डोलोमाइट से सीखे सबक

अलान देवीन डोलोमाइट के बारे में बात करते हैं जिसे वर्ष 2009 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था। यह अद्भुत पर्वत श्रृंखला इटली के उत्तर-पूर्व में स्थित है और यूरोप की सबसे ऊँची व सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला है। यह लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी है तथा आठ अल्पाइन देशों - मोनाकोफ्रांसस्विट्ज़रलैंडइटलीलिखटेंस्टाइनजर्मनीऑस्ट्रिया और स्लोवेनिया - तक फैली हुई है।

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ये सभी तस्वीरें एक ही पर्वत की हैं जो 24 घंटे की अवधि में अलग-अलग समय पर ली गई हैं। ये 2,000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर डोलोमाइट में स्थित यूरोप के सबसे ऊँचे अल्पाइन घास के मैदान, ‘अल्पी दी सीउसी’ में एक निश्चित स्थान से ली गई हैं। ये तस्वीरें प्रकाश और रंग के निरंतर खेल के साथ-साथ पर्वत श्रृंखला में मौसम के बदलते मिज़ाज को खूबसूरती से प्रकट करती हैं।

 

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डोलोमाइट की एक अनूठी विशेषता है, प्रसिद्ध ‘अल्पेनग्लो'। वास्तव में दिन में दो बार, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय, ये पर्वत पहले गुलाबी रंग में, फिर गहरे लाल रंग में और अंत में रात के अंधेरे में छिप जाने से पहले बैंगनी रंग में बदल जाते हैं। अल्पेनग्लो को डोलोस्टोन की संरचना से समझाया जा सकता है। इसे डोलोमाइट चट्टान के रूप में भी जाना जाता है जिसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम होते हैं। जब सूर्य की किरणें इन दोनों तत्वों पर बिलकुल सही कोण में पड़ती हैं तब ये पर्वतों को खूबसूरत गुलाबी-लाल रंग में बदल देती हैं।

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कभी-कभी बादलों के छाए रहने के कारण पर्वत बिलकुल दिखाई ही नहीं देता मानो वह मौजूद ही न हो। लेकिन जिन्होंने इसे सूर्य के प्रकाश से आच्छादित देखा है, वे जानते हैं कि यह हमेशा मौजूद है, केवल प्रकृति के गुज़रते हुए आच्छादन के पीछे छिपा हुआ है। इससे, हम एक गहन सबक सीखते हैं - चीज़ें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखाई देती हैं। अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष पर पहुँचने से गलतफ़हमी हो सकती है। सही समझ के लिए समय, धैर्य और ध्यानपूर्वक देखने की तत्परता होनी चाहिए।

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चीज़ें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखाई देती हैं। अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष पर पहुँचने से गलतफ़हमी हो सकती है। सही समझ के लिए समयधैर्य और ध्यानपूर्वक देखने की तत्परता होनी चाहिए।


तस्वीरों का यह क्रम ध्यान के सार को भी बड़ी खूबसूरती से दर्शाता है। हालाँकि पर्वत बदलते ‘मौसम’ के साथ बदलता हुआ प्रतीत होता है लेकिन वास्तव में यह अपरिवर्तित रहता है।

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हमारा आंतरिक परिदृश्य निरंतर विकसित होता रहता है। यह हमारे हृदय के बदलते मौसम यानी बदलती दशा - सूक्ष्म भावनाओं, विचारों और अनुभूतियों - से प्रभावित होता है। प्रत्येक ध्यान का अनुभव अद्वितीय होता है जो इन आंतरिक बदलावों से प्रभावित होता है।

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फिर भी, इस निरंतर होते परिवर्तन के बीच, हमारे भीतर एक अविचल उपस्थिति है - हमारा आंतरिक केंद्र, हमारा ‘आंतरिक पर्वत’ - जो स्थिर व मौन रहता है और बिना प्रभावित हुए सब कुछ देखता है। यह स्थिर केंद्र, बादलों के पीछे पर्वत की तरह, हमारे हृदय के भीतर का केंद्र है, हमारे अस्तित्व की नींव है, एक ऐसी जगह जो हर तूफ़ान और धूप में दृढ़ता से टिकी रहती है।

20वीं सदी के रूसी रूढ़िवादी हाइरोमॉन्क (जो साधू भी है और पुजारी भी), फ़ादर सेराफ़िम रोज़, की शिक्षाएँ यहाँ समझ में आती हैं। उन्होंने अभ्यासियों से आग्रह किया कि वे एक पर्वत की तरह ध्यान करें और सभी आंतरिक मौसमों यानी बदलती स्थितियों का स्वागत करें - तूफ़ानों यानी उग्र भावनाओं और शांति दोनों का। जैसा कि उन्होंने बड़ी खूबसूरती से कहा, “पर्वत की तरह बैठने का मतलब है, सभी स्थितियों को स्वीकार करना - अच्छी, बुरी, वर्षा, धूप और धुंध। पर्वत का एक हिस्सा हमेशा रोशनी में और दूसरा छाया में रहता है।” यह कल्पना हमें याद दिलाती है कि पर्वत की भाँति हम भी अपने हृदय के केंद्र में स्थिर और दृढ़ता से बने रह सकते हैं, हर अनुभव को समभाव और विनीत भाव के साथ अपना सकते हैं।


पर्वत की तरह बैठने का मतलब हैसभी स्थितियों को स्वीकार करना - अच्छीबुरीवर्षाधूप और धुंध। पर्वत का एक हिस्सा हमेशा रोशनी में और दूसरा छाया में रहता है।”


पर्वत से सीखा सबक केवल अवलोकन करना ही नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति - प्रकाश और छाया, आनंद और कठिनाई - को उसके वास्तविक रूप में स्वीकार करना भी है।

मेरे अनुसार, डोलोमाइट को निश्चित रूप से यूरोप की सबसे ‘आध्यात्मिक’ पर्वत श्रृंखलाओं में से एक के रूप में वर्णित किया जा सकता है। उसकी विस्मयकारी ऊर्ध्वता, गिरजाघर जैसे शिखर, शानदार चट्टानें और विशाल शिलाएँ विनम्रता और श्रद्धा के साथ-साथ उत्थान की भावना भी उत्पन्न करती हैं जैसा कि पवित्र स्थानों की उत्तम वास्तुकला को देखकर होता है।


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अलान देवीन

अलान अमेरेंको के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं जो एक पुनर्योजी कंपनी है। इससे पहले उन... और पढ़ें

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