आइएहम विश्व भर के कुछ हार्टफुलनेस अभ्यासियों से प्राणाहुति के अनुभव और उनमें आए रूपांतरण के बारे में जानें।

 

नेगिन खोरासानी,

टोरंटो, ओंटारियो, कैनेडा

जब मैंने हार्टफुलनेस के एक प्रशिक्षक के साथ हुए अपने पहले ध्यान सत्र के दौरान प्राणाहुति प्राप्त की तो ऐसा लगा जैसे तरल रूप में प्रेम मेरे हृदय में उतरकर भीतर जमी हुई बर्फ़ को पिघला रहा है। वह एक प्रेम भरा आलिंगन, एक मौन आश्वासन था कि मुझे पूरी तरह समझा व स्वीकारा जा रहा है और मुझे बिना किसी अपेक्षा के प्रेम प्राप्त हो रहा है।

मैं ऐसी व्यक्ति थी जो हमेशा असहज महसूस करती थी, जिसकी पसंद और जीने का तरीका सबसे अलग था। लेकिन उस एक पल ने मेरे अकेलेपन के एहसास को खत्म कर दिया। ऐसा लगा जैसे मेरे दिल को उसका असली घर मिल गया हो। जैसे-जैसे मेरा अभ्यास गहरा होता गया, मेरा लोगों, अन्य जीवों और आसपास की दुनिया के साथ जुड़ाव भी गहरा होता गया। सड़क पर चलते लोग मुझे अब अजनबी नहीं लगते थे बल्कि हर एक के साथ एक अनकही आत्मीयता महसूस होती थी।

समय के साथ प्रेम मेरी स्वाभाविक अवस्था बन गया - सहज और असीमित - जिसने अलगाव के सभी अवरोधों को दूर कर दिया और मैं दूरस्थ जगहों पर भी घर जैसा महसूस करने लगी।

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नतालिया एन. लाज़ो,

लैंगली, ब्रिटिश कोलंबिया, कैनेडा

मैंने वर्ष 2016 में आध्यात्मिक मार्ग की खोज शुरू की और विभिन्न ध्यान अभ्यासों को आज़माया। हालाँकि मुझे कई महत्वपूर्ण तकनीकें मिलीं लेकिन मैंने हमेशा सही तरीके से ध्यान करने के लिए संघर्ष किया। यह तब बदला जब मैंने हार्टफुलनेस के प्रशिक्षक के साथ अपना पहला ध्यान का सत्र किया - जहाँ पहली बार मैंने एक गहरी व अवर्णनीय ध्यानमयी अवस्था का अनुभव किया। और यह पहली ही सिटिंग के दौरान हुआ।

मैंने साधारण और गहन, दोनों तरह की छापों और बोझ को वहन किया है। हालाँकि हर इंसान को संघर्षों का सामना करना पड़ता है लेकिन मुझे अपनी जीवन यात्रा में बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हार्टफुलनेस ध्यान के माध्यम से मैंने महसूस किया है कि प्राणाहुति ने इन छापों को बड़ी सहजता से बाहर निकालने में मदद की है। (ऐसा नहीं है कि यह आसान रहा है लेकिन 31 वर्षों में पहली बार मैंने वास्तविक आंतरिक प्रगति देखी है।)

कई बार ऐसा भी हुआ है कि मैं अपने दिल में एक दबी सी इच्छा या विचार लेकर सिटिंग लेने गई और ध्यान के अनुभव में एक स्पष्ट व प्रेमपूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। मुझे याद है कि मेरे किसी शुरुआती भंडारे में एक वीडियो में दाजी सीधे उसी बात से संबंधित वार्ता दे रहे थे जिसके बारे में मेरा दिल जानना चाहता था। यह एक सौम्य लेकिन प्रभावशाली तकाज़ा था।

इन अनुभवों से मुझे यह स्पष्ट हो गया कि प्राणाहुति न केवल असली है बल्कि यह बहुत व्यक्तिगत भी है जो ठीक वहीं पहुँचती है जहाँ इसकी आवश्यकता होती है।

मैं जानती हूँ कि यह अविश्वसनीय लग सकता है लेकिन यह इतना वास्तविक व प्रत्यक्ष रहा है कि प्राणाहुति के उपहार व प्रभाव और इसके द्वारा होने वाले रूपांतरण के बारे में मेरे मन में कोई संदेह नहीं है।

 

मौन शक्ति

 

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अल्मा टरेली,

कक्विटलैम, ब्रिटिश कोलंबिया, कैनेडा

हृदय ईश्वर का कार्य क्षेत्र है।” 

—लालाजी

मैं पिछले आठ वर्षों से अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान योग का गहन अध्ययन तथा विभिन्न तरह के ध्यान और अन्य आध्यात्मिक साधनों का अभ्यास करती रही हूँ।

