अलैंडा ग्रीन चिड़चिड़ी बत्तखों, दैनिक परेशानियों और आध्यात्मिक अभ्यास के निरंतर सहयोग से सबक लेकर इस बात पर विचार करती हैं कि कैसे शांति अंदर से शुरू होती है।
गर्मियों के एक दिन नौका घाट पर नाव के आने का इंतज़ार करते हुए मैं गर्मी से बचने के लिए नाव के रैंप के नीचे छाया में आराम कर रही थी। बत्तखें भी यही कर रही थीं। कई बत्तखें रेत पर बैठ गईं और अपने सिर को पीठ पर घुमाकर सो गईं। एक चिड़चिड़ी बत्तख फुफकारते और चोंच मारते हुए उनके बीच में घुस गई। एक-एक करके सो रही बत्तखें उठीं और चिड़चिड़ी बत्तख से कुछ कदम दूर जाकर शांत होकर जल्दी ही फिर से सो गईं। चिड़चिड़ी बत्तख बार-बार उनके आराम में खलल डालती रही जिससे उन्हें हिलने के लिए मजबूर होना पड़ा। बार-बार बत्तखें उठीं, दूसरे स्थान पर गईं और फिर से सो गईं। अंत में, चिड़चिड़ी बत्तख ने हार मान ली और वह भी सो गई।
इससे मेरे मन में अज्ञात लेखक द्वारा लिखी एक परिचित उक्ति उभर आई - शांति संघर्ष की अनुपस्थिति से नहीं बल्कि इससे उबरने की क्षमता से आती है। वे बत्तखें इस ज्ञान को समझती थीं।
विश्वभर में हिंसा और युद्ध, अभाव और तबाही से शांति भंग हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में इस शांति को कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
अपने शिक्षण के दिनों में हम अक्सर ‘वर्ल्ड विदाउट वॉर’ नामक एक गीत गाते थे। प्रत्येक पद के अंत में यह वाक्य था - ऐसी उम्मीद हो सकती है कि हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जिसमें कोई युद्ध न हो। इस गीत ने व्यक्त किया कि यदि ऐसे विचारों, शब्दों और कार्यों का चुनाव किया जाए जो क्रोध हिंसा या आक्रोश को भड़काते नहीं हैं तो एक शांतिपूर्ण दुनिया की आशा की जा सकती है। एक छात्र ने गीत के बोल का विरोध किया। उसने कहा, “दुनिया में युद्ध से छुटकारा पाने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते।”
मैंने कहा, “आप अपनी दुनिया में इससे छुटकारा पा सकते हैं।” बत्तखों का झुंड अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने चिड़चिड़ी बत्तख पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
मैं हमेशा बत्तखों की तरह उत्तेजक, अन्यायपूर्ण, अनुचित या कठोर लगने वाली परिस्थितियों में विवेकशील नहीं रह पाती हूँ। कभी-कभी संतुलन हासिल करने में बहुत समय लग जाता है। लेकिन यह जानना कि शांति संभव है, यह जानना कि मेरे पास अपने आप को पुनः संतुलित करने के साधन हैं, मुझे विकल्प देता है।
फिर भी, मैं कभी-कभी विरोध करती हूँ। चिड़चिड़ा होने में या खुद को सही समझने में या यह महसूस करने में कि एक कठोर जवाब देना ही एकमात्र सही रास्ता था, एक अजीब तरह की संतुष्टि होती है।
हमारे समय के महान शांतिदूतों - गाँधी, डैग हैमरशोल्ड, जेम्स ओ'डीया, चीनी सैनिकों के आक्रमण व हिंसा का सामना कर रहे हज़ारों तिब्बती - ने प्रदर्शित किया है कि शांति पहले अपने अंदर प्राप्त की जाती है। यदि भीतर शांति है तो हम बाहर भी हिंसा और असामंजस्य के बजाय शांति स्थापित कर सकते हैं।
विश्वभर की आध्यात्मिक परंपराएँ आंतरिक शांति पाने के तरीके तथा ऐसे साधन व अभ्यास प्रदान करती हैं जो हमें उस आंतरिक अवस्था का ज्ञान और अनुभव प्राप्त करने में मदद करते हैं। उनमें ध्यान, प्राणायाम, चिंतन, शारीरिक मुद्राएँ और पवित्र मंत्रों का जाप शामिल है।
शांति प्राप्त करना एक आंतरिक कार्य है और इसे हमेशा अपने अंदर अनुभव किया जा सकता है। हमारे वर्तमान संसार में हिंसा सब ओर फैली हुई है। ऐसे में जब हम अपने भीतर शांति का अनुभव करते हैं तब यह आशा जगती है कि यह आंतरिक शांति एक बीज की तरह अन्य स्थानों पर शांति को जन्म दे सकती है। अंदर शांति बनाए रखने से यह बाहर भी दिखाई देती है।
जैसे अंत में चिड़चिड़ी बत्तख हार मानकर अन्य बत्तखों के साथ सोने चली गई।
शांति प्राप्त करना एक आंतरिक कार्य है और इसे हमेशा अपने अंदर अनुभव किया जा सकता है। हमारे वर्तमान संसार में हिंसा सब ओर फैली हुई है। ऐसे में जब हम अपने भीतर शांति का अनुभव करते हैं तब यह आशा जगती है कि यह आंतरिक शांति एक बीज की तरह अन्य स्थानों पर शांति को जन्म दे सकती है। अंदर शांति बनाए रखने से यह बाहर भी दिखाई देती है।

