एलिज़ाबेथ डेनली बता रही हैं कि हार्टफुलनेस सफ़ाई समय के साथ कैसे विकसित हुई है। यह हमें याद दिलाती है कि यह एक गतिशील विधि है जिससे निरंतर कुछ न कुछ उजागर होता रहता है और नई जागरूकता व अंतर्दृष्टि मिलती रहती है। इसके साथ-साथ हम मानव मन के सामर्थ्य को देखकर विस्मित होते हैं।

 

दशकों तक हार्टफुलनेस का अभ्यास करने के बाद आप सोच सकते हैं कि अभी कम ही बातें होंगी जिन्हें जानना बाकी है लेकिन जब भी इस आंतरिक यात्रा में मेरे सामने कुछ अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक प्रकट होता है तो मैं अचरज से भर जाती हूँ। यह कुछ ऐसा हो सकता है जिसे मैं कुछ हद तक पहले से ही जानती हूँ लेकिन फिर मैं इसे चेतना के एक गहरे स्तर पर और इसलिए गहरी समझ के साथ अनुभव करती हूँ। ऐसी गहन समझ के पल बहुत आनंददायक होते हैं। 

इस साल जनवरी और फरवरी माह के शुरुआती दिनों में सफ़ाई की प्रक्रिया के दौरान मुझे कुछ नया अनुभव हुआ। सफ़ाईदिन के दौरान जमा हुए मानसिक एवं भावनात्मक बोझ और भारीपन को दूर करने के लिए शाम को किया जाने वाला एक अभ्यास है।

जब मैंने हार्टफुलनेस का अभ्यास शुरू किया था तब मैं सफ़ाई की प्रक्रिया से इतनी प्रभावित हुई थी कि मैं हर शाम 30 मिनट के लिए यह करने के लिए ज़रूर बैठती थी और यह किसी भी थेरेपी सत्र से बेहतर था। अवचेतन छवियाँध्वनियाँभावनाएँयादें और जीवन के विभिन्न पहलू आपस में कैसे जुड़े हुए होते हैंइसके बारे में बढ़ती जागरूकता सतह पर उभरती और सहजता से निकल जाती थी। कभी-कभी इसके कारण भावनात्मक बेचैनी भी होती थी लेकिन मैं चाहती थी कि अतीत की बाधाएँ चली जाएँ और इसके लिए बेचैनी एक छोटी-सी कीमत थी। मैं उन बाधाओं से परे जीवन का अनुभव करना चाहती थी।

हर दिन शाम को उस अभ्यास के दौरान मुझे महसूस होता था कि मेरे अंदर से बोझ निकल गया है और मैं अपनी डायरी में पन्नों पर पन्ने लिखा करती थी। हर हफ़्ते जब मैं किसी प्रशिक्षक के साथ ध्यान करती तो मुझे और भी ज़्यादा भार हटने की अनुभूति होती थी। हर बार जब मैं सामूहिक ध्यान में शामिल होती तो मुझे एहसास होता था कि अनुभव की परतें बाहर निकल रही हैं ताकि मैं अपने अस्तित्व के केंद्र में मौजूद खज़ाने तक पहुँच सकूँ। सपने उन छापों के संकेतक बन गए थे जो मेरे तंत्र से साफ़ हो रही थीं। हर चीज़ जटिलताओं को दूर करने के लिए काम कर रही थी। मुझे याद है कि जब मैं पहली बार विचारहीन शांत मन से ध्यान के लिए बैठी थी और मुझे एहसास हुआ था कि इतने कम समय में ही मुझ पर बहुत अधिक आंतरिक काम हो चुका था। इसके लिए मेरे मन में असीम कृतज्ञता थी।

एक वैज्ञानिक होने के नाते इस आंतरिक काम को देखना एक अद्भुत अनुभव था। यह अनुभव हर उस चीज़ से कहीं अधिक गहरा था जिसे मैंने मनोविज्ञान या किसी अन्य आध्यात्मिक पद्धति में महसूस किया था। इसके परिणामस्वरूप होने वाले बदलाव जीवन को बदलने वाले थे।


