डॉ. रोलिन मैक्रेटी दिल और दिमाग के बीच तालमेल के विज्ञान के बारे में बात करते हैं कि जब वे तालमेल में होते हैं तब उससे उत्पन्न प्रेम कैसे हमें एक-दूसरे से और दुनिया की हर चीज़ से सकारात्मक रूप से जोड़ देता है।
यहाँ आमंत्रित होना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। मैं यहाँ खड़े होकर आपको कुछ भी ऐसा बताने की कोशिश नहीं करने जा रहा हूँ जो आपने पहले नहीं सुना है या जो आप पहले से नहीं जानते हैं लेकिन मैं आपको वही बात एक अलग भाषा में, विज्ञान की भाषा में बताने जा रहा हूँ।
मैं खुद एक लंबे समय से ध्यान कर रहा हूँ और मैंने हृदय के बारे में सीखा है। लेकिन अगर मैं वास्तव में ईमानदारी से कहूँ तो मुझे यह भावनाओं के लिए एक रूपक लगता था; मेरे लिए सब कुछ मस्तिष्क ही था। मैंने चेतना के अध्ययन में डिग्री भी प्राप्त की। फिर मुझे हार्टमैथ के संस्थापक, डॉक चाइल्ड्री से मिलने का सौभाग्य मिला और मेरा परिचय वास्तविक हृदय, गहनतर हृदय से हुआ जो वास्तव में सब कुछ है।
मेरा सौभाग्य था कि हार्टमैथ इंस्टीट्यूट की स्थापना करने में मुझे उनकी मदद करने का अवसर मिला। और कुछ साल बाद उन्होंने मुझे हार्टमैथ रिसर्च सेंटर की स्थापना के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि हमें श्रमपूर्वक वैज्ञानिक शोध करना होगा। विज्ञान की भाषा दुनिया के कई लोगों के लिए नई भाषा है और अगर हम उन्हें दिल और दिमाग को एक साथ लाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं तो हमें उस पर काम करने की ज़रूरत है।
इसलिए, पिछले 30 वर्षों में हमने बहुत सी वैज्ञानिक खोजें कीं जो हमारे द्वारा पहले से ही सत्य माने जाने वाले तथ्यों को प्रमाणित करती हैं। हमने यह देखना शुरू किया कि भावनाएँ शरीर और जीवन पद्धति को कैसे प्रभावित करती हैं। हम प्रयोगशाला में मस्तिष्क की तरंगों और हृदय की गति को माप रहे थे। और जब हमने यह शुरू किया (उस समय, कोई भी यह नहीं देख रहा था कि जब हम प्रेम करते हैं, जब हम सराहना करते हैं तब हमारे शरीर में क्या होता है; सब कुछ तनाव, अवसाद और चिंता के बारे में था) तब हमने पाया कि जब लोगों में प्रेम, करुणा, दयालुता की हार्दिक भावनाएँ होती थीं तब कुछ जादुई घटित होता था। उनके दिल की धड़कनें, हृदय की लय पूरी तरह बदल जाती थीं।

सबसे बड़ा उपहार अपने अंतर्ज्ञान, अपने आंतरिक मार्गदर्शन को प्राप्त करना है।
आज हम इसे एक अनुकूलतम स्थिति के रूप में जानते हैं, एक ऐसी स्थिति जहाँ मन, भावनाएँ, हृदय सभी तालमेल में रहते हैं। हम इसे हृदय सुसंगति कहते हैं। ऐसे 500 से अधिक अध्ययन हैं जो दिखाते हैं कि जब लोग हृदय की सुसंगत स्थिति में होते हैं तब यह लगभग हर चीज़ को बेहतर करता है और लाभ पहुँचाता है - हमारा स्वास्थ्य, खेल में हमारा प्रदर्शन आदि। लेकिन विशेष रूप से यह हमारे आंतरिक सहज ज्ञान का मार्गदर्शन प्राप्त करने की हमारी क्षमता को बढ़ाता है।
हृदय और हृदय की सुसंगति के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह तटस्थ है। यह हम सभी के पास है। और जब भी हम प्रेम, करुणा और दयालुता महसूस करते हैं तब हम दिल की सुसंगत अवस्था में चले जाते हैं। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हम वहाँ कैसे पहुँचते हैं, हम कौन सी तकनीक का उपयोग करते हैं या कौन सा अभ्यास करते हैं। यह दिल की सुसंंगत अवस्था मस्तिष्क की लय और हृदय की लय के बीच मापनीय समन्वय को बढ़ाती है।
