आर्यन अरोड़ा एक युवा अभिनेता, संगीतकार और संगीत रचनाकार हैं। वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव के दौरान प्रज्ञा मिस्रा ने उनका साक्षात्कार लिया। इस साक्षात्कार में वे इस पर चर्चा कर रहे हैं कि ध्यान का उनकी रचनात्मकता एवं आंतरिक संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ा तथा अपने रास्ते की तलाश में संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए वे क्या सलाह देना चाहेंगे।
प्रश्न - हमें समय देने के लिए धन्यवाद। आप एक सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर (प्रभावी व्यक्ति) हैं। आपके लिए यह सब कैसे शुरू हुआ?
मैंने तीन वर्ष पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट करना शुरू किया था और अब मेरे लगभग 400,000 फ़ॉलोअर्स हैं। मैंने अपने अभिनय की कुछ परियोजनाओं से आरंभ किया था। उसके बाद मैंने संगीत विमोचन करना शुरू किया जिसमें ज़्यादातर हिंदी और अंग्रेज़ी गानों के कवर थे। फिर दाजी से मुलाकात के बाद मैं संगीत रचना करने में डूब गया।
मैंने दाजी से कॉन्टेंट (विषय सामग्री) बनाने वाले कलाकारों के बारे में पूछा। उन्होंने मुझसे कहा कि जब भी कलात्मक क्षेत्र में कोई व्यक्ति किसी विषय पर कार्य करता है तो उसके मन में एक उद्देश्य होना चाहिए ताकि कुछ अर्थपूर्ण रचना की जा सके। तब मैंने संगीत रचना करना प्रारंभ किया। मैं जीवन में गहराई में जाना चाहता था इसलिए ऐसे संगीत की रचना करने लगा जो ज़्यादा आध्यात्मिक थी।
प्रश्न - कान्हा में आप दूसरी बार आए हैं। आपने अपनी पिछली यात्रा के बाद कुछ परिवर्तन अवश्य महसूस किया होगा। आपको यहाँ क्या वापस खींचकर लाया है?
निश्चित रूप से दाजी और बाकी सभी लोग जो दाजी के सहयोगी हैं - वे स्वयंसेवक और वे लोग जिनसे मैं यहाँ मिलता रहा हूँ, जो हार्टफुलनेस के सार, प्रेम, को साकार करते हैं।
जब मैं पहली बार दाजी से मिला और हमने साथ में एक पॉडकास्ट किया तो दाजी ने मेरे दिल को छू लिया। मैं किसी अपेक्षा के साथ नहीं आया था लेकिन वे मुझे एक विशुद्ध परमानंद की स्थिति में ले गए। उनसे बात करना मात्र ही कितना अद्भुत था। मेरा पहला प्रश्न प्रेम के बारे में था। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है और हम विभिन्न आयामों पर बात करते गए जिसने मेरा दिल खोल दिया। मुझे याद है, मैं सोच रहा था, “एक कलाकार होने का मतलब क्या है? क्या यह केवल मनोरंजन के लिए सामग्री बनाना है या इसका उद्देश्य लोगों और समाज पर प्रभाव डालना भी है – कुछ ऐसा प्रस्तुत करना जो परिवर्तन ला सकता है?” तब से भावनाओं का एक सैलाब सा आ गया है। जिस क्षण मैंने कान्हा में दोबारा प्रवेश किया मैं प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया। ध्यान मुझे एक उत्तम दशा में ले आया है।
प्रश्न - आप यहाँ कान्हा में वैश्विक आध्यात्मिक महोत्सव के लिए आए हैं जहाँ पर अनेक आध्यात्मिक संगठन इस उद्देश्य से एक साथ मिल रहे हैं कि आंतरिक शांति से किस प्रकार विश्व शांति लाई जा सकती है। यदि हरेक व्यक्ति शांतिमय अवस्था में हो तभी हम सब समग्र रूप से एक ऐसे विश्व की स्थापना कर सकते हैं जहाँ पर कम युद्ध हों, ज़्यादा सहयोग हो और सब लोग एक साथ मिलकर रह सकें। मैं आपसे एक रचनाकार और इन्फ़्लुएंसर होने के नाते यह समझना चाहती हूँ कि आंतरिक शांति और आनंद को पाने के लिए आप क्या करते हैं?
