आयुर्वेद के प्राकृतिक रहस्यों की पुनर्खोज
श्रवण बांदा यहाँ एक प्राकृतिक व जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन को प्रस्तुत कर रहे हैं जो औषधीय पौधों की मदद से हमारे मुँह के संपूर्ण स्वास्थ्य की देखभाल कर सकता है। सदियों से जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजनों का उपयोग किया जाता रहा है जो शारीरिक संतुलन को बनाए रखते हुए दाँतों और मसूड़ों की कोमलता से देखभाल करते हैं।
मुँह की देखभाल की शुरुआत
प्राचीन सभ्यताएँ मुँह के स्वास्थ्य के प्रति बेहद जागरूक थीं। दाँतों की सफ़ाई के लिए औषधीय पेड़ों की टहनियों से बने दातून और जड़ी-बूटियों के चूर्ण का इस्तेमाल हज़ारों वर्षों से किया जा रहा है। भारत की 5000 वर्ष पुरानी चिकित्सा व्यवस्था, आयुर्वेद, में मुँह की दैनिक देखभाल को बहुत महत्व दिया गया है और दाँतों को बीमारी से बचाने के लिए जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन का उपयोग सुझाया गया है।
मुँह के स्वास्थ्य के प्रति आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद के अनुसार मुँह के स्वास्थ्य का हमारे शरीर में पाए जाने वाले तीन दोष - वात, पित्त और कफ के संतुलन से बहुत गहरा संबंध है। इन दोषों के असुंतलन से कई मुँह की बीमारियाँ हो सकती हैं जैसे मसूड़ों में सूजन, दाँतों में सड़न या मुँह की दुर्गंध। जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन न सिर्फ़ दाँतों की सफ़ाई करते हैं, बल्कि इन दोषों में भी संतुलन लाते हैं जिससे मुँह की बीमारियों से तो बचाव होता ही है, साथ ही दाँत और मसूड़े भी मज़बूत होते हैं।
जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन न सिर्फ़ दाँतों की सफ़ाई करते हैं, बल्कि तीन दोषों में भी संतुलन लाते हैं जिससे मुँह की बीमारियों से तो बचाव होता ही है, साथ ही दाँत और मसूड़े भी मज़बूत होते हैं।
जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजनों के फ़ायदे -
- जड़ी-बूटियों के प्राकृतिक जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी प्रभाव
- प्राकृतिक खनिजों की मदद से दाँतों की मज़बूती और क्षीण हो रहे खनिजों की बहाली
- सूजन दूर करके मसूड़ों के स्वास्थ्य में सुधार
- जड़ी-बूटियों से देर तक रहने वाली ताज़गी
आयुर्वेदिक दंतमंजनों में मौजूद मुख्य सामग्री -
जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजनों में अक्सर ऐसी सामग्रियों का मिश्रण होता है जिन्हें लंबे समय तक जाँचा-परखा जा चुका है। ये मुँह के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करती हैं। इस तरह के दंतमंजनों में सामान्यतः पाए जाने वाली कुछ ज़रूरी जड़ी-बूटियाँ इस प्रकार हैं -
लौंग (Syzygium aromaticum)-
लौंग अपने प्रभावशाली रोगाणु रोधक और पीड़ानाशक गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह दाँतों के दर्द और मसूड़ों के संक्रमण के उपचार में बहुत ही उपयोगी है। उसमें मौजूद यूजीनॉल नामक पदार्थ सूजे हुए मसूड़ों को राहत पहुँचाता है और श्वास को ताज़गी देता है।

सौंठ और काली मिर्च (Zingiber officinale and Piper nigrum) -
ये दोनों जड़ी-बूटियाँ अपने सूजनरोधक गुण और रक्तसंचार को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध हैं। ये हमारे दाँतों से मैल हटाती हैं और वहाँ के तंतुओं में रक्तसंचार को बढ़ाकर मसूड़ों को स्वस्थ बनाती हैं।

आँवला (Phyllanthus emblica)-
यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत है। आँवला मसूड़ों को स्वस्थ बनाने और दाँतों को मज़बूत बनाने में सहायता करता है। इसके जीवाणुरोधी गुण उन जीवाणुओं को बढ़ने से रोकते हैं जिनके कारण दाँतों में सड़न पैदा होती है।

नीम की छाल (Azadirachta indica)-
आयुर्वेद में मुँह की देखभाल में नीम हमेशा अति महत्वपूर्ण रहा है। उसके प्रभावकारी जीवाणुरोधी गुण दाँतों से गंदगी हटाकर दाँतों को सड़न व मैल के जमा होने से और मसूड़ों को बीमारी से बचाते हैं।

पुदीना सत्त (Mentha)-
पुदीना सत्त दाँतों को ताज़गी देने वाली ठंडक पहुँचाता है और मुँह को साफ़ और तरोताज़ा होने का एहसास दिलाता है। इससे जलन भी कम होती है और श्वास में भी ताज़गी आती है।

सांभर झील से निकला सेंधा नमक -
प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यह झील का क्षारीय नमक मृत कोशिकाओं को हटाने का काम करता है जिससे दाँतों की गंदगी को दूर करने में मदद मिलती है और मुँह के हानिकारक अम्ल निष्क्रिय हो जाते हैं। यह मुँह में लार बढ़ाता है जिससे मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।

