सारा बब्बर एक कहानी सुना रही हैं जिसमें एक राजा अपने लिए सहायक ढूँढने हेतु एक प्रतियोगिता आयोजित करता है। कहानी हमें समय का महत्व सिखाती है। सारा ने हृदय से जुड़ी हुई एक गतिविधि भी दी है जो हमें विचार करने पर मजबूर करती है और वे हमें समय के बारे में कुछ रोचक तथ्य भी बता रही हैं।
राजा का सलाहकार
एक राजा था जो अपने लिए एक सहायक की तलाश में था - ऐसा व्यक्ति जो मेहनती हो, समय की कीमत पहचाने, प्रतिबद्धता तथा लोकहितकारी जैसे बहुत से अच्छे गुणों से परिपूर्ण हो। जब राजा ने इसकी घोषणा की तब उसके राज्य के लोग बहुत उत्साहित हो गए। राजा के लिए काम कौन नहीं करना चाहता था! उसे न केवल राज्य के भीतर से सैकड़ों आवेदन मिले बल्कि पड़ोसी क्षेत्रों से भी हज़ारों आवेदन आए। जब उसने उन्हें छाँटना शुरू किया, उसे समझ नहीं आ रहा था कि साक्षात्कार के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवारों का चयन कैसे करे।
उसके ज्ञानी मुख्यमंत्री ने कुछ लोगों को चुनकर संक्षिप्त सूची बनाई। इसके लिए उसने पहले आवेदकों के बारे में छानबीन की फिर कुछ गुणों से संबंधित उनकी कई परीक्षाएँ लीं जैसे अपरिचितों के प्रति दयालुता, नए कौशल सीखने की इच्छा, सजगता और अन्य गुण जो राजा अपने सहयोगी में देखना चाहेगा। अंततः उन सब आवेदकों में से तीन उम्मीदवारों का चयन किया गया।
अंत में राजा उनसे मिला और उन्हें बधाई दी कि वे चयन प्रक्रिया के इस आखिरी चरण तक पहुँच पाए। उसने बताया कि अगली परीक्षा सबसे उत्तम और चुनौतीपूर्ण है जिसके लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए। अब तक की चुनौतियाँ रोमांचक थीं जैसे घोड़े की सवारी, वित्त, कला कौशल दिखाना, खेल खेलना इसलिए सभी उसका इंतज़ार कर रहे थे।
अगली परीक्षा के बारे में राजा ने घोषणा की कि उम्मीदवारों को एक टैंक, जिसमें एक हज़ार लीटर पानी है, में से राज्य के लोगों को पानी बाँटना है। उम्मीदवार तैयार हो गए और उन्होंने राजा से पानी की पाइप माँगी लेकिन राजा ने कहा कि वे पाइप का उपयोग नहीं कर सकते, केवल एक बाल्टी का इस्तेमाल कर सकते थे जो सिर्फ़ उनकी छोटी ऊँगली के बराबर थी। उम्मीदवार हैरान-परेशान थे कि इतना बड़ा काम कैसे हो पाएगा।

उन्होंने काम शुरू किया। कुछ बाल्टी भर पानी बाँटने के बाद उनमें से एक व्यक्ति ने यह सोचते हुए कि काम कुछ ज़्यादा ही है, छोड़ दिया। राजा को इस बात से अवगत करा दिया गया। बचे हुए दो लोगों ने दो दिनों तक कड़ी धूप में काम किया। आखिरकार दूसरा व्यक्ति भी हार मान गया और काम छोड़ कर चला गया।

किसी को भी अपना समय देना सबसे मूल्यवान उपहार देने के समान है।
तीसरा व्यक्ति लगा रहा। अचानक, पानी निकालते हुए उसका हाथ एक शीशे की चीज़ को छू गया। उसने उस चीज़ को बाहर निकाला तो देखा कि वह एक बोतल थी जिसमें एक पर्चा था। पर्चे पर लिखा था, “यह तुम्हारी दृढ़ता का इनाम है। यह जानते हुए भी कि काम असंभव है तुम उसे करने में लगे रहे। असंभव कार्य शुरुआत में तुम्हें अभिभूत कर सकते हैं लेकिन तुम धीरे-धीरे, एक-एक बाल्टी की तरह आगे बढ़ सकते हो जैसा कि तुमने आज किया। तुम्हें राजा के सलाहकार के रूप में चयनित होने पर बधाई दी जाती है।” वह व्यक्ति आश्चर्यचकित था कि नौकरी तो केवल एक सहायक की थी मगर राजा उसे सलाहकार बना रहा था।
राजा आया और उसने व्यक्ति को बताया कि उसने इस काम के लिए अपनी सबसे मूल्यवान संपत्ति दी है ‘समय’। “किसी को भी अपना समय देना सबसे मूल्यवान उपहार देने के समान है। और इसलिए तुम्हारा इस पद पर स्वागत है।”
दिल से जुड़ी हुई एक गतिविधि
हम सभी अनूठे हैं, हम विभिन्न पृष्ठभूमियों से आते हैं, हमारी विभिन्न योग्यताएँ हैं और हम विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं। लेकिन दो चीज़ें हम सभी के लिए समान हैं - दिल और समय!
दिल और समय, दोनों परस्पर संबंधित हैं। जब आप किसी चीज़ में दिल लगाते हैं तो ज़ाहिर है उसे अपना समय भी देंगे।
इस दिल में उन लोगों, पशुओं, चीज़ों और शौकिया परियोजनाओं के नाम लिख लें जिन्हें इस माह आप अधिक समय देने वाले हैं।

कुछ रोचक तथ्य
1. अंग्रेज़ी में ‘समय’ की अवधारणा की उत्पत्ति एक ग्रीक शब्द ‘क्रोनोस’ से हुई है जिसका अर्थ ‘क्रोनोलॉजिकल’ अर्थात ‘कालानुक्रमिक’ या ‘क्रमवार’ है।
2. प्राचीन काल में, समय को मापने के विभिन्न तरीके थे जैसे धूप-घड़ी और पानी के कटोरे।
3. प्राचीन भारतीय और ग्रीक, दोनों ही संस्कृतियों में धूप-घड़ी का उपयोग करके सूर्य की छाया द्वारा समय को मापा जाता था।
4. विभिन्न संस्कृतियाँ समय को भिन्न-भिन्न रूप से अनुभव करती हैं। कुछ लोग इसे रेखीय मानते हैं, कुछ लोगों को लगता है कि समय बाएँ से दाएँ जाता है और कुछ लोग समय को आवर्ती मानते हैं।

सारा बब्बर
सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें
