इस महीनेसारा बब्बर विश्व नेतृत्व दिवस (20 फरवरी, 2025) के अवसर परहमारे लिए एक लोककथा लेकर आई हैं। इस लोककथा को कई जगहों पर अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया जा चुका है।

 

राजा का चुनाव

एक समय की बात है, एक राजा था जिसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। उसे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो विभिन्न कसौटियों पर खरा उतरे जैसे - संरक्षण, प्रशासन, युद्ध, दूरदर्शिता, भविष्य के लिए सही दृष्टि और परोपकारिता। उसे लगता था कि वह इतने गुणों वाले व्यक्ति को कभी नहीं ढूँढ पाएगा। इसलिए उसने सबसे महत्वपूर्ण गुणों के आधार पर एक उम्मीदवार चुनने का निर्णय लिया। ये गुण थे - ईमानदारी और धैर्य। अन्य सभी गुण सीखे और अर्जित किए जा सकते हैं।

इसलिए उसने अपने प्रजा की परीक्षा लेने और सबसे ईमानदार व मेहनती पात्र को खोजने की योजना बनाई। एक दिन उसने बाज़ार के चौक पर घोषणा करवाई, “सुनो, सुनो, हमारे राजा अपने उत्तराधिकारी के रूप में एक योग्य व्यक्ति को ढूँढ रहे हैं। सभी इच्छुक उम्मीदवार अगली पूर्णिमा के एक दिन बाद महल के मैदान में आ जाएँ। उम्मीदवारों की परीक्षा ली जाएगी और उनमें से एक योग्य व्यक्ति का चयन किया जाएगा।”

पूर्णिमा के अगले दिन, महल का मैदान लोगों से भरा हुआ था। कुछ लोग प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते थे, तो कुछ बड़ी उत्सुकता के साथ यह सब देखने आए थे। राजा ने घोषणा की, “यहाँ एक पानी की टंकी है, जिसे आपको अपनी छोटी उंगली जितने छोटे गिलास से खाली करना है।” सभी प्रतियोगियों ने सोचा कि यह काम तो बहुत बड़ा है और वे चले गए। केवल दो प्रतियोगी रुक गए और राजा के सामने जाकर खड़े हो गए। राजा यह देखकर खुश था कि दो लोग उस चुनौती के लिए तैयार थे।

प्रतिभागी टंकी को खाली करने लगे। वो टंकी में छोटे से गिलास को डालते गए और पानी निकालते गए, लेकिन टंकी में पानी का स्तर ज्यों का त्यों बना रहा। दो दिन बाद, उनमें से एक व्यक्ति प्रतियोगिता छोड़कर चला गया। उसने सोचा कि यह काम बहुत बड़ा और थकाऊ है। लेकिन दूसरा प्रतिभागी काम करता रहा। एक हफ़्ते बाद, टंकी खाली करते हुए, उसे गिलास में कुछ खनकती हुई आवाज़ सुनाई दी। उसने गिलास में देखा, तो उसमें एक हीरा था। वह उस हीरे को राजा के पास ले गया।

राजा हीरे को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने प्रतियोगी से कहा कि इस गतिविधि का उद्देश्य वास्तव में टंकी को खाली करना नहीं था, बल्कि हीरे को ढूँढना और उसे ईमानदारी से राजा को वापस करना था। उसी हीरे को उत्तराधिकारी के ताज में लगाया गया और उस अंतिम प्रतिभागी को सिंहासन के उत्तराधिकारी का पद दे दिया गया।

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सारा बब्बर

सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें

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