अकेलेपन पर काबू पाना
मेरी केरीगन एक 'वाइटल स्पेस मेकर' हैं यानी वे जीवन के लिए महत्वपूर्ण स्थान बनाती हैं। वे प्रकाश से भरपूर महत्वपूर्ण स्थान बनाती हैं जो हर एक के लिए fहोते हैं। वे एक वास्तुकार–स्थान निर्माता और संरक्षण विशेषज्ञ हैं जो पिछले 25 वर्षों से सांस्कृतिक और स्थानिक परिवर्तन की अग्रणी समर्थक रही हैं। वे सबसे कठिन परिस्थितियों में भी सक्रिय रही हैं और उनके कार्यों का ज़बरदस्त प्रभाव पड़ा है। यहाँ वे अकेलेपन को दूर करने के बारे में कुछ विचार प्रस्तुत कर रही हैं।
कर्टनी और मैं पड़ोसी थे और गाँव में एक सड़क के किनारे पर साथ-साथ लगे हुए अपने घरों में रहते थे। फिर उसने और उसके मित्र ने पास में ही एक बड़ा घर ढूँढ लिया।
उसे गाँव की किराने की दुकान के काउंटर के पीछे खड़ा देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। मैं यह जानने को उत्सुक थी कि क्या वह सड़क के छोर पर बने कॉल सेंटर पर अभी भी काम कर रही है जहाँ वह घर बदलने के बाद काम शुरू करने वाली थी।
उसने बताया, “ओह नहीं, मैंने वह काम छोड़ दिया। मैं घर से काम करने, सारा दिन बैठकर कम्प्यूटर स्क्रीन पर देखते रहने और किसी को भी न मिलने के कारण तंग आ गई थी।” उसकी इस बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। कोविड महामारी ने हममें से हज़ारों को घर से ही काम करने के लिए बाधित कर दिया था। बेशक, इसके कुछ फ़ायदे भी थे। रोज़ की आने-जाने की परेशानी से मुक्त होने से घर पर मित्रों और परिवार के साथ ज़्यादा समय मिल जाता था - उनको जिनके पास मित्र और परिवार थे।
अब घर से ही काम करने का एक चलन बन गया है - पूर्णकालिक या आंशिक रूप से। हममें से कितने लोग अपनी किचन या बेडरूम में कम्प्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर अनगिनत दिन बिता रहे हैं? शायद पूरा-पूरा दिन किसी इंसान को भी नहीं देखते, विशेषकर जब हम अकेले रहते हों।
हम में से जो अंतर्मुखी हैं उनके लिए यह बहुत अच्छा प्रतीत होता है। उन्हें अब उन शोर भरे, भीड़भाड़ वाले, ओपन-प्लान ऑफ़िस में या ऊर्जा से भरी सभाओं में अपनी सारी ऊर्जा नष्ट करने की कोई ज़रूरत नहीं।
“संबंध के कारण ही हम यहाँ हैं।
हम दूसरों से जुड़ने के लिए ही बने हैं,
इसी से हमारे जीवन को अर्थ
और उद्देश्य मिलता है,
और इसके बिना केवल पीड़ा है।”
—ब्रने ब्राउन
हालाँकि टीम, गूगल मीट, और ज़ूम निस्संदेह जीवनदायी थे, जिन्होंने सैकड़ों और हज़ारों लोगों को लॉकडाउन के संपूर्ण एकांतवास की पीड़ा से बचाया। लेकिन सच तो यह है कि प्रधानतः आभासी दुनिया में जीना वास्तविक जीवन और आमने-सामने मिलने-जुलने की जगह नहीं ले सकता।
मेरे दिमाग में सहसा, अपनी एक विश्वविद्यालय के दिनों की मित्र, जो ग्रेटर लंदन में रहती है, से महामारी के बाद की एक मुलाकात की याद ताज़ा हो गई। वह एक स्थानीय प्राधिकरण के लिए कई सालों से काम कर रही हैं। कोविड-19 महामारी के आने के बाद वह सप्ताह में पाँच दिन घर पर रहकर काम करने लगी।
फिर महामारी के बाद सब कुछ खुलने लगा। मेरी मित्र के लिए उसका मतलब था, चार दिन घर से काम करना और हर शुक्रवार को दफ़्तर जाकर अपनी टीम की ओर से जनता का सामना करने के कर्तव्य को निभाना।
क्या उसके एक दिन दफ़्तर जाने का मतलब था कि उसे अपनी बाकी टीम से मिलने का मौका मिलेगा? बिलकुल नहीं। वे या तो घर से काम कर रहे थे या फिर किसी दूसरी मंज़िल पर अस्थायी रूप से काम कर रहे होते थे।
उससे एक साल बाद मिलने पर पता चला कि वह वापिस अपने घर से काम करने लग गई है — सप्ताह में पाँचों दिन।
ऊपर से, एक क्षणिक साइकिल दुर्घटना में लगी घुटने में दर्दनाक चोट की वजह से उसकी प्रिय लंबी सैर करने पर और योगाभ्यास पर रोक लग गई। यहाँ तक कि उसे चलने की भी इजाज़त नहीं थी। इस कारण वह घर में और भी ज़्यादा कैद हो गई।

हममें से कितने लोग अपनी किचन या बेडरूम में कम्प्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर अनगिनत दिन बिता रहे हैं?
