पारिस्थितिकीविद् बी. रतिनसबापति बताते हैं कि साधारण सी घास में भी कष्टोंखूबसूरतीभक्ति और पोषण की कई कहानियाँ मौजूद हैं।

 

वह मोती जो स्मरण कराता है

हमारी धरती पर फैली विविध प्रकार की घास में एक है संक्रू या वैयजंती (कॉइक्स लैक्रिमा जोबी)। इसकी विशेषता यह है कि यह बिलकुल मोती जैसे आकर के बीज उत्पन्न करती है जो आँसुओं की तरह प्रतीत होते हैं। इस घास का अंग्रेज़ी नाम, जॉबज़ टीयर्स बाइबल के एक पात्र जॉब पर पड़ा है जिसे अपने घोर कष्टों व अडिग श्रद्धा के लिए जाना जाता है। इस घास का वैज्ञानिक नाम आँखों की अश्रु ग्रंथि यानी लैक्रीमल ग्रंथि पर आधारित है।

विभिन्न संस्कृतियों और महाद्वीपों में इन आँसू रूपी मोतियों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है – डेविडज़ टियर्स, मरियमज़ टियर्स, क्राइस्टज़ टियर्स या सिर्फ़ टियर ड्रॉप्स। ये सारे नाम बस एक ही सार्वभौमिक सच के प्रतीक हैं - दुख को शक्ति, खूबसूरती और भक्ति में बदला जा सकता है।

एक अन्न जो शरीर को पोषित करता है

वैयजंती मूल रूप से एशिया के उष्णकटिबंधीय (tropical) क्षेत्रों में पाया जाता है और सदियों से पारंपरिक आहार का एक हिस्सा रहा है। इसे अदलय के नाम से भी जाना जाता है और बाज़ार में व्यापारिक अनाजों की वृद्धि से पहले, इसके दानों ने कई समुदायों का भरण-पोषण किया है।

सादगी से जुड़ा इतिहास

एग्नेस आर्बर ने अपनी पुस्तक ‘द ग्रैमिनी’ में लिखा है कि एक चीनी जनरल पहली सदी ईस्वी में इस अन्न को चीन में पहली बार लाया। टॉनकिंग में इसकी लोकप्रियता देखकर वह इन दानों को कई गाड़ियों में भरकर अपने साथ वापस चीन ले गया। जावा, सिलीबीज़ और सुदूर पूर्व में किसान इसे चावल के खेतों की मेढ़ों पर उगाया करते थे।

एक बहुउपयोगी और पौष्टिक आहार

इस अन्न की कई नरम छिलकों वाली किस्मों की खेती की जाती है। ये इनके मीठे, उच्च-प्रोटीन दानों के कारण लोग इन्हें बहुत पसंद करते हैं। एशिया में वैयजंती को -

  • चावल की तरह उबाला जाता है
  • सुखाया या भूना जाता है
  • पीसकर उस आटे से ब्रेड बनाई जाती है
  • सूप या दलिये के रूप में पकाया जाता है
  • पारंपरिक पेयों के रूप में बनाया जाता है। भारत में इससे ज़ू (मिज़ो समुदाय द्वारा) बनाया जाता है और जापान में मा-यूएन।

इस साधारण सी दिखने वाली घास की समाज के लिए बहुत महत्ता है क्योंकि यह गरीबों के पेट भरती है, संस्कृति को बनाए रखती है और दिखाती है कि प्रकृति की प्रचुरता अक्सर साधारण रूपों में छिपी होती है।

प्रकृति का एक उत्तम मोती

यदि वैयजंती शरीर को पोषित करती है तो वह कला को भी बढ़ावा देती है। दुनिया के कई देशों जैसे मध्य अमरीका, अफ़्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में लोग इन दानों को सुखाकर इनका उपयोग माला, जपमाला, कंगन और अन्य पारंपरिक गहनों को बनाने के लिए करते हैं।

वैयजंती की असली खूबसूरती है इनका विशिष्ट प्राकृतिक आकार जो कारीगरी के लिए बेहद उपयुक्त है। अन्य बीजों से अलग इन दानों के बीच में एक प्राकृतिक रूप से छेद बना होता है, जिस कारण इन्हें बिना किसी तरह के औज़ार या छेद करने की ज़रूरत के, बड़ी ही आसानी से धागे में पिरोकर गहनों का रूप दिया जा सकता है।

साथ ही इनमें एक प्राकृतिक चमक होती है और ये ठीक तरह से छिद्रित भी होते हैं। ऐसा लगता है कि इनका सौंदर्य और हलकी सी चमक हमसे कह रही हो, “ज़रूरी नहीं है कि खूबसूरती को निर्मित किया जाए।” हालाँकि इन प्राकृतिक सफ़ेद मोतियों को चमकदार रंगों में रंगा जा सकता है, फिर भी इनका प्राकृतिक मोतिया-धूसर रंग सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है। अक्सर सर्वश्रेष्ठ कला रास्ते के किनारे यानी साधारण जगहों पर मिलती है जिसे प्रकृति कलाकार के लिए तैयार करती है और कलाकार अपने कौशल से उस सौंदर्य को अपनी कृतियों में उतारता है।