हर दिन शाम को उस अभ्यास के दौरान मुझे महसूस होता था कि मेरे अंदर से बोझ निकल गया है और मैं अपनी डायरी में पन्नों पर पन्ने लिखा करती थी। हर हफ़्ते जब मैं किसी प्रशिक्षक के साथ ध्यान करती तो मुझे और भी ज़्यादा भार हटने की अनुभूति होती थी। हर बार जब मैं सामूहिक ध्यान में शामिल होती तो मुझे एहसास होता था कि अनुभव की परतें बाहर निकल रही हैं ताकि मैं अपने अस्तित्व के केंद्र में मौजूद खज़ाने तक पहुँच सकूँ।


हफ़्तोंमहीनोंवर्षों और दशकों के दौरान वह तीव्रता बढ़ती और घटती रही जैसा कि सभी प्राकृतिक प्रक्रियाओं और लय के साथ होता है। कभी-कभी सफ़ाई के लिए कम तीव्रता व कम अवधि की आवश्यकता होती थी क्योंकि अंदर शून्यता और शांति थी। फिर ज़रूरत के अनुसार तीव्रता बढ़ती जाती। समय के साथ सफ़ाई की प्रक्रिया में कम ज़ोर लगने लगा। यह सूक्ष्म व अनायास होती गई और हल्कापन महसूस होने लगा। फिर इस वर्ष कुछ अलग घटित हुआ।

जनवरी के दूसरे पखवाड़े में मैंने देखा कि मैं हर शाम को कम से कम 30 मिनट तक सफ़ाई के लिए नियमानुसार बैठती थी। ऐसा करने का कोई इरादा नहीं थालगता था मानो मैं नहीं कोई और कर रहा था या प्राकृतिक प्रक्रियाएँ चल रही थीं। प्रत्येक सत्र गहन और स्वाभाविक था। इस जीवन और पिछले जन्मों के जीवनकालजो दफ़न हो चुके थेबहुत स्पष्टविशद विवरण मेंकभी-कभी एक फ़िल्म की तरह दृश्यों के रूप मेंकभी-कभी केवल यादोंअनुभूतियों और भावनाओं के रूप में और हमेशा बिना किसी फेरबदल केसमान तीव्रता के साथ बहुत तेज़ गति से मेरे सामने आने लगे। कभी-कभी इससे परेशानी होती थी।

उन घटनाओंअतीत में लिए गए निर्णयों और उन चीज़ों को फिर से याद करते हुएजो आज इतनी बेकार और उद्देश्यहीन लगती हैंमुझे अपना जीवन बेकार लगने लगा था और मैं स्वयं को बेकार समझने लगी थी। किसी उच्च उद्देश्य के बिना जीवन बेकार लगता था। मुझे अद्भुत और मूर्खतापूर्ण दोनों तरह की चीज़ें याद आ रही थीं लेकिन उनमें भारीपन नहीं था। यह सब नकारात्मक नहीं था और कभी-कभी मैं इन सभी की अर्थहीनता और बेतुकेपन पर मुसकुराती थी। शुरुआती बेचैनी के बाद यह बहुत मुक्तिदायक था। उसमें न तो कुछ पकड़ने के लिए था और न ही कुछ संभालकर रखने लायक। पहचान और अहंकार केवल हमारे विकास के साधन हैं जो हमारे अस्तित्व को कोई अर्थ नहीं देते।

 

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एक वैज्ञानिक होने के नाते इस आंतरिक काम को देखना एक अद्भुत अनुभव था। यह अनुभव हर उस चीज़ से कहीं अधिक गहरा था जिसे मैंने मनोविज्ञान या किसी अन्य आध्यात्मिक पद्धति में महसूस किया था।


इन्हीं सफ़ाई सत्रों के दौरान सबकुछ अनिश्चित गति से हो रहा था - शाश्वत अस्तित्व के उद्देश्य और प्रवाह के बारे में गहरे दार्शनिक विचारविभिन्न अनुभवों के अर्थ और मानवीय स्पंदन को दैवीय स्पंदन में बदलने वाला स्वयं सफ़ाई का अभ्यास। यह एक पुनरारंभ जैसा था और ऐसा लगता था जैसे अभ्यास को और उन्नत कर दिया गया हो।

