सूरज सहगल ने बो जॉनसन का साक्षात्कार लिया जिसमें उन्होंने स्टैंड-अप कॉमीडियन होने, हास्य के पीछे की मानवता और इस बात की चिंता कि उनके हास्य को कैसे समझा जाएगा, के बारे में बात की। वे हमें यह भी याद दिलाते हैं कि हमें हास्य की इस समय पहले से कहीं अधिक आवश्यकता क्यों है।

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प्रश्न - शुरुआत में किस बात ने आपको स्टैंड-अप कॉमीडियन (जो सीधा मंच से हास्य प्रदर्शन करता है) के व्यवसाय की ओर आकर्षित किया?

जब मैं सातवीं या आठवीं कक्षा में था, आईट्यून्स स्टोर बहुत लोकप्रिय हो रहा था। उनके पास सभी पुराने - जिनमें कुछ कम पुराने भी थे - कॉमेडी सेंट्रल के आधे घंटे के कार्यक्रम थे। उस समय मैं बहुत सारे घास के मैदानों की कटाई करता था और कभी-कभी आँगन का काम भी करता था। इस काम से मैंने जो भी पैसा कमाया, लगभग सारा आईट्यून्स स्टोर में संगीत या कॉमेडी स्पेशल पर खर्च कर दिया। मैंने तय कर लिया कि मैं इसे दोबारा कभी नहीं सुनूँगा।

पहले हास्य कार्यक्रम जो मुझे पसंद आए, वे मिच हेडबर्ग और डेमेट्री मार्टिन के थे। दोनों ऐसे महान हास्य अभिनेता थे जो किसी भी बात से कुछ भी बेतरतीब बात निकालकर कोई चुटकुला या मज़ेदार टिप्पणी बना देते थे। मुझे हास्य पुस्तकें भी पसंद हैं जैसे डेविड सेडारिस और डगलस एडम्स द्वारा लिखी पुस्तकें। डगलस एडम्स ने ‘द हिचहाइकर गाइड टू द गैलेक्सी’ लिखी थी।

मैं दो दोस्तों के साथ एक छोटी व्यंग्य पत्रिका लिख रहा था लेकिन कॉलेज के बाद इस काम में उनकी रुचि खत्म हो गई। मैं वह सब लिखने से भी निराश हो गया था जिसे कोई पढ़ना नहीं चाहता था। इसलिए मैं एक ऐसा माध्यम ढूँढना चाहता था जो मेरी अपनी रुचि के अनुसार हो। स्टैंड-अप कॉमीडियन बनना एकदम सही था, भले ही शुरुआत में ये तीन मिनट के ओपन माइक सेट यानी संक्षिप्त प्रदर्शन होते थे। ऐसे कार्यक्रमों में दर्शक तल्लीन होते हैं और वे तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं कि क्या बेकार है और उन्हें क्या पसंद आता है। कॉलेज से स्नातक होने के तुरंत बाद इसकी शुरुआत इसी तरह हुई। मैं होटलों में मेज़ की साफ़-सफ़ाई का काम करता था और स्टैंड-अप कॉमेडी यानी मंच पर खड़े होकर हास्य प्रदर्शन करना शुरू कर रहा था।

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प्रश्न - मैंने आपका स्टैंड-अप प्रदर्शन दो बार देखा है, एक बार अटलांटा में और एक बार सैन फ्रांसिस्को में। मैंने देखा है कि आपके पास ऐसे चुटकुले हैं जिनके साथ आप सहज हैं। आपके पास एक परचा भी होता है जिसमें नई सामग्री होती है जिस पर आप काम कर रहे होते हैं। नई सामग्री विकसित करने के लिए आपकी रचनात्मक प्रक्रिया क्या है?