मैं ध्यान करता हूँ। मैंने यहाँ कान्हा में ध्यान करना शुरू किया था। वह एक ऐसा सर्वोत्कृष्ट अनुभव था जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था। मैं किसी भी प्रकार की अपेक्षा के साथ नहीं आया था। मैं एक खुले दिल के साथ आया था। जो ऊर्जा मुझे मिल रही थी मैंने सिर्फ़ उसका अनुसरण किया। तब से मैं हार्टफुलनेस का नियमित अभ्यास कर रहा हूँ।
आंतरिक शांति के लिए मैं अपने भीतर जाने का प्रयास करता हूँ - विश्लेषण करने के लिए नहीं बल्कि अपने दिल की गहराई में जाने के लिए। हार्टफुलनेस ध्यान में हम यही तो करते हैं। यह एक बहुत बड़ा अंतर लाता है। जब भी मैं जीवन, समस्याओं, दुनिया में होने के उद्देश्य या मैं यह क्यों कर रहा हूँ आदि चीज़ों के बारे में सोचता हूँ तो मैं बस अपने हृदय की गहराई में जाता हूँ और आगे बढ़ता हूँ।
दाजी से मिलने और हार्टफुलनेस शुरू करने से पहले मैं कुछ मौलिक सामग्री बना रहा था जो प्रेम पर केंद्रित थी क्योंकि मैं हमेशा लोगों से दिल से मिलता हूँ और बात करता हूँ। लेकिन मैं अपने लेखन में वह गहराई नहीं ला पा रहा था। जब मैं दाजी से मिला और दिल्ली वापस लौटा तो मेरी माँ ने कहा, “तुम्हें क्या हुआ है?” मैं आत्म-खोज की अवस्था में था।

आंतरिक शांति के लिए मैं अपने भीतर जाने का प्रयास करता हूँ - विश्लेषण करने के लिए नहीं बल्कि अपने दिल की गहराई में जाने के लिए। हार्टफुलनेस ध्यान में हम यही तो करते हैं।
मैं गहरे अर्थों वाले गीत लिखने लगा। इसमें वह गाना भी शामिल है जो अभी रिलीज़ नहीं हुआ है। उसका यह भाव है कि हम सब इस पृथ्वी पर भटकती आत्माएँ हैं और हम सब सच को खोजने का प्रयास कर रहे हैं। अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सब खुशी को पाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हम यह नहीं समझ पाते हैं कि यह खुशी अस्थायी है जबकि वास्तविक खुशी आपके अंदर ही है। है कि नहीं? जब आप स्वयं से संतुष्ट होते हैं तभी आप वास्तविक खुशी महसूस करते हैं।
लोग कहते हैं, “मैंने अभी कुछ हासिल नहीं किया है, मैं अभी सफल नहीं हूँ।” लेकिन सफलता के बारे में अब मेरे सोचने का तरीका है कि आप अपने अंदर कैसा महसूस करते हैं। जो आप कर रहे हैं, यदि आपकी आत्मा उससे संतुष्ट है तो आप सफल हैं।
हम सोशल मीडिया के युग में रह रहे हैं। उस व्यक्ति के लिए जो पहले से ही एक इन्फ़्लुएंसर है या सोशल मीडिया में जाने का सोच रहा है, उसका बहुत सारा समय ‘लाईक्स’ और ‘फ़ॉलोअर्स’ जैसे पहलुओं पर खर्च हो जाता है। आप शायद सोच सकते हैं, “मुझे यह नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर पर्याप्त लोग मेरे साथ नहीं जुड़े तो क्या होगा?” या “यदि मैं यह करूँगा तो मुझे ज़्यादा कमेंट्स मिलेंगे। ज़्यादा लड़कियाँ फ़ॉलो करेंगी। लड़कियाँ इसे ज़्यादा पसंद करेंगी।”
मैं आजकल बहुत जल्दी-जल्दी पोस्ट नहीं करता हूँ - महीने में बस एक या दो बार। अपना काम दिल से करें। यदि आप किसी विशिष्ट स्थिति पर पहुँचना चाहते हैं और किसी चीज़ का प्रचार करना चाहते हैं तो वह ऐसा हो जिसे आप दिल से पसंद करते हों। जो लोग योग के क्षेत्र में हैं, वे इसे इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे योग से प्रेम करते हैं। वे उस सुंदर कला को सारे विश्व में फैलाना चाहते हैं। मैं भी ऐसा ही संगीत, अभिनय और अपनी रचनाओं से कर रहा हूँ।
प्रश्न - मैं पूरी तरह से सहमत हूँ। लेकिन अक्सर यह बहुत मुश्किल होता है जब आप अपने हृदय की गहराई में जाकर देखने के लिए संघर्ष कर रहे हों और कहें, “हाँ, मैं यही करना चाहता हूँ।” हालाँकि आप इस पर विश्वास करते हैं लेकिन आपके पास हमेशा हृदय के अनुसार चलने का साहस नहीं होता। क्या आपने कभी ऐसी परिस्थिति का सामना किया है? आपको अपने रास्ते पर टिके
रहने में किस चीज़ ने मदद की है?
