पूर्णिमा रामकृष्णन ने जठरांत्ररोगविज्ञानी (gastroenterologist) और जन स्वास्थ्य के समर्थक डॉ. पलानियाप्पन मणिकम, जिन्हें आमतौर पर डॉ. पाल के नाम से जाना जाता है, से प्रसन्नता और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बातचीत की।
प्र.- आँतों का स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? और क्या ध्यान जैसे अभ्यास सक्रिय रूप से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं?
आँतों को अक्सर दूसरा मस्तिष्क कहा जाता है क्योंकि इसमें 50 करोड़ से ज़्यादा न्यूरॉन्स यानी तंत्रिकाएँ होती हैं जो वेगस तंत्रिका के माध्यम से लगातार मस्तिष्क के संपर्क में रहती हैं। जब आँत में सूजन होती है या वहाँ के सूक्ष्म जीवों में गड़बड़ी होती है तो यह मनोभाव व एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है और यहाँ तक कि चिंता या अवसाद का कारण भी बन सकता है। दूसरी ओर, जब आप हार्टफुलनेस जैसे ध्यान का अभ्यास करते हैं तब कोर्टिसोल जैसे तनाव वाले हार्मोन कम हो जाते हैं। यह सीधे आपकी आँतों को शांत करता है और स्वस्थ बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है। इसलिए हाँ, एक शांत मन वास्तव में आँतों के स्वास्थ्य में सहायक होता है।
प्र.- इंटरमिटेंट उपवास (नियमित अंतराल पर उपवास करना) और समय-प्रतिबंधित भोजन करना आजकल बहुत लोकप्रिय है। जठरांत्र विज्ञान (gastroenterology) के नज़रिए से इन अभ्यासों के क्या फ़ायदे हैं और क्या इनके बारे में कोई गलतफ़हमियाँ हैं?
मैं इंटरमिटेंट उपवास का बहुत बड़ा समर्थक हूँ और खुद भी इसका अभ्यास करता हूँ। यह कारगर है क्योंकि यह आँतों को आराम और मरम्मत करने का समय देता है। इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है, सूजन कम होती है और अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि होती है। लेकिन एक बड़ी गलतफ़हमी यह है कि उपवास आपके शरीर को ‘विषमुक्त’ (Detox) करता है। यह सच नहीं है। आपका यकृत (liver) और गुर्दे (kidneys) पहले से ही रोज़ाना यह काम कर रहे हैं। उपवास बस एक साधन है, सब रोगों का उपचार नहीं। यह संतुलित आहार के साथ मिलकर सबसे अच्छा काम करता है - जल्दी परिणाम पाने के तरीके के रूप में नहीं।
प्र.- आयुर्वेद और योग ने लंबे समय से पाचन को समग्र स्वास्थ्य की कुंजी माना है। आधुनिक जठरांत्र विज्ञान इस अवधारणा को कैसे देखता है?
आयुर्वेद और योग ने हमेशा पाचन को स्वास्थ्य का केंद्र माना है। आधुनिक जठरांत्र विज्ञान इस बात से सहमत है कि पाचन का संबंध हृदय, मस्तिष्क और यहाँ तक कि प्रतिरक्षा-तंत्र से है। शोध इन सदियों पुराने विचारों को वैज्ञानिक आँकड़ों के साथ प्रमाणित कर रहे हैं।
प्र.- आँतों के सूक्ष्मजीवों (gut microbiome) पर शोध के बढ़ने के साथ व्यक्तिगत पोषण पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। क्या आपको लगता है कि भविष्य में लोगों के आँत में मौजूद सूक्ष्मजीवों के आधार पर उन्हें आँत स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाएगी?
भविष्य में जठरांत्र विज्ञान हर व्यक्ति के अनुरूप ही उसका उपचार करेगा। सूक्ष्मजीवों पर हुए शोध से हम सीख रहे हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की एक विशिष्ट जीवाणु पहचान होती है। जल्द ही सामान्य आहार सलाह के बजाय हमारे पास आपके सूक्ष्मजीवों, आनुवंशिकी और जीवनशैली के आधार पर अनुकूलित पोषण योजनाएँ होंगी। यह कोई विज्ञान की कल्पित कथा नहीं है। इस पर शोध किया जा रहा है। अभी आँतों के सूक्ष्मजीवों पर आधारित व्यक्तिगत पोषण उतना सटीक नहीं है लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि आँतों का स्वास्थ्य आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार है। इसलिए भविष्य वास्तव में आँतों की व्यक्तिगत देखभाल की ओर बढ़ रहा है।
प्र.- आप अपनी सोशल मीडिया उपस्थिति में हास्य को शिक्षा के साथ मिलाते हैं। आपके विचार से हँसी, आनंद और सकारात्मक सोच आँतों के स्वास्थ्य में कैसे योगदान करती है?