यदि मैं यात्रा कर रहा होता हूँ तो मुख्य सामग्री में डालने के लिए कुछ नई पंक्तियाँ या फिर कुछ नई सामग्री लिख लेता हूँ। जिस शो में मेरी मुख्य भूमिका होती है उसमें पाँच से दस मिनट की नई सामग्री पेश करने की कोशिश करता हूँ। यदि मुझे लगता है कि उसे लगातार पसंद किया जा रहा है तो मैं उसे अपने नियमित कार्यक्रम में शामिल कर लेता हूँ और देखता हूँ कि क्या वह तब भी लोगों को पसंद आ रहा है। यदि ऐसा होता है तो उसे हमेशा के लिए शामिल कर लेता हूँ।

जब मैं अपने शहर में होता हूँ या छोटे-छोटे कार्यक्रम कर रहा होता हूँ तब मैं ओपन माइक पर यानी लोगों के किसी समूह के सामने प्रदर्शन के लिए जाता हूँ और 30 मिनट तक अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करता हूँ। यह एक आदर्श दुनिया है जहाँ मैं नए विचारों को आज़माता हूँ और जहाँ कोई भी मुझे देखने के लिए पैसे नहीं देता है। लेकिन कुछ चुटकुले लंबे होते हैं और वास्तव में ऐसे प्रदर्शन में काम नहीं करते हैं पर कुछ चुटकुले तभी बेहतर काम करते हैं यदि आप उनकी भूमिका बाँधने के बजाय किसी कार्यक्रम में 30 मिनट बात करते हैं।

प्रश्न - स्टैंड-अप कॉमीडियन के लिखने के तरीके अलग होते हैं। क्या आप प्रत्येक दिन लिखने में एक निश्चित समय व्यतीत करते हैं? या यह तब होता है जब अंदर से प्रेरणा मिलती है?

मुझे और अधिक बैठकर लिखना चाहिए क्योंकि कुछ चीज़ें इसी तरह लिखी गई हैं। लेकिन अभी तो मैं लंबी सैर या कसरत के लिए चला जाता हूँ और यहाँ-वहाँ कोई विचार आता है तो उसे लिख लेता हूँ। अगर मैं शो के लिए किसी शहर में हूँ तो मैं आस-पास घूम-फिर कर किसी ऐसी चीज़ के बारे में सोचना पसंद करता हूँ जो शायद लोगों को लुभा सके। इसका अधिकांश भाग वार्तालाप-आधारित लेखन होता है। अगर मैं दोस्तों के साथ बात कर रहा हूँ और कोई चीज़ हमें हँसाती है तो मैं इसे एक आधार के रूप में लिख लेता हूँ। मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ हर सप्ताह बात करता हूँ और हम उन चुटकुलों पर चर्चा करते हैं जिन पर हम काम कर रहे होते हैं और एक-दूसरे की सामग्री को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं।

प्रश्न - स्टैंड-अप कॉमीडियन होने का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू क्या रहा है? और आपने इससे उबरने के लिए क्या कोशिश की है?

मैं लगभग डेढ़ साल से पूर्णकालिक रूप से स्टैंड-अप कॉमेडी कर रहा हूँ और साढ़े आठ साल से इसमें पूरी तरह लगा हुआ हूँ, जिसमें कोविड महामारी का समय भी शामिल है। सबसे चुनौतीपूर्ण बात है एक समय पर तीन या चार अलग-अलग कार्य करना। मेरे पास अब एक प्रबंधक है जो कार्यक्रमों की बुकिंग में मेरी मदद करता है लेकिन मैं अभी भी अपने सभी ऑनलाइन विज्ञापन और सोशल मीडिया चलाता हूँ। वे कार्य जिनसे मेरा जीविका कमाना संभव हो पाता है, मेरी रचनात्मक क्षमता को कम कर देते हैं। लेकिन इन्हें किए बिना स्टैंड-अप कॉमेडी से जीवन निर्वाह नहीं हो सकता। मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता हूँ कि मैं अपने व्यवसाय से कुछ समय निकालूँ और एक व्यक्ति बनकर दुनिया का सीधे अनुभव करूँ, मेरा दिमाग इतना खाली रहे कि मैं रचनात्मक बन पाऊँ और नए अनुभव करूँ जिनके बारे में मैं लिखूँ।


मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता हूँ कि मैं अपने व्यवसाय से कुछ समय निकालूँ और एक व्यक्ति बनकर दुनिया
 का सीधे अनुभव करूँ, मेरा दिमाग इतना खाली रहे कि मैं रचनात्मक बन पाऊँ और नए अनुभव करूँ जिनके बारे में मैं लिखूँ।


एक और चुनौती यह है कि अगर मैं मंच पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता हूँ तो इससे मैं परेशान हो जाता हूँ। इसका मतलब है कि वास्तव में मैं कह रहा हूँ, “अरे, मुझे जो मज़ेदार लगता है वह मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ।” कभी-कभी लोगों को मेरा दुनिया को देखने का तरीका पसंद नहीं आता है। कुछ सप्ताह या महीने ऐसे होते हैं जब मैं अत्यधिक रचनात्मक और बहुत मज़ाकिया महसूस करता हूँ। तब मैं बहुत सी नई सामग्री लिखता हूँ जो सफल रहती है। फिर ऐसा समय भी होता है जब कुछ काम नहीं करता है और मुझे न दुख महसूस होता है, न मज़ाक सूझता है। जीवन बस अधिक तनावपूर्ण हो जाता है। ऐसा लगता है मानो मेरी निजी ज़िंदगी में कुछ हो गया हो।

स्टैंड-अप कॉमेडी करना मूलतः स्वतंत्र कार्य है। आपकी किसी महीने कमाई होती है और किसी महीने नहीं होती है। जीवन यापन एक आमदनी से दूसरी आमदनी तक चलता है, भले ही वह धनराशि बड़ी हो या छोटी। जैसे ही एक काम पूरा हो जाता है, आप दूसरे का इंतज़ार करने लगते हैं। आपकी मनोदशा इस बात से जुड़ी हो सकती है कि आप मंच पर कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। कभी-कभी आप नहीं जानते कि अपनी भावनाओं को कैसे संतुलित किया जाए। जब मेरे पास पूरे दिन का काम भी था और मैं रचनात्मक या मज़ाकिया महसूस नहीं कर रहा होता था या मैंने मंच पर खराब प्रदर्शन किया होता था तो वह मेरी एकमात्र पहचान नहीं थी। मैं सोच सकता था, “ओह, मेरे पास यह दूसरा काम भी है। और यह भी मेरा हिस्सा है।” उस समय ऐसा महसूस नहीं हुआ कि यही एकमात्र चीज़ थी जो मैंने की थी।

आजकल जब मंच पर प्रदर्शन अच्छा नहीं होता है तब संतुलन बनाना और यह महसूस करना कठिन होता है, “ठीक है, चलो इस पर सोचते मत रहो।” जैसे एक खिलाड़ी जिसका कोई खेल खराब हो गया, निरंतर उसके बारे में नहीं सोचना चाहेगा। आप थोड़ी देर ही उसे याद रखना चाहते हैं। बेहतर यही होता है कि आप इस बारे में ईमानदारी से सोचें कि खेल क्यों ठीक से नहीं हुआ लेकिन उस पर बहुत लंबे समय तक सोचते न रहें।

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प्रश्न - प्रदर्शन सफल न होने पर निजी रूप से परेशान न होना कठिन है। आपको कोई बात मज़ाकिया लगती है और आप लोगों के सामने खड़े होकर उसे बोलते हैं क्योंकि आपको वस्तुतः लगता है कि यह बोलने लायक है। संगीत के मामले में लोग कह सकते हैं, "हमें आपकी आवाज़ पसंद नहीं है।" स्टैंड-अप कॉमेडी के मामले में लोग कह सकते हैं, "आपकी सोच हमें पसंद नहीं है।" पिछले आठ वर्षों में मुझे यकीन है कि कई बार ऐसा हुआ होगा जब आपकी मनोदशा अलग थी या आप बस एक ऐसी स्थिति में थे जहाँ आपको कम मज़ाकिया महसूस हुआ। आपको ऐसी मनोदशा से उबरने में क्या मदद करता है?

