डॉ. इचक अडीज़ेस यह समझने के लिए अतीत की गहराई में जाते हैं कि वे जैसे हैं वैसे क्यों हैं। और परिणाम जीवन बदलने वाले और बहुत ही मार्मिक हैं। जिस विनम्रता के साथ वे खुद को स्वीकार करने और बदलने में सफल होते हैं, वह सीखने लायक है।
मुझ पर मेरी पहली पत्नी और अब मेरी दूसरी पत्नी ने आत्ममोही, अहंकारी और इससे भी अधिक, बहुत अधिक होने का आरोप लगाया है। जब मुझ पर आरोप लगते थे तब मैं बहुत नाराज़ हो जाता था। “आप मुझसे क्या चाहती हैं? मैं ऐसा क्या कर रहा हूँ जिसकी वजह से आप मुझे ऐसा कह रही हैं,” मैं जवाब में चिल्लाता था। मुझे कभी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
वर्ष 2014 में एंथनी रॉबिंस के ‘डेट विद डेस्टिनी' कार्यक्रम में तुरंत ही मुझे यह बात अच्छी तरह समझ आ गई। कार्यक्रम के दौरान एक समय एंथनी रॉबिंस ने रोशनी कम कर दी और हमें एक जाना-माना अभ्यास करवाया जिसमें आप अपने अतीत की सबसे पुरानी स्मृति को याद करने की कोशिश करते हैं। एक साल पहले, जब मैंने पहली बार इस अभ्यास का प्रयास किया तो मुझे अविश्वसनीय सफलता मिली। मैं प्यार के लिए अपनी तड़प के कारण को अच्छी तरह समझ गया। और मैं जान गया कि जीवनभर मेरा व्यवहार इसी से प्रेरित रहा है।
क्या हुआ था? मैं मैसेडोनिया में बल्गेरियाई बंदी शिविर में अपने बचपन के अनुभव को याद करने में सफल रहा। मैं पाँच साल का था। अपने आप को समय में वापस ले जाते हुए मैंने देखा कि मेरे दादा-दादी को मृत्यु कक्ष में ले जाया जा रहा था जबकि मैं, पाँच साल का बच्चा, उन्हें मवेशियों की गाड़ी पर ले जाते हुए देख रहा था। दरवाज़े उनके पीछे ज़ोर से बंद कर दिए गए थे। और उस याद के क्षण में मुझे स्पष्टतः पता चल गया कि मेरा दिल बंद हो गया था। मैं इस डर से किसी से प्यार करने का जोखिम नहीं उठा पा रहा था कि मैं उसे खो दूँगा। उस डर का बोझ मुझ पर जीवन भर रहा है।
मेरे दोस्तों, विकसित होने के लिए कभी देर नहीं होती। सीखने के लिए कभी देर नहीं होती। व्यापार जगत में एक
कहावत है - जैसे ही तेल मिल जाए, खोदना बंद कर दें। दूसरे शब्दों में, अधिक खोदने का कोई फ़ायदा नहीं है। आप जो
चाहते थे वह आपको पहले ही मिल चुका है। लेकिन, व्यक्तिगत विकास में जब आपको तेल दिखने लगता है,
कुछ और खोदें और उसके बाद कुछ और यानी अपना प्रयास जारी रखें। तेल मिलने के बाद आपको सोना भी मिल सकता है।
एंथनी ने मुझे अपने जीवन में और भी पहले जाने के लिए कहा। और उसकी कोशिश काम कर गई। मैंने अपनी पत्नियों को समझा। मैंने खुद को एक बच्चे के रूप में देखा। मैं कुछ समय पहले ही जन्मा था और बहुत ज़्यादा रो रहा था। मुझे अपनी माँ का दूध चाहिए था और वह मुझे नहीं दे रही थी। मैंने अपने आप को अस्वीकृत महसूस किया। मुझे याद आया कि मैं वास्तव में चिल्ला रहा था। मैं न केवल शारीरिक रूप से बल्कि भावनात्मक रूप से भी आहत था। फिर एंथनी ने कहा, देखो कमरे में और कौन है। वे कैसा व्यवहार कर रहे हैं? जैसे ही मैंने कमरे में वापस देखा, पचहत्तर साल से भी पहले का वह दृश्य, मुझे एहसास हुआ कि मेरी माँ रो रही थी। उसने मुझे उतना दूध पिलाया था जितना उसके पास था। बस अब और दूध नहीं था। उस समय दूध प्राकृतिक रूप से ही पिलाया जाता था और उसके पास जितना था वह दे चुकी थी। वह जानती थी कि वह मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रही थी, इसलिए मुझे रोते हुए देखकर वह रो रही थी।
और अचानक मुझे एहसास हुआ - मुझे अस्वीकार नहीं किया गया था, मैं बस ज़रूरत से कुछ ज़्यादा माँग कर रहा था। आखिरकार मैं अपनी पत्नियों और उनकी शिकायतों को समझ गया। मैंने यह भी समझा कि मैं न केवल अपनी पत्नियों से, बल्कि अपने कर्मचारियों से भी ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षा करने लगा था। चाहे उन्होंने कितना भी योगदान दिया हो, मैं और अधिक चाहता था। खैर मेरे दोस्तों, विकसित होने के लिए कभी देर नहीं होती। सीखने के लिए कभी देर नहीं होती। व्यापार जगत में एक कहावत है - जैसे ही तेल मिल जाए, खोदना बंद कर दें। दूसरे शब्दों में, अधिक खोदने का कोई फ़ायदा नहीं है। आप जो चाहते थे वह आपको पहले ही मिल चुका है। लेकिन व्यक्तिगत विकास में जब आपको तेल दिखने लगता है, कुछ और खोदें और उसके बाद कुछ और यानी अपना प्रयास जारी रखें। तेल मिलने के बाद आपको सोना भी मिल सकता है।
मैं आपको अपने दु:ख और खुशियाँ बता रहा हूँ।

इचक के. अडीज़ेस
ichak@adizes.com
https://www.ichakadizes.com/post/on-being-a-narcissist