इसका सबसे बड़ा उपहार अपने अंतर्ज्ञान, अपने आंतरिक मार्गदर्शन को प्राप्त करना है। यह कुछ ऐसा है जिसे हमने प्रयोगशाला में परखा है और इससे हम भी आश्चर्यचकित थे। हमने यही सीखा है कि हृदय भविष्य जान सकता है; सब कुछ हृदय से ही शुरू होता है। सबसे पहले जानकारी हृदय को प्राप्त होती है। यह मस्तिष्क को मापनीय रूप से एक अलग संकेत भेजता है और फिर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया होती है और उसके बाद ही शरीर महसूस की गई भावना पर प्रतिक्रिया करता है।
हृदय सूचना को एक ऐसे क्षेत्र से भी प्राप्त कर सकता है जो समय और स्थान से बंधा नहीं है। मैं सुझाव दूँगा कि हमारे पास दो हृदय हैं - भौतिक हृदय और ऊर्जावान हृदय जिसे बहुत सी आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं में आध्यात्मिक हृदय कहा गया है। ऊर्जावान हृदय वह सेतु है जो हमारे अस्तित्व के बड़े हिस्से को जोड़ता है - हमारी आत्मा। यह इस जुड़ाव को हमारे शरीर की भौतिक दुनिया में उतारता है। ऊर्जावान हृदय ही वह है जिससे हम अपने वृहत्तर स्व, अपने उच्चतर स्व से जुड़ते हैं। यही हमारा असली रूप है। जैसे-जैसे हम अधिक हृदय-सुसंगत बनना सीखते हैं, वह मार्ग खुलता जाता है। अधिक हृदय-सुसंगत बनने से हम जो कुछ भी करते हैं और जो भी अभ्यास हम करना चाहते हैं, उसमें मदद मिलती है।
जब हम सुसंगत अवस्था में होते हैं, जो हम स्वाभाविक रूप से तब प्राप्त करते हैं जब हम प्रेमपूर्ण और सराहनापूर्ण होते हैं, तब यह हमें उस हद तक दूसरों से जोड़ता है जिसे मापा जा सकता है।

हमारे शोध में अगला साहसिक कार्य वैज्ञानिक रूप से यह समझना था कि हृदय हमें दूसरों से कैसे जोड़ता है। हमारा हृदय हमारी त्वचा तक सीमित नहीं है। हम अपने हृदय में पैदा होने वाले विकिरण क्षेत्रों को, चुंबकीय क्षेत्रों को प्रसारित करते रहते हैं। हम यह साबित कर पाए कि उन क्षेत्रों में हमारे एहसासों की जानकारी होती है। जब हम सुसंगत अवस्था में होते हैं, जो हम स्वाभाविक रूप से तब प्राप्त करते हैं जब हम प्रेमपूर्ण और सराहनापूर्ण होते हैं, तब यह हमें उस हद तक दूसरों से जोड़ता है जिसे मापा जा सकता है। जब हम सब अपने हृदय से जुड़ते हैं तब हम सभी के हृदय सचमुच एक-दूसरे से तालमेल बना लेते हैं।
इससे एक नए प्रकार का आपसी संवाद शुरू हो जाता है जहाँ हम एक-दूसरे को गहराई से सुनते हैं। जब हम सहमत नहीं होते हैं तब भी हम हृदय से परस्पर जुड़े होते हैं। यह इस बात का आधार है कि हम सामाजिक सामंजस्य कैसे बनाते हैं, हम दूसरों के साथ कैसे मिलजुल कर रहना सीखते हैं, उस समय भी जब हम एक दूसरे से असहमत होते हैं।
शोध के पथ पर अगला बड़ा कदम यह समझना था कि कैसे हमारा हृदय हमें न केवल अपने उच्चतर स्व और दूसरों के साथ जोड़ता है बल्कि पृथ्वी के साथ भी जोड़ता है। जब हमने हृदय-सुसंगत लय को मापा, जो लगभग दस सेकंड की लय है (हमारे पास नई तकनीकें हैं जो इसे माप सकती हैं) तब हमने ऐसे सवाल पूछने शुरू किए, “माताओं को कैसे पता चलता है कि उनके बच्चे खतरे में हैं जब वे पृथ्वी के दूसरे कोने में होते हैं?” “हमें क्या जोड़ रहा है? ऐसा कुछ तो होना चाहिए जो उस संबंध को बना रहा है।”

