ब्रायन बार्नेट रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में अपने विचार प्रस्तुत कर रहे हैं और बता रहे हैं कि यह आध्यात्मिकता से कैसे संबंधित है।

 

मैंने कई बार रचनात्मकता और आध्यात्मिकता के बीच संबंध के बारे में सोचा है। मेरे दो पुराने दोस्त हैं और दोनों सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। वे न तो धार्मिक हैं और न ही उनकी आध्यात्मिकता में कोई रुचि है। एक को संगीत पसंद है और जब वह बीथोवेन्स के क्वार्टेट के प्रत्यक्ष संगीत समारोह को सुनता है तब वह परमानंद की भावना में खो जाता है। दूसरा, जकूज़ी में अपनी पीठ के बल लेट जाता है और उसका वर्णन इस तरह करता है मानो वह किसी बहुत ही शांत और उन्मुक्त अवस्था में तैर और बह रहा हो। मैंने उनके साथ ध्यान के बारे में चर्चा की है और उन्हें बताया है कि कैसे मुझे आंतरिक शांति और विस्तार के सूक्ष्म एहसास के साथ-साथ दुनिया से जुड़ाव भी महसूस होता है। मैं शांत पानी की उपमा देता हूँ जब कोई भी शांत झील के तल को देख सकता है लेकिन वही तल पानी के अशांत होने पर ठीक से दिखाई नहीं देता।

मैंने रचनात्मकता के बारे में एक प्रकार के आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में सोचा है। वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकार अक्सर बताते हैं कि वे चेतना की एक अलग ही अवस्था का अनुभव करते हैं और दर्शक भी उसे महसूस करते हैं। यह कोई सरोद वादक हो सकता है जो दर्शकों के दिलों से जुड़ने के लिए शोकपूर्ण स्वरों का उपयोग करता है या फिर, यह जैज़ का उत्कृष्ट तात्कालिक प्रदर्शन हो सकता है। सॉनी रोलिन्स (अमेरिकन सेक्सोफ़निस्ट) रात में घंटों तक ब्रुकलिन ब्रिज (एक पुल) पर रियाज़ करते थे और अपनी तकनीक का और परिष्कार करते थे।

 

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मुझे याद है कि पेंटिंग करते समय मैं तस्वीर में इस कदर डूब गया था कि मुझे समय का भी एहसास नहीं रहा। इसी प्रकारसंगीत को सुनते और संगीत-वादन करते समय मैंने गहरा जुड़ाव और उन्नत जागरूकता महसूस की है। हालाँकि मेरे प्रयास शायद ही उत्कृष्ट कला के स्तर के थेफिर भी मुझे रचनात्मकता और आध्यात्मिकता के संबंध की एक हल्की सी अनुभूति हुई। रचनात्मकता का कार्य आध्यात्मिक अनुभव की शुरुआत तक पहुँचने का प्रयास हो सकता है।

ध्यान कुछ हद तक एक ऐसा कौशल है जो आपको आरामदायक स्थिति में ले आता है और हृदय के साथ जोड़ता है। फिर यह कौशल स्वचालित हो जाता है और वह अवस्था कुछ ही क्षणों में प्राप्त हो जाती है। शायद यह कौशल इतना पूर्ण हो जाता है कि यह अब एक सचेत प्रक्रिया नहीं रह जाती। तब यह सवाल उठता है कि क्या ध्यान और कलाकारों की रचनात्मक स्थिति के बीच कोई समानता है। कई उत्कृष्ट पारंपरिक रचनाएँ हैं जो रूपांतरणकारी हैं। क्या रचनाकार की मानसिक स्थिति की प्रतिभा तब भी मौजूद रहती है जब रचना वर्षों या सदियों बाद प्रस्तुत की जाती है?

ये प्राकृतिक ध्यान की अवस्थाएँ हो सकती हैं लेकिन बिना दैनिक अभ्यास के ये अवस्थाएँ सोचने से महसूस करने और अनुभव करने में प्रगति नहीं कर सकती हैं। हो सकता है कि रचना करने और संगीत देने का कार्य उस कलाकार के लिए एक आध्यात्मिक अवस्था हो।

यूरोप की यात्रा के दौरान मैं कई चित्रकला की वीथिकाओं को देखने गया और अक्सर चित्रों और मूर्तियों के सामने अचंभित होकर खड़ा रहा। उनमें से कुछ में एक प्रभावशाली ऊर्जा थी और मुझे लगता था कि उस कलाकार की कुछ ऊर्जा उस समय भी उसके काम में मौजूद थी। जब मैंने उसकी तुलना उसी कृति की किसी प्रति को देखकर होने वाली अनुभूति से की तब मैंने पाया कि भले ही वह प्रति देखने में उसी तरह खूबसूरत थी मगर उसमें वह ऊर्जा नदारद थी। मुझे याद है कि कैसे मैं, रेम्ब्रैंट (नीदरलैंड के मशहूर चित्रकार) के एक आत्म-चित्र के सामने खड़े होकर उसकी आँखों में देख रहा था और उसकी निगाह को बस देखता ही रह गया। मुझे लगा कि वे दर्शक के सामने अपनी आत्मा को उजागर कर रही थीं। वैन हौह (नीदरलैंड के एक अन्य प्रसिद्ध चित्रकार) की पेंटिग्स को देखते समय मुझे लगा कि मैं उनके सिर पर पड़ने वाली उस धूप को महसूस कर सकता था जब उन्होंने उस दृश्य का चित्र गाढ़े पेंट से बनाया था। क्या यह वही ऊर्जा है जो कला की रचना के दौरान कलाकार द्वारा अनुभव की गई थी और जो उस समय भी उसकी पेंटिंग में मौजूद थी?

मुझे याद है कि पेंटिंग करते समय मैं तस्वीर में इस कदर डूब गया था कि मुझे समय का भी एहसास नहीं रहा। इसी प्रकार, संगीत को सुनते और संगीत-वादन करते समय मैंने गहरा जुड़ाव और उन्नत जागरूकता महसूस की है। हालाँकि मेरे प्रयास शायद ही उत्कृष्ट कला के स्तर के थे, फिर भी मुझे रचनात्मकता और आध्यात्मिकता के संबंध की एक हल्की सी अनुभूति हुई। रचनात्मकता का कार्य आध्यात्मिक अनुभव की शुरुआत तक पहुँचने का प्रयास हो सकता है। अंग्रेज़ी के जाने-माने कवि और नाटककार, रॉबर्ट ब्राउनिंग के शब्दों में, “इंसान की पहुँच उसकी पकड़ से अधिक होनी चाहिए।”


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ब्रायन बार्नेट

ब्रायन बार्नेट

ब्रायन एक सेवानिवृत्त दंत चिकित्सक हैं। वे तलाकशुदा हैं और उनके दो बेटे व दो पोते-पोतियाँ हैं। वेऔर पढ़ें

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