फ़ियोना नियरी भारत में दाजी के घर पर एक रात्रिभोज का वर्णन करती हैं, जहाँ टिमटिमाते तारों के नीचे किया गया ध्यान और बगीचे में बैठकर सुनी कहानियाँ, ऐसी स्थायी याद बन गईं जो आज भी जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को प्रेरित करती हैं।
जनवरी 2023 में मैं हार्टफुलनेस संस्थान के मुख्यालय, कान्हा शांतिवनम् गई थी और तब मुझे दाजी के घर पर रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किए जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं अपनी माँ के साथ पहली बार भारत गई थी। हम न्यूयॉर्क से आए अभ्यासियों के एक छोटे से समूह के साथ उनकी बैठक में इकट्ठे हुए थे। बैठक कक्ष में बगीचे की ओर बड़ी गोल खिड़कियाँ थीं और फ़र्श पर उभरे हुए बड़े-बड़े प्राकृतिक पत्थर थे, जिन्हें देखकर लगता था जैसे प्रकृति और इमारत की सुंदर संरचना के बीच कोई स्पष्ट सीमा रेखा नहीं थी।
जब दाजी अपनी सफ़ेद रंग की कार में आए तब उन्होंने खिड़की से मुस्कुराते हुए “नियरी गर्ल!” कहकर मुझे संबोधित किया (मेरे माता-पिता वर्षों से उनके साथ अभ्यास करते रहे हैं), जिससे मेरे दिल में गर्मजोशी और बढ़ गई। हमें रात के आकाश तले आँगन में बाहर बैठकर ध्यान करने के लिए निर्देशित किया गया। हम अपने आध्यात्मिक गुरु के पास नीली कुर्सियों पर अर्धचंद्राकार में बैठे थे। मेरी नई दोस्त, ईशा, मेरी बगल में बैठी हुई थी। जब आप आध्यात्मिक व्यक्तित्व के सान्निध्य में होते हैं तब वातावरण में कुछ बदलाव स्वत: ही आ जाता है। अपने विचारों पर गौर किया तो मैंने अपने भीतर खालीपन व शांति का अनुभव किया और ऐसा लगा जैसे मेरे हृदय में प्रेम भर रहा था।
हार्टफुलनेस ध्यान पद्धति में हमेशा एक ऐसे जीवित मार्गदर्शक या ‘गुरु’ रहते हैं जिन्होंने चेतना का उच्चतम स्तर प्राप्त कर लिया है और जो दूसरों को उनकी आंतरिक दुनिया में महारत हासिल करने के लिए मार्गदर्शन दे सकते हैं। वे उन्हें आध्यात्मिक यात्रा में आगे बढ़ने के लिए उत्साहपूर्वक सहायता प्रदान करते हैं। वे अभ्यासियों के हृदयों में प्राणाहुति संप्रेषित करके अपने पूर्व गुरुओं से प्राप्त ज्ञान को सीधे उन्हें देते हैं। यह बात बहुत अच्छी है कि इस समय वे हमारे लिए सशरीर उपस्थित हैं और हमें प्राचीन ग्रंथों के आधार पर उनकी उपस्थिति की कल्पना करने की आवश्यकता नहीं है।
मुझे अपने हृदय में हल्कापन महसूस हुआ और मुझे लगा जैसे कि मेरी जागरूकता ऊपर तारों भरे आकाश की असीमितता में विस्तारित हो गई थी और वह मेरे शरीर की सभी कोशिकाओं से जुड़ी हुई थी। मौन एक तरह की ध्वनि बन गया और आस-पास के लोगों की शांत उपस्थिति के कारण हम आत्मचिंतन करने लगे।
थोड़ी देर बाद हम बगीचे में चले गए और हमें सबसे स्वादिष्ट भारतीय भोजन परोसा गया। दाजी ने हमें कहानियाँ सुनाईं और मेहमानों ने उनसे जीवन के बारे में प्रश्न पूछे। घटनाएँ यादें बनाती हैं और हमारे दिलों में भावनात्मक छाप छोड़ देती हैं। जैसे-जैसे जीवन में हम आगे बढ़ते हैं, सकारात्मक पलों को अपने दिलों में संजोए रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कठिन अनुभव अक्सर ज़्यादा उभरकर सामने आते हैं। जब भी मैं इस वाकये को याद करती हूँ तब मैं तुरंत अपने भीतर जुड़ाव महसूस करने लगती हूँ मानो मैं अभी भी वहीं उस पल में हूँ।
जब मैं दाजी के बारे में सोचती हूँ तब कई दृश्य मेरी आँखों के सामने आ जाते हैं - जैसे पेड़ों की पंक्तियों से घिरे शानदार रास्ते, सूर्यास्त के बाद लड़ियों से जगमगाते ताड़ के पेड़, सूर्योदय के समय ‘यात्रा उद्यान’ के ऊपर उठती धुंधली हवा, फलते-फूलते वर्षावन, ध्यान कक्ष के ऊपर पक्षियों के पंख फड़फड़ाने की आवाज़ और दूर छतों पर झुंड बनाकर बैठे पक्षी। यह सब कभी एक खूबसूरत सपना था। महज़ कुछ दस साल पहले, कान्हा सिर्फ़ बंजर ज़मीन था। मैं इन्हीं गुणों को अपनाना चाहती हूँ और जिस तरह मैं अपने द्वारा चित्रित जंगली फूलों को देखती हूँ और अपने आस-पास के अजनबियों से जुड़ाव महसूस करती हूँ उसी तरह मैं अपने अंदर शांति विकसित करना चाहती हूँ। उनकी बैठक के अंदर के पत्थर की तरह, उन तारों की तरह जिन्हें मैंने अपने हृदय में महसूस किया, मैं भी सरल और हमेशा प्राकृतिक तंत्र के हिस्से के रूप में खुद को महसूस करना चाहती हूँ।

फ़ियोना नियरी
फ़ियोना ने न्यू यॉर्क के यूनिवर्सिटी ऐट अल्बेनी से ललित कला और स्पेनिश की पढ़ाई की है। वे हार्टफुलनेस की ... और पढ़ें
