लेज़्ली ब्लेयर अपने एक अत्यंत गहन स्वप्न के बारे में बता रही हैं जिस पर ध्यान देने से वे लगभग चूक गई थीं। हमें अनेक बार ऐसे दिव्य उपहार प्राप्त होते हैं जिनका हमें भान भी नहीं होता।
एक बार एक उदास रविवार की दोपहर मैं झपकी ले रही थी तब मुझे यह स्वप्न आया। यह उस श्रेणी का स्वप्न था कि उम्र के सात दशकों तक अगणित स्वप्न देखने के बाद भी वैसे स्वप्न उँगलियों पर गिने जा सकते हैं। शायद वह स्वप्न था ही नहीं; वह एक दिव्य दर्शन था।
मैं इस पर ध्यान देने से लगभग चूक ही गई थी – वे गायक वृन्द, दिव्य संगीत जो पहले ही मंद होने लगा था, मेरी चेतना जो पूरे आकाश में तेज़ी से घूम रही थी और जो दूर जाते-जाते स्वप्न और ध्वनियों से लौट रही थी - मेरे मन की तीव्र कोशिश थी कि यह वापसी धीमी हो जाए और उस सुंदर, अवर्णनीय मधुर सुर और ताल को मैं समझ सकूँ।
जो थोड़ा सा समय बच गया था, उसमें मुझे एहसास हुआ कि वह संगीत खो जाएगा। लेकिन उसमें गीत के बोल
भी थे। मैं पहले उन पर गौर नहीं कर पाई थी इसलिए मैं इस गीत के आखरी बोल ही सुन पाई।
स्वप्न से जागने पर मैंने जल्दी से कलम और कागज़ उठाए और वे बोल लिख लिए जिनका अर्थ इस प्रकार है -
“अपनी आत्मा को थोड़े से हर्ष में डूब जाने दो।”
(Let thy soul be couched in merest gladness.)
इस तरह की भाषा से मैं परिचित नहीं थी इसलिए मैंने मोटे तौर पर इसका अनुवाद इस तरह किया -
“अपनी आत्मा को थोड़े से हर्ष में छुप जाने दो।”
यह अनुवाद किसी भी तरह से उस संगीत के उत्कृष्ट सौंदर्य के अनुकूल नहीं लग रहा था जिसे मैंने सुना था। अत्यंत निराशा में मैंने इस उम्मीद में शब्दकोष उठाया कि इसका कुछ बेहतर अर्थ मिल सके। इस कोशिश
ने मुझे निराश नहीं किया।
शब्दकोष में इन शब्दों की ये परिभाषाएँ मिलीं -
काउच (Couch) - अभिव्यक्त करना, प्रकट कर देना; मिअर (Mere) – पवित्र, शुद्ध
दिव्य पहेली हल हो गई थी। अब संदेश इस तरह अनुवादित होता है -
“अपनी आत्मा को अपने आपको पवित्र व शुद्ध आनंद में अभिव्यक्त होने दो।”
स्वर्गीय आयाम से पृथ्वी पर आने वाले संदेश को रोज़ाना काम आने वाले शब्दकोष ने
हम तक पहुँचाया। कौन कह सकता है कि मदद कहाँ से मिलेगी?

लेज़्ली ब्लेयर
लेज़्ली अमेरिका में रहने वाली हार्टफुलनेस की अभ्यासी और प्रशिक्षक हैं। एक सेवानिवृत्त संपादक के रूप में वे जानती हैं क... और पढ़ें