वास्तव में हृदय ही हमें विभिन्न आयामों में, उच्चतर स्व से, दूसरों से और खुद से जोड़ता है।
हम सभी पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रों, उत्तरी ध्रुव, दक्षिणी ध्रुव, में रहते हैं। हमने पाया कि ये क्षेत्र उसी आवृत्ति पर कंपन करते हैं जिस पर सुसंगत मानव हृदय की लय की आवृत्ति होती है। जब हम उस हृदय-सुसंगत अवस्था में होते हैं तब अनुकंपन के माध्यम से हम पृथ्वी के क्षेत्रों से जुड़ते हैं। हम सब भी जुड़े हुए हैं। हमें यह भी पता लग रहा है कि पृथ्वी के परस्पर जुड़े क्षेत्र न केवल हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं बल्कि प्रकृति, पेड़ों और जानवरों से भी जोड़ते हैं। वास्तव में हृदय ही हमें विभिन्न आयामों में, उच्चतर स्व से, दूसरों से और खुद से जोड़ता है।
एक बार जब हम वास्तव में इसे समझ गए तब हमने कहा, “हम इसे दूसरों को कैसे सिखा सकते हैं? हम सुसंगति को कैसे आसान बना सकते हैं?” इसलिए इसमें मदद करने के लिए हमने तकनीकें विकसित कीं। ये तकनीकें ज़्यादा महंगी नहीं हैं और इनकी मदद से आप वास्तविक रूप से अपने हृदय की लय को देख सकते हैं। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि इनका उपयोग अमेरिका और अन्य देशों के कई स्कूलों में किया जा रहा है जिससे बच्चों को कम उम्र में यह सीखने का मौका मिल रहा है। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि हम अपने बच्चों को इससे बड़ा कोई उपहार नहीं दे सकते कि वे अपने दिल और दिमाग को कैसे तालमेल में लाएँ ताकि उनके पास जीवन भर के लिए यह कौशल हो।
जब हम वैश्विक क्षेत्र को देखते हैं हमारे पास नई तकनीकें हैं जो इसे माप सकती हैं। जब हम इस तरह के आयोजनों में एक साथ आते हैं तब हम उस सुसंगत अवस्था में पहुँच जाते हैं। दूसरे शब्दों में, इस तरह से हम अपने अंदर प्रेम और करुणा विकसित करते हैं और हम जानते-बूझते उसे क्षेत्रीय वातावरण, पृथ्वी, में संचारित करते हैं। प्रेम अब तक की सबसे शक्तिशाली ऊर्जा या आवृत्ति है जो ग्रहीय क्षेत्र में सुसंगति लाती है। हम इसे माप सकते हैं। और मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट इस परियोजना में हमारे भागीदारों में से एक है। हमारे पास यहाँ, इस समय भी ऐसे बहुत से उपकरण हैं जो यह माप रहे हैं कि हम इस क्षेत्र को प्रभावित करने के लिए क्या कर रहे हैं।
प्रेम अब तक की सबसे शक्तिशाली ऊर्जा या आवृत्ति है जो ग्रहीय क्षेत्र में सुसंगति लाती है। हम इसे माप सकते हैं। और मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट इस परियोजना में हमारे भागीदारों में से एक है।
मुझे उम्मीद है कि आपके साथ कुछ विज्ञान साझा करना उपयोगी रहा होगा। यह सब किस ओर इशारा करता है? मेरा अंतिम निमंत्रण है - यह प्रेम के तीव्र विस्तार का समय है। यही इस ग्रह की आवृत्ति को बदलेगा, यही मानवता की आधार रेखा को हमारी चेतना के अगले स्तर पर ले जाएगा जहाँ दिल और दिमाग वास्तव में तालमेल में और एक साझेदारी में होंगे।

