हार्टफुलनेस पत्रिका में मई के कलाकार नीरज पटेल हैं। अनन्या पटेल की इस विशिष्ट प्रस्तुति द्वारा हम उनके दृष्टिकोण और व्यावसायिक जीवन के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

 

नीरज पटेल राजस्थान, भारत, के जोधपुर शहर में एक बहु-विषयक कलाकार हैं। चित्रकला की पृष्ठभूमि होने से वे अपने काम में कई साधनों और तकनीकों का उपयोग करते हैं, जिसमें ड्रॉइंग, संस्थापन (installation) और फ़ोटोग्राफ़ी शामिल हैं। वे वडोदरा और नई दिल्ली के बीच रहते हैं। उन्होंने भारत और विदेश में अपने काम को व्यापक रूप से प्रदर्शित किया है, जिसमें उनकी दो एकल प्रदर्शनियाँ भी हैं।

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उनके कार्यों में एक प्रमुख विषय है, संरचित रूपरेखा और स्वतंत्र प्रवाह वाली अमूर्तता के बीच की सीमाओं को जानना। राजस्थान में एक लघु चित्रकला कलाकार की शागिर्दी में अपने प्रारंभिक प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कला के सख्त नियमों और तकनीकों से खुद को सीमित महसूस किया। इसलिए उन्होंने कला की पारंपरिक विधि से मुक्त होने के तरीकों की तलाश की। शिव नादर विश्वविद्यालय में उनकी एम.एफ.ए. (ललित कला में स्नातकोत्तर) कक्षाओं में संरचना और विषय के अन्य रूप प्रस्तुत किए गए, जिनमें ग्राफ़िक रूपों को बनाने में वास्तुकला चित्रण और गणितीय सटीकता पर ज़ोर दिया गया। इन तकनीकों से प्रभावित होकर पटेल ने एक अनूठी कलात्मक प्रक्रिया बनाई, जिसमें वे अपनी अमूर्त कल्पनाओं को दिशा और आधार देने के लिए एक सटीक रूपरेखा का उपयोग करते हैं।

 

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उनके सभी चित्र ग्राफ़ पेपर पर शुरू होते हैं। इन्हें सोच-समझकर और मापकर बनाया जाता है हालाँकि वे अंततः यादृच्छिक और स्वतंत्र प्रवाह वाले दिखाई दे सकते हैं। वे बताते हैं कि ये ग्रिड संरचनात्मकता का भाव पैदा करते हैं जिससे उनके हाथ परतदार संरचनाओं के माध्यम से अमूर्त का पता लगा पाते हैं। वे कहते हैं, “हम जहाँ भी जाते हैं, हर जगह विषय और संरचनाएँ होती हैं जो हो सकता है कि हमें दिखाई न दें, लेकिन वे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का आधार बनाती हैं जो फिर हमारे चारों ओर बना रहता है।” यह सोच तकनीक के साथ उनके रिश्ते को दर्शाती है और यह भी बताती है कि वे अपनी कला में इसका किस तरह से इस्तेमाल करते हैं।

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डिजिटल वास्तविकता’ से प्रेरित होकर, पटेल डिजिटल और एनालॉग के बीच की सीमाओं के बारे में जानने का प्रयास करते हैं। वे डिजिटल प्रारूपों से प्रभावित हैं और कोडिंग भाषाओं एवं वास्तुकला-ड्रॉइंग से संकेत प्राप्त करते हैं। डिजिटल उपकरणों से जो सटीकता मिलती है, उसे प्राप्त करने के लिए वे जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे तकनीक कृतियों को उस तरह से बनाने में मदद कर सकती है, जिस तरह हाथ से बनाना संभव नहीं है। वे पारंपरिक सामग्रियों से अलग-अलग अंशों को बनाने के लिए लेज़र-कटिंग और प्रतिरूपण (modeling) जैसी तकनीकों का उपयोग करते हैं। इन अंशों पर हाथ से काम करके परतदार कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं। इन ‘औद्योगिक परिदृश्यों’ द्वारा वे दर्शाते हैं कि मशीनों का उपयोग केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसी कृति बनाने के लिए भी किया जा सकता है जो अद्वितीय, उच्च दर्जे की और उत्कृष्ट है।

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नई दिल्ली के नेचर मोर्टे में उनके एकल शो ने इन विचारधाराओं को संपुटित किया, विशेष रूप से धातु से बनीं दीवार की मूर्तियों में। इन मूर्तियों के बारे में उनका कहना है कि ये उनके चित्रों का विस्तार हैं, “जो किसी ढाँचे या किसी कठोर सीमा से बंधे नहीं हैं।” उन्होंने वडोदरा के स्पेस स्टूडियो में भी एक कार्यकाल पूरा किया है जिसे एक कलाकार के रूप में वे अपनी वैचारिक और तकनीकी दोनों तरह की बढ़ती क्षमता का श्रेय देते हैं।

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वडोदरा में उनका एक स्थायी स्टूडियो है। उन्हें शहर के ललित कला संकाय और उसके कलाकारों, डिज़ाइनरों, स्टूडियो और औद्योगिक निर्माताओं के नेटवर्क से निर्मित रचनात्मक समुदाय के साथ गहनता से जुड़े रहने में आनंद मिलता है। उन्हें अपने नए विचारों को साकार करने के लिए विभिन्न विषयों के साथ-साथ स्थानीय शिल्पकारों के साथ सहयोग करना अच्छा लगता है। पटेल अपनी कलात्मक क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए अपने अभ्यास का विस्तार करना चाहते हैं, जिसमें त्रि-आयामी कार्य, स्थल-विशिष्ट स्थापना और वीडियो एवं ध्वनि से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं।


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नीरज पटेल

नीरज एक कलाकार हैं जो पेंटिंग, ड्रॉइंग, और पढ़ें

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