विश्व पर्यावरण दिवस 2024
श्रवण बांदा ने 5 जून को कुछ गतिविधियों के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जिनकी सहायता से हम पृथ्वी को पुनर्जीवन देने में अपना सहयोग दे सकते हैं। यह हम सबको बेहतर भविष्य की आशा देता है।
हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह पर्यावरण संबंधी ज़रूरी मुद्दों के प्रति जागरूकता लाने और कदम उठाने के लिए प्रेरित करने का एक मंच है। इस वर्ष का मूल विषय है, भूमि की बहाली - रेगिस्तान बनी भूमि को पुनः उत्पादक बनाना। यह विषय हमारे सामूहिक कल्याण में स्वस्थ भूमि की भूमिका पर प्रकाश डालता है।
हरे-भरे वर्षा वनों से लेकर उर्वर मैदानी क्षेत्रों तक स्वस्थ भूमि ही पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह हमें भोजन, जल, स्वच्छ वायु और अन्य प्राकृतिक संसाधन प्रदान करती है। लेकिन दशकों से की जा रही वनों की अनियंत्रित कटाई जैसी पर्यावरण विरोधी गतिविधियों के कारण पृथ्वी के एक बड़े हिस्से की गुणवत्ता में तीव्र गिरावट आई है। इसके कारण पारितंत्र इस कगार पर पहुँच गया है जहाँ भूमि के शुष्क व बंजर हो जाने और सूखा पड़ने जैसी विकट समस्याएँ खड़ी हो गई हैं।
संसार को उपचार की ज़रूरत है
मरुस्थलीकरण और भूमि की गुणवत्ता में गिरावट, जिसके कारण भूमि रेगिस्तान के समान बन जाती है, एक बढ़ता हुआ खतरा बन गया है जो विश्व भर में 360 करोड़ लोगों को प्रभावित कर रहा है। इससे कृषि उत्पादकता में गिरावट आ जाती है, खाद्य सुरक्षा बाधित होती है और वहाँ रहने वाले जन समूहों को पलायन करना पड़ता है। ऐसे भू भाग में सूखा व अति शुष्क मौसम के दौर बार-बार और अधिक तीव्रता से आने लगते हैं जिससे संसाधनों की और भी अधिक क्षति होती है और लोगों में संघर्ष होने लगते हैं।
खराब भूमि का प्रभाव सिर्फ़ भूमि के शुष्क हो जाने तक सीमित नहीं है। पेड़ों की कटाई से न केवल जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं बल्कि इससे नाज़ुक जल-चक्र भी प्रभावित होता है। इस कारण कभी बाढ़ तो कभी जल की कमी जैसी स्थितियाँ पैदा होने लगती हैं। खराब भूमि की कार्बन धारण करने की क्षमता कम हो जाती है जो जलवायु परिवर्तन का महत्वपूर्ण कारक है।
क्षति को उलटना और दृढ़ता लाना
अच्छी बात यह है कि भूमि का उपचार किया जा सकता है। भूमि की बहाली ऐसी प्रक्रिया है जिससे खराब भूमि को पुनः उपजाऊ बना दिया जाता है और उससे हम फिर से लाभान्वित होने लगते हैं। हालाँकि वृक्षारोपण इस प्रक्रिया का मत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन यह केवल इतने तक ही सीमित नहीं है। भूमि की बहाली में चराई के चलन के प्रबंधन से लेकर मिट्टी की उर्वरता में सुधार, जैव विविधता को बढ़ावा देने और जल संसाधनों के संरक्षण सहित अनेक तकनीकें शामिल हैं।
वैश्विक कार्रवाई से लेकर स्थानीय प्रभाव तक
विश्व पर्यावरण दिवस 2024 का मूल विषय सामूहिक प्रयास पर ज़ोर देता है। सरकार से लेकर व्यवसायों एवं व्यक्तियों तक, भूमि की बहाली में सभी की भूमिका है। विश्व में की जा रही कुछ प्रेरक परियोजनाएँ प्रस्तुत हैं -
अफ़्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल (हरित दीवार) - इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य साहेल क्षेत्र में 10 करोड़ हेक्टेयर नष्ट भूमि का पुनरुद्धार करना, मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए हरित अवरोध स्थापित करना तथा लाखों लोगों के लिए सतत विकास के अवसर
बढ़ाना है।

