डॉ. रॉक्सैन एम. सेंट क्लेयर अपनी और दूसरों की अहमियत को पहचानने और उसे एक दैनिक अभ्यास बनाने पर बात कर रही हैं।
क्या हो यदि हर बार जब आप किसी से मिलें तब आप उनके वास्तविक महत्व को समझ पाएँ और वे आपके महत्व को समझ पाएँ?
इस 8.2 अरब टुकड़ों वाली पहेली, जिसे जीवन कहा जाता है, में हर एक टुकड़ा महत्वपूर्ण है। कुछ बड़े हैं तो कुछ छोटे तथा वे विभिन्न आकृतियों और रंगों वाले भी हैं। यही इस पहेली की खूबसूरती है। एक पूरी तस्वीर बनाने के लिए इन सभी टुकड़ों की आवश्यकता होती है। आज के समय में जब स्वयं की किसी से तुलना हमारी खुशी को बढ़ने से रोकती है तब इस बात को ज़हन में रखना ज़रूरी हो जाता है कि आप अपने अनूठे गुणों और प्रतिभाओं के साथ पैदा हुए हैं। हाँ, आपके और किसी अन्य व्यक्ति के बीच समानताएँ हो सकती हैं लेकिन आपका एक ऐसा अंश भी है जो मानवता के लिए आपका विशेष योगदान है।
अहमियत का केंद्र
जब मैंने ‘द वैल्यू इन यू® (आपकी अहमियत) कार्ड’ बनाए तो मेरा एकमात्र उद्देश्य लोगों को उनकी जन्मजात अहमियत की याद दिलाना था। अक्सर हम अपनी अहमियत को बाहरी मानकों, पदवियों, संपत्तियों, उपलब्धियों, लाइक्स या फ़ॉलोअर्स के आधार पर मापने के आदी होते हैं। हालाँकि पहचान और सफलता की अवधारणाओं का अपना स्थान है लेकिन वे हमारे वास्तविक स्वरूप का सच्चा सार नहीं हैं।
अहमियत ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप कमाते हैं बल्कि यह वो गुण है जो आप में मौजूद है। यह गुण दयालुता के शांत क्षणों में, सुनने वाले कानों में, रचनात्मक चिंगारी में और उस अविचल दृढ़ता में बसता है जिसके बारे में आपको तब तक एहसास भी नहीं था जब तक जीवन ने इसे आवश्यक नहीं बना दिया।
अहमियत ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप कमाते हैं बल्कि यह वो गुण है जो आप में मौजूद है। यह गुण दयालुता के शांत क्षणों में, सुनने वाले कानों में, रचनात्मक चिंगारी में और उस अविचल दृढ़ता में बसता है जिसके बारे में आपको तब तक एहसास भी नहीं था जब तक जीवन ने इसे आवश्यक नहीं बना दिया।
मुझे एक नेता के साथ हुई बातचीत याद है जो ज़िम्मेदारी का बोझ ढोते-ढोते थक गई थीं। उन्हें लगता था कि उनके निरंतर योगदान के बावजूद उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया और उनकी कद्र नहीं की गई। मैंने उन्हें उन कार्डों में से एक मुख्य प्रश्न पर विचार करने के लिए कहा - “वह कौन-सा उपहार है जो मैं दूसरों को देती हूँ?” उनका उत्तर उनकी भूमिका या उनकी प्रतिष्ठा के बारे में नहीं था बल्कि वह अशांति के समय शांति लाने की उनकी योग्यता के बारे में था। उन्हें एहसास हुआ कि उनके इसी गुण, जिसे वे अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती थीं, पर दूसरे भरोसा करते थे। उनके दृष्टिकोण में आए इस बदलाव ने उन्हें न केवल पुनः ऊर्जित किया बल्कि उससे भी अधिक लाभ पहुँचाया। इससे वे खुद को अलग तरह से देख पाईं जिसके परिणामस्वरूप वे खुद के प्रति सहानुभूतिपूर्ण बन पाईं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।
