दाजी हमें कार्यस्थल परपरिवार में और जिन लोगों से भी हम मिलते हैं उनके साथ दैनिक बातचीत में सद्भाव व सहानुभूति लाने के लिए और अपने बातचीत के कौशल को बेहतर बनाने के लिए कुछ सुझाव दे रहे हैं।

 

प्रिय मित्रों,

संवाद के बारे में मेरे पास बहुत से प्रश्न आते हैं - बातचीत का सही तरीका कैसा होना चाहिए? विवादों से कैसे बचें, खासकर प्रियजनों के साथ? कार्यस्थल पर बेहतर संवाद कैसे करें?

अभी तक इस लेखखंड (column) में हमने विभिन्न सरल अभ्यासों द्वारा व्यक्तिगत समग्र कल्याण को बेहतर बनाने के तरीकों के बारे में बात की है - जैसे हमारी चेतना के स्तर को बढ़ाने के लिए हार्टफुलनेस ध्यान करना, आंतरिक जटिलताओं व अशुद्धियों से खुद को मुक्त करने के लिए हार्टफुलनेस सफ़ाई करना और अपनी व्यक्तिगत पहचान के विलय के लिए हार्टफुलनेस प्रार्थना करना। हम इस विषय पर केंद्रित रहे हैं कि हम इन आध्यात्मिक अभ्यासों को कब करते हैं और वे प्रतिदिन हमारी कैसे मदद कर सकते हैं।

लेकिन हर रोज़ जागृत अवस्था के उन कई घंटों के बारे में क्या करना चाहिए जब हम दूसरे लोगों के साथ संवाद करते हैं? हर छोटी-छोटी बातचीत में हमारा चरित्र सामने आता है। हमारी बातचीत की गुणवत्ता कई तरह से हमारे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

तो क्या हम अपने बातचीत करने के तरीके को एक बेहतर इंसान बनने का तरीका भी बना सकते हैं? यहाँ कुछ सुझाव हैं जिनके द्वारा आप अपने बातचीत के कौशल को अधिक प्रभावी और शालीन बना सकते हैं।

जुड़ने का इरादा रखें

जुड़ने का अर्थ है खुलापन तथा हर पल उन चीज़ों के संपर्क में रहना जो दूसरों के लिए तथा आपके लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

सम्मानजनक और सहानुभूतिपूर्ण जुड़ाव बनाने का लक्ष्य रखें ताकि हर कोई अपनी बात रख पाए, उनको सुना व समझा जाए। सही होने या अपनी बात रखने से ज़्यादा महत्वपूर्ण और पोषक लोगों के साथ जुड़ाव होता है। इस तथ्य पर विश्वास करें।

जब कोई व्यक्ति यह महसूस करता है कि आप उसे समझते हैं तो वह भी आपको समझने के लिए तैयार होता है। दूसरों को समझने की इच्छा में उदारता, सम्मान, आत्म-नियंत्रण, सहानुभूति और धैर्य शामिल हैं। दूसरे आपसे कैसे भिन्न हैं, इस बारे में “उग्र होने के बजाए उत्सुक” रहें।

दूसरों को कार्य करने की स्वतंत्रता दें और उनकी प्रगति में आनंद लें।

बोलने से अधिक सुनें

हमारे पास दो कान और एक मुँह है जो हमें याद दिलाते हैं कि क्या महत्वपूर्ण है।

सुनना महत्वपूर्ण है। अक्सर हम केवल कुछ ही सुनते हैं तथा बोलने के लिए अपने मौके का इंतज़ार करते रहते हैं क्योंकि हम अपनी बात कहना चाहते हैं। जब हमारा ध्यान अपने ही विचारों पर होता है तब हम दूसरे की बात नहीं सुनते।

सुनने का अर्थ है दूसरे व्यक्ति की दुनिया में प्रवेश करना और उसे समझने का इरादा रखना, भले ही हम उसकी बात से सहमत न हों।

इस बात के प्रति सजग रहें कि आप दूसरे व्यक्ति की बातों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया कर रहे हैं। क्या आप ध्यान दे रहे हैं, निष्पक्ष हैं, खुले मन से सुन रहे हैं, सुनने की मनःस्थिति में हैं या आप पहले से ही अपने भीतर प्रतिक्रिया कर रहे हैं? अवचेतन स्तर पर आपके अंदर क्या चल रहा है, इसे दूसरा व्यक्ति महसूस कर लेगा।

ध्यानपूर्वक सुनें। सक्रिय रूप से सुनने पर आप दूसरों से क्या सीखते हैं?

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3. जुड़ाव, समझ और सामंजस्य

आपके अंदर की हर बात आपके शरीर, आपके चेहरे के हाव-भाव, आपकी आवाज़ के लहज़े और आपसे निकलने वाले स्पंदनों के ज़रिए व्यक्त होती है। दूसरे लोग उसे ग्रहण कर लेते हैं। क्या आपके शब्द इन पहलुओं के साथ सामंजस्य रखते हैं? अपने रिश्तों में जुड़ाव, समझ और सामंजस्य को बनाए रखने के लिए आपको अपने भीतर इन पहलुओं को गहराई से पोषित करने की ज़रूरत है।

सबसे पहले आती है आत्म-सहानुभूति। जितना अधिक हम अपने लिए सहानुभूति महसूस करते हैं उतना ही हम इसे दूसरों के लिए महसूस कर पाते हैं। जिन लोगों में आत्म-सहानुभूति उच्च स्तर पर होती है, वे बुद्धिमान और भावनात्मक रूप से अधिक दृढ़ होते हैं।

समानुभूति का अर्थ है दूसरों की ज़रूरतों को महसूस करना, उनसे जुड़ना और उन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कुछ करना - अपनी और दूसरों, दोनों की ज़रूरतों के लिए।

अपने आप से पूछें, “अगर मैं उनकी स्थिति में होता तो मैं क्या चाहता?” जब हम स्वयं को आत्म-केंद्रित, इच्छाओं से घिरा हुआ और अहंकारपूर्ण स्थिति में पाते हैं तब यह एक स्वाभाविक चेतावनी है – “दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने लिए चाहते हैं।”

आप जितना अधिक आनंदित होंगे, आपकी बातचीत और संवाद उतने ही हल्के और प्रेरणादायक होंगे।

मुझे आशा है कि ये कुछ सुझाव और हार्टफुलनेस के अभ्यास दूसरों के साथ आपके दैनिक संबंधों में और अधिक जागरूकता, आत्मविश्वास और आनंद लाने में सहायक होंगे।

मंगल कामना सहित,
दाजी

हार्टफुल कम्युनिकेशन पर अधिक जानकारी के लिए यहाँ जाएँ -

https://learning.heartfulness.org/courses/hc-english


जितना अधिक हम अपने लिए सहानुभूति महसूस करते हैं उतना ही हम इसे दूसरों के लिए महसूस कर पाते हैं। जिन लोगों में आत्म-सहानुभूति उच्च स्तर पर होती है वे बुद्धिमान और भावनात्मक रूप से अधिक दृढ़ होते हैं।


 


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दाजी

दाजी हार्टफुलनेसके मार्गदर्शक

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