सारा बब्बर सर्विस स्पेस की ऑड्री लिन की एक कहानी बता रही हैं। वे हमारे समक्ष कुछ विचारशील प्रश्न और एक महीने तक करने के लिए एक प्रयोग प्रस्तुत कर रही हैं।

 

एक बार की बात है, जूलियो नामक एक खुशमिजाज़ आदमी रहता था। वह जिस किसी की भी हो सकती थी, मदद करता था। वह बिना पैसे लिए लोगों को उनके गंतव्य तक छोड़ देता था, गुमनाम रहकर लोगों का कर्ज़ चुका देता था और बेघरों के लिए नियमित रूप से खाना खरीदता था। वह छोटे बच्चों के साथ खेलता था और उन्हें कहानियाँ सुनाता था।

एक रात जब वह मेट्रो से अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट जा रहा था, केबिन में वह और एक युवक ही बचे थे। स्टेशन पहुँचते ही दोनों ट्रेन से उतर गए। जूलियो अपने दोस्तों से मिलने की उत्सुकता में रेस्टोरेंट की ओर चलने लगा। अचानक वह युवक जुलिओ के सामने खड़ा हो गया और उसके पेट पर चाकू रखकर बोला, “चुपचाप अपना बटुआ मुझे दे दो। जूलियो थोड़ा घबरा गया लेकिन उसने अपना बटुआ निकाला और युवक को दे दिया। युवक धमकी भरी नज़रों से देखता रहा और उसकी खूबसूरत सोने की घड़ी की ओर इशारा करते हुए बोला, “यह भी दे दो। जल्दी करो।जूलियो ने घड़ी उतारकर, युवक को दे दी। 

जूलियो मुस्कुराया, उसने अपनी जैकेट उतारी और उसे देते हुए बोला, “शायद तुम्हें ठंड लग रही है। लो, यह भी ले लो। 

 युवक हैरान था, पर उस समय उसे कोई भी तोहफ़ा स्वीकार था।

युवक अंधेरी सुनसान गली में गायब होने ही वाला था कि जूलियो ने उसे रोका और उसके कंधे पर हाथ रखकर पूछा कि क्या वह भूखा था। युवक की हैरानी बढ़ने लगी।

उसने गुस्साते हुए फिर चाकू निकाला और कहा, “क्या तुम मेरे साथ कोई चाल चलने की कोशिश कर रहे हो? क्योंकि अगर ऐसा है तो . . .”

जुलियो मुस्कुराया और बोला, “नहीं, चिंता मत करो, मैं रेस्टोरेंट जा रहा हूँ। मेरे साथ चलो।

युवक जुलियो के पीछे-पीछे चल दिया और रेस्टोरेंट पहुँचकर उसने देखा कि हर कोई उसे खुशी से सलाम कर रहा था। “नमस्ते जूलियो! आप आज कैसे हो?” “जुलियो, मैं तुमसे मिलने की सोच रहा था और मैं खुश हूँ कि हम यहाँ मिल गए। युवक सोच रहा था कि उसका अंत आ गया है। हर कोई उस आदमी को जानता था जिसे उसने लूटा था और वह उन्हें बता देगा। वह हैरान तब हुआ जब जूलियो एक टेबल की ओर गया, उसने उसके लिए एक कुर्सी खींची और उसे बैठने के लिए कहा। जुलियो ने बैरे से अपना पसंदीदा गरम सूप और युवक के लिए कुछ गरमा-गरम व्यंजन लाने को कहा। भौचक्का होकर युवक खाना खाने लगा लेकिन वास्तव में समझ ही नहीं पाया कि क्या हो रहा था।

जी भर कर भोजन करने के बाद जुलियो ने उससे पूछा कि शाम कैसी रही? युवक के पास शब्द नहीं थे। उसने दबी ज़बान से कहा, “बहुत अच्छी। गरम खाना मिला। तब जुलियो ने कहा, “अब, मैं बिल चुकाना चाहता हूँ लेकिन मेरा बटुआ तुम्हारे पास है।

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युवक के आँसू बहने लगे और वह जुलियो के गले लग गया। उसने शर्मिंदगी भरी माफ़ी माँगते हुए बटुआ, सोने की घड़ी और कोट जुलियो के सामने रख दिए। जूलियो ने उसे कोट वापस दे दिया और कहा, “तुम्हें इसकी मुझसे ज़्यादा ज़रूरत है। 

युवक अपनी माँ की गायी हुई लोरी को गुनगुनाता हुआ, मुस्कुराता हुआ और दिल से खुशी महसूस करता हुआ अंधेरे में गुम हो गया।

कलाकृति - लक्ष्मी गद्दाम


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सारा बब्बर

सारा एक कहानीकार, मोंटेसरी सलाहकार और बच्चों की एक पुस्तक की लेखिका हैं। वे एक प्रकृतिवादी भी हैं और बाल्यावस्था में पारिस्थितिकी चेतना के विषय में डॉक्टरेट कर रही हैं। वे आठ वर्षों... और पढ़ें

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