किशोर भारत फ़ेलोशिप -
यह भारतीय उपक्रम युवाओं को अपने समुदाय में भूमि की बहाली हेतु नवीन समाधान विकसित करने के लिए कौशल और संसाधन प्रदान करता है।
भूमि बहाली के लिए कोष -
यह वैश्विक मंच उन निवेशकों को जोड़ता है जो भूमि की बहाली पर केंद्रित परियोजनाओं में कार्य कर रहे हैं तथा इस महत्वपूर्ण प्रयास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
आशा का रमणीय स्थल - कान्हा शांतिवनम्, हैदराबाद -
यह सफल भूमि बहाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वर्ष 2015 से पहले 1,400 एकड़ का यह क्षेत्र बंजर और सूखा था। पारिस्थितिकी पुनरुद्धार के सिद्धांतों से प्रेरित होकर हार्टफुलनेस संस्थान ने एक परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत की। पौधों की स्वदेशी प्रजातियों पर केंद्रित रहते हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाकर इस बंजर ज़मीन को एक हरे-भरे रमणीय स्थल में बदल दिया गया। हज़ारों पौधे और प्रत्यारोपित पेड़, विशाल जलाशय और अभिनव कृषि पद्धतियाँ अब इस भूमि पर फल-फूल रही हैं।
ये उदाहरण भूमि और जल की बहाली के लिए किए गए प्रयासों की शक्ति के प्रमाण हैं। ऐसी परियोजनाएँ न केवल भूमि को रेगिस्तान बनने से रोकती हैं बल्कि वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास भी प्रदान करती हैं। ये जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं और मिट्टी, पानी तथा वायु की गुणवत्ता को बढ़ाती हैं। ये संधारणीय जीवन के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती हैं और दूसरों को अपने समुदायों में कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करती हैं।
स्वस्थ पृथ्वी के लिए व्यक्तिगत प्रयास
वृहत परियोजनाओं के अलावा हर व्यक्ति भी भूमि बहाली के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यहाँ कुछ सरल तरीके दिए जा रहे हैं जिनसे आप ये बदलाव ला सकते हैं -
संधारणीय कृषि का समर्थन करें -
मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और भूमि क्षरण को कम करने वाली पद्धतियों से उगाई गई खाद्य सामग्री खरीदें।
पेड़ लगाएँ -
पेड़ भूमि बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपने बगीचे में स्थानीय देशी पेड़ लगाने या सामुदायिक वृक्षारोपण उपक्रम में शामिल होने पर विचार करें।
अपनी बची-खुची भोजन सामग्री से खाद बनाएँ -
खाद बनाने से मिट्टी उपजाऊ बनती है और कचरा भराव क्षेत्र में कचरा कम जाता है। इससे भोजन तंत्र अधिक संधारणीय बनता है।
संसाधनों की खपत में कमी लाएँ -
संसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा उपभोग प्राकृतिक संसाधनों की कमी और भूमि का क्षरण बढ़ाता है। अपनी खरीदारी और उपभोग के प्रति सचेत रहें।
जानकारी का प्रसार करें -
जानकार बनें ताकि आप भूमि पुनरुद्धार के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ा सकें और दूसरों को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकें।

एक परिवर्तित विश्व
सरकार, व्यवसाय और व्यक्ति अगर मिलकर काम करें तो भूमि क्षरण की समस्या को दूर कर सकते हैं। जब हम सक्रिय रूप से अपनी भूमि का संरक्षण करते हैं तब एक ऐसे संसार का निर्माण करते हैं जिसमें समुदाय शक्तिशाली होते हैं, उनकी खाद्य सुरक्षा अधिक होती है तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक दृढ़ता होती है। ऐसे संसार में विविध पारिस्थितिकी तंत्र पनपते हैं जो भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, पानी और एक समृद्ध प्राकृतिक संसार प्रदान करते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस 2024 हमें इस बात का स्मरण कराता है कि छोटे-छोटे कार्य भी पृथ्वी को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। आइए, एक समय में एक बीज का रोपण करें और अपनी भूमि को पुनर्जीवन देने का प्रयास करें। अपने पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक दृढ़ बनाएँ और ऐसे भविष्य का निर्माण करें जहाँ मानवता और प्रकृति एकसाथ सामंजस्य में रह सकें।

श्रवण बांदा
श्रवण की विशेषज्ञता आर्द्ररभूूमि का निर्मााण और अपशिष्ट जल चुनौतियोंं का समाधान करना है। वे आईजीबीसी द्वारा मान्यता प्राप्त एक ग्रीन बिल्डिंग प्रोफेशनल याानी हरित भवन व्यवसायी और 'सोसाइटी ऑफ वेटलैंंड साइंंटिस्ट्स', यूएसए के सदस्य हैं। उन... और पढ़ें
