सारा बब्बर एक कहानी साझा करती हैं जिससे यह पता चलता है कि कृतज्ञता के सरल अभ्यास से कैसे दुख को सुख में परिवर्तित किया जा सकता है। फिर वे कृतज्ञता पर कुछ सुझाव देती हैं और कुछ रोचक गतिविधियाँ करने को कहती हैं।

क समय की बात है, एक छोटी सी चिड़िया तपते हुए रेगिस्तान में रहती थी। वह बहुत ही दयनीय हालत में जी रही थी। उसके पंख नहीं थे, शरीर कमज़ोर था, खाने को भी बहुत कम मिलता था और जीने की इच्छा भी लगभग खत्म हो चुकी थी। वह हर रोज़ अपनी दयनीय और एकाकी ज़िंदगी को कोसती थी।

एक दिन हवा का रुख बदला और उसे अपने आसपास हवा में किसी के होने का एहसास हुआ। देखा तो एक खूबसूरत फ़रिश्ता, जिसके चारों ओर हल्के जामुनी रंग की आभा थी, भगवान से मिलने जा रहा था। दयालु फ़रिश्ते को लगा कि किसी को मदद की ज़रूरत है और वह वहाँ उस छोटी चिड़िया के पास रुक गया।

नन्ही चिड़िया, तुम्हें क्या तकलीफ़ है?”

चिड़िया ने जवाब दिया, “मैं अकेली हूँ, बीमार हूँ और लगभग एक ज़िंदा लाश हूँ। मैं कैसे खुश हो सकती हूँ? मैं अपने जीवन से थक चुकी हूँ। किसी ने कभी मेरी परवाह नहीं की। तुम कौन हो और कहाँ जा रहे हो?”

फ़रिश्ते ने जवाब दिया, “मैं भगवान का दूत हूँ और मैं उसके धाम जा रहा हूँ।”

चिड़िया को आशा की किरण दिखी और उसने एक छोटी सी विनती की, “क्या तुम भगवान से मेरी तकलीफ़ों से छुटकारा पाने का तरीका पूछ सकते हो?” फ़रिश्ता मान गया और आगे चला गया।

जब फ़रिश्ता भगवान के धाम पहुँचा तो उसने उन्हें वह सब बताया जो उसने पृथ्वी पर देखा था - किन लोगों को उसने रास्ता दिखाया, किन लोगों ने उसके मार्गदर्शन को मानने से इनकार कर दिया और आखिर में उस छोटी चिड़िया के बारे में बताया जो उसे तपते हुए रेगिस्तान में मिली थी। “भगवन, इस चिड़िया को कब तक दुख सहना पड़ेगा? उसे अकेले तड़पते देख मुझे बहुत बुरा लगा।”

भगवान ने फ़रिश्ते को बताया कि चिड़िया को एक लंबा दंड भुगतना है और शायद कई जन्मों तक उसे कष्ट सहना पड़े।

फ़रिश्ता परेशान हो गया और ऐसी खबर चिड़िया को बताना नहीं चाहता था। उसने फिर से भगवान से पूछा, “क्या इस दुख से मुक्ति पाने का कोई रास्ता नहीं है?”

भगवान मुस्कुराए और फ़रिश्ते से कहा, “बिलकुल है। चिड़िया से कहो कि वह एक छोटा मंत्र इस्तेमाल कर सकती है। किसी भी समय और हर समय, उसे कहना चाहिए, “भगवान, हर चीज़ के लिए आपका धन्यवाद, यहाँ तक कि सबसे बुरी परिस्थितियों में भी।”

फ़रिश्ता वापस गया और चिड़िया को भगवान का संदेश सुनाया। चिड़िया अपनी तकलीफ़ों से छुटकारा पाने की संभावना से उत्साहित थी।

कुछ महीनों बाद, फ़रिश्ता फिर से उसी जगह से गुज़रा जहाँ रेगिस्तान हुआ करता था। उसने देखा कि वहाँ फूलों से भरा एक खूबसूरत बगीचा था, छायादार पेड़ थे और झील थी। वह हैरान रह गया। फ़रिश्ते को लगा कि वह किसी दूसरे रास्ते पर आ गया था, लेकिन फिर उसे एहसास हुआ कि जगह तो वही थी। एक चिड़िया खुशी से चहचहा रही थी। मगर फ़रिश्ते को अफ़सोस हो रहा था कि शायद जो चिड़िया उसने कुछ महीने पहले देखी थी, अब नहीं रही होगी।

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लेकिन तभी उस छोटी चिड़िया ने फ़रिश्ते को आवाज़ दी और उसे धन्यवाद दिया।

तुम कौन हो?” फ़रिश्ते ने पूछा।

क्या तुमने मुझे नहीं पहचाना? तुमने ही तो मुझे भगवान का संदेश दिया था। याद है?”

फ़रिश्ता उसे देखकर बहुत हैरान हुआ। उसने चिड़िया को शुभकामनाएँ दीं और चला गया।

वह जब भगवान के धाम पहुँचा तब भी उलझन में था। भगवान ने पूछा, “बच्चे, क्या बात है?” फ़रिश्ते ने पूछा, “भगवन, आपने तो कहा था कि चिड़िया को कई जन्मों तक दुख सहना पड़ेगा। फिर उसकी हालत और परिवेश दोनों इतने कम समय में कैसे बदल गए?” भगवान मुस्कुराए और बोले, “यह बहुत आसान है। जब तुम खुश रहते हो और शुक्रिया अदा करते हो तब तुम्हारी खुशी बढ़ती जाती है और खुशी से समृद्धि आती है।”

कृतज्ञता ज़िंदगी में परिपूर्णता लाती है।

जो भी हमारे पास है, उसे पर्याप्त और ज़्यादा बनाती है।

इनकार को स्वीकृति में बदल देती है,

अव्यवस्था को व्यवस्था में और उलझन को स्पष्टता में
बदल देती है।” — मेलोडी बीटी

खुशी हर जगह है। इसे देखने के लिए हमें अपनी दृष्टि को परिष्कृत करने की ज़रूरत है।

खुशी हवा में लहलहाते पेड़ों में है।

खुशी मादा कुत्ते के अपने पिल्ले को दूध पिलाने में है।

खुशी मुस्कुराने में है।

खुशी ज़िंदगी जीने के लिए एक और दिन मिलने में है।


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