इचक अडीज़ेस कहते हैं कि रचना और विकास की मूल शक्ति प्रेम है जो परस्पर विश्वास और सम्मान पर आधारित होता है।

 

भौतिक विज्ञान कहता है कि समय और स्थान की शुरुआत बिग-बैंग से हुई। इसका मतलब है कि बिग-बैंग से पहले जो भी था, वह समय और स्थान की सीमा में बंधा नहीं था। वह असीमित था। ऐसा क्या है जो सीमित न हो? ऐसा क्या है जिसे समय और स्थान बाँध न सकें?

वह प्रेम है। हम किसी ऐसे व्यक्ति से भी प्रेम कर सकते हैं जो इस दुनिया में नहीं रहा। हम ऐसे व्यक्ति से प्रेम कर सकते हैं जो हज़ारों मील दूर हो। प्रेम की कोई सीमा नहीं है। प्रेम समय और स्थान से परे है। प्रेम ही भगवान है। भगवान यानी प्रेम ही सृष्टि रचना का स्रोत है।

इससे समझ आता है कि किसी भी रचना में प्रेम एक आवश्यक तत्व है। कंपनियों या देशों के संस्थापकों को देखिए। वे अपनी रचनाओं से इतना प्रेम करते हैं कि अपने जीवन की सुख-सुविधाएँ तक त्यागने को तैयार रहते हैं, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वे अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

एक कलाकार को चित्र बनाते हुए देखिए। जब तक वह अपनी पेंटिंग से प्रेम करता है, वह न तो उसे छोड़ेगा और न ही उसे प्रदर्शित करेगा; वह लगातार उसमें सुधार करता रहेगा। संगीतकार भी संगीत बनाते समय ऐसा ही करता है। लेखक भी किताब लिखते हुए यही करता है।

एक छोटा बच्चा जब किसी अनजाने व्यक्ति को मिलता है, वह यह नहीं देखता कि सामने वाले की नाक कैसी है, कान कैसे हैं, वह सुंदर है या बदसूरत। बच्चे ये सब नहीं देखते। वे दिल से देखते हैं। वे सामने वाले को देखकर अपने दिल में महसूस करते हैं कि यह व्यक्ति प्रेममय है या नहीं। उसी अनुभूति के आधार पर वे तय करते हैं कि मुस्कुराना है या रोना है। वे प्रेम खोजते हैं और उन्हें बढ़ने के लिए प्रेम की आवश्यकता होती है।


परस्पर विश्वास और सम्मान प्रेम की अनिवार्य नींव हैं। इन्हीं के कारण कोई भी तंत्र प्रगति कर सकता है। यदि परस्पर विश्वास और सम्मान नहीं होगा तो प्रेम समाप्त हो जाएगा। ऐसे में एकीकरण और विकास की जगह विघटन और पतन होने लगेगा।


शोध बताते हैं कि जिन बच्चों को प्रेम मिलता है, वे उन बच्चों की तुलना में ज़्यादा स्वस्थ और मज़बूत बनते हैं जो प्रेम से वंचित रह जाते हैं। फूल और पेड़-पौधे भी प्रेम के प्रति ऐसी ही प्रतिक्रिया दिखाते हैं।

परस्पर विश्वास और सम्मान प्रेम की अनिवार्य नींव हैं। इन्हीं के कारण कोई भी तंत्र प्रगति कर सकता है। यदि परस्पर विश्वास और सम्मान नहीं होगा तो प्रेम समाप्त हो जाएगा। ऐसे में एकीकरण और विकास की जगह विघटन और पतन होने लगेगा।

प्रेम में डूबे लोगों को देखिए। वे अक्सर अपनी उम्र से छोटे दिखते हैं, जबकि घृणा से भरे लोग उम्रदराज़ और थके हुए लगते हैं। प्रेम बूढ़ा होने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है क्योंकि प्रेम एकीकृत करता है। और जहाँ एकीकरण होता है वहाँ ऊर्जा की बर्बादी नहीं होती। घृणा विघटन करती है जिसके कारण किसी भी तंत्र की निश्चित व सीमित ऊर्जा बर्बाद होती है। जैसे-जैसे ऊर्जा बर्बाद होती है, जीवन छोटा होता जाता है और आप कम वर्षों तक जीवित रहते हैं।

अंधकार प्रकाश की अनुपस्थिति है। वे सिर्फ़ विपरीत नहीं हैं। वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, एक ही मिठाई के दो टुकड़े हैं। इसलिए अंधकार को कोसिए मत, प्रकाश के लिए मोमबत्ती जला लीजिए। उसी तरह, घृणा से घृणा मत कीजिए। बस प्रेम कीजिए। प्रेम से ही रचना होती है और आपका सपना वास्तविकता में बदलता है।

 

creations-start-with-love2.webp

 


आपके बच्चे केवल आपके बच्चे नहीं हैं। वे जीवन की निरंतरता और सृजन की इच्छा का परिणाम हैं।

खलील जिब्रान


 


Comments

डॉ. इचक अडीज़ेस

डॉ. इचक अडीज़ेस

डॉ. इचकअडीज़ेस विश्व

उत्तर छोड़ दें