जब आप हँसते हैं तब आपके तनाव वाले हार्मोन कम हो जाते हैं और रक्त संचार बेहतर हो जाता है तथा आपकी आँतों की माँसपेशियों को आराम मिलता है। सकारात्मक मनोदशा वास्तव में पाचन और दर्द को सहने की क्षमता में भी सुधार करती है। हँसी दवा है - इसीलिए मैं ऑनलाइन शिक्षा के साथ हास्य को जोड़ता हूँ। एक आनंदमय मनोभाव न केवल जीवन को बेहतर बनाता है बल्कि यह वास्तव में आपकी आँत को भी स्वस्थ बनाता है।
प्र.- धन्यवाद, डॉ. पाल!
पूर्णिमा रामकृष्णन ने जठरांत्ररोगविज्ञानी (gastroenterologist) और जन स्वास्थ्य के समर्थक डॉ. पलानियाप्पन मणिकम, जिन्हें आमतौर पर डॉ. पाल के नाम से जाना जाता है, से प्रसन्नता और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बातचीत की।
प्र.- आँतों का स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? और क्या ध्यान जैसे अभ्यास सक्रिय रूप से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं?
आँतों को अक्सर दूसरा मस्तिष्क कहा जाता है क्योंकि इसमें 50 करोड़ से ज़्यादा न्यूरॉन्स यानी तंत्रिकाएँ होती हैं जो वेगस तंत्रिका के माध्यम से लगातार मस्तिष्क के संपर्क में रहती हैं। जब आँत में सूजन होती है या वहाँ के सूक्ष्म जीवों में गड़बड़ी होती है तो यह मनोभाव व एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है और यहाँ तक कि चिंता या अवसाद का कारण भी बन सकता है। दूसरी ओर, जब आप हार्टफुलनेस जैसे ध्यान का अभ्यास करते हैं तब कोर्टिसोल जैसे तनाव वाले हार्मोन कम हो जाते हैं। यह सीधे आपकी आँतों को शांत करता है और स्वस्थ बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है। इसलिए हाँ, एक शांत मन वास्तव में आँतों के स्वास्थ्य में सहायक होता है।
प्र.- इंटरमिटेंट उपवास (नियमित अंतराल पर उपवास करना) और समय-प्रतिबंधित भोजन करना आजकल बहुत लोकप्रिय है। जठरांत्र विज्ञान (gastroenterology) के नज़रिए से इन अभ्यासों के क्या फ़ायदे हैं और क्या इनके बारे में कोई गलतफ़हमियाँ हैं?
मैं इंटरमिटेंट उपवास का बहुत बड़ा समर्थक हूँ और खुद भी इसका अभ्यास करता हूँ। यह कारगर है क्योंकि यह आँतों को आराम और मरम्मत करने का समय देता है। इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है, सूजन कम होती है और अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि होती है। लेकिन एक बड़ी गलतफ़हमी यह है कि उपवास आपके शरीर को ‘विषमुक्त’ (Detox) करता है। यह सच नहीं है। आपका यकृत (liver) और गुर्दे (kidneys) पहले से ही रोज़ाना यह काम कर रहे हैं। उपवास बस एक साधन है, सब रोगों का उपचार नहीं। यह संतुलित आहार के साथ मिलकर सबसे अच्छा काम करता है - जल्दी परिणाम पाने के तरीके के रूप में नहीं।
प्र.- आयुर्वेद और योग ने लंबे समय से पाचन को समग्र स्वास्थ्य की कुंजी माना है। आधुनिक जठरांत्र विज्ञान इस अवधारणा को कैसे देखता है?