इसलिए जब मैं पहली बार एक प्रशिक्षक के साथ हार्टफुलनेस ध्यान करने बैठी तो आप कल्पना कर सकते हैं कि मेरा आध्यात्मिक अहंकार कितना बड़ा था। मैंने चमत्कारासन या काकासन जैसे कोई आसन नहीं किए बल्कि मैं पद्मासन में ऐसे बैठ गई मानो उनके सामने कुछ शानदार कर रही हूँ। आध्यात्मिक अहंकार वास्तव में होता है। मैंने यह जताने की कोशिश की कि मैं बहुत उन्नत अवस्था में हूँ। मैंने उन्हें अपने वर्षों के ध्यान और विभिन्न क्रियाओं के अभ्यास के बारे में बताया।

वे बस हल्के से लेकिन दृढ़ता के साथ मुस्कुराईं और मुझे शिथिलीकरण करने के लिए आमंत्रित करते हुए सत्र शुरू किया। इसके बाद जो हुआ उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, “अपने हृदय में पहले से ही मौजूद दिव्य प्रकाश को महसूस करो।”

यह उन सभी मानसिक कल्पनाओं और सभी आकर्षक रंगों से बिलकुल अलग था जिनका मैं वर्षों से अपने मानसिक कल्पना के अभ्यास में कर रही थी।

अपने हृदय में पहले से ही मौजूद दिव्य प्रकाश को महसूस करो।” कैसे?

मैंने देखा कि मेरा मन कुछ समय तक उस परिदृश्य को बनाने की बहुत कोशिश कर रहा था। उसमें कोई मज़ा नहीं आ रहा था। लेकिन कुछ मिनटों के बाद मुझे अत्यंत गहरी शांति का एहसास हुआ। फिर खामोशी थी, पूर्ण खामोशी। मैं दीवार पर टंगी उनकी घड़ी की टिक-टिक सुन सकती थी। यह आवाज़ बहुत प्रबल थी। फिर बस शांति का एहसास था। और फिर उन्होंने कहा, “बस कीजिए।”

प्राणाहुति मुझे अंदर की ओर एक ऐसी गहराई में ले गई जो मेरे लिए अनजानी थी। मैं अपनी आँखें नहीं खोल पा रही थी और यह पहली बार था जब दिल ने मेरे शरीर पर पूरा नियंत्रण कर लिया था। मैं हैरान रह गई। मेरे मन में कई सवाल भी थे। सवालों के जवाब देने के बजाय उन्होंने मुझे मालिक की बैंगनी किताब, स्पिरिचुअल एनाटॉमी थमा दी।

पहली रात मैं कुछ देर रोती रही। मुझे नहीं पता कि मेरा दिल साफ़ हो रहा था या मैं उन बीते वर्षों के लिए रो रही थी जब मैं ध्यान करने की ‘कोशिश’ कर रही थी। ध्यान करने की कोशिश करना खुद से, अपने दुखों से बचने का एक तरीका था।

हार्टफुलनेस ध्यान पूरी तरह से अलग है। यह स्वयं से भागने के लिए कुछ करना नहीं है। यह कुछ अधिक करना या पाना भी नहीं है। बस जैसे हैं, वैसे ही रहें और “अपने दिल में पहले से मौजूद दिव्य प्रकाश को महसूस करें।”

ये अभ्यास सरल हैं - आराम की अवस्था में बैठें, प्राणाहुति प्राप्त करें और मन की सफ़ाई करें। लेकिन इनका प्रभाव बहुत गहरा है। प्राणाहुति एक ऐसी शांति पैदा करती है जो गहराई से पोषण करती है और सफ़ाई की प्रक्रिया उस भावनात्मक बोझ को दूर करती है जिसके बारे में मुझे पता भी नहीं था कि मैं उसे ढो रही थी। यह यात्रा मेरे जीवन में एक स्वाभाविक लय बन गई है - जिसे मैं पूरे दिल से अपनाती हूँ। यदि आप शांति, आनंद और सच्चे गहन आंतरिक जुड़ाव की तलाश कर रहे हैं तो हार्टफुलनेस ही सच्चा रास्ता है।

मेरी आध्यात्मिक जाग्रति अभी पूरी तरह नहीं हुई है लेकिन मेरा दिल रास्ता जानता है।

जब हम दिल से जीने लगते हैं तब जीवन ध्यान बन जाता है।”
दाजी

 

 

आनंदपूर्ण जागृति

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एलिज़ाबेथ डेनली,

ग्लेनलियोन, विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया

 

पहली बार जब मैंने प्राणाहुति के साथ ध्यान का अनुभव किया तब मेरी दुनिया ही उलट-पलट हो गई। ऐसा लगा जैसे मेरा दिल आनंदित हो रहा हो और हर चीज़ प्रेम से भर गई हो। आत्मा की मौजूदगी का एहसास हुआ और ध्यान के बाद भी तृप्ति नहीं हुई । ‘प्रत्याहार’ इतनी सहजता से हुआ कि मैं हृदय में जाकर उसमें इस तरह डूब गई थी जैसे कोई स्पंज अनुभव को अवशोषित कर रहा हो। फिर कुछ भी कभी पहले जैसा नहीं रहा। चेतना का विस्तार होने लगा और संवेदनशीलता के प्रति जागरूकता बढ़ने लगी। चेतना इलास्टिक की तरह फैल गई और भारीपन एकदम चला गया जैसे कोई चमत्कार हो गया हो। अपने पिछले जीवन से संबंध व अन्य लोगों से जुड़ाव महसूस होने लगा।