शायद इसे कहना आसान है, करना मुश्किल। आप समय के साथ सीखते हैं कि यह समय हमेशा बीत जाएगा। ऐसे कई मौके आए जब मैंने खुद को बहुत मज़ाकिया महसूस किया और मंच पर बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। फिर थोड़े समय के लिए पूरी तरह से असफल रहा। इस तरह सफलता और असफलता के दौर आते रहते हैं। सिर्फ़ यह याद रखना ज़रूरी है कि ऐसा पहले भी हो चुका है।

अगर मैं यात्रा कर रहा होता हूँ तो मैं शहर के बारे में कुछ लिखने की कोशिश करता हूँ या कोई नया चुटकुला, एक नई पंक्ति लिखता हूँ। इससे वर्तमान में रहना आसान हो जाता है। मैं ऐसी स्थिति नहीं चाहता जिसमें ऐसा लगे कि इसका अधिकांश भाग पहले से लिखा गया था या कोई अभिनय है। मैं इसे यांत्रिक या बिना किसी भावना वाले नाटक की तरह नहीं सुनाना चाहता। अगर मैं अपने पसंदीदा संगीत समारोहों के बारे में सोचूँ तो ऐसा नहीं था कि वे सिर्फ़ अच्छे गायक ही थे बल्कि वे वहाँ आकर स्पष्ट रूप से बहुत खुश थे। हम सब इस क्षण में हैं। यही लक्ष्य है। जब मैं प्रदर्शन कर रहा हूँ तो मैं पूर्ण रूप से उपस्थित रहना चाहता हूँ। मुझे वह अच्छा लगता है। और इससे प्यार करना और भी मज़ेदार हो जाता है।

प्रश्न - जो उचित या सम्मानजनक माना जाता है उसकी सीमाएँ बदल रही हैं। मुझे लगता है कि बहुत सारे हास्य कार्यक्रम सीमाओं को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन साथ ही सम्मानजनक होने और इसे मनोरंजक बनाए रखने की कोशिश भी कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि यह आपकी अपनी व्यक्तिगत हास्य वृत्ति से और आप कितना अच्छा चुटकुला लिख सकते हैं, उससे संबंधित है। मैं कहूँगा कि मेरी हास्य वृत्ति का झुकाव गंभीरता से ज़्यादा अटपटी बातों की ओर रहता है। महान चुटकुला-लेखक किसी भी चीज़ का मज़ाक बनाकर बच सकते हैं क्योंकि अगर सही परिप्रेक्ष्य में बोला जाए तो आप किसी भी बात को मज़ेदार बना सकते हैं। आप किस बारे में मज़ाक कर सकते हैं, आप क्या कह सकते हैं और इसे कैसे समझा जा सकता है, यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप कौन हैं। यदि आप अपनी खुद की पहचान के बारे में मज़ाक कर रहे हैं तो यह स्वयं से भिन्न किसी समूह पर टिप्पणी करने से बहुत अलग है। आदर्श रूप से मैं ऐसे चुटकुले नहीं लिखता हूँ जिससे लोगों को बुरा लगे। अगर मैं कुछ ऐसा लिखता हूँ जिसका अर्थ गलत लगा लिया जाता है तो मैं वह मज़ाक फिर कभी नहीं करता। जब लोग ही उन चीज़ों के बारे में बात करते हैं जिनके बारे में आपको मज़ाक नहीं करना चाहिए तब आप जो चाहें मज़ाक कर सकते हैं पर अगर लोग नाराज़ हो जाते हैं तो यह एक प्रतिक्रिया है और यह पूरी तरह से उचित है।

प्रश्न - क्या आपने कभी कोई चुटकुला न सुनाने का निर्णय लिया है क्योंकि लोग नाराज़ हो गए? 

मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी कोई ऐसा पोस्ट या कुछ भी साझा किया है जो बहुत विवादास्पद हो। मुझे नहीं पता कि इसमें कुछ सही है या गलत - कुछ ऐसे विषय होते हैं जिनके बारे में आप किसी भी तरह से मज़ाक कर सकते हैं लेकिन वे परेशान करने वाले विषय होते हैं। भले ही चुटकुला सही तरीके से लिखा गया हो, कमरे में कोई ऐसा ज़रूर होगा जो इसे सुनना नहीं चाहेगा। हो सकता है कि वह उनके पिछले अनुभवों से जुड़ा हो। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या के बारे में मज़ाक कर सकता है। मैंने उन लोगों के साथ ऐसा होते देखा है जिनकी मैं परवाह करता हूँ। जब लोगों को कोई बुरा अनुभव होता है, वे उस स्मृति को सामने नहीं लाना चाहते, भले ही यह बहुत समझदारी से किया गया हो। मुझे लगता है कि यह उचित है। आदर्श रूप से हम नहीं चाहते कि लोगों की दशा शो से बाहर जाते समय उससे भी खराब हो, जिस हालत में वे शो देखने आए थे।


आप किस बारे में मज़ाक कर सकते हैं, आप क्या कह सकते हैं और इसे कैसे समझा जा सकता है, यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप कौन हैं। यदि आप अपनी खुद की पहचान के बारे में मज़ाक कर रहे हैं तो यह स्वयं से भिन्न किसी समूह पर टिप्पणी करने से बहुत अलग है।


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प्रश्न - आजकल बहुत कुछ ऐसा है जो काफ़ी चुनौतीपूर्ण लगता है। दुखी होने के लिए बहुत कुछ है। मुझे यह महत्वपूर्ण लगता है कि लोग अभी भी हँस रहे हैं और मज़ाक कर रहे हैं। हास्य-विनोद के महत्व के बारे में आप क्या सोचते हैं, खासकर अब?

स्टैंड-अप कॉमेडी के बारे में मेरा पसंदीदा हिस्सा एक चुटकुले का प्रारंभिक विचार है, इससे पहले कि आपको पता चले कि यह कारगर है या नहीं। यह बात अन्य कलाओं के बारे में भी सत्य है। जब मैं बड़ा हो रहा था, मुझे उस समय के ‘केल्विन एंड हॉब्स’ जैसे कार्टून याद हैं। यह सोचकर मैं उत्साहित हो जाता था कि कोई ऐसी विषयवस्तु बना रहा है जो मुझे अच्छी लगती थी। और इससे दुनिया एक बेहतर जगह लगती थी। कॉलेज में मेरे एक कक्ष साथी (roommate) ने मुझे माइक बर्बिग्लिया का एक हास्य कार्यक्रम दिखाया जो मुझे बहुत पसंद था। जब उसने मुझे यह व्यक्ति दिखाया, जिससे वह वास्तव में प्रभावित था और पसंद करता था, तो हम एक-दूसरे के और करीब आ गए और गहरे मित्र बन गए। हाई स्कूल में मेरे सबसे अच्छे दोस्तों के बारे में भी यही कहा जा सकता है; मैं अब भी वास्तव में उनके करीब हूँ। हम सभी को ‘फ़्लाइट ऑफ़ द कॉनकॉर्ड्स’ कार्यक्रम बहुत पसंद था और हमारे पास अलग-अलग शो और हास्य-कार्यक्रम से जुड़े चुटकुले थे जिनका हम आनंद लेते थे। हम साथ-साथ हँसते-हँसते और करीब आ गए। हम सभी में समान हास्य वृत्ति थी। यदि मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ उसका वैसा ही प्रभाव हो तो यह वास्तव में अच्छा होगा।

बो जॉनसन के बारे में और जानें YouTube: https://www.youtube.com/channel/UCLGWWlDBQUcW77ENfRCLeUw

Instagram: https://www.instagram.com/bojohnsoncomedy/?hl=en

कलाकृति - अनन्या पटेल


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बो जॉनसन

बो सिएटल, वाशिंगटन, के एक हास्य अभिनेता हैं। उन्हें अमेरिका और कैनेडा में क्लबों, मद्यनिर्माणशालाओं और नाट्यशालाओं में प्रमुख भूमिका निभाते हुए देखा जा सकता है। उनके स्टैंड-अप कॉमेड... और पढ़ें

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