आयुर्वेद और योग ने हमेशा पाचन को स्वास्थ्य का केंद्र माना है। आधुनिक जठरांत्र विज्ञान इस बात से सहमत है कि पाचन का संबंध हृदय, मस्तिष्क और यहाँ तक कि प्रतिरक्षा-तंत्र से है। शोध इन सदियों पुराने विचारों को वैज्ञानिक आँकड़ों के साथ प्रमाणित कर रहे हैं।
प्र.- आँतों के सूक्ष्मजीवों (gut microbiome) पर शोध के बढ़ने के साथ व्यक्तिगत पोषण पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। क्या आपको लगता है कि भविष्य में लोगों के आँत में मौजूद सूक्ष्मजीवों के आधार पर उन्हें आँत स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाएगी?
भविष्य में जठरांत्र विज्ञान हर व्यक्ति के अनुरूप ही उसका उपचार करेगा। सूक्ष्मजीवों पर हुए शोध से हम सीख रहे हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की एक विशिष्ट जीवाणु पहचान होती है। जल्द ही सामान्य आहार सलाह के बजाय हमारे पास आपके सूक्ष्मजीवों, आनुवंशिकी और जीवनशैली के आधार पर अनुकूलित पोषण योजनाएँ होंगी। यह कोई विज्ञान की कल्पित कथा नहीं है। इस पर शोध किया जा रहा है। अभी आँतों के सूक्ष्मजीवों पर आधारित व्यक्तिगत पोषण उतना सटीक नहीं है लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि आँतों का स्वास्थ्य आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार है। इसलिए भविष्य वास्तव में आँतों की व्यक्तिगत देखभाल की ओर बढ़ रहा है।
प्र.- आप अपनी सोशल मीडिया उपस्थिति में हास्य को शिक्षा के साथ मिलाते हैं। आपके विचार से हँसी, आनंद और सकारात्मक सोच आँतों के स्वास्थ्य में कैसे योगदान करती है?
जब आप हँसते हैं तब आपके तनाव वाले हार्मोन कम हो जाते हैं और रक्त संचार बेहतर हो जाता है तथा आपकी आँतों की माँसपेशियों को आराम मिलता है। सकारात्मक मनोदशा वास्तव में पाचन और दर्द को सहने की क्षमता में भी सुधार करती है। हँसी दवा है - इसीलिए मैं ऑनलाइन शिक्षा के साथ हास्य को जोड़ता हूँ। एक आनंदमय मनोभाव न केवल जीवन को बेहतर बनाता है बल्कि यह वास्तव में आपकी आँत को भी स्वस्थ बनाता है।
प्र.- धन्यवाद, डॉ. पाल!
पूर्णिमा रामकृष्णन ने जठरांत्ररोगविज्ञानी (gastroenterologist) और जन स्वास्थ्य के समर्थक डॉ. पलानियाप्पन मणिकम, जिन्हें आमतौर पर डॉ. पाल के नाम से जाना जाता है, से प्रसन्नता और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बातचीत की।
प्र.- आँतों का स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है? और क्या ध्यान जैसे अभ्यास सक्रिय रूप से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं?
आँतों को अक्सर दूसरा मस्तिष्क कहा जाता है क्योंकि इसमें 50 करोड़ से ज़्यादा न्यूरॉन्स यानी तंत्रिकाएँ होती हैं जो वेगस तंत्रिका के माध्यम से लगातार मस्तिष्क के संपर्क में रहती हैं। जब आँत में सूजन होती है या वहाँ के सूक्ष्म जीवों में गड़बड़ी होती है तो यह मनोभाव व एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है और यहाँ तक कि चिंता या अवसाद का कारण भी बन सकता है। दूसरी ओर, जब आप हार्टफुलनेस जैसे ध्यान का अभ्यास करते हैं तब कोर्टिसोल जैसे तनाव वाले हार्मोन कम हो जाते हैं। यह सीधे आपकी आँतों को शांत करता है और स्वस्थ बैक्टीरिया को पनपने में मदद करता है। इसलिए हाँ, एक शांत मन वास्तव में आँतों के स्वास्थ्य में सहायक होता है।
प्र.- इंटरमिटेंट उपवास (नियमित अंतराल पर उपवास करना) और समय-प्रतिबंधित भोजन करना आजकल बहुत लोकप्रिय है। जठरांत्र विज्ञान (gastroenterology) के नज़रिए से इन अभ्यासों के क्या फ़ायदे हैं और क्या इनके बारे में कोई गलतफ़हमियाँ हैं?