संगीत में वैयजंती - पृथ्वी की लय

इन दानों का एक बेहतरीन उपयोग अफ़्रीका के शेकेरे (लौकी से बना एक पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र) में देखने को मिलता है। एक खोखली तुंबी पर ढीली जाली चढ़ाई जाती है जिसमें इसके सैकड़ों मोतियों को बुना जाता है। जब इसे बजाया जाता है तो ये मोती तुंबी से टकराकर एक बहुत ही प्राचीन, जीवंत व प्राकृतिक ध्वनि उत्पन्न करते हैं। बीजों से उत्पन्न यह संगीत ऐसा लगता है मानो दुनिया की प्राकृतिक धड़कन हो।


ये आँसू के आकार के मोती स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता से संबंधित प्रतीत होते हैं। कई संस्कृतियों में वैयजंती प्रार्थनाचिंतन और ध्यान का एक साधन बन जाती है।


tears-become-prayer-3.webp
tears-become-prayer-2.webp

भक्ति का प्रतीक

ये आँसू के आकार के मोती स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता से संबंधित प्रतीत होते हैं। कई संस्कृतियों में वैयजंती प्रार्थना, चिंतन और ध्यान का एक साधन बन जाती है।

आत्ममंथन की ओर ले जाने का साधन

आँसू का आकार आत्ममंथन को आमंत्रित करता है। यह प्रतिबिंबित करता है –

  • उन दुखों को जिन्हें हम झेलते हैं।
  • उस करुणा को जिसे हम विकसित
    करते हैं।
  • उस कृपा को जो हमें दुखों से परे ले जाती है।

जपमाला में लगा हर मोती स्मरण के एक पवित्र क्षण का प्रतीक है। वैयजंती का हर मोती मानवीय अनुभवों की लय को दर्शाता है - खुशी, दर्द, समर्पण और अध्यात्मिक उत्कर्ष।

 

tears-become-prayer-4.webp

 

मदर टेरेसा - एक जीवित जपमाला

जपमाला से चिंतन करने की शैली का आध्यात्मिक समानांतर मदर टेरेसा के जीवन में मिलता है। रोमन कैथोलिक परंपरा में जपमाला का उपयोग दिव्यता के तीन रहस्यों पर मनन करने के लिए किया जाता है – आनंदपूर्ण रहस्य, दुखद रहस्य और गौरवमय रहस्य। मदर टेरेसा ने अपने जीवन में इन तीनों को बड़ी ही खूबसूरती से सम्मिलित किया था। उनकी निर्मल मुस्कान में सेवा से उत्पन्न आनंद झलकता था।

 

tears-become-prayer-5.webp

उनके झुर्रियों से भरे चहरे और चिंतनशील आँखों में, मनुष्यों को अपार कष्ट झेलते हुए देखने का दुख था। उनके जुड़े हुए हाथ, जिन पर माला लिपटी रहती थी, अपने गौरवमय कार्यों को एक ऐसी दिव्य शक्ति को समर्पित कर देते थे जो इंसान की समझ से परे है।

हाथ में पकड़े मोतियों की तरह, मदर टेरेसा ने हर आँसू को करुणा में और हर दर्द के अंधेरे को रोशनी में बदल दिया।

हार्टफुलनेस के लिए आध्यात्मिक चिंतन

हार्टफुलनेस में हम अक्सर सादगी, शुद्धता और आंतरिक समर्पण की बात करते हैं। वैयजंती ठीक इन्हीं बातों का प्रतीक है -

  • शुद्धता - यह उसके प्राकृतिक रूप से चमकीले, स्वाभाविक बीज रूपी मोती
    में है।
  • सादगी - यह एक साधारण सी घास है जो शरीर और आत्मा दोनों को पोषित करती है।
  • समर्पण - यह उसके आँसू के आकार में है जो दर्द को प्रार्थना के क्षेत्र में ले जाता है

जिस तरह मदर टेरेसा अपनी जपमाला का उपयोग हृदय को ईश्वर के साथ तालमेल में लाने के लिए करती थीं, ठीक उसी तरह वैयजंती हमें याद दिलाती है कि हमारे चिंतन के लिए प्रकृति हमें मूर्त साधन भी प्रदान करती है। इसके हर मोती में - चाहे वह हार में पिरोया गया हो या फिर जपमाला में या किसी अन्य आभूषण में - स्मरण, कृपा और कृतज्ञता का भाव समाहित है।

आँसू जो रोशनी बन जाते हैं

वैयजंती हमें एक गहन शिक्षा देती है -

जो आँसू के रूप में शुरू होता है, वह पोषण, सौंदर्य, लय और प्रार्थना भी बन सकता है। एशिया के चावल के खेतों से लेकर प्रार्थनापूर्ण हाथों में पकड़ी जपमाला तक, अफ़्रीका की तुंबी के संगीत से लेकर मदर टेरेसा की मौन शक्ति तक, ये साधारण से मोती हमें सिखाते हैं कि रूपांतरण प्रकृति और आध्यात्मिक जीवन दोनों में महत्वपूर्ण है।

आँसू अंत नहीं है। बल्कि अक्सर यह एक शुरुआत होता है। यह आशा और रूपांतरण का प्रतीक है तथा प्रकृति, भक्ति और मानवीय हृदय के नवीनीकरण का संकेत है।

 

tears-become-prayer-7.webp

 


हर मोती में - चाहे वह हार में पिरोया गया हो या फिर जपमाला में या किसी अन्य आभूषण में - स्मरणकृपा और कृतज्ञता का भाव समाहित है।


 


Comments

बी. रतिनसभापति

बी. रतिनसभापति

रतिनसभापति एक पारिस्थितिकीविद् हैंजिन्ह... और पढ़ें

उत्तर छोड़ दें