महोत्सव के अंतिम सत्र में राष्ट्रमंडल की महासचिव माननीया पेट्रिशिया स्कॉटलैंड के.सी. ने पूरी दुनिया में आध्यात्मिकता का प्रसार करने, सभी धर्मों व संस्कृतियों के लोगों को एकजुट करने और प्रकृति का पोषण करने में दाजी की भूमिका की चर्चा की। उनके कार्य के सम्मान में, उन्होंने दाजी को राष्ट्रमंडल में शांति व आस्था स्थापित करने वाले वैश्विक राजदूत की उपाधि प्रदान की। यह सम्मान प्रदान करते समय उनके द्वारा दिया गया भाषण प्रस्तुत है।
आप सभी को मेरा हार्दिक प्रणाम। इस शानदार जगह पर लौटना वास्तविक सम्मान है। दूरदृष्टि, प्रतिभा और परिश्रम ने यहाँ की पथरीली और बंजर भूमि को हरे-भरे परिसर में बदल दिया है। यहाँ का वर्षा-वन फलते-फूलते वृक्षों की लुप्तप्राय स्थानीय और वैश्विक प्रजातियों, औषधीय व भोज्य वनस्पतियों और जैविक खेती से संपन्न है। यह परिसर प्रकृति के साथ सामंजस्य का एक अनुपम उदाहरण है। यात्रा गार्डन और इन पवित्र कक्षों में हर एक कदम पर शांति और नवीन ऊर्जा प्राप्त होती है।
यह स्थान उस हार्टफुलनेस पद्धति का भौतिक सत्यापन कर रहा है जिसका आप इतने सालों से अभ्यास कर रहे हैं और जिसे आप पूरी मानवता के साथ साझा कर रहे हैं। हम बाबूजी की 125वीं जयंती के एक महीने पहले यहाँ हैं जो उनकी चिरस्थायी विरासत का एक उचित स्मारक है।
विनम्र सेवा, भक्ति और प्रेम से परिपूर्ण उनके जीवन की छाप अचूक है। यह यहाँ मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के आचरण में प्रतिध्वनित होता है। यह हमारे प्रिय मित्र और भाई, दाजी की दूरदृष्टि और उनके कुशल नेतृत्व में हमेशा झलकता है जिन्होंने एक बार फिर से इस अद्भुत जगह पर इतनी शालीनता से हमारा स्वागत किया है।
राष्ट्रमंडल एक परिवार है। हम 56 राष्ट्र और 250 करोड़ लोग हैं जो पाँच महाद्वीपों और छह महासागरों में फैले हुए हैं। हम सभी के हृदयों में शांति, समझ और आपसी सम्मान के साझा मूल्य विद्यमान हैं। दाजी, हार्टफुलनेस पद्धति के मार्गदर्शक के रूप में आप इन सभी मूल्यों का मूर्त स्वरूप हैं। आपका विवेक, आपकी करुणा और मानवता की आध्यात्मिक भलाई के लिए आपकी अटूट प्रतिबद्धता इस अभियान के माध्यम से निरंतर प्रसारित हो रही है। आपके नेतृत्व ने हार्टफुलनेस पद्धति के विकास को पोषित किया है। ऐसा करते हुए आपने दुनिया भर के अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। आज 160 देशों में 50 लाख से अधिक अभ्यासी हैं और आपकी संस्था 16000 से अधिक स्वयंसेवी प्रशिक्षकों के समर्पित सहयोग से विश्व भर के 5000 से अधिक केंद्रों में काम कर रही है।
आपका प्रभाव दूर-दूर तक फैला हुआ है। हार्टफुलनेस पद्धति आज आंतरिक रूपांतरण के लिए एक वैश्विक शक्ति बन गई है जो महाद्वीपों और संस्कृतियों के परे जाकर इसे धीरे-धीरे फैला रही है तथा सचेतनता, करुणा और आध्यात्मिक कल्याण के बीज रोपित कर रही है। आपकी शिक्षाएँ गहराई तक प्रतिध्वनित होती हैं और शांति तथा आत्म-खोज का मार्ग प्रशस्त करती हैं। ध्यान और आध्यात्मिकता की आपकी पद्धति गहन भी है और सुलभ भी जो सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की यात्रा में साधकों का मार्गदर्शन करती है।
आपकी इस दूरदर्शिता ने एक ऐसे हार्टफुलनेस समुदाय को विकसित किया है जो मुख्यतः प्रेम, एकता और सचेतनता पर केंद्रित है और इस अधिकाधिक अराजक दुनिया में विविध पृष्ठभूमि से आए साधकों को सुकून और आध्यात्मिक पोषण प्रदान करता है। सेवा के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता और साथ ही मानव हृदय की आपकी गहन समझ कृपा, विनम्रता, प्रेरणा और असीम करुणा की विरासत विकसित करती है। अपने जीवन में हम सभी परिवर्तन की सकारात्मक लहर बनाने और उसे दूसरों तक प्रसारित करने की कोशिश में लगे रहते हैं। आपने जो तरंगें बनाई हैं, वे विशाल और स्थायी हैं। उनसे एक ऐसा प्रवाह बन सकता है जो प्रतिरोध की शक्तिशाली दीवारों को भी ढहा सकता है और हम सभी को निरंतर प्रेरणा प्रदान कर सकता है।

आपके सम्मान में, आपकी दूरदर्शिता, आपके नेतृत्व और सेवा के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता के सम्मान में, राष्ट्रमंडल देशों की महासचिव के रूप में मैं आपको “ग्लोबल अम्बेसडर फ़ॉर पीसबिल्डिंग एंड फ़ेथ इन द कॉमनवेल्थ” (राष्ट्रमंडल में शांति व आस्था स्थापित करने वाले वैश्विक राजदूत) की यह उपाधि देने में स्वयं को गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रही हूँ।
आपके सम्मान में, आपकी दूरदर्शिता, आपके नेतृत्व और सेवा के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता के सम्मान में, राष्ट्रमंडल देशों की महासचिव के रूप में मैं आपको “ग्लोबल अम्बेसडर फ़ॉर पीसबिल्डिंग एंड फ़ेथ इन द कॉमनवेल्थ” (राष्ट्रमंडल में शांति व आस्था स्थापित करने वाले वैश्विक राजदूत) की यह उपाधि देने में स्वयं को गौरवान्वित और सम्मानित महसूस कर रही हूँ।

पेट्रिशिया स्कॉटलैंड
राष्ट्रमंडल की महासचिव नियुक्त होने वाली पहली महिला के रूप में, पेट्रिशिया ने अपने व्यावसायिक जीवन में कई चीजें ऐसी कीं जो दुनिया में पहली बार हुईं। वे राष्ट्रमंडल के 56 देशों को जल... और पढ़ें