मैं इंटरमिटेंट उपवास का बहुत बड़ा समर्थक हूँ और खुद भी इसका अभ्यास करता हूँ। यह कारगर है क्योंकि यह आँतों को आराम और मरम्मत करने का समय देता है। इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है, सूजन कम होती है और अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि होती है। लेकिन एक बड़ी गलतफ़हमी यह है कि उपवास आपके शरीर को ‘विषमुक्त’ (Detox) करता है। यह सच नहीं है। आपका यकृत (liver) और गुर्दे (kidneys) पहले से ही रोज़ाना यह काम कर रहे हैं। उपवास बस एक साधन है, सब रोगों का उपचार नहीं। यह संतुलित आहार के साथ मिलकर सबसे अच्छा काम करता है - जल्दी परिणाम पाने के तरीके के रूप में नहीं।
प्र.- आयुर्वेद और योग ने लंबे समय से पाचन को समग्र स्वास्थ्य की कुंजी माना है। आधुनिक जठरांत्र विज्ञान इस अवधारणा को कैसे देखता है?
आयुर्वेद और योग ने हमेशा पाचन को स्वास्थ्य का केंद्र माना है। आधुनिक जठरांत्र विज्ञान इस बात से सहमत है कि पाचन का संबंध हृदय, मस्तिष्क और यहाँ तक कि प्रतिरक्षा-तंत्र से है। शोध इन सदियों पुराने विचारों को वैज्ञानिक आँकड़ों के साथ प्रमाणित कर रहे हैं।
प्र.- आँतों के सूक्ष्मजीवों (gut microbiome) पर शोध के बढ़ने के साथ व्यक्तिगत पोषण पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। क्या आपको लगता है कि भविष्य में लोगों के आँत में मौजूद सूक्ष्मजीवों के आधार पर उन्हें आँत स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाएगी?
भविष्य में जठरांत्र विज्ञान हर व्यक्ति के अनुरूप ही उसका उपचार करेगा। सूक्ष्मजीवों पर हुए शोध से हम सीख रहे हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की एक विशिष्ट जीवाणु पहचान होती है। जल्द ही सामान्य आहार सलाह के बजाय हमारे पास आपके सूक्ष्मजीवों, आनुवंशिकी और जीवनशैली के आधार पर अनुकूलित पोषण योजनाएँ होंगी। यह कोई विज्ञान की कल्पित कथा नहीं है। इस पर शोध किया जा रहा है। अभी आँतों के सूक्ष्मजीवों पर आधारित व्यक्तिगत पोषण उतना सटीक नहीं है लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि आँतों का स्वास्थ्य आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार है। इसलिए भविष्य वास्तव में आँतों की व्यक्तिगत देखभाल की ओर बढ़ रहा है।
प्र.- आप अपनी सोशल मीडिया उपस्थिति में हास्य को शिक्षा के साथ मिलाते हैं। आपके विचार से हँसी, आनंद और सकारात्मक सोच आँतों के स्वास्थ्य में कैसे योगदान करती है?
जब आप हँसते हैं तब आपके तनाव वाले हार्मोन कम हो जाते हैं और रक्त संचार बेहतर हो जाता है तथा आपकी आँतों की माँसपेशियों को आराम मिलता है। सकारात्मक मनोदशा वास्तव में पाचन और दर्द को सहने की क्षमता में भी सुधार करती है। हँसी दवा है - इसीलिए मैं ऑनलाइन शिक्षा के साथ हास्य को जोड़ता हूँ। एक आनंदमय मनोभाव न केवल जीवन को बेहतर बनाता है बल्कि यह वास्तव में आपकी आँत को भी स्वस्थ बनाता है।
प्र.- धन्यवाद, डॉ. पाल!

एक आनंदमय मनोभाव न केवल जीवन को बेहतर बनाता है बल्कि यह वास्तव में आपकी आँत को भी स्वस्थ बनाता है।

डॉ. पाल मणिक्कम
भारतीय-अमेरिकी डॉ. पाल मणिक्कम एक बोर्ड-प्रमाणित जठरांत्ररोगीविज्ञानी (gastroenterologi... और पढ़ें
