इस विश्व नारियल दिवस परसारा बब्बर नारियल से संबंधित फिलीपींस की एक दिलचस्प कहानी प्रस्तुत कर रही हैं। नारियल अंदर से कोमलरसीला और विटामिन व खनिज से भरपूर होता है। नारियल पानी पीते हुए इस कहानी और नारियल पानी के विभिन्न उपहारों का आनंद लें - प्यास बुझाने वाला पानीमीठा गूदा और यह संदेश कि उसके भीतर मौजूद खालीपन में जीवन का अमृत है।

क समय की बात है, फिलीपींस में लोला नाम की एक युवा लड़की रहती थी। वह अकेली थी, लेकिन अपने चारों ओर लगाए गए पेड़-पौधों को अपना परिवार मानती थी। वे पौधे उसे भोजन, छाया व हरियाली देते थे और लोला अपने उपवन की बड़े प्यार से देखभाल करती थी। एक दिन लोला ने बिलकुल अलग तरह का पेड़ लगाया।

उसकी अच्छी देखभाल की वजह से उपवन के सभी पेड़ बढ़ते जा रहे थे। वह नया पेड़ भी बढ़ तो रहा था, लेकिन अजीब बात यह थी कि उसमें पत्ते नहीं थे। ऐसा लगता जैसे कि वह पेड़ शर्मीला था। हर वर्ष वर्षा ऋतु में लोला पेड़ों के अच्छे विकास की कामना करती और उस पेड़ को गले लगाकर कहती कि वह भी अपने रूप में बड़ा हो जाए। एक बार वर्षा ऋतु में उस पेड़ पर तीन फल आए - भूरे, खुरदुरे और रेशों वाले।

लोग उस अजीब से रूप का मज़ाक उड़ाने लगे। किसी ने कहा, “यह तो बंदर जैसा दिखता है,” तो किसी ने उसकी हँसी उड़ाते हुए कहा - “अरे, यह तो पैर साफ़ करने वाला ब्रश है।” लोला ने इन बातों की परवाह नहीं की। उसने सबको कहा कि यह पेड़ खास है और यह अपने तरीके से बढ़ेगा।

फिर एक दिन गाँव में भयंकर तूफ़ान आया। ऊँची-ऊँची लहरें उठने लगीं, छतें उड़ गईं, लोग आश्रय के लिए भागने लगे। लेकिन लोला अपने पेड़ को गले लगाकर वहीं रुकी रही। तूफ़ान थमने तक सभी घर बह चुके थे, सिवाय लोला की झोपड़ी के। एक सैनिक की तरह दृढ़ता से खड़े उस अजीब पेड़ की वजह से लोला की झोपड़ी सुरक्षित बची रही।

 

coconut2.webp

 

अगली सुबह एक भूरे रंग का फल लोला की गोद में गिरा। उत्सुकता के साथ लोला ने उस फल को खोला तो उसमें मीठा पानी और सफ़ेद गूदा था। जब गाँववाले भूखे-प्यासे वहाँ आए तब लोला ने उन्हें वह फल दिया। उसने कहा, “लो, बंदर का सिर चखो।”

 

coconut3.webp

 

बच्चे हँसने लगे। लेकिन फिर हर परिवार ने अपने घर में वह नया पेड़ लगाया।

उन्होंने उसका नाम (फ़िलिपिनो भाषा में) ‘नियोग’ रखा जिसे हिंदी में नारियल कहा जाता है। उनका मानना था कि उसका खोल दरअसल उसका सिर है और उस पर बने तीन निशान उस नारियल की आँखें और मुँह हैं। वह चेहरा उस बहादुर आत्मा का है जिसने उस तूफ़ानी रात में लोला की रक्षा की।

तब से जब भी कोई नारियल पानी पीता, वह उस पेड़ को धन्यवाद देता, जिसकी पहचान अब उसके सिर से भी होने लगी और लोग कहने लगे कि उसने अपना दिल कभी नहीं खोया।

 

coconut4.webp

Comments

सारा बब्बर

सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें

उत्तर छोड़ दें