इस बार 20 मार्च के विश्व कथावाचन दिवस के अवसर पर, हम आपके लिए सारा बब्बर द्वारा लिखी एक कहानी प्रस्तुत करते हैं जो लोककथाओं की शैली पर आधारित है। आशा है कि इस कहानी के भीतर की कहानियाँ आपको मनोरंजक लगेंगी!
प्राचीन काल से ही कहानियाँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में रीतियों का स्थानांतरण करने का एक साधन रही हैं। कहानियों के रूप में ही मनोरंजन, ज्ञान, बुद्धिमत्ता और शिक्षा अगली पीढ़ियों में स्थानांतरित होती रही हैं।
एक समय की बात है, धरती एक खुले चित्रपट की तरह थी। लोग खानाबदोश ज़िंदगी जीते थे। खाने, रहने और कपड़े के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाना आम बात थी। रेडियो, टेलीविज़न और फ़ोन के बिना एक-दूसरे का मनोरंजन करने का एकमात्र तरीका कहानियाँ सुनाना था। ये नई जड़ों, विशाल पेड़ों और डरावने बाघों की कहानियाँ होती थीं। यात्रियों को कहानियाँ सुनाने के बदले ठहरने की सुविधा दी जाती थी। इसके अलावा कहानियाँ सुनाना एक काम भी हुआ करता था।
ऐसे ही एक दिन, कुछ दोस्त यात्रा कर रहे थे। दिन भर की लंबी यात्रा के बाद सब थके हुए थे और अब यह तय होना था कि आग जलाने के लिए लकड़ी चुन कर कौन लाएगा और सबके लिए खाना कौन पकाएगा। उन्होंने फ़ैसला करने के लिए कई तरीके अपनाए लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाए। फिर उन्होंने एक युवती को देखा जो उन्हीं की तरफ़ आ रही थी। उन्होंने सोचा कि वे उसे अपने लिए खाना पकाने के लिए कह सकते हैं और खुद आराम कर सकते हैं। उन्होंने युवती से पूछा कि वह कहाँ से है और क्या वह कुछ कहानियाँ सुनना पसंद करेगी।
उस युवती को कहानियाँ बहुत पसंद थीं। वह तुरंत मान गई। यात्रियों ने पूछा कि क्या वह कहानी सत्र को रोचक बनाना चाहती है। उन्होंने एक छोटी सी शर्त रखी। शर्त यह थी कि यात्री लड़की को एक ऐसी कहानी सुनाएँगे जो बिलकुल असंभव हो। यदि लड़की कहती है कि कहानी असंभव है और वह इसे नहीं मानती तो लड़की को खाना पकाना पड़ेगा। शर्त का दूसरा पहलू भी था। इसके बाद वह युवती एक कहानी सुनाएगी और यदि यात्री कहते हैं कि यह असंभव है तो उन यात्रियों को लड़की के लिए खाना पकाना होगा।
कहानी सत्र शुरू हुआ।
यात्रियों में से एक ने शुरू किया - “मेरे दादाजी एक गरीब किसान थे जो एक अमीर घराने में काम करते थे। हमेशा धीमे और लापरवाही से काम करने पर उनका अपमान किया जाता था। वह हर दिन भगवान से प्रार्थना करते थे। वे अपनी तरफ़ से कितनी भी कोशिश करते लेकिन तेज़ी से काम नहीं कर पाते थे और आखिर में उन्हें डाँट ही मिलती थी। एक दिन, जिस भगवान की वे प्रार्थना करते थे, उनके सामने प्रकट हुए। इसके बाद जब दादाजी सोकर उठे तो उन्हें अपार शक्ति महसूस हुई। फिर, अगले दिन जब उन्हें रोज़ की तरह डाँट पड़ी तब जो ऊर्जा उन्होंने महसूस की थी, वह उनकी नसों में दौड़ने लगी। उनका आकार बढ़ गया, उन्होंने पूरे घर को उठा लिया और एक बड़ी छलांग लगाई। घर हिलने लगा, अलमारियाँ गिर गईं, बिस्तर बाहर उड़ गए और खिड़कियाँ टूट गईं। वे ऊँचा उड़ते गए। ये सब देखकर उनका मालिक डर गया और उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा कि मेहरबानी करके अब बस करो। इसके बाद, मालिक ने न केवल उन्हें अपमानित करना बंद कर दिया बल्कि उन्हें परिवार का सदस्य भी बना दिया।”

“कहानी कैसी लगी? कोई है, जो इससे असहमत है?”
किसी ने असहमति ज़ाहिर नहीं की।
अब अगले यात्री की बारी थी। उसने कहानी शुरू की - “एक बार मेरे दादाजी की ज़मीन पर अकाल पड़ा। मेरे दादाजी बहुत कमज़ोर व्यक्ति थे। एक दिन, अपने भाई के साथ हुई लड़ाई के बाद, उन्हें घर छोड़ना पड़ा। उन्होंने सोचा कि वे एक दिन अपना खूब नाम कमाएँगे। वे एक जंगल में गए और उन्होंने एक आदमी को चित्रकारी करते हुए देखा। उस चित्रकार ने एक हिरण का एक चित्र बनाया। दादाजी उस चित्र को बनते हुए देखते रहे। अचंभे की बात है कि अचानक वह हिरण जी उठा। दादाजी ने सोचा कि यह पेंटिंग ब्रश एक अद्भुत वस्तु है और वे इसे हासिल करना चाहते थे। मौका मिलते ही उन्होंने आगे बढ़कर उस ब्रश से एक नाव का चित्र बनाया, जिसमें उस ब्रश का मालिक सवार था। उन्होंने झील में हवाएँ भी बनाईं और ब्रश के मालिक को उड़ा दिया। अब वह ब्रश पूरी तरह से दादाजी का हो गया था। उन्होंने ब्रश लिया और उससे बादल और अनाज के चित्र बनाए, जिससे उनके गाँव की समस्याओं का समाधान हो गया। वह गाँव के खजांची बन गए और एक दिन उन्होंने पेंटब्रश से एक पुत्र को पैदा किया। वह इतना अद्वितीय था कि उसके जोड़े के लिए कोई लड़की नहीं थी। फिर उन्होंने अपने बेटे के लिए एक पूरी तरह से विकसित युवती बनाई। मैं इसी चित्रित किए गए जोड़े का पुत्र हूँ। ब्रश तो चला गया है लेकिन ऐसा लगता है कि मेरे शानदार बाल उस पेंटब्रश का उपहार हैं। मैं इनके लिए सबसे अच्छे बगीचे में पैदा होने वाली सर्वोत्तम जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करता हूँ जिन्हें मेरे दादाजी ने पेंट किया था।”

“तो यह है मेरी कहानी, क्या आप सहमत हैं?”
“हाँ, हम सभी सहमत हैं।”
अब बारी थी युवती की। उसने अपनी कहानी शुरू की।
“मेरे दादा-दादी के पास कई चीज़ें थीं। समाज में उनकी बड़ी इज़्ज़त थी तथा उन्होंने कई और लोगों को महान बनने में मदद की। उनमें विशालकाय व्यक्ति जैसी ताकत थी और उनके पास ऐसी चीज़ें थीं जिनमें तरह-तरह की जादुई शक्तियाँ मौजूद थीं। एक दिन, शहर में फ़साद छिड़ा था। घर के नौकर विशालकाय व्यक्ति के ताकत वाले संदूक और कुछ जादुई चीज़ें जैसे इच्छा पूरी करने वाला पेंटब्रश लेकर भाग गए। मेरे माता-पिता जीवन भर ढूँढते रहे और आज मैं इस खोज पर निकली थी। आखिरकार, मुझे अपने परिवार की सभी संपत्तियाँ आपके पास मिली हैं। ऐसा लगता है कि आप हमारे परिवार के नौकर हैं जो लंबे समय से खोए हुए थे और आप ही के पास हमारी संपत्तियाँ हैं।”
मेरी कहानी यहाँ खत्म होती है। क्या आप सहमत हैं?”
“हाँ, हम सहमत हैं।”
युवती ने कहा, “बहुत अच्छे! तो अब मेरी संपत्तियाँ वापस करो।”
“लेकिन... नहीं, हम सहमत नहीं हैं,” सबने एक साथ कहा।
“अच्छा, तो फिर शर्त के मुताबिक आप लोगों को मेरे लिए खाना पकाना होगा।” और युवती ने अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए खुद आराम किया, जबकि यात्रियों ने मिलकर उसके लिए खाना बनाया।

कहानियों के जुड़े दिलचस्प तथ्य
इसॉप के किस्से
इसॉप एक गुलाम था जो प्राचीन यूनान में रहता था। उसे किसी भी चीज़ से ज़्यादा आज़ादी प्यारी थी। इसके लिए उसने गुलामों के पर्यवेक्षक को रोज़ाना कहानियाँ सुनाना शुरू कर दिया। पर्यवेक्षक उसकी कहानियों से प्रभावित हुआ और उसने एक दिन इसॉप से पूछा कि वह क्या चाहता है। इसॉप ने अपने गुलाम साथियों के लिए भोजन की माँग की। उसके निस्स्वार्थ भाव ने पर्यवेक्षक के दिल को छू लिया तथा इसॉप और उसके समुदाय को वह आज़ादी प्राप्त हुई जिसके वे हकदार थे। इन सभी कहानियों को मिलाकर इसॉप फेबल्स बनीं, जिन्हें सुनकर हम बड़े हुए हैं।
ग्रिम की परीकथाएँ
ग्रिम की परीकथाएँ जेकब और विल्हेम ग्रिम द्वारा संकलित जर्मन परीकथाओं का संग्रह है, जो पहली बार 20 दिसंबर, वर्ष 1812 को प्रकाशित हुआ था। इसे पश्चिमी बाल साहित्य का सबसे महत्वपूर्ण संकलन माना जाता है और इसे यूनेस्को की मेमरी ऑफ़ द वर्ल्ड रजिस्ट्री में सूचीबद्ध किया गया है।
पंचतंत्र
पंचतंत्र प्राचीन भारत की कहानियों का संग्रह है जो राजनीति, व्यवहार, संचार और अर्थशास्त्र पर आधारित है। ये कहानियाँ ज्ञान के भंडार हैं जो वेदों, उपनिषदों, रामायण और महाभारत से ली गई हैं। राजा अमरशक्ति के राजकुमारों की पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी। इसलिए एक शिक्षक, विष्णु शर्मा, ने इन राजकुमारों को कहानियों के ज़रिये शिक्षा प्रदान करने के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका बनाई। यही शिक्षाप्रद कहानियाँ आगे चलकर पंचतंत्र की कहानियों के नाम से मशहूर हुईं जिन्हें बच्चे बड़े चाव से पढ़ते हैं।

गतिविधि 1
इन विवरणों से इन लोकप्रिय कहानियों का अनुमान लगाएँ -
- एक युवती जिसके जूते खो जाते हैं और इसकी वजह से वह एक राजकुमार से शादी कर पाती है।
- एक लड़का जो जादुई बीन्स से उगने वाले बड़े से पेड़ पर चढ़ता है और उसे बादलों में पहुँचकर खज़ाना मिलता है।
- एक राजकुमार जो अपनी पत्नी और भाई के साथ जंगल में चौदह साल तक रहने के लिए गया। उसकी पत्नी का अपहरण हो जाता है और वह वानर सेना की मदद से अपनी पत्नी को वापस ले आता है।
- एक छोटा प्राणी जो बत्तखों के परिवार में पैदा होता है, अकेले दुनिया में जाकर अपने असली रूप को जान पाता है।
- दो अनोखे दोस्त जो नदी के किनारे मिलते हैं। दोस्ती तब समाप्त होती है जब बड़ा वाला दोस्त अपने पेड़ पर रहने वाले दोस्त से उसका दिल माँगता है।
गतिविधि 2
अपनी कहानी यहाँ लिखें। आप इस कहानी में जानवर, राजा, राज्य, इंसान, पौधे या किसी भी अन्य पात्र को शामिल कर सकते हैं।
कहानी इस तरह से लिखें कि इसकी शुरुआत हो, उसमें कुछ समस्याएँ हों और फिर उनका समाधान करते हुए कहानी का अंत हो।

सारा बब्बर
सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें
