सुनने वाला हृदय
राजा सुलैमान का उपहार और न्याय

रूबी कार्मन बाइबिल से एक कहानी सुनाती हैं। यह कहानी राजा सुलैमान की है, जिन्होंने ईश्वर से एक ‘सुनने वाला हृदय’ माँगा था और जो अपनी असाधारण विवेकशीलता के लिए जाने गए।

सदियों पहले की बात है। इज़राइलियों के प्राचीन राज्य में एक सुल्तान हुए थे जिनका नाम था सुलैमान। वे अपने पिता राजा दाऊद और माता बतशेबा के प्यारे बेटे थे। जब सुलैमान पैदा हुए तब पैगंबर नातान ने उन्हें एक विशेष नाम दिया, ‘जेडीडियाह,’ जिसका अर्थ है, ‘परमेश्वर का प्यारा।’
जब राजा दाऊद का जीवन काल पूरा होने को आया तब उन्होंने सुलैमान को अपने पास बुलाया। बेटे के हाथों को पकड़कर उन्होंने बड़े प्यार से एक ज़रूरी बात कही, “मेरे बेटे मेरी बात सुनो! मेरा इस दुनिया से जाने का समय आ गया है। तुम मज़बूत और निडर रहना, साहसी बने रहना और हमेशा पूरे दिल से परमेश्वर को समर्पित रहना। याद रखना, अपने पूरे मन और अपनी पूरी आत्मा से हर पल परमेश्वर के साथ चलना। वे तुम्हें और तुम्हारे लोगों को शांति और समृद्धि की ओर ले जाएँगे।”
राजा दाऊद के निधन के बाद सुलैमान राजा बन गए। वे अपने सलाहकारों के साथ गिबोन शहर में प्रार्थना के लिए गए। वहाँ उन्होंने बड़े विनम्र और सच्चे दिल से प्रार्थना की और परमेश्वर से मार्गदर्शन माँगा कि वे अपनी प्रजा और अपने राज्य पर सबसे अच्छी तरह से राज कैसे कर सकते हैं। उसी रात परमेश्वर ने सुलैमान को सपने में दर्शन दिए और कहा, “मेरे बच्चे, तुम दिल से जो कुछ भी चाहते हो, माँग लो।” परमेश्वर के सामने आकर सुलैमान बहुत भावुक हो गए और आध्यात्मिक रूप से उन्नत महसूस करने लगे। सुलैमान जानते थे कि परमेश्वर किसी बड़े व ऊँचे मकसद के लिए उनके सामने प्रकट हुए हैं और इसलिए सुलैमान ने प्रभु की ओर विशेष ध्यान देते हुए जवाब दिया।
सुलैमान ने बड़े विनम्र मनोभाव से कहा, “हे प्रभु! आपका प्रेम और आपकी उदारता पाकर मैं धन्य हो गया हूँ। आपने मेरे पिता पर उनके आखिरी पलों तक अपनी कृपा बरसाई और अब आपने मुझे यह सिंहासन सौंपकर आपके लोगों पर राज करने के लिए चुना है। लेकिन मैं तो अभी एक नादान और अनुभवहीन बच्चा हूँ, इसलिए इस काम को कैसे पूरा कर पाऊँगा? मैं प्रजा की ज़रूरतों को कैसे पूरा कर पाऊँगा और उनकी समस्याओं को कैसे हल कर सकूँगा?” सुलैमान जानते थे कि सिर्फ़ परमेश्वर ही हर इंसान की ज़रूरत को जान सकते हैं।
बड़ी विनम्रता से सुलैमान ने अपने दिल की इच्छा परमेश्वर को बताई – “हे प्रभु, मुझे एक ‘सुनने वाला हृदय’ दीजिए ताकि मैं आपके बताए रास्ते पर चल सकूँ और आपकी तथा मानवता की सेवा कर सकूँ। मुझे वह असली आवाज़ सुनने की शक्ति मिले जो हृदय की गहराई में होती है - वह असली लेकिन धीमी आवाज़ जो खुद को ज़ाहिर करना चाहती है पर मन के शोर और उलझनों के कारण अक्सर दब जाती है।”