मुझे खुशी है कि आपने यह प्रश्न पूछा। लगभग एक वर्ष पहले मैं अवसाद की स्थिति में था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या अनुभव कर रहा था। मेरी माँ ने उसे भाँप लिया। और आप जानती ही हैं कि माँएँ कितनी भावुक और प्रेममयी होती हैं। हालाँकि मेरी माँ आध्यात्मिक हैं और ध्यान करती हैं लेकिन वे जानती थीं कि मैं उस समय थोड़ा अड़ियल था। जब आप आध्यात्मिकता में आते हैं तो शुरुआत में यह हमेशा आसान नहीं होता है। मैं सोचता था कि यदि भौतिक चीज़ें आपको खुशी नहीं दे सकती हैं तो यह फिर किस चीज़ से मिलेगी? इस बात से मैं अवसाद की स्थिति में पहुँच गया था, एक तरह के चक्कर में फँस गया था। मैं सोचता रहता था, सोचता रहता था, सोचता रहता था और इतना ज़्यादा सोचता था कि मैं अवसाद के कगार पर पहुँच गया। मैं एक चिकित्सक के पास गया और उसने कहा, “आपको जीवन भर दवाइयाँ लेनी पड़ेंगी।” तब मेरी माँ ने कहा, “ठीक है, अब मेरी बात सुनो, थोड़ा ध्यान करना शुरू करो।”

एक कलाकार के लिए अपना हृदय खोलने का एक तरीका संगीत की रचना करना है। अवसाद के बाद और एक या दो महीने ध्यान करने के बाद मैं अपने दिल से गीत लिखने लगा और इसने मेरा पूरा जीवन बदल दिया। ध्यान और आध्यात्मिकता ने मेरे अंदर के कलाकार की रचनात्मकता को बाहर निकलने में मेरी सहायता की।
हमने सुबह और शाम ध्यान करना आरंभ किया। पहले सप्ताह ज़्यादा कुछ महसूस नहीं हुआ। दूसरे सप्ताह मुझे थोड़ा आराम महसूस हुआ और कुछ महीनों के बाद सब कुछ बदल गया। अवसाद मेरे लिए एक उत्प्रेरक था क्योंकि मैंने कभी भी संगीत की रचना नहीं की थी। मैं केवल दूसरे लोगों के गाने गा रहा था। एक कलाकार के लिए अपना हृदय खोलने का एक तरीका संगीत की रचना करना है। अवसाद के बाद और एक या दो महीने ध्यान करने के बाद मैं अपने दिल से गीत लिखने लगा और इसने मेरा पूरा जीवन बदल दिया। ध्यान और आध्यात्मिकता ने मेरे अंदर के कलाकार की रचनात्मकता को बाहर निकलने में मेरी सहायता की।
मैंने प्रख्यात निर्देशक डेविड लिन्च के साथ एक पॉडकास्ट किया था। उन्होंने मुझसे कहा था कि जब अभिनेता कमरे में प्रवेश करते हैं तो कई बार लोग कहते हैं, “ओह! इसमें ‘वो’ खास बात है।” क्यों? क्योंकि उसमें आपका रूप-रंग, अच्छा पहनावा, चेतना, ऊर्जा और आपकी वह आध्यात्मिकता शामिल है जिससे आपकी आत्मा बात कर रही है। कभी-कभी आप अपने बारे में लोगों के दृष्टिकोण को बदल देते हैं और आप लोगों को एक ऊर्जा दे देते हैं। जब कुछ समय तक आप ध्यान करते हैं तो यह दूसरे लोगों के साथ आपके अनुभव को बदल देता है, आपके रिश्तों को बदल देता है। यह केवल खुद को और अधिक समझना ही नहीं है बल्कि यह आपके लोगों से बात करने के तरीके और परिस्थितियों को संभालने के तरीके को भी बदल देता है।
उदाहरण के लिए, अगर रोज़मर्रा के जीवन में कुछ घटित होता है, चाहे छोटा हो या बड़ा - एक व्यापारिक सौदा या किचन में एक बर्तन का टूटना - पहले मेरी प्रतिक्रिया होती थी, “हे ईश्वर, यह क्यों हो रहा है?” मेरी पीड़ित होने की मानसिकता लगातार उछलती ही रहती थी। लेकिन जब से मैंने नियमित ध्यान करना शुरू किया है यह स्थिति बदल गई है। मैंने दाजी के साथ जुड़े हुए लोगों को देखा है। वे अपने आपसे बहुत संतुष्ट हैं। वे जानते हैं कि कैसे व्यवहार करना है और विभिन्न परिस्थितियों में कैसी प्रतिक्रिया देनी है।
प्रश्न - मैं पूर्णतया सहमत हूँ। हार्टफुलनेस ने मुझे भी केंद्रित होने में और प्रतिक्रिया के बजाय प्रत्युत्तर देने में बहुत सहायता की है।
बिलकुल सही। जब आप कम से कम अपने रास्ते में बाधा पैदा करते हो और आप उस अवस्था में तल्लीन रहते हो तब ध्यान आपको वह विनम्रता देता है जो आपको यह एहसास कराती है कि आप कितने महत्वहीन हो और फिर भी आप महत्वपूर्ण हो। इस जीवन में प्राप्त महत्व के साथ आप क्या हासिल कर सकते हो? मुझे लगता है कि यह वही है जो दाजी आत्मबोध और स्वयं को पाने के बारे में कहते हैं।
जब मैं ज़्यादा ध्यान करता हूँ तब मैं लोगों के साथ दिल से जुड़ता हूँ और ये संबंध लंबे समय तक चलते हैं। आखिरकार दूसरा व्यक्ति भी यह महसूस कर सकता है और समझ सकता है कि आप उसके साथ दिल से जुड़ रहे हैं। यदि यह रिश्ता एक लेन-देन के बारे में है तो वे तुरंत ही समझ जाते हैं।

आध्यात्मिकता में एक सहज संतुलन है, ऐसी मादकता व तल्लीनता जिसका असर कभी नहीं उतरता।
प्रश्न - अक्सर जब युवा लोग अवसाद से ग्रस्त होते हैं या किसी प्रकार का संघर्ष कर रहे होते हैं तब सबसे आसान रास्ता नशा होता है। आप उसमें जाने से कैसे बच गए? या फिर आपने कभी ऐसा किया था और आप कुछ साझा करना चाहेंगे?
मैंने किया था। मैं पूरी ईमानदारी से बताऊँगा क्योंकि मेरे बहुत सारे दर्शक अमेरिका और पश्चिमी जगत से हैं। मॉरिजुआना सभी जगहों पर कानूनी तौर पर वैध है और उसका प्रचार चिकित्सकीय उपयोग के रूप में किया जाता है जो शायद किन्हीं विशेष परिस्थितियों में हो भी सकता है। कैलिफ़ोर्निया और न्यूयार्क में इसके औषधालय हैं। हर सामाजिक समूह में आपके मित्र पूछते हैं, “तुम धूम्रपान करना चाहते हो?” मुझे अभी भी याद है, मैं एक शूटिंग के लिए फ़्लोरिडा गया था। हम काफ़ी पैसा कमा रहे थे। मैंने सोचा, “अब आराम और मज़ा करने का समय है। चलो, कुछ चरस-गांजा पीते हैं।” आप एक बार चरस फूँकते हैं और वह एक बहुत ही अच्छा अनुभव देता है। और संगीतकार होने के नाते आप अमेरिका के किसी भी रिकार्डिंग स्टूडियो में चले जाओ, वे पूरी तरह से धुएँ से भरे हुए होते हैं।
मैंने अपनी माँ को बताया, “माँ, मैंने चरस ली है।”
और वे बोलीं, “क्या!”