यह मुझे तब महसूस हुआ जब हमारे हार्टफुलनेस समुदाय का एक बड़ा आयोजन होने वाला था। यह हार्टफुलनेस परंपरा के पहले गुरु लालाजी के जन्मदिन का उत्सव था जिसे से फ़रवरी के बीच मनाया गया था। प्रत्येक दिन दाजी के साथ सामूहिक ध्यान होता था जिसके दौरान मुझे कुछ हद तक उसी प्राकृतिक तीव्रता और सफ़ाई का अनुभव हुआ लेकिन ध्यान के दौरान हमेशा शून्यता और अस्तित्वहीनता में डूबने का एहसास हुआ। यह मेरे पूर्व के अनुभवों की तुलना में अधिक हल्केपन की अवस्था थी। हालाँकि यह सुंदर दशा नहीं थी क्योंकि इसमें कोई गुण नहीं थे। उसमें न कोई आनंदमय उन्माद थान कोई गहन जागरूकता या अंतर्दृष्टि थी और न ही ऐसा कुछ था जिसके प्रति लगाव पैदा हो लेकिन फिर भी उसमें एक ऐसा आनंद और स्वतंत्रता का एहसास था जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। यह एक ऐसी स्थिति थी जो बहुत स्थिर व बहुत स्पष्ट थी जिसमें ऐसी गति का भरपूर सामर्थ्य था जो दबीफिर उभरीदबी और फिर उभरी। शून्यता में मौजूद सामर्थ्य बहुत दिलचस्प था।


सरलतम अभ्यास अकल्पनीय तरीकों से सामने आते रहते हैं।


पीछे मुड़कर देखती हूँ तो सोचती हूँ कि उस गहन तैयारी के बिनाजो इस आयोजन के पहले के दिनों में हुई थीऐसी जागरूकता मिली ही नहीं होती। उत्सव समाप्त होने के एक सप्ताह बाद भी यह अनुभव आत्मसात हो रहा है। जीवन बदल गया है और शब्दों में उस परिवर्तन का वर्णन नहीं किया जा सकता। एक बात मैं अवश्य कह सकती हूँ कि सच्ची जागरूकता तभी संभव है जब इसे सीमित न रखा जाए क्योंकि तभी यह सार्वभौमिक होती है और स्वतंत्र रूप से प्रवाहित हो पाती है। अन्यथा यह प्रभावित रहती है और किसी न किसी खींचा-तानी से जुड़ी हुई रहती है। शायद यह विकासवादी खींचा-तानी हो जो उपयोगी हो जैसे माँ के लिएगुरु के लिए या फिर ईश्वर के लिए प्रेम। ये सभी हमें वहाँ ले जाने के लिए प्रारंभिक प्रयास या उत्प्रेरक हैं जहाँ ऐसी दैवीय धारा बहती है जिसमें न तो कोई भार होता है और न कोई खींचा-तानी।

अनुभव के विस्मय के अलावापिछले महीने मुझे यह एहसास हुआ कि प्रत्येक हार्टफुलनेस अभ्यास समय के साथ विकसित होकर अधिक गहरा और प्रभावकारी होता रहता है। निर्देश वही रहते हैं लेकिन उनका स्तर भिन्न हो जाता है। कभी-कभी तो यह हमेशा की तरह क्रमिक परिवर्तन के रूप में न होकर एक छलांग के रूप में भी होता है। पिछले सालों में मैंने अक्सर कहा है कि सफ़ाई अब उस तरह से नहीं होती जैसी पहले होती थी लेकिन अब इस कथन ने एक बिलकुल नया अर्थ ले लिया है।

मैं अक्सर अचंभित होती हूँ कि जीवन में परिवर्तन के लिए इतनी गहन और गतिशील पद्धति मौजूद है। सरलतम अभ्यास अकल्पनीय तरीकों से सामने आते रहते हैं।


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एलिज़ाबेथ डेनली

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