जायफल और अजवाइन (Myristica fragrans and Trachyspermum ammi)-
जायफल का जीवाणुरोधी गुण दाँतों में मैल का जमना और मुँह में दुर्गंध का पैदा होना रोकता है। और अजवाइन से सूजन कम होती है तथा जीवाणुरोधी लाभ प्राप्त होते हैं जिससे मुँह में जीवाणु कम हो जाते हैं।

मुलेठी (Glycyrrhiza glabra)-
मुलेठी के सूजनरोधी और सड़न से लड़ने के गुण दाँतों की सड़न और मसूड़ों में होने वाली बीमारियों को रोकते हैं।

फिटकरी (Potash alum)-
फिटकरी अपने सिकोड़ने के गुण के कारण मसूड़ों को कसती है, रक्तस्राव से बचाती है और मुँह के अंदर के कीटाणुओं को कम करती है।

बबूल (Acacia nilotica)-
बबूल में साफ़ करने और मज़बूती देने वाले प्राकृतिक गुण मौजूद हैं। यह दाँतों को सफ़ेद करने, मसूड़ों को मज़बूत करने और मुँह में होने वाले संक्रमण को रोकने में मदद करता है।

हल्दी (Curcuma longa)-
यह जीवाणुरोधी और सूजन कम करने का प्राकृतिक पदार्थ है जो मसूड़ों की सूजन को कम करता है और दाँतों में मैल का जमना रोकता है। इसके चमकाने वाले गुण के कारण दाँत बेहतर दिखने लगते हैं।

जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन चुनते समय सावधानियाँ
वैसे तो जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन प्राकृतिक और प्रभावकारी होते हैं, फिर भी अपने मुँह के स्वास्थ्य के लिए मंजन चुनते समय थोड़ी सी सावधानी बरतनी ज़रूरी है, जैसे इस्तेमाल की गई सामग्री की शुद्धता। सदैव सुनिश्चित करें कि आप जो भी दंतमंजन चुनते हैं वह पूर्णतः उच्च कोटी और शुद्ध सामग्री से बना हो ताकि उत्पाद प्रभावी व सुरक्षित बना रहे।
- भारी धातुओं से होने वाला अशुद्धिकरण-- सुनिश्चित करें कि उस उत्पाद का भारी धातु जैसे दूषणकारी तत्वों के लिए परीक्षण किया गया है और उचित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रमाणित किया गया है।
- उसके कणों की मुलायमियत और बनावट-- खुरदरे और बड़े दानों वाले चूर्ण से आपके दाँतों के इनामेल (दाँतों के ऊपर की सफ़ेद कड़ी परत) पर अतिसूक्ष्म खरोंच पड़ सकती हैं। सदैव एकदम बारीक पिसा हुआ पाउडर ही चुनें जिसके कण नरम हों।
- जड़ी-बूटियों से बना - ऐसा मंजन चुनें जो आपकी ज़रूरत के अनुसार हो। लौंग और फिटकरी जैसी कुछ सामग्री काफ़ी तेज़ और प्रबल होती है और नाज़ुक या संवेदनशील दाँतों व मसूड़ों के लिए उपयुक्त नहीं होती। किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से इस विषय पर मश्वरा लेने से आपको अपने लिए उपयुक्त मंजन चुनने में मदद मिलेगी।

आधुनिक युग में मुँह की देखभाल के लिए एक कालातीत समाधान
आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान का उपयोग करके जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन मुँह के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं। यह एक प्राकृतिक और प्रभावकारी समाधान है। वे न सिर्फ़ हमारे दाँतों और मसूड़ों की सफ़ाई करते हैं, बल्कि शरीर के दोषों में संतुलन लाकर हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य में भी सहायता करते हैं। फिर भी उत्पाद की गुणवत्ता और उसमें मौजूद सामग्री के प्रति सावधान रहना चाहिए। मंजन में इस्तेमाल की गई सामग्री की शुद्धता, भारी धातु के दूषण से मुक्ति और अपनी ज़रूरत के अनुसार मंजन चुनने से काफ़ी फ़र्क पड़ जाता है। सही इस्तेमाल से जड़ी-बूटियों से बना दंतमंजन न सिर्फ़ मुँह का स्वास्थ्य बेहतर करता है बल्कि मुँह की देखभाल के लिए आजकल प्रयोग किए जाने वाले उत्पादों के लिए एक संधारणीय विकल्प भी है। आज की दुनिया में जहाँ प्राकृतिक समाधानों की तरफ़ झुकाव बढ़ता जा रहा है, जड़ी-बूटियों से बने दंतमंजन प्राकृतिक ज्ञान से जुड़े रहते हुए हमारे मुँह के स्वास्थ को बनाए रखने में मदद करते हैं।

श्रवण बांदा
श्रवण की विशेषज्ञता आर्द्ररभूूमि का निर्मााण और अपशिष्ट जल चुनौतियोंं का समाधान करना है। वे आईजीबीसी द्वारा मान्यता प्राप्त एक ग्रीन बिल्डिंग प्रोफेशनल याानी हरित भवन व्यवसायी और 'सोसाइटी ऑफ वेटलैंंड साइंंटिस्ट्स', यूएसए के सदस्य हैं। उन... और पढ़ें
