बी. रतिनसबापति एवं डॉ. अनंतनेनी श्रीनाथ,
हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूटफ़ॉरेस्ट बाई हार्टफुलनेस।

 

वृक्षारोपण का अर्थ केवल एक नन्हे पौधे को मिट्टी में लगाना ही नहीं हैइसका मतलब है यह सुनिश्चित करना कि वह आने वाली कई पीढ़ियों तक फलता-फूलता रहे। फ़ॉरेस्ट बाई हार्टफुलनेस (FBH) में हम सिर्फ़ पेड़ नहीं लगातेहम पारितंत्र विकसित करते हैं। हमारा विशिष्ट नीलाकाला और हरा तरीका (BBG), जिसके लिए हमें दाजी से प्रेरणा मिलीपौधे के स्वास्थ्यमिट्टी की संधारणीयता और दीर्घकालिक पारिस्थितिकी संतुलन को अधिकतम करने के लिए एक वैज्ञानिक रूप से बनाई गई विधि है। सोच-समझकर किए गए नियोजन एवं संधारणीय तकनीकों द्वारा हम बंजर भूमि को हरे-भरे वनों में रूपांतरित कर रहे हैं।

 

सजग वृक्षारोपण का विज्ञान

जून 2025, विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पूर्व हम इस बात से सुख प्राप्त कर रहे थे कि कान्हा शांतिवनम् अब एक हरा-भरा रमणीय स्थल बन चुका है। संरक्षण के लिए समर्पित प्रयासों, वृक्षारोपण के युक्तिपूर्ण उपक्रमों और पारिस्थितिकी पुनरुद्धार के प्रति गहन प्रतिबद्धता द्वारा कान्हा जैव-विविधता का एक स्वर्ग बन गया है जो संधारणीय पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

फ़ॉरेस्ट बाई हार्टफुलनेस वृक्षारोपण की एक विशिष्ट योजना का पालन करता है जिसकी प्रेरणा पूज्य दाजी से प्राप्त हुई है। वृक्षारोपण की प्रत्येक पहल की योजना गहन पारिस्थितिक अंतर्दृष्टि से बनाई जाती है जिससे पौधे केवल जीवित ही नहीं रहते बल्कि फलते-फूलते हैं। हमारी नीली, काली और हरी (BBG) विधि एक वैज्ञानिक रूप से समर्थित तकनीक है जिससे पौधों के स्वास्थ्य और मिट्टी की संधारणीयता को बेहतर बनाया जाता है।

किसी भी वृक्षारोपण से पहले, हम परिदृश्य में प्राकृतिक जल प्रवाह का अध्ययन करते हैं, विशेष रूप से वर्षा के दौरान, ताकि वर्षा जल संचयन तालाबों (नीला) के लिए सबसे प्रभावी स्थानों को निर्धारित किया जा सके। इन तालाबों से भूजल पुनर्भरण बढ़ता है और पौधों के जलयोजन में सहायता मिलती है। रोपण से एक सप्ताह पहले हम एक मीटर गहरे गड्ढे खोदते हैं (काला), जिससे मिट्टी ठंडी हो जाए और हवादार हो जाए। फिर गड्ढों में आवश्यक तत्वों वाली मिट्टी की परतें डाली जाती हैं, जिससे पौधों की जड़ों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर वातावरण बनता है (हरा)। इस विधि को फ़ॉरेस्ट बाई हार्टफुलनेस के विभिन्न बगीचों व वनों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिससे पौधों के जीवित रहने की दर प्रभावशाली 90 से 95% रही है।

जिस प्रकार संतुलित नाश्ता हमारे शरीर को ऊर्जा देता है उसी प्रकार हमारी BBG विधि पौधों के मज़बूत और स्वस्थ विकास के लिए सभी ज़रूरी तत्व प्रदान करती है। इन बेहतरीन विधियों को बताने का उद्देश्य यह है कि अन्य लोग भी इस समग्र पद्धति को अपने बगीचों में अपनाएँ।

बी.बी.जी. (नीला, काला, हरा) विधि - विकास के लिए एक संधारणीय सूत्र

1. नीला - वर्षा जल संचयन और जल प्रबंधन

वर्षा के जल के युक्तिपूर्ण संचयन से तालाबों में मानसून के दौरान पानी को इकट्ठा और जमा किया जाता है, जिससे साल भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है और बाहरी जल स्रोतों पर निर्भरता कम होती है।

 

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2. काला - अधिकतम जल प्रतिधारण और पोषक तत्व वृद्धि के लिए मिट्टी संवर्धन

हम उर्वरता और नमी बनाए रखने के लिए मिट्टी-सुधारकों का वैज्ञानिक रूप से संतुलित मिश्रण डालते हैं –

काली कपास मिट्टी-

यह पानी को अच्छी तरह धारण किए रहती है, नमी की कमी नहीं होने देती और जड़ों द्वारा मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित करने में सहायता करती है।

बायोचार –

यह जीवामृत में भिगोया गया एक छिद्रपूर्ण, कार्बन युक्त पदार्थ है, जो सूक्ष्मजीवी गतिविधि और पोषक तत्व प्रतिधारण को बढ़ाता है।

 

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वर्मीकंपोस्ट -

यह पत्तियों के कूड़े और खाद्य अपशिष्ट से बनी जैविक खाद है, जिससे मिट्टी लाभकारी सूक्ष्मजीवों से समृद्ध बन जाती है।

जेल पॉलिमर -

यह नमी बनाए रखने में मदद करता है, जलाभाव तनाव (जब पानी की ज़रूरत उसकी उपलब्धता से अधिक हो) को कम करता है और यह सुनिश्चित करता है कि पौधों की जड़ों को निरंतर पानी मिलता रहे।

नीम पाउडर -

यह हानिकारक कीड़ों से बचाव का एक प्राकृतिक उपाय है जो यह सुनिश्चित करता है कि जड़ें मज़बूत और स्वस्थ रहें।

सहारा देने वाली छड़ी - लगाए गए ऊँचे पेड़ों को हम छड़ी से बाँध देते है जिससे उन्हें तेज़ हवाओं का सामना करने और झुकने से बचने में मदद मिले।

3. हरा - एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सही पौधे

हमारे बागानों में अच्छी तरह से विकसित पौधों को प्राथमिकता दी जाती है, जो आमतौर पर (प्रजातियों के आधार पर) छह फुट से अधिक लंबे होते हैं, ताकि एक मज़बूत शुरुआत सुनिश्चित हो सके। हम ऊपरी परत के लिए मातृ मृदा और लाल मिट्टी के मिश्रण का उपयोग करते हैं, जिससे संरचनात्मक स्थिरता प्रदान करते हुए प्राकृतिक उर्वरता बनी रहती है।

 

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Nurturing plants with care to meet our goal of 50 million plantations, fostering a greener future.

 

परिदृश्य बदलना

इस विज्ञान समर्थित पद्धति ने न केवल बंजर भूमि को बदला है, बल्कि यह संधारणीय वनरोपण के लिए एक अनुकरणीय आदर्श भी बन गया है। इस तरीके से लगाए गए पेड़ों की वृद्धि और जीवित रहने की दर ने कई लोगों को वृक्षारोपण की संधारणीय विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

कान्हा शांतिवनम् में आने वाले पर्यटक अक्सर हरियाली को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। मुख्य द्वार पर, बीच में नारियल का पेड़ देखकर उनकी जिज्ञासा जागृत होती है - ऐसी जगह पर फलदार पेड़ क्यों लगाया गया? इससे उन्हें कान्हा में वृक्षारोपