बी. रतिनसबापति हमें एक ऐसे जीवित परिदृश्य में ले जाते हैं जहाँ पक्षीतितलियाँ और पतंगे कोमल मार्गदर्शक बनकर हमें सजगतासंतुलन और प्रकृति के साथ अधिक घनिष्ठ संबंध स्थापित करने की ओर ले जाते हैं।

 

प्कृति में, हर उड़ने वाले जीव के नाज़ुक पंखों में हमारे लिए कोई न कोई संदेश होता है। उनके रंग हमें जीवन के सौंदर्य को जानने के लिए प्रेरित करते हैं और उनका छलावरण (camouflage) जीवन के अद्भुत चमत्कारों को संजोय रखने का संदेश देता है।

नए वर्ष के आगमन के साथ कान्हा का प्राकृतिक वातावरण भी रंगों, संगीत और खामोश पंखों की समरसता से जीवंत हो उठता है। हमारे इन पंखों वाले मित्रों की लगभग 200 प्रजातियाँ - जिनमें पक्षियों की 90, तितलियों की 70 और पतंगों की 40 प्रजातियाँ शामिल हैं - इस परिसर को अपना घर मानती हैं। प्रत्येक जीव की अपनी अलग लय और शोभा है। कान्हा में दिन के समय पक्षियों की चहचहाहट और मधुर ध्वनियाँ सुनाई पड़ती हैं और कुछ जीव रात में सक्रिय होते हैं मानो प्रकृति के प्रहरी हों। इस प्रकार कान्हा का पंखों वाला संसार प्रकृति के पूर्ण संतुलन को दर्शाता है। वे हमें थोड़ा विराम लेनेअवलोकन करने और एक ऐसे वर्ष का स्वागत करने के लिए प्रेरित करते हैं जो जागरूकता, सामंजस्य और आश्चर्य से भरा है।

भोर के समय जब सूर्य की पहली किरण धरती को छूती है तब दिन का आरंभ केवल प्रकाश से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के गीतों से भी होता है। कोयल की मधुर ध्वनि कान्हा के शांत वातावरण में प्रवाहित होने लगती है।

कुछ क्षण बाद, मोर की ऊँची पुकार सुनाई देती है जो दूर तक पेड़ों और खुले स्थानों में गूँजती हुई जागरण के बिगुल की तरह दुनिया को जगाती है। पक्षियों की ये मधुर ध्वनियाँ सुबह होने का एलान करती हैं और दुनिया को सुबह की हवा में साँस लेने, प्रकृति के संगीत को सुनने तथा जीवंत होने का निमंत्रण देती हैं। फिर, सूरज की पहली सुनहरी किरण के पड़ते ही रंग-बिरंगे फूल खिल उठते हैं और उन पर मंडराती हुए तितलियाँ अपने दिन की मनमोहक शुरुआत करती हैं।

जब साँझ होती है और वहाँ लगे लैंपों की हल्की रोशनी जगमगाने लगती है तब उनके रात के साथी, पतंगे, अपने पूरे छलावरण में अँधेरे में से धीरे-धीरे निकल आते हैं। इस तरह दिन और रात के बीच रंगों, ध्वनियों और निस्तब्धता का एक मौन संवाद चलता है, जो हमें याद दिलाता है कि प्रकृति शोर से नहीं, बल्कि सूक्ष्म तरीकों से बहुत कुछ कहती है।

रूपांतरण की सुंदरता

हर तितली, पतंगे और पक्षी की अपनी आश्चर्य भरी कहानी है। तितलियों और पतंगों के लिए यह कहानी उनके रूपांतरण का चमत्कार है। तितली के अंडे से पहले कैटरपिलर निकलता है जो कुछ समय बाद अपने आपको एक कोकून में बंद कर लेता है और फिर उस स्थिरता से तितली के रूप में अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ एक पंखों वाला जीव बाहर निकलता है। पक्षियों के लिए, रूपांतरण उनकी उड़ना सीखने की प्रक्रिया में दिखाई देता है। पहले वे काँपते हुए अपने पंख फड़फड़ाते हैं और धीरे-धीरे वे आत्मविश्वास के साथ आकाश में स्वच्छंदता से उड़ने लगते हैं। उनकी यात्राएँ हमारे उस आंतरिक विकास को प्रतिबिंबित करती हैं जो हमें हल्केपन, स्पष्टता और उच्चतर चेतना की ओर ले जाता है।

सौंदर्य से भी बढ़कर - एक पारिस्थितिक उपहार

तितलियाँ, अपने चमकदार रंगों के साथ, चुपचाप हमारे बगीचों और जंगलों में परागण करती हैं। पतंगे, यद्यपि साधारण दिखाई देते हैं लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद ज़रूरी हैं। वे सूर्यास्त के देर बाद तक भी परागण करते रहते हैं और पक्षियों, चमगादड़ों तथा असंख्य छोटे जीवों के लिए महत्वपूर्ण भोजन का स्रोत बन जाते हैं। पक्षी पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं - पतेना (bee-eaters) कीटों के झुंड को नियंत्रित करते हैं, बुलबुल और बारबेट बीज फैलाते हैं, किलकिला (kingfisher) मछलियाँ और छोटे जलीय जीव खाकर तालाब का संतुलन बनाए रखते हैं और उल्लू रात के प्रहरी होते हैं। मिलकर ये जीव ऐसी व्यवस्था बनाते हैं जो प्रकृति को सजीव रखती है।

पतंगे - छलावरण में माहिर

यदि तितलियाँ विभिन्न रंगों को प्रदर्शित करती हैं तो पतंगे स्थिरता को प्रदर्शित करते हैं। उनके मिट्टी जैसे भूरे और धूसर रंग उन्हें पेड़ों की छाल, पत्तों और छायाओं में छिपा देते हैं। इससे हमें विनम्रता और अनुकूलन का सबक मिलता है। लेकिन हल्की-सी रोशनी पड़ने पर उनकी सुंदर बनावट उजागर हो जाती है - जटिल रेखाएँ, रेशम की तरह चिकनी बनावट और कुछ उष्णकटिबंधीय (tropical) विशाल पतंगों में तो पंख मानव हाथ से भी चौड़े होते हैं। वे हमें याद दिलाते हैं कि सुंदरता को दिखावटी होने की आवश्यकता नहीं होती।

पक्षी - प्राकृतिक परिदृश्य का स्वर और आत्मा

पक्षी पेड़ों के छत्र में गति और हवा में संगीत भर देते हैं। कोयल की मधुर तान, मोर की ऊँची पुकार, दर्ज़ी पक्षियों (tailorbirds) की धीमी चहचहाहट, कठफोड़वों की लयबद्ध ठक-ठक और कबूतरों की सुकूनभरी गुटरगूँ - ये सब मिलकर परिदृश्य को जीवंत बना देते हैं। कुछ पक्षी, जैसे शकरखोरे (sunbirds) तितलियों के साथ मिलकर काम करते हैं। वे फूलों का रस पीते हैं और पराग को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। शलभाष (flycatcher) और भुजंगा (Drongo) जैसे पक्षी कीटों का संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे जंगल स्वस्थ रहते हैं।

अपने बगीचों में उनका स्वागत करें

तितलियों और पक्षियों के लिए अनुकूल स्थान जीवन का एक पवित्र स्थल होता है। अपने बगीचों में रस्ती फूल, इक्सोरा, ज्वालामुखी फूलों की बेल और अन्य जंगली फूलों जैसे रसदार फूल लगाएँ। तितलियों के लिए परपोषी पौधे उगाएँ, जैसे मीठा नीम। पक्षियों के लिए फलदार पौधे लगाएँ, जैसे अंजीर, अमरूद, शहतूत, करौंदा और भारतीय चेरी।

हल्केपन और आंतरिक स्वतंत्रता के प्रतीक

विभिन्न संस्कृतियों में तितलियाँ आत्मा की स्वतंत्रता का प्रतीक मानी जाती हैं। पक्षी आकांक्षा, दृष्टि और आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक हैं। पतंगे अज्ञात पर विश्वास का प्रतीक हैं क्योंकि उनमें अंधकार में भी शांतिपूर्वक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की क्षमता है। ये मिलकर हमें सिखाते हैं कि हम जीवन को हल्केपन के साथ जिएँ, सहजता से समर्पण करें और परिवर्तन को गरिमा के साथ अपनाएँ।

अंतिम संदेश

चमकदार तितलियाँ हों या हल्के रंगों वाले पतंगे, ये पंखों वाले संदेशवाहक हमें सिखाते हैं कि प्रकृति रंगों का उपयोग अभिव्यक्ति के लिए करती है और छलावरण का उपयोग सुरक्षा के लिए करती है। यह जीवित रहने तथा संतुलन और सौंदर्य बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जब हम इन नाज़ुक जीवों की देखभाल करते हैं तब हम प्रकृति के ज्ञान को गहराई से समझ पाते हैं। यह ज्ञान याद दिलाता है कि परिवर्तन पतंगों की मौन उड़ान की तरह धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से होता है।

नियोजित जलाशयों के पुनर्स्थापन और पेड़-पौधों की संख्या में निरंतर वृद्धि के कारणकान्हा असंख्य पंखों वाले मित्रों के लिए एक आकर्षक आश्रय-स्थल बन गया है। जगह-जगह बीजों को फैलाने और परागण में इन जीवों की अपरिहार्य भूमिका है। ये ऐसे कार्य हैं जिन्हें कोई भी अन्य जीव उस तरह नहीं कर सकता और ये कार्य परिदृश्य को लगातार समृद्ध करते रहते हैं। आने वाले वर्षों में यह अभयारण्य और भी अधिक फल-फूल उठेगा और पक्षियों, तितलियों तथा पतंगों के लिए एक स्वर्ग बन जाएगा, जैसा कि श्रेष्ठतम वनों और अभयारण्यों में देखा जाता है। कान्हा इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे पेड़-पौधों की सोच-समझकर की गई देखभाल प्रकृति के संतुलन और सौंदर्य को पुनर्स्थापित कर सकती है।

तितलियाँ दिन में दिखाई देने से जीवित रहती हैं; जबकि पतंगे छिपकर जीवित रहते हैं। दोनों मिलकर हमें यह याद दिलाते हैं कि प्रकृति संतुलन में फलती-फूलती है। कब सामने आना और कब पीछे हटना, यह जानना ही जीवन का रहस्य है।

दूसरों के साथ क्या हुआ, यह जानकर संतुष्ट न रहें।
अपनी कहानी जानने का प्रयास करें।”

रूमी


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रतिनसभापति एक पारिस्थितिकीविद् हैंजिन्ह... और पढ़ें

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