दुर्भाग्य से उसके माता-पिता भी जीवित नहीं हैं। केवल एक सहोदर के अलावा, जो एक घंटे की दूरी पर है, पूरे देश में उसका कोई भी रिश्तेदार नहीं है। वह उसके लिए बहुत ज़्यादा अकेलेपन का समय था।
मुझे अचानक एहसास हुआ कि यह ‘जीवन जीना’ नहीं है। यह केवल ‘अस्तित्व में होना’ है - अत्यधिक कष्ट, दर्द सहते हुए।
वर्ष 2016 में, ब्रिटिश रेड क्रॉस और को-ऑप द्वारा बनाई गई एतिहासिक रिपोर्ट में पाया गया कि यू.के. में 90 लाख से अधिक लोग अकेलेपन से पीड़ित हैं। और यह उस महामारी द्वारा आरोपित अलगाव से पहले की बात है।

जब हम स्वेच्छा से कुछ समय के लिए एकांतवास नियमित रूप से अपनाते हैं तब
हमारे हृदय और आत्मा में सुधार होता है और वे ऊर्जित हो जाते हैं।
क्या आप भी उनमें से एक हो, चाहे कुछ समय के लिए ही? यदि हाँ, तो आप पर इसका क्या असर पड़ता है?
करीब चार दशकों से भी ज़्यादा समय में किए गए शोध से इस बात के ठोस प्रमाण मिले हैं कि सामाजिक-जुड़ाव में कमी और विशेष रूप से अत्यधिक सामाजिक अलगाव, छोटी उम्र की मृत्यु के खतरे को काफ़ी ज़्यादा बढ़ा देता है, चाहे मृत्यु का कारण कुछ भी हो।”
—2020 कन्सेन्सस स्टडी नेशनल अकेडमीज़ ऑफ़ साइंस, इंजीनियरिंग एंड मेडिसिन यू.एस.सर्जन जनरल रिपोर्ट
वही आलेख, हमें यह सलाह भी देता है कि हमारे शरीर पर अकेलेपन का प्रभाव, दिन में पंद्रह सिगरेट पीने या मोटापे से भी कहीं अधिक होता है, जिन्हें हम उम्र कम करने के कारक समझते हैं। तो हमारी इस अकेलेपन की महामारी की मानसिक और भावनात्मक कीमत क्या है?
इसके प्रमाण हैं कि लंबे समय तक हुआ अत्यधिक सामाजिक अलगाव हमारी शरीरिक, मानसिक और भावनात्मक सेहत पर बुरा प्रभाव डालता है। बिना एक सिगरेट पिए और बिना एक बूँद शराब पिए भी, यह हमें समय से पहले, एक अति धीमी मृत्यु की ओर ले जा रहा है।
निस्संदेह ‘अकेले’ होना, ‘अत्यधिक अकेलेपन से पीड़ित होने’ के समान नहीं है। अकेलापन तब महसूस होता है जब हमारी दिन-प्रतिदिन की वास्तविकता में हमारी पसंद या ज़रूरत से कहीं ज़्यादा सामाजिक अलगाव होता है। लेकिन जब हम स्वेच्छा से कुछ समय के लिए एकांतवास नियमित रूप से अपनाते हैं तब हमारे हृदय और आत्मा में सुधार होता है और वे ऊर्जित हो जाते हैं। कभी-कभी, हमारे पास किसी अच्छी चीज़ की भी अधिकता हो सकती है लेकिन हर चीज़ में संतुलन होना चाहिए।
अकेलापन भी मानवीय दशा का एक हिस्सा है जैसे दुःख, शोक, आनंद, क्रोध, खुशी और संतोष। हम सभी इसे अपने जीवन में कभी न कभी अनुभव करते हैं। यहाँ तक कि हम भीड़ में भी अकेले हो सकते हैं।
पुराना गहरा अकेलापन जो पीड़ा का कारण बन जाता है, जिसके बारे में ब्रने ब्राउन बात करती हैं, कुछ और ही है। यह भाव क्रोध या खुशी की तरह स्पष्ट दिखाई नहीं देता; यह सूक्ष्म हो सकता है जो एक प्रकार की खामोश तड़प हो सकती है। हालाँकि शायद इससे उदासी पैदा हो लेकिन यह भिन्न है। इसमें किसी चीज़ की कमी लगती है जिसकी स्पष्ट पहचान करना मुश्किल हो सकता है। आप सबसे कटा हुआ महसूस करते हैं। यह कुछ ऐसा है जैसे ठंड आपकी हड्डियों में रिसने लगती है। आपका उस ओर तब तक ध्यान नहीं जाता जब तक आप पूरी तरह से जम नहीं जाते।
पिछले सौ वर्षों में, खासतौर पर पश्चिमी जगत में, हमने ऐसा भौतिक वातावरण निर्मित कर लिया है जो हमें लोगों से अलग रखता है।

जब हम दूसरों में वास्तव में रुचि रखते हैं और उनके लिए वक्त निकालते हैं तो सच्चा जुड़ाव स्वाभाविक रूप से बन जाता है।
वह स्थान, जहाँ आप रहते हैं या काम करते हैं, आपको अपने आसपास के लोगों से जुड़ने से रोकता है या उसमें मदद करता है?
