इस लेख में जगदीश नारन उबंटू अर्थात एक शाश्वत सत्य को उजागर करते हैं कि हम एक-दूसरे के माध्यम से ही अपने आप को गहराई से जान पाते हैं।

र मनुष्य के हृदय में एक गहरा सच छुपा है - हम जितना सोचते हैं या जानते हैं, उससे कहीं ज़्यादा गहराई से हम सब एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं। मेरी खुशहाली आपकी खुशहाली के बिना अधूरी है और मेरी यात्रा आपकी यात्रा के साथ जुड़ी हुई है। दक्षिण अफ़्रीका में इस सच को बस एक ही शब्द से जाना जाता है - उबंटू।

उबंटू दक्षिण अफ़्रीका की उनगुनी (ज़ुलू, खोज़ा) भाषा का एक शब्द है। इसका अर्थ है ‘दूसरों के प्रति मानवता’। इस शब्द में अंतर्संबद्धता की भावना, “मैं हूँ क्योंकि हम हैं,” समाहित है जो करुणा, समुदाय, गरिमा और पारस्परिक देखभाल पर ज़ोर देती है। इसके अनुसार मानवता संबंधों में निहित होती है। यह मानवतावादी नैतिकता लोगों में सद्भाव, आदर और एक-दूसरे के साथ साझा करने के भाव को बढ़ावा देती है। यह नैतिकता दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद के बाद के दौर का एक आधारस्तंभ बन गई और इसने नेल्सन मंडेला एवं डेसमंड टुटु जैसी महान हस्तियों के नेतृत्व में वहाँ की कानूनी तथा सामाजिक संरचनाओं को आकार दिया। उबंटू कई तरह से परिभाषित किया गया है - मैं हूँ क्योंकि हम हैं; मनुष्य अन्य मनुष्यों के माध्यम से ही मनुष्य है; दूसरों के प्रति मानवता। उबंटू केवल एक नारा या एक अच्छा सिद्धांत ही नहीं है, यह हमारे साझा सत्व का एक जीवंत अनुभव है। यह पहचान है कि हम सब उसी दिव्य स्रोत की चिंगारी हैं। भले ही हम अनेक रूपों में प्रकट होते हैं लेकिन वास्तव में हमारा मूल आधार एक ही है।

हार्टफुलनेस के अभ्यासी होने के नाते हम निरंतर अपनी भीतरी खोज की यात्रा पर रहते हैं। हम रोज़ सुबह ध्यान में बैठते हैं और प्राणाहुति की मदद से अपने हृदय को शुद्ध करते हुए उसे उन्नत करते हैं। हम एक साथ ध्यान करते हैं और पाते हैं कि रूपांतरण महज़ व्यक्तिगत प्रक्रिया नहीं है, इसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ता है। हमारी चेतना में होने वाला हर बदलाव औरों को छूता है, कभी-कभी बिना एक भी शब्द कहे। इस नज़रिए से देखा जाए तो उबंटू केवल एक सांस्कृतिक मूल्य नहीं है; यह एक आध्यात्मिक सत्य है।

हम’ की खोज

आधुनिक जीवन अक्सर हमें एक ‘अलगाव’ के छलावे की ओर ढकेलता है - मेरी तरक्की, मेरा सुकून, मेरी आध्यात्मिक उन्नति, मेरा घर, मेरा देश, मेरा, मेरा, मेरा। हम तुलना करते हैं, प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपनी रक्षा करते हैं। यहाँ तक कि हमारी आध्यात्मिक साधना भी आत्म-केंद्रित हो जाती है यदि हम उसके वास्तविक उद्देश्य - अपनी अंतर्संबद्धता को उजागर करना और अपनी प्रेम करने की क्षमता को बढ़ाना - को भूल जाते हैं। उबंटू हमें ‘मैं’ की खोज से ‘हम’ की खोज की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इसके अनुसार, “आपकी खुशी मुझे खुशी देती है; आपकी तकलीफ़ मुझे प्रभावित करती है; आपकी उन्नति मुझे उन्नत करती है; आपकी गरिमा मेरी गरिमा को प्रकट करती है।”

हमारा हृदय अकेले नहीं धड़कता है। यह अनगिनत मानवीय और दैवीय हृदयों के साथ सामंजस्य में धड़कता है। करुणा का हर कार्य, उपस्थिति का हर साझा क्षण, एक सूक्ष्म सामूहिक ऊर्जा में योगदान देता है। यह एक ऐसा जीवंत क्षेत्र है जिसके साथ हृदय से जुड़ने पर वह और भी सशक्त हो जाता है।

साझी मानवता की विरासत

उबंटू के विचार की शुरुआत किसी पुस्तक या दार्शनिक ग्रंथों से नहीं हुई। इसकी शुरुआत एक समुदाय से हुई - उन लोगों से, जिनका जीवन आपसी सहयोग, मदद और पूर्वजों व बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान पर निर्भर था। यह प्रकृति के निकट रहते हुए स्वाभाविक रूप से उभरा। एक व्यक्ति की फ़सल से कई परिवारों का पेट भरता था। ज्ञान उनकी सामूहिक विरासत थी।

