सूरज सहगल इस बात पर विचार करते हैं कि कैसे मिलजुलकर बदलाव तथा दूरदर्शिता के साथ समुदाय का निर्माण किया जाए।
बहुत सारे लोग किसी नए स्थान पर जाकर पढ़ाई करते हैं और फिर नई नौकरी शुरू करते हैं। बहुत से लोग वहाँ शादी भी कर लेते हैं। हमारे जीवन में इस तरह के बहुत से अलग-अलग चरण आते हैं और ऐसे अनेक मोड़ आते हैं जब हम यह सोचने लगते हैं कि हमारा समुदाय क्या है, कहाँ है, हम कैसे इसका हिस्सा बनना चाहते हैं और हम अपने समुदाय का निर्माण कैसे करना चाहते हैं? मेरे अनुभव में भी हम जब पहली बार अमेरिका के पूर्वी तट से पश्चिमी तट पर रहने गए तब हम वहाँ के लोगों को जानना चाहते थे, लोगों का ऐसा समुदाय बनाना चाहते थे जिसमें लोग एक-दूसरे की मदद करें और एक-दूसरे के संपर्क में रहें। यहाँ कुछ बातें हैं जिनके बारे में हमने सोचा और जो शायद सभी के लिए महत्वपूर्ण होंगी –
पहली चीज़ है नियमितता यानी गतिविधियों को नियमित रूप से करना, चाहे वह साप्ताहिक सामूहिक ध्यान और रात्रिभोज हो या हर महीने की जाने वाली छोटी सी सैर या लंबी पैदल यात्रा हो या आपस में नित्य मिलना-जुलना हो। आज हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहाँ हर कोई अपने निर्धारित काम नहीं कर रहा है और सबकी अलग-अलग प्राथमिकताएँ हैं। ऐसे में नियमितता समुदाय निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो यह दिखाता है कि आप उसकी परवाह करते हैं। इसलिए आप जो भी करते हैं उसमें निरंतरता और नियमितता बनाए रखना वास्तव में एक दीर्घकालिक समुदाय को स्थापित करने में बहुत मदद करता है। चाहे वह एक ऑनलाइन समूह हो या एक समाचार-पत्रिका हो जो हर हफ़्ते या हर दो हफ़्ते में या भले ही वह तिमाही निकलती हो, उसमें निरंतरता बनाए रखें। सोचें कि यदि आप किसी मित्र के साथ फ़ोन पर बात करते हैं तो आप उसमें निरंतरता और नियमितता कैसे बनाए रख सकते हैं।
दूसरी चीज़ है, उपलब्धता। एक समुदाय के निर्माण के लिए, चाहे मिलकर ध्यान करना हो या कोई अन्य गतिविधि, अपने आप से यह सवाल पूछना आवश्यक है कि मैं दूसरों के लिए कैसे उपलब्ध रह सकता हूँ? इसका मतलब यह नहीं है कि आपको हर चीज़ के लिए हाँ कहना है। इसका मतलब है कि आप इस बात पर विचार करें कि क्या मैं किसी के जीवन के यादगार क्षणों में उसके साथ मौजूद हूँ - चाहे वह उसका जन्मदिन हो या उसके माता-पिता उसके स्नातक समारोह में आ रहे हों। और साथ ही यह भी सोचें कि क्या मैं इस तरह से दूसरों के लिए उपलब्ध हूँ कि वे भी मेरे जीवन के यादगार क्षणों में शामिल हो सकें। क्या मैं सोच रहा हूँ कि मैं अकेले ही सब कुछ करूँगा और लोगों को अपने साथ आने, आनंद लेने और अपने साथ जश्न मनाने या साथ काम करने का अवसर नहीं दूँगा?
आखिरी चीज़ है, दूरदर्शिता और गहरी सामुदायिक भावना का होना। मुझे लगता है कि यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि आप जीवन में जो चाहते हैं, उसके बारे में एक इरादा या खयाल निर्धारित करें जो आपके दैनिक जीवन में आपका मार्गदर्शन करे। आजकल जीवन का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। हमें नहीं पता कि कौन क्या करेगा, कौन हमारे जीवन में आएगा आदि। लेकिन यदि आप ऐसा समुदाय बनाने या ऐसी भावना विकसित करने की परिकल्पना करते हैं - भाईचारे, मित्रता, एक-दूसरे की मदद करने के लिए जुड़ाव की भावना - तो उस परिकल्पना को बनाए रखें, उस पर ध्यान करें, उसे आमंत्रित करने के लिए मन से प्रार्थना करें और फिर उससे प्रेरित होकर सोचें कि आप उसे साकार करने के लिए क्या कर सकते हैं, आप लोगों तक कैसे पहुँच सकते हैं। और क्या मालूम आप समुदाय के लिए और भी बहुत कुछ करें।

सूरज सहगल
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