आप अपने सहकर्मियों और पड़ोसियों को कितनी अच्छी तरह से जानते हैं? क्या इतनी अच्छी तरह से कि उनके घर कॉफ़ी पीने जा सकें या सिर्फ़ अपना मूड ठीक करने के लिए गप-शप कर सकें? या फिर यदि आपका पड़ोसी जो अकेला रहता है और बीमार है, क्या आप उसके लिए कुछ सूप लेकर जा सकते हैं?
क्या आप अपने पड़ोस, कार्यस्थल या शहर के केंद्र आराम से पैदल चल सकते हैं?
घर से आने-जाने के लिए आपका पसंदीदा साधन कौन सा है? क्या एक स्थान से दूसरे स्थान तक आप अपनी कार से ही जाती हैं? यदि हाँ, तो यह संभव है कि आपको अपने पड़ेसियों या सहकर्मियों के साथ बातचीत करने के ज़्यादा अवसर नहीं मिल रहे।
आप बहुत सौभाग्यशाली हैं यदि आप के आस-पास करीबी दोस्त और परिवार हैं। फिर भी, आधे समय, आधे लोग शायद निरंतर अपने फ़ोन पर ही लगे रहते हैं।
हमारे अलग होने और उससे उत्पन्न होने वाले अकेलेपन का जो भी कारण हो, हौसला रखें। इसके बारे में कुछ तो किया ही जा सकता है भले ही वह असंभव प्रतीत हो।
मैं जब भी एक कमरे में प्रवेश करता हूँ, मैं अकेला प्रवेश करता हूँ। और मानव के रूप में
यह मेरा कर्तव्य बन जाता है कि मैं लोगों से जुड़ूँ।” — पीटर ब्लॉक
हालाँकि हम सभी में अर्थपूर्ण संबंध बनाने का सामर्थ्य है, फिर भी यह स्वतः नहीं होता। उसके लिए हमें प्रयास करना पड़ता है और साथ मिलकर इसे बनाना पड़ता है। जुड़ने का इरादा बनाना ज़रूरी है। फिर, हमारे लिए क्या मायने रखता है? क्या हम उसे प्रकट करने में और अपनी कमज़ोरियों को व्यक्त करने के लिए तैयार हैं?
वास्तव में, दूसरों में गहन दिलचस्पी लेने से, उनकी तरफ़ ध्यान देने से, जुड़ाव के दरवाज़े खुल जाते हैं। दूसरे व्यक्ति की वास्तविकता को जानने के लिए, सोचे-समझे प्रश्नों को पूछना और उनके उत्तर को बिना किसी रोक-टोक और सलाह दिए सुनना, हमें जल्द ही उस व्यक्ति के साथ जुड़ने में मदद करता है।
जब हम दूसरों में वास्तव में रुचि रखते हैं और उनके लिए वक्त निकालते हैं तो सच्चा जुड़ाव स्वाभाविक रूप से बन जाता है।
कोविड-19 ने हमारे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों को बनाना जो हर किसी के लिए हों, लोगों व स्थानों को जोड़ना, इस प्रभाव को कम करने में मदद करता है।

मेरी केरीगन
मेरी लोगों को प्रकाशमयी जगहों का निर्माण करने में मदद करती हैं। वे अमरीका, मध्य पूर्वी देशों तथा आयरलैंड के नेताओं के साथ काम कर चुकी हैं। वे एक व्यावसायिक ... और पढ़ें
