आत्म-विश्वासअपनेपन और आंतरिक मार्गदर्शन पर लिया कुमार की एक प्रेरक कहानी।

ज़ूरी एक छोटी सी जुगनू थी। वह बहुत घबराई हुई थी। कुछ ही घंटों में उसका परिवार जंगल में एक नई जगह की ओर लंबा सफ़र शुरू करने वाला था। अपने सभी भाई-बहनों में सबसे छोटी होने के कारण ज़ूरी ने अभी अपनी रोशनी का इस्तेमाल करना सीखा ही था। उसके सभी भाई-बहनों के लिए अपनी पूरी रोशनी के साथ चमकना बहुत आसान था, लेकिन उसकी रोशनी सिर्फ़ एक धीमी टिमटिमाहट पर अटकी हुई थी। वह हर दिन घंटों अभ्यास करती थी लेकिन फिर भी उसकी रोशनी बाकियों से आधी ही चमकदार थी। इतना ही नहीं, उसने पहले कभी इतनी लंबी उड़ान भी नहीं भरी थी। जल्द ही परिवार अपने पंख फैलाने लगा और उड़ान भरने की तैयारी करने लगा। “उम्मीद है तुम हमारी गति से उड़ पाओगी, ज़ूज़ू!” उसके भाई-बहनों ने उसका मज़ाक उड़ाया और वे उड़कर दूसरों के पास चले गए। ज़ूरी ने देखा कि वे कितनी आसानी से उड़ रहे थे और अंधेरे आसमान में अपनी चमकदार रोशनी से रास्ते बना रहे थे। यह देखकर उसकी घबराहट डर में बदल गई।

आज रात तुम्हें कुछ नहीं होगा, ज़ूरी,” एक जानी-पहचानी स्नेहभरी आवाज़ आई। यह आवाज़ ज़ूरी की दादी माँ की थी। दादी जुगनू ने ज़ूरी के हाथ अपने हाथों में लिए, हिम्मत बंधाते हुए मुस्कुराईं और बोलीं, “मुझे पता है कि तुम आज रात के सफ़र को लेकर चिंतित हो लेकिन हमेशा याद रखना कि एक महान प्रकाश है जो हम सबके अंदर मौजूद है, बस अपना दिल खोलो और यह तुम्हें हमेशा घर का रास्ता दिखाएगा।” यह सुनकर ज़ूरी मुस्कुराई। वह अब काफ़ी बेहतर महसूस कर रही थी। उसने दादी का हाथ पकड़ा और दोनों झुंड में शामिल होने के लिए उड़ चलीं।

कुछ घंटे बीत गए, झुंड अब भी उड़ रहा था और नई जगह की ओर लगातार बढ़ रहा था। हालाँकि ज़ूरी झुंड में सबसे तेज़ नहीं उड़ रही थी, लेकिन वह किसी तरह उनके साथ बनी हुई थी और उसके पंख थके भी नहीं थे। “शायद मैं बेकार में ही चिंता कर रही थी,” नन्ही ज़ूरी ने मन ही मन सोचा।

 

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अभी वह ऐसा सोच ही रही थी कि अचानक आसमान का रंग गहरा होने लगा। काले-काले बादल घिर आए। और इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप उसके चारों ओर जुगनुओं की रोशनी तेज़ हो गई। समूह के बीच आवाज़ें गूँजने लगीं, “सब एक साथ रहो!” “पानी से बचना!” हवा शोर करती हुई और चक्कर खाती हुई बहने लगी। इसलिए झुंड तेज़ी से उड़ने लगा लेकिन ज़ूरी को उनके साथ बने रहने में मुश्किल हो रही थी। तभी हवा का एक ज़ोरदार झोंका ठीक उसके पंखों के नीचे से गुज़रा और उसे बहुत दूर ले गया।

जब उसने अपने आसपास नज़र घुमाई, तब उसने देखा कि जंगल में अंधेरा छाया था। ज़ूरी अपने जुगनू परिवार की स्पष्ट दिखाई देने वाली चमक की तलाश में गोल-गोल घूमने लगी, लेकिन उसे केवल गहरे रंग के पेड़ और परछाइयाँ ही दिखाई दे रही थीं। इस विशाल, अंधेरे तूफ़ान में उसकी अपनी धीमी रोशनी बहुत फीकी लग रही थी। ज़ूरी बस गोल-गोल घूमती रही। वह बहुत अकेली महसूस कर रही थी और उसे डर लगने लगा था।


एक महान प्रकाश है जो हम सबके अंदर मौजूद हैबस अपना दिल खोलो और यह तुम्हें हमेशा घर का रास्ता दिखाएगा।


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आखिरकार, जब उसके पंख थक गए तब वह आराम करने के लिए एक पत्ते में सिमटकर बैठ गई। तभी उसे अपनी दादी के शब्द याद आए, “एक महान प्रकाश है जो हम सबके अंदर मौजूद है, तुम्हें बस उसे महसूस करने के लिए अपना दिल खोलने की ज़रूरत है।” ज़ूरी ने अपनी आँखें बंद कीं और अपने दिल को खोलते हुए अपने चिंता भरे विचारों को शांत किया। उसे एक स्नेहपूर्ण, चमकदार उपस्थिति महसूस होने लगी। उसे ऐसा लगा जैसे वह अपनी दादी, अपने परिवार और सारी दुनिया के लिए अपने दिल में भरे प्यार को महसूस कर सकती है, जो उसके दिल से निकलकर चारों ओर बह रहा था। जैसे ही ज़ूरी ने इस स्नेह भरी ऊर्जा को अपने आसपास महसूस किया, उसने अपनी आँखें खोलीं और यह देखकर चौंक गई कि उसकी अपनी रोशनी अंधेरे आसमान में कितनी तेज़ी से चमक रही थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था। वह गोल-गोल घूमते हुए यह देखने लगी कि उसकी रोशनी उन परछाइयों को भी प्रकाशमान कर रही थी जिनसे गुज़रना कुछ देर पहले असंभव लग रहा था।

तूफ़ान अब थमने लगा था और उसे एक हल्का सा खिंचाव महसूस होने लगा, जैसे कोई अदृश्य डोर उसे आगे की ओर खींच रही हो। उसने अपने इस अंदरूनी दिशा सूचक पर भरोसा करने और जंगल के बीच उसका अनुसरण करने का फ़ैसला किया। जल्द ही, उसे पेड़ों के बीच से तेज़ रोशनी दिखाई देने लगी। उसे अपने परिवार की खुशी भरी आवाज़ें सुनाई देने लगीं क्योंकि उसके परिवार ने उसकी तेज़ रोशनी को आते देख लिया था। “ज़ूरी! ज़ूरी!” वे पुकार रहे थे। ज़ूरी ने अपनी दादी को अपनी ओर आते देखा। वह सीधे अपनी दादी की बाँहों में समा गई और उन्हें कसकर गले लगा लिया। घर वापस आकर उसे बहुत राहत मिली। दादी ने उससे कहा “मेरी ज़ूरी, मैं देख रही हूँ कि तुमने वह महान प्रकाश पा लिया है जो तुम्हारे साथ चमकता है, ठीक वैसे ही जैसे यह हम सब के भीतर चमकता है। मुझे तुम पर बहुत गर्व है।”

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लिया कुमार

लिया यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास में इकोनॉमिक्स और कंप्यूटर साइंस की छात्रा हैं। उन्हें दौड़ना, ... और पढ़ें

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