जीवन जीने का यह तरीका हार्टफुलनेस की शिक्षाओं के साथ बड़ी खूबसूरती से मेल खाता है -

  • हृदय हमारा साझा मिलन स्थल है जहाँ हम एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
  • भाईचारा आध्यात्मिक विकास का प्रमाण है।
  • प्रेम का विस्तार ही विकास का मापदंड है।

जैसे-जैसे हम ध्यान करते हुए हृदय की सूक्ष्मता को परिष्कृत करते हैं, हम पाते हैं कि -करुणा एक ऐसा भाव नहीं है जिसको हम विकसित कर सकते हैं; करुणा हमारी प्रकृति है। उबंटू हमें केवल इस बात की याद दिलाता है।

 

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एक अदृश्य डोर

जब लोग सद्भावना, करुणा और साझे उद्देश्य के साथ एकजुट होते हैं तब हमारी सूक्ष्म चेतना में एक ऊर्जापूर्ण वातावरण निर्मित होता है, जिसे कभी-कभी एग्रेगोर भी कहा जाता है। यही वह अदृश्य डोर है जो उन हृदयों को बाँधती है जिनमें समान उद्देश्य, प्रेम और समूह के लिए परवाह होती है।

हार्टफुलनेस ध्यान पद्धति में यह सूक्ष्म क्षेत्र स्पष्टतः महसूस होता है। वातावरण शांति और सुकून से भर जाता है। हमारे हृदय स्वाभाविक रूप से तालमेल में रहते हैं जैसे किसी कोमल, अदृश्य तरंग ने उनमें सामंजस्य स्थापित कर दिया हो। यही उबंटू का जीवंत सार है - शब्दों से परे जुड़े होने का मूर्त अनुभव। एक हृदय का रूपांतरण बहुतों का उत्थान करता है।

वैयक्तिकता और अंतर्संबद्धता

आधुनिक वैश्विक दृष्टिकोण स्वतंत्रता, उपलब्धि और व्यक्तिगत पहचान को बढ़ावा देता है। इसमें कुछ गलत भी नहीं है। हर आत्मा अद्वितीय है और उसे एक खास उद्देश्य को पूरा करना होता है। लेकिन अंतर्संबद्धता के बिना वैयक्तिकता अकेलापन बन जाती है; बिना करुणा की उपलब्धि खालीपन बन जाती है।

उबंटू एक संतुलन प्रदान करता है - हम सब मिलकर आगे बढ़ते हैं - हर व्यक्ति अलग है लेकिन कभी अकेला नहीं।

ध्यान में हम अपने भीतर केंद्रित होकर स्रोत से जुड़ते हैं, लेकिन भीतर जाने का परिणाम है अपने आसपास के लोगों के प्रति हृदय में बढ़ा हुआ प्रेम। जो हृदय ईश्वर से जुड़ जाता है उसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। सामूहिक चेतना के इस क्षेत्र में हम कई हृदयों की उपस्थिति को महसूस करते हैं जो एकसाथ उन्नत होते हैं।

सेवा - उबंटू का अभ्यास

उबंटू मूलतः बहुत व्यावहारिक है। यह केवल एक मानसिक अवस्था ही नहीं है बल्कि एक कर्म है - बाँटना, सुनना, सम्मिलित करना, उन्नत करना, रक्षा करना और एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना।

सेवा का मतलब है यह जानना कि जितना हम सोचते थे, हमारे पास देने के लिए उससे कहीं अधिक है। उदारता का हर कार्य उस सूक्ष्म क्षेत्र में योगदान देता है जो हमको एक-दूसरे से जोड़ता है। इससे हमारी एकता और करुणा की शक्ति सुदृढ़ होती है। हार्टफुलनेस में सेवा एक कर्तव्य नहीं बल्कि एक खुशी है। जब हम सेवा करते हैं तब हम अपने और दूसरों के बीच की सीमा को मिटा देते हैं। हम ‘उन्हें’ देखना छोड़ देते हैं और ‘हमको’ पहचानने लगते हैं, यानी हम उन्हें अपना मानने लगते हैं।

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अपने वास्तविक स्व की खोज

हमारे जीवन का सबसे बड़ा भ्रम यही है कि हम अलग-अलग प्राणी हैं। उबंटू उस भ्रम को भंग करता है। यह पहचान को एक अकेले द्वीप के रूप में नहीं, बल्कि रिश्तों के पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में प्रकट करता है यानी हमारी पहचान केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि हमारे अपने परिवारों, अपने समुदायों, प्रकृति और ईश्वर के साथ संबंधों से बनी है।

उबंटू से हम बाहर की तरफ़ विस्तार करके अपने भीतर जाने लगते हैं। उबंटू की मदद से हम यह समझ पाते हैं कि मेरे अंदर जो दिव्यता का बीज है वही बीज आपके अंदर भी है। जब मैं अपना सम्मान करता हूँ तब मैं उस स्रोत का भी सम्मान करता हूँ जो हम दोनों को जीवन प्रदान करता है।

