डॉ. इचक अडीज़ेस ध्यान करने से प्राप्त लाभों के बारे में अपना व्यक्तिगत अनुभव बता रहे हैं। एक अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन परामर्शदाता के रूप में लंबे समय से अपने व्यवसाय के शीर्ष पर रहने के कारण, वे उन सभी लोगों के लिए एक आदर्श बन गए हैं जो अपने व्यवसाय में उत्कृष्टता पाना चाहते हैं।
मैंने पहले भी कई ब्लॉग में ध्यान करने के लाभों के बारे में लिखा है। आज ध्यान करते हुए मुझे उन लाभों के बारे में अंतर्दृष्टि मिली जो मुझे समय के साथ नियमित ध्यान करने से प्राप्त हुए। मैं वर्षों से ध्यान कर रहा हूँ, लेकिन पिछले अठारह महीनों में, कोविड महामारी की वजह से और ल्यूडमिला व्लैडोवा की मदद से, जो मुझे हर हफ़्ते ध्यान कराती हैं, मैं बिना किसी रुकावट के ध्यान कर रहा हूँ।
मैंने और मेरे परिवार ने मेरे व्यवहार में बदलाव देखा है। मैं ज़्यादा सहनशील हो गया हूँ। मैं अब कम नाराज़ होता हूँ। मैं अपनी मर्ज़ी के अनुरूप काम कराने के लिए अपनी आवाज़ ऊँची नहीं करता। मैं दूसरों से कम अपेक्षाएँ रखता हूँ। मेरे लिए थोड़ा ही बहुत है। मैं अब दूसरों को उनकी त्रुटियों के लिए ज़्यादा आसानी से स्वीकार कर लेता हूँ।
मैंने सहनशीलता सीख ली है क्योंकि जब आप ध्यान करने के लिए आधे घंटे या उससे ज़्यादा समय तक बैठते हैं तब आप शांत रहना, अपने मन और विचारों के हस्तक्षेप को सहन करना, उन्हें स्वीकार करना और उन्हें गुज़र जाने देना सीखते हैं। आप धैर्य सीखते हैं, यह समझने लगते हैं कि किसी समस्या का तुरंत ही समाधान करना ज़रूरी नहीं है। आप उस पर गौर कर सकते हैं, चाहे आपको वह पसंद हो या न हो और उसे गुज़रने दे सकते हैं। मैं अनुशासन सीखता हूँ क्योंकि मैं हर दिन ध्यान करता हूँ, एक दिनचर्या का पालन करता हूँ।
ध्यान में, सहनशीलता व धैर्य के कारण और नियंत्रण की महत्वाकांक्षा छूट जाने से, मुझे प्रेम और शांति महसूस होने लगी।
ध्यान करते-करते मैंने अनासक्ति सीखी। जब मैं ध्यान करता हूँ और विचार आते हैं, तो उनमें से कुछ वास्तव में कार्रवाई करने की अपेक्षा करते हैं। मैं उन्हें गुज़र जाने देता हूँ। मुझे उन पर तुरंत कार्रवाई करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। मैं उनमें से किसी भी समस्या के प्रति आसक्त नहीं हूँ। मैं अपनी सभी समस्याओं को अपने पर हावी नहीं होने देता और उनसे परे हो जाता हूँ, इसलिए मुझे उनसे निपटने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मैं बस ध्यान में बने रहता हूँ ताकि विचारों को नियंत्रित करने का भ्रम न रहे। जब आप कार्रवाई करते हैं तब आप हमेशा यही मानते हैं कि आप परिवर्तन कर सकते हैं, आप वास्तव में पर्यावरण को नियंत्रित कर सकते हैं। लेकिन यदि आप गौर करें तो ध्यान में आपको कुछ हद तक विनम्रता प्राप्त होती है और आप यह समझ जाते हैं कि आप सब कुछ नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। बस प्रवाह के साथ चलें और स्वीकार करें कि आप किसे नियंत्रित कर सकते हैं और किसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। ध्यान में, सहनशीलता व धैर्य के कारण और नियंत्रण की महत्वाकांक्षा छूट जाने से, मुझे प्रेम और शांति महसूस होने लगी। जहाँ दुनिया में उथल-पुथल हो रही है वहीं मैं शांत हूँ। मैं प्रेम महसूस करता हूँ और प्रेम प्राप्त करता हूँ। ध्यान वर्षों की मनोचिकित्सा को पीछे छोड़ देता है। यह सस्ता है और निश्चित रूप से अधिक प्रभावी है।
बस कुछ सोच और एहसास,

डॉ. इचक अडीज़ेस