यही आपकी अहमियत का केंद्र है। यह आपके बाहर नहीं पाया जाता। यह आपका ही एक हिस्सा है जिसे केवल आपको स्वीकारने की ज़रूरत है।
स्वास्थ्य, संपत्ति और संबंध - अहमियत के तीन आधार स्तंभ
जब हम वास्तव में अपनी अहमियत को स्वीकार कर लेते हैं तब यह हमारे जीने के तरीके को बदल देती है। यह हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू में प्रवाहित होने लगती है तथा उस मनोभाव को प्रभावित करती है जिससे हम अपने स्वास्थ्य, धन और संबंधों को देखते हैं।
स्वास्थ्य -
“अपने स्वास्थ्य, मन, शरीर और आत्मा का ध्यान रखना अपनी और दूसरों की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है।” — द वैल्यू इन यू®

हमारे शरीर वे वाहन हैं जिनके माध्यम से हम जीवन का अनुभव करते हैं। फिर भी कितनी ही बार हम खुद पर ज़बरदस्ती करते हैं, आराम नहीं करते हैं, दर्द को दबाते हैं और पोषण की उपेक्षा करते हैं क्योंकि हम खुद को महत्व देना और अपनी कुशल-क्षेम को प्राथमिकता देना भूल जाते हैं। जब आप अपनी अहमियत जानते हैं तब आप अपने शरीर को एक पवित्र पात्र के रूप में मानते हैं न कि उपेक्षित वस्तु की तरह। तब आप अपनी देखभाल के मामले में कोई समझौता नहीं करते। इस तरह अपनी अहमियत को स्वीकार करना आपको ऐसे विकल्प चुनने में मदद करता है जो आपको मज़बूत बनाते हैं और आपको स्थिरता देते हैं ताकि आप बेहतर बन पाएँ और दुनिया को ज़्यादा से ज़्यादा दे पाएँ; अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें।
संपत्ति -
“आपकी संपत्ति केवल आपकी वित्तीय स्थिति तक सीमित नहीं है। आपका ज्ञान और आपके जीवन में मौजूद लोग भी आपकी संपत्ति का हिस्सा हैं क्योंकि वे उन अनुभवों में योगदान करते हैं जो आपको समृद्ध बनाते हैं।”
—द वैल्यू इन यू®
संपत्ति को अक्सर बैंक खाते में दिखने वाले अंकों तक सीमित कर दिया जाता है। लेकिन सच्ची संपत्ति कृतज्ञता, उपायकुशलता और जो हमारे पास है उसका सार्थक उपयोग करने की क्षमता में निहित है। जब आप अपने महत्व को पहचान लेते हैं तब आप भौतिक तुलनाएँ करके अपनी अहमियत साबित करने की कोशिश नहीं करते हैं, बल्कि आपको उन कामों को करने और उन चीज़ों का हिस्सा बनने से संतुष्टि मिलती है जो आपको खुशी देती हैं।
मैंने ऐसे लोगों को देखा है जिनके पास ज़्यादा कुछ नहीं है, फिर भी वे पूर्ण जीवन जीते हैं क्योंकि वे समुदाय, दयालुता और रचनात्मकता का मूल्य जानते हैं। वहीं दूसरी ओर मैंने कुछ धनवान लोगों को अभाव और अकेलेपन में जीते देखा है क्योंकि वे यह नहीं मानते कि वे अपने आप में पर्याप्त हैं। आत्मसम्मान के बिना संपत्ति खाली महसूस होती है; आत्मसम्मान से जुड़ी संपत्ति वृहद् महसूस होती है।
संबंध -
“आपके संबंधों की गुणवत्ता दोनों पक्षों द्वारा किए गए प्रयासों का प्रतिबिंब हैं। एक रिश्ता दोतरफ़ा माध्यम है जिसमें दोनों के सचेत योगदान की आवश्यकता होती है।”
— द वैल्यू इन यू®

मूल रूप से आत्मसम्मान का अर्थ है जागरूकता - केवल स्वयं के प्रति ही नहीं बल्कि दूसरों के प्रति भी। संबंध तब बेहतर होते हैं जब हम अपने सामने वाले व्यक्ति की मानवता, गुणों और योग्यता को देखते हैं। उस परिवर्तन की कल्पना कीजिए जो परिवारों, कार्यस्थलों और समुदायों में आ सकता है, यदि हर बातचीत से पहले हम शांत भाव से स्वयं को याद दिलाएँ कि सामने वाले व्यक्ति में भी मेरी तरह ही योग्यता है।
यह सरल बदलाव बातचीत के स्वर को बदल देता है, टकराव से बचाता है या स्वभाव में नरमी लाता है और हृदय में दया-भाव उत्पन्न करता है। इससे हम आंकलन नहीं करते बल्कि हम में जिज्ञासा पैदा हो जाती है और हम प्रतिस्पर्धा के बजाय साथ मिलकर काम करते हैं। आखिरकार पहेली का हर टुकड़ा एक-दूसरे से जुड़ा है। उन जुड़ावों के बिना तस्वीर अधूरी रहती है।
दिन की शुरुआत
तो फिर हम दैनिक जीवन की भाग-दौड़ में अपनी अहमियत को याद कैसे रखें? यहीं पर माइंडफुलनेस और हार्टफुलनेस की भूमिका आती है। मैंने पाया है कि ऐसा करने का एक शक्तिशाली तरीका है कि आप तय करें कि आप दिन कैसे बिताएँगे, बजाय इसके कि दिन आपके लिए निर्धारित करे कि आप कैसे रहेंगे। कल्पना कीजिए कि हर सुबह आप अपने दिन की शुरुआत अपने फ़ोन से या अपनी कार्य-सूची के बारे में सोचने से न करके कुछ मिनटों के मौन और कृतज्ञता के भाव से करते हैं। जागने पर मेरा पहला विचार होता है, “एक और नया दिन प्रदान करने की कृपा के लिए धन्यवाद!” यह मुझे याद दिलाता है कि मुझे अभी भी दुनिया में बदलाव लाना है। इसलिए चाहे वह छोटा ही क्यों न हो मैं आज भी एक बदलाव ला सकती हूँ। अक्सर यह स्टेशन के रास्ते में किसी अजनबी को देखकर मुस्कुराना भर हो सकता है।
दिन के दौरान
पूरा दिन, उस ‘दृष्टिकोण’ पर ध्यान दें जिससे आप जीवन को देखते हैं। विचार करें, “क्या मैं आंकलन, आलोचना, तुलना कर रहा हूँ या मैं सराहना कर रहा हूँ, सीख रहा हूँ और सबक पाने की कोशिश कर रहा हूँ?” आंकलन करने के बजाय सराहना करने से हृदय कोमल बनता है और आपको अपनी व दूसरों की योग्यता से जोड़ता है।
दिन के अंत का चिंतन
दिन भर के तनाव को कम करने के लिए सोने से पहले डायरी लिखने के लिए कुछ मिनट निकालें। कुछ प्रश्न जिन पर आप विचार कर सकते हैं वे हैं -
- मैंने आज अपनी अहमियत का सम्मान कैसे किया?
- मैंने दूसरों की अहमियत का सम्मान कैसे किया?
- मैं आज क्या बदलाव लाया?
- मैं कल के लिए क्या आगे ले जाऊँगा?

मैंने पाया है कि ऐसा करने का एक शक्तिशाली तरीका है कि आप तय करें कि आप दिन कैसे बिताएँगे, बजाय इसके कि दिन आपके लिए निर्धारित करे कि आप कैसे रहेंगे। कल्पना कीजिए कि हर सुबह आप अपने दिन की शुरुआत अपने फ़ोन से या अपनी कार्य-सूची के बारे में सोचने से न करके कुछ मिनटों के मौन और कृतज्ञता के भाव से करते हैं।
इस शांत मनन से हमारे दिन का समापन जागरूकता, कृतज्ञता और शांति के साथ होता है।

डॉ. रॉक्सैन एम. सेंट क्लेयर
डॉ. रॉक्सैन एम. सेंट क्लेयर एक पुरस्कार विजेता नेतृत्व रणनीतिकार, ... और पढ़ें