सुलैमान के ये शब्द सुनकर परमेश्वर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, “तुम मुझसे धन-दौलत, बड़ा राज्य, नाम और शोहरत, लंबी उम्र या अपने दुश्मनों पर जीत भी माँग सकते थे, लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया। तुमने मुझसे एक सुनने वाला हृदय माँगा है। मैं अत्यंत प्रसन्नता के साथ तुम्हारी यह इच्छा पूरी करता हूँ - तुम्हें एक सुनने वाला हृदय प्राप्त हो, एक ऐसा हृदय जो विवेक और ज्ञान के रास्ते पर चलकर सही-गलत को जान सके।” परमेश्वर ने आगे कहा, “तुमने यह सुनने वाला हृदय अपने लिए नहीं बल्कि मेरी सेवा करने और मेरा काम करने के लिए माँगा है। सुलैमान, तुम इंसानों में सबसे विवेकशील बनोगे। तुम्हारे समान बुद्धिमान इंसान न तो पहले कभी हुआ है और न ही भविष्य में कोई तुम्हारी बराबरी कर पाएगा। सदियों तक लोग तुम्हें याद रखेंगे।”
जल्द ही उस दिव्य उपहार की शक्ति प्रकट हुई। एक दिन राज-दरबार में दो औरतें राजा के पास न्याय माँगने आईं। दोनों के पास एक-एक बच्चा था, एक जीवित और एक मृत। पहली औरत ने राजा से कहा, “महाराज! मैं आपकी अनुमति से कुछ कहना चाहती हूँ। हम दोनों औरतें एक ही घर में रहती हैं। जब मैंने अपने बच्चे को जन्म दिया तब घर में हम दोनों ही थीं।” उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उसने आगे कहा, “मेरे बच्चे के पैदा होने के तीन दिन बाद आधी रात को इस औरत (दूसरी महिला की ओर इशारा करते हुए) ने अपने बच्चे को जन्म दिया। जब मैं अगली सुबह उठी तब इसने मुझसे कहा कि मेरा बच्चा रात में सोते हुए मर गया था और इसका बच्चा स्वस्थ था।” वह बोलती गई, “मैंने अपने बिस्तर पर मरे हुए बच्चे को देखा तो मेरा दिल टूट गया। फिर मैंने उस बच्चे का चेहरा करीब से देखा और पाया कि वह मेरा बच्चा नहीं था। जिस बच्चे को यह गोद में लिए खड़ी है वह बच्चा मेरा है। इसने ज़रूर मेरे सोते समय मेरे बच्चे को ले लिया और अब मेरे पास यह मरा हुआ बच्चा है।”

‘‘हे प्रभु, मुझे एक ‘सुनने वाला हृदय’ दीजिए ताकि मैं आपके बताए रास्ते पर चल सकूँ और आपकी तथा मानवता की सेवा कर सकूँ। मुझे वह असली आवाज़ सुनने की शक्ति मिले जो हृदय की गहराई में होती है - वह असली लेकिन धीमी आवाज़ जो खुद को ज़ाहिर करना चाहती है पर मन के शोर और उलझनों के कारण अक्सर दब जाती है।”
राजा सुलैमान ने दूसरी औरत को तीखी व प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा। उसने पहली औरत की बात को गलत बताया और कहा कि सच तो इसका बिलकुल उल्टा है। उसने दावा किया कि पहली औरत वास्तव में झूठ बोल रही थी और सिर्फ़ उससे उसका बच्चा छीनने की कोशिश कर रही थी। राज दरबार में दो माँएँ खड़ी थीं, दोनों रो रही थीं और दोनों एक-दूसरे को झूठी कह रही थीं। न कोई गवाह था और न कोई सबूत, राजा कैसे पता लगाते कि असली माँ कौन थी? यह एक नामुमकिन सा काम लग रहा था।
तभी राजा ने अपने सिपाही को तलवार लाने के लिए कहा और सबके सामने ऐलान किया, “बच्चा तो केवल एक है और माँएँ दो। मैं एक माँ को बच्चा दे दूँ और दूसरी को मना कर दूँ, यह कैसे हो सकता है?” राजा ने सिपाही को बुलाकर उदास और गंभीर आवाज़ में उसे आदेश दिया, “इस जीवित बच्चे के अभी दो टुकड़े कर दो, उसके बाद एक टुकड़ा पहली औरत को और दूसरा टुकड़ा दूसरी औरत को दे दो।” जैसे ही सिपाही बच्चे को लेकर आदेश पूरा करने के लिए आगे बढ़ा, पहली औरत चिल्ला उठी, “कृपया रुक जाइए। इस बच्चे को मत मारिए। मैं कुबूल करती हूँ कि यह बच्चा मेरा नहीं है। कृपया इसे जीवित रहने दीजिए और इसे इसकी असली माँ के पास रहने दीजिए।”

लेकिन दूसरी औरत पत्थर की तरह स्थिर खड़ी रही और बोली, “महाराज, आपका फ़ैसला सही है। बच्चे के दो टुकड़े कर दिए जाएँ। अगर यह बच्चा मुझे नहीं मिल सकता तो इसे भी नहीं मिलना चाहिए।”
राजा सुलैमान सिंहासन से उठे और तेज़ी से उस सिपाही की ओर बढ़े जिसके पास बच्चा था। उन्होंने गरजते हुए कहा, “तलवार नीचे रखो। ईश्वर की कृपा से मैंने असली माँ की आवाज़ सुन ली है।” राजा के इस ऐलान पर पूरे राज-दरबार में सन्नाटा छा गया। राजा सुलैमान ने दृढ़ता के साथ कहा, “कोई भी माँ कभी यह नहीं चाहेगी कि उसके बच्चे को मार दिया जाए या दो टुकड़ों में काट दिया जाए। माँ का प्यार निस्वार्थ होता है। पहली औरत अपने बच्चे को ज़िंदा रखने के लिए उसे छोड़ने को तैयार हो गई। वही उसकी असली माँ है।” राजा ने घोषणा की, “बच्चे को वापस उसी महिला को दे दिया जाए।” इस प्रकार पहली औरत, यानी बच्चे की असली माँ अपने बच्चे को पाकर खुश हो गई।


रूबी कार्मन
रूबी एक हार्टफुलनेस प्रशिक्षक, शिक्षक व अनुभवी परामर्शदाता हैं और कभी-कभी लिखती भी हैं... और पढ़ें
