वे रेंगते हैंउड़ते हैंकुलबुलाते हैंभिनभिनाते हैं - लेकिन हम उन पर बहुत कम ध्यान देते हैं। मगर यह भी सच है कि अकशेरूकियों (।nvertebrates) के बिना इस पृथ्वी पर जीवन रुक जाएगा। पारिस्थितिकीविद् बी. रतिनसबापति समझाते हैं कि अकशेरूकी वो गुमनाम कार्यकर्ता हैं जो हमारी फसलों का परागणहमारी मिट्टी की सफ़ाई और हमारे पारितंत्र को पोषित करते हैं। इस दुनिया मेंजहाँ 98% प्रजातियाँ अकशेरुकी हैंक्या हम उनकी चुपचाप विलुप्ति को नज़रंदाज़ कर सकते हैं?

 

जब हम वन्य जीवन संरक्षण के बारे में सोचते हैं तब हमारे मनसपटल पर अक्सर किसी महाकाय हाथी, ऊँचे उड़ते हुए चील या किसी दुर्लभ बाघ का चित्र उभर आता है। लेकिन ये प्रतिष्ठित प्राणी कशेरुकी (vertebrates) जीवों के मात्र कुछ उदाहरण हैं। कशेरुकी जीव, प्राणी-जगत का सिर्फ़ 2% हिस्सा हैं, बाकी का 98% अकशेरुकी (Invertebrates) यानी बिना रीढ़ की हड्डी के जीवों से बना है, जिसमें मधुमक्खियाँ, तितलियाँ, केंचुए, चींटियाँ, मकड़ियाँ, घोंघे और बहुत सी अन्य प्रजातियाँ शामिल हैं। ये सारे जीव भले ही छोटे हैं और इन्हें अक्सर नजरंदाज़ किया जाता है, लेकिन ये जीव इस पृथ्वी पर जीवन की नींव हैं।

अकशेरुकी क्यों ज़रूरी हैं?

अकशेरुकी पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • परागण (Pollination) हमारे अधिकतर जंगली पेड़ों और खाद्य फसलों के लिए मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और झींगुर परागण करने वाले मुख्य जीव होते हैं। इनके बिना प्राकृतिक और कृषि परिदृश्य, दोनों ही खत्म हो जाएँगे।
  • अपघटन (Decomposition) केंचुए, दीमक और मक्खियाँ जैविक पदार्थों का अपघटन करती हैं जिससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है और मिट्टी की पौष्टिकता बढ़ जाती है।
  • खाद्य जाल में सहायता - अकशेरुकी जीव खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पक्षी, सरीसृप (reptiles), उभयचर (amphibians) और स्तनधारी भी (जिनमें इंसान भी अपने समुद्री भोजन के कारण शामिल हैं) अपने भोजन के लिए इन पर आधारित हैं।

इनके महत्व के बावजूद, मानव प्रेरित कारकों के चलते अकशेरुकियों की संख्या में बहुत ही भयानक तरीके से गिरावट हो रही है।

शहरीकरण के कारण इनके प्राकृतिक आवास खंडित और नष्ट होते जा रहे हैं। इस कारण से उनके पनपने की जगहें कम होती जा रही हैं।

कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग - कृषि उद्योग में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग इनके लिए एक और जानलेवा खतरा है। ये रसायन न सिर्फ़ हानिकारक कीटों को बल्कि आवश्यक परागणकारियों और लाभकारी कीटों को भी क्षति पहुँचाते हैं।

invertebrates2.webp

 

इनके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन ऋतुओं के चक्र में परिवर्तन लाकर पारितंत्रों को नष्ट कर रहा है जो फिर अकशेरुकियों के प्रजनन चक्रों और खाद्य स्रोतों की उपलब्धता को भी प्रभावित करता है।

कार्रवाई का आह्वान

अब वक्त आ गया है कि हम इन गुमनाम वीरों को भी अपने संरक्षण के प्रयत्नों में शामिल करें। अकशेरुकियों को बचाने के लिए बहुत ज़्यादा प्रयत्नों की ज़रूरत नहीं है। बस छोटे-छोटे सार्थक कार्य करने की ज़रूरत है -

  • परागणकारियों व तितलियों के लिए बगीचे बनाएँ - देसी फूलों के पौधे लगाने से स्थानीय परागणकारी आकर्षित होते हैं और उन्हें वो सारे संसाधन देते हैं जो उनके जीवित रहने के लिए ज़रूरी हैं।
  • उनके प्राकृतिक आवासों को पुनर्स्थापित करें - देसी पेड़-पौधों को लगाने से हम उनके छोटे-छोटे आवासों को पुनर्स्थापित करते हैं जो उनके जीवित रहने के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
  • जैव-विविधता का आंकलन करें-
    बगीचों, पार्कों और खुले हरे मैदानों का सर्वेक्षण करना चाहिए ताकि हम मौजूदा अकशेरुकी विविधता को समझ सकें और उन्हें खत्म करने वाले खतरों को पहचान सकें।
  • रसायनों का इस्तेमाल कम करें -
    जैविक और संधारणीय कृषि व भूदृष्य निर्माण के तरीके बढ़ाएँ।
  • जागरूकता बढ़ाएँ - जैसा कि आध्यात्मिक गुरु दाजी कहते हैं, “हर एक, एक और को शिक्षित करे और एक पेड़ लगाए।” यह सिद्धांत संरक्षण की मूल भावना को साकार करता है।
  •  
invertebrates3.webp

 

भविष्य के लिए उम्मीद

साल दर साल यदि हम पौधे लगाएँ, उनका पोषण करें और इस विषय में लोगों को शिक्षित करें तो हम खूबसूरत तितलियाँ, गुनगुनाते भौंरे, रंग-बिरंगे झींगुर और इसी तरह के अन्य अकशेरुकियों को अपने बगीचों और पार्कों में लौटते हुए पाएँगे। समय के साथ हम उस अदृश्य तंत्र को फिर से बना सकते हैं जो जीवन को बनाए रखता है - एक बार में एक परागणकारी।

अकशेरुकियों का संरक्षण सिर्फ़ कीड़े-मकौड़ों को बचाने की बात नहीं है - यह जीवन के उस जटिल जाल को संरक्षित करने की कोशिश है जो हम सभी को जीवित रखता है। आइए, अब हम उस वक्त तक का इंतज़ार न करें जब मधुमक्खियों की गुन-गुनाहट से गूँजता आसमान मौन पड़ जाए। अब कार्रवाई करने का समय आ गया है।

अकशेरुकियों का संरक्षण जीवन का संरक्षण है। चलिए शुरू करते हैं - एक पेड़ लगाएँ, एक को शिक्षित करें और सैकड़ों को बचाएँ।


अकशेरुकियों का संरक्षण सिर्फ़ कीड़े-मकौड़ों को बचाने की बात नहीं है - यह जीवन के उस जटिल जाल को संरक्षित करने की कोशिश है जो हम सभी को जीवित रखता है। आइएअब हम उस वक्त तक का इंतज़ार न करें जब मधुमक्खियों की गुन-गुनाहट से गूँजता आसमान मौन पड़ जाए। अब कार्रवाई करने का समय आ गया है।


 

invertebrates4.webp

 


Comments

बी. रतिनसभापति

बी. रतिनसभापति

रतिनसभापति एक पारिस्थितिकीविद् हैंजिन्ह... और पढ़ें

उत्तर छोड़ दें