प्राणाहुति और रूपांतरण

एस.एस. रामकृष्णन,

कान्हा शांतिवनम्, भारत

मुझे अभी भी प्राणाहुति का अपना वह पहला अनुभव याद है जो भारत के कानपुर शहर में मेरे दूसरे परिचयात्मक ध्यान सत्र के दौरान मुझे हुआ था। मुझे उम्मीद थी कि हृदय में कंपन महसूस होगा, जैसा कि मैंने पहले ध्यान सत्र के दौरान महसूस किया था।

इसके बजाय कुछ ऐसा हुआ जो पूरी तरह से अप्रत्याशित था। मुझे अचानक ऐसा लगा जैसे मैं खाली जगह में तैर रहा हूँ - यह नहीं बता सकता कि मेरे पैर ऊपर थे या मेरा सिर ऊपर था। वास्तव में मुझे यह भी याद नहीं कि मेरे पास सिर या पैर थे भी या नहीं। मैंने खुद को बिना शरीर के शुद्ध मन के रूप में अनुभव किया।

ध्यान सत्र के बाद एक पुरानी पहेली मन में फिर से उभर आई - “क्या मैं सिर्फ़ एक शरीर हूँ जिसके अंदर एक मस्तिष्क है - एक ऐसी मशीन जिसके अंदर रासायनिक संयंत्र हैं और ऊपर एक कंप्यूटर है? क्या यह मशीन एक दिन बंद हो जाएगी और मैं बस नहीं रहूँगा? या मैं कुछ और हूँ, कुछ ऐसा जो इस शरीर की मृत्यु के बाद भी जारी रहता है?”

कोई स्पष्ट उत्तर या प्रमाण नहीं था, बस धुंधली सी छवियाँ थीं जो एक नई दिशा की ओर इशारा कर रही थीं। प्राणाहुति का एक और यादगार अनुभव मुझे शाहजहाँपुर में पूज्य बाबूजी महाराज के घर में हुआ। वहाँ, एक सिटिंग के दौरान मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने विस्तार करते हुए पूरे कक्ष को भर दिया है।

जब मैं अपने स्वभाव या चरित्र में रूपांतरण के बारे में सोचता हूँ तब कई विशिष्ट अनुभव और परिवर्तन मुझे याद आते हैं। इन परिवर्तनों ने मुझे मेरे पारिवारिक जीवन, मेरे व्यावसायिक जीवन, छात्रों के साथ मेरी बातचीत और परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ मेरे संबंधों में बहुत मदद की है।

लेकिन अगर मुझे एक स्पष्ट परिवर्तन का उल्लेख करना हो तो वह जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होगा। यह बदलाव पिछले दस वर्षों में विशेष रूप से दृष्टिगत हुआ है। अब मैं 80 वर्ष की परिपक्व उम्र में हूँ। मैं हमेशा से ऐसा नहीं था। जब मैंने पहली बार आध्यात्मिक मार्ग अपनाया तब मैं आशावादी नहीं था, यहाँ तक कि अपने आध्यात्मिक भविष्य के बारे में भी नहीं। मुझे न तो अपनी सफलता के बारे में और न ही किसी और की सफलता के बारे में यकीन था कि अंतिम लक्ष्य तक पहुँचा जा सकता है। बस यही वह मानसिकता थी जिसके साथ मैंने शुरुआत की थी।

इतने वर्षों में मैंने भारत और अमेरिका, दोनों जगहों पर कई आध्यात्मिक पद्धतियों, मार्गों, शिक्षकों और गुरुओं को देखा है। लेकिन हार्टफुलनेस परंपरा के ज़रिए प्राणाहुति प्राप्त करने के बाद पिछले पचास सालों में मुझ में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब मैं अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में बहुत आशावादी हूँ। और उससे भी बढ़कर मैं इस मार्ग पर चलने वाले सभी लोगों की सफलता को लेकर पूरी तरह आशावादी हूँ।

मुझे लगता है कि हम सभी मानव जीवन के अंतिम लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। यह खुशी, यह शांत आत्मविश्वास मुख्य रूप से मेरे तीन आध्यात्मिक गुरुओं के साथ मेरे जुड़ाव से उपजा है। यह उनकी मैत्री, उनकी प्रेमपूर्ण मित्रता है जिसने इस तरह के रूपांतरण को संभव बनाया है।


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नेगिन खुरासानी

नेगिन खुरासानी

नेगिन एक सामाजिक उद्यमी एवं सक्रिय कार्यकर्ता हैं जो आंतरिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। वे एक लेखिकाऔर पढ़ें

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