यह समझ लेने से हमारी सामूहिक चेतना प्रेम, समानुभूति और परवाह जैसे भावों को और बढ़ाती है। दूसरों की इंसानियत को
खोजते-खोजते हम अपने भीतर की
दिव्यता को खोज लेते हैं।

एकजुटता पर निर्मित भविष्य

आज की दुनिया कई कठिन समस्याओं का सामना कर रही है - असमानता, अकेलापन, पारिस्थितिकी विनाश और झगड़े। इन सबके समाधन हमें प्रतिस्पर्धा अथवा बटवारे द्वारा नहीं मिलेंगे। इनके समाधान हमें तभी प्राप्त होंगे जब हम यह समझ लेंगे कि ये धरती, हवा और हमारा भविष्य हम सभी के हैं।

उबंटू मानवीय उत्तरजीविता के लिए एक आध्यात्मिक रूपरेखा प्रस्तुत करता है -

यदि आप असफल हुए तो मैं आपको उठने में मदद करूँगा। क्योंकि शायद कल मुझे आपकी मदद की ज़रूरत पड़े। यह विनम्रता कोई कमज़ोरी नहीं है, बल्कि यह बुद्धिमता है।

एक हृदय केंद्रित उबंटू

हार्टफुलनेस अपने भीतर उबंटू की भावना को गहन करने का तरीका प्रस्तुत करता है –

  • ध्यान हृदय को कोमल बनाता है।
  • सफ़ाई हमें उन छापों से मुक्त करती है जो हमारी करुणा की राह में अवरोध हैं।
  • प्रार्थना हमारे प्रेम को हमारे सीमित दायरे से बाहर विस्तारित करती है।
  • प्राणाहुति हमें वास्तविक सत्व के स्तर पर जोड़ती है।

उबंटू केवल एक सांस्कृतिक विरासत ही नहीं बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक अनुभव यानी प्रेम, करुणा और एकता का क्रियाशील क्षेत्र बन जाता है। जब हृदय खुला होता है तब उबंटू की विचारधारा बिना किसी प्रयास के बहने लगती है।

खोज का एक सरल अभ्यास

कितना अच्छा हो यदि हम रोज़ कुछ पल उबंटू का अभ्यास करें।

  • ऐसे व्यक्ति को, जो अपने आप को अनदेखा महसूस करता है, एक मुस्कान दें।
  • कोई प्रत्युत्तर देने की जल्दी किए बिना ध्यान से किसी की बात सुनें।
  • किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे दूसरों ने नज़रंदाज़ किया हो, सम्मिलित करें।
  • किसी और की खुशी के लिए सच्चे दिल से कामना करें।
  • किसी पीड़ित के लिए शांति का विचार लें।
  • किसी ज़रूरतमंद के लिए चुपचाप प्रार्थना करें।

ये छोटे-छोटे कार्य भले ही मामूली लगें लेकिन प्रत्येक कार्य दिलों के अदृश्य जाल को मज़बूत बनाता है। यह एकजुटता की वो सूक्ष्म ऊर्जा है जो देने वाले और पाने वाले दोनों को रूपांतरित करती है।

हम स्वयं ही खोज हैं

इस महीने का विषय ‘खोज’ हमें याद दिलाता है कि जीवन केवल बाहरी दुनिया की खोज नहीं है बल्कि अपनी भीतरी दुनिया की खोज भी है। उबंटू इसी बात को उजागर करता है कि सबसे महत्वपूर्ण खोज जो हर कोई कर सकता है, वह है –
हम एक-दूसरे के हैं।
मैं अकेला पूरी कहानी नहीं हूँ और न आप पूरी कहानी हैं। हम सब ‘एक मानवता’ नामक एक ही पुस्तक के अध्याय हैं और हमारा मार्गदर्शन एक दिव्य हृदय कर रहा है।

ईश्वर करे कि जैसे-जैसे हम ध्यान करते हैं, सेवा करते हैं, एक-दूसरे से जुड़ते हैं, एकसाथ विकसित होते हैं, हम उस सत्य को पुनः खोज पाएँ जिसे हमारे पूर्वज भली-भांति जानते थे - इंसानों के फलने-फूलने के लिए प्रेम एक विकल्प नहीं है बल्कि हमारे अस्तित्व की
नींव है।

आपको खोजते हुए मैं स्वयं को खोज लेता हूँ।

हम दोनों को खोजते हुए मैं ईश्वर को खोज लेता हूँ।

मैं हूँ क्योंकि हम हैं।

हम हैं क्योंकि ईश्वर है।


उबंटू केवल एक सांस्कृतिक विरासत ही नहीं बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक अनुभव यानी प्रेमकरुणा और एकता का क्रियाशील क्षेत्र बन जाता है। जब हृदय खुला होता है तब उबंटू की विचारधारा बिना किसी प्रयास के बहने लगती है।


 


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जगदीश नारन

जगदीश नारन दक्षिण अफ़्रीका के एक हार्टफुलनेस साधक, प्रशिक्षक और स्... और पढ़ें

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