात्रा करने में और शांति उत्पन्न करने वाले विषयों की तस्वीरें खींचने में गहरी रुचि है। इस कारण इस परियोजना का विशेष महत्व था। मेरी माँ ने हमेशा मुझ पर विश्वास किया और मुझे अपने सपने पूरे करने के लिए प्रोत्साहित किया। वे होतीं तो उन तस्वीरों को देखकर बहुत प्रसन्न होतीं।
इस योजना को थाईलैंड से शुरू करने का इरादा था जो दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है। मैंने वहाँ बहुत समय बिताया था। इसलिए मुझे पता था कि यहीं से शुरुआत करना सही रहेगा। इस देश में बहुत सारे विस्मयकारी मंदिर और प्राचीन मूर्तियाँ हैं जो फ़ोटोग्राफ़ी के लिए बहुत बढ़िया अवसर प्रदान करते हैं। एक स्थानीय गाइड कितना आवश्यक होगा, इस तथ्य को जानते हुए, मैंने एक चैट साइट के माध्यम से स्थानीय समुदाय से सहायता माँगी। मुझे खुशी हुई कि पहला ही व्यक्ति जिससे मैंने संपर्क किया, वही कुछ दिनों के लिए बैंकॉक घूमने में मेरी मदद करने के लिए सहमत हो गया। जैसे-जैसे हमारी बातचीत बढ़ती गई, हमारी भ्रमण योजनाएँ उतनी ही बढ़ती गईं। आखिरकार, हमने मध्य थाईलैंड में तीन सप्ताह की यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया।




(जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, दुनिया की सबसे अनूठी और दिलचस्प बुद्ध प्रतिमाओं की हमारी अविचल खोज जारी है। यह उस पथ का प्रमाण है जिसने हमें मिलाया और जो भविष्य के लिए एक पथ प्रशस्त करने वाला प्रकाश है।)
बैंकॉक पहुँचने पर मुझे तारारत से मिलने की आशा थी। प्रारंभ में हमने शहर को जानने में कुछ दिन बिताए और फिर इस प्राचीन बौद्ध देश में फैले छोटे शहरों और गाँवों में गए। एकसाथ यात्रा करते हुए हमने जो आनंद अनुभव किया वह अद्वितीय था। इससे हमने निर्णय लिया कि म्यांमार से लौटने के बाद हम उत्तर-पूर्वी थाईलैंड जाएँगे। वहाँ देखने और जानने के लिए अनगिनत जगहें थीं और प्रत्येक नए गंतव्य ने आगे बढ़ने की हमारी इच्छा को और अधिक प्रबल कर दिया। हम उत्तर-पूर्वी थाईलैंड गए और उसके बाद अगले कुछ वर्षों में हमारी यात्रा का विस्तार लाओस, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, नेपाल और भारत तक हो गया। इस परियोजना को रोकने का हमारा कोई इरादा नहीं है क्योंकि खोजने और जानने के लिए अभी भी बहुत बाकी है।
3 मई 2019 को तारा और मैंने बैंकॉक में एक मनोहर पल में विवाह कर लिया जिससे हमारी वैवाहिक जीवन की खूबसूरत यात्रा शुरू हो गई।
दिसंबर 2019 में हमने मध्य थाईलैंड के सात प्रांतों में अपने पहले सफल दौरे का नेतृत्व किया और हमने लोगों को अपने पसंदीदा बौद्ध स्थलों की लुभावनी सुंदरता दिखाई। इस अनुभव से हम और भी यात्राओं का नेतृत्व करने के लिए उत्सुक और आशावान हो गए।
जैसे ही वर्ष 2020 का आरंभ हुआ, हम एक थेरवाद बौद्ध भिक्षु के साथ भारत के कुछ भीतरी स्थानों तक जाने के लिए तीन सप्ताह की गहन यात्रा पर निकल पड़े। यह अभियान हमारे जीवन के सबसे परिवर्तनकारी अनुभवों में से एक था। हमने प्राचीन बौद्ध स्थलों को देखा जिनका अत्यधिक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। हमें सारनाथ के धमेख स्तूप जाने का सौभाग्य मिला जहाँ बुद्ध ने अपने पहले प्रवचन द्वारा अपनी शिक्षा दी थी।

फिर हम कौशांबी गए जहाँ बुद्ध ने ज्ञानोदय के बाद बारिश के मौसम में अपना छठा व नवाँ वर्ष बिताया था। गहन ज्ञान और ज्ञानोदय के पदचिन्हों पर चलना एक विस्मयकारी अनुभव था।
अपनी यात्रा के दौरान हमें ऐसे अवशेष और बहुमूल्य कलाकृतियाँ देखने को मिलीं जिनका बहुत ही गहरा आध्यात्मिक महत्व था। हम कुछ बुद्ध की प्राचीनतम प्रतिमाओं को देखकर आश्चर्यचकित रह गए। ये पहली शताब्दी की हैं और अभी भी मौजूद हैं। ये भव्य मूर्तियाँ सदियों की भक्ति की गवाही देती हैं और बुद्ध की शिक्षाओं के कालातीत प्रभाव को दर्शाती हैं।
भारत की हमारी यात्रा एक जीवन परिवर्तित करने वाला अनुभव था। यह हमारे लिए बौद्ध धर्म के मूल से जुड़ने और बुद्ध द्वारा सदियों पहले प्रशस्त किए गए मार्ग के बारे में अपनी समझ को गहरा करने का अवसर था।
थाईलैंड लौटने के बाद दुनिया कोविड महामारी के कारण पूरी तरह बंद होने के कगार पर थी। जैसे ही स्थिति सामने आई, मैंने मार्च 2020 में अमेरिका लौटने का कठिन निर्णय लिया जहाँ मैंने तारा की यात्रा के लिए आवश्यक कागज़ी कार्रवाही शुरू की ताकि वह मेरे पास आ सके। तारा 16 जुलाई, 2021 को रोचेस्टर, न्यू यॉर्क पहुँची जिससे हमारे एकसाथ रहने के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई।
पिछले दो वर्षों में बुद्ध परियोजना के तहत हम अमेरिका के कई संग्रहालयों में गए और हमें कई स्थलों की सुंदरता को जानने का सौभाग्य मिला। इस दौरान हमें ऐसी अद्भुत चीज़ें पता लगीं जिन्हें हमने अन्यथा कभी नहीं देखा होता। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, दुनिया की सबसे अनूठी और दिलचस्प बुद्ध प्रतिमाओं की हमारी अविचल खोज जारी है। यह उस पथ का प्रमाण है जिसने हमें मिलाया और जो भविष्य के लिए एक पथ प्रशस्त करने वाला प्रकाश है।

Photo reference: पोलुनावारा, श्रीलंका
Photo reference: वाट फ़ू, चंपासाक, लाओस
Photo reference: मार्बल माउंटेन दा नांग, वियतनाम
Photo reference: अयुत्या, थाईलैंड
Photo reference: एलोरा की गुफाएँ, औरंगाबाद, भारत
Photo reference: इनले झील, म्यांमार
फ़ोटोग्राफ़ी - जोश बुलरिस

जोश बुलरिस
जोश पेशेवर फ़ोटोग्राफ़र हैं जिन्होंंने फ़ोटोोग्राफ़ी की शिक्षा स्वयंं प्राप्त की थी। वे बुद्ध की मूर्तियों के मनोरम चित्रोंं के लिए जााने जााते हैं। उनके चित्रोंं ने कई किताबोंं और पत्रिकाओं के मुखपृष्ठ की शोभा बढ़ाई है। उनकी फ़ोटोग्राफ़ी कल... और पढ़ें