मैंने कहा, “माँ, मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझे बहुत खराब लग रहा है।”
वे बोलीं, “तुम यह क्यों कर रहे हो?”
मैंने उनसे कहा, “माँ, मुझे नहीं पता। मुझे ऐसा लगा कि यह मेरी रचनात्मकता को बाहर लाता है।”
फिर मुझे पता चला कि ध्यान और आध्यात्मिकता से ऐसी मादकता छाती है जो चरस कभी भी नहीं दे सकती। किसी भी नशे में, कुछ घंटों की मादकता के बाद आपका नशा उतरने लगता है। लेकिन आध्यात्मिकता में एक सहज संतुलन है, ऐसी मादकता व तल्लीनता जिसका असर कभी नहीं उतरता।
प्रश्न - क्या आपको लगता है कि हम साथियों के साथ जुड़े रहने या उनके अनुकूल बनने की कोशिश में उनके दबाव में आ जाते हैं? हम अक्सर ऐसे काम करते हैं जो हमारे मूल्यों से मेल नहीं खाते। जब मैं छोटी थी तब मैंने भी यह किया था और मैं जानती हूँ कि बहुत सारे लोग अभी यही कर रहे हैं। आप उनसे क्या कहना चाहेंगे जो उन्हें इससे बचने और यह कहने का साहस दे, “मैं इस जाल में फँसने वाला नहीं हूँ। मैं वही करूँगा जो मैं समझता हूँ कि मेरे लिए सही है?”
जब आपके कई मित्र हों और खासकर वे वर्षों पुराने मित्र हों तो यह आसान नहीं होता। यह और अधिक मुश्किल होता है जब वे उसी व्यवसाय में हों जिसमें आप हैं और विशेषकर यदि वे सफल भी हों। यह कॉलेज या हाईस्कूल से अलग होता है जब परीक्षा के पहले कोई आपको नशीले पदार्थ देता है। लेकिन जब आप बड़े हो जाते हो, आप अच्छा पैसा कमाने लगते हो और अपने काम में सफलता हासिल करते हो तब बात अलग होती है। तब जो लोग आपके आसपास चरस फूँकते हैं वे आप पर भी इसे लेने के लिए दबाव डालते हैं।
ध्यान को आज़माएँ। इसे सिर्फ़ एक बार ही न करके देखें। इसे कुछ हफ़्तों या एक महीने तक करें। यह परिवर्तन लाएगा। आप अपने जीवन में आध्यात्मिक के साथ-साथ भौतिक प्रगति का भी अनुभव करेंगे।
आजकल, मैं एक गहरी साँस लेता हूँ और एक अल्पकालिक ध्यान कर लेता हूँ। यह मैं 100% ईमानदारी से कह रहा हूँ। ध्यान के दौरान प्राप्त उस प्रकार के मौन की दशा, विशुद्ध परमानंद की स्थिति, आपको अपनी आत्मा से जोड़ देती है। जब आप ध्यान से बाहर आते हैं तो आपके पास इस बारे में कोई विचार नहीं होते कि दूसरे लोग क्या कह रहे हैं। आप अब उतने प्रभावित नहीं होते जितने कि आप पहले होते थे। यहाँ तक कि केवल एक बार के ध्यान में ही आप अपने सोचने के तरीके को परिवर्तित कर सकते हैं।
हम सबकी परिस्थिति एक-दूसरे से एकदम अलग है चाहे परिवार हो, दोस्त हों या फिर जहाँ हमारा लालन-पालन हुआ हो। साथ ही, अंततः हम घर छोड़ देते हैं, दोस्त बनाते हैं और साथियों के दबाव से बचना बहुत मुश्किल होता है।
मैं तो कहूँगा कि एक गहरी साँस लें और अपनी आत्मा से जुड़ जाएँ। ध्यान को आज़माएँ। इसे सिर्फ़ एक बार ही न करके देखें। इसे कुछ हफ़्तों या एक महीने तक करें। यह परिवर्तन लाएगा। आप अपने जीवन में आध्यात्मिक के साथ-साथ भौतिक प्रगति का भी अनुभव करेंगे।
हमसे बातचीत करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। हम आपके आने वाले मधुर संगीत को देखते-सुनते रहेंगे।
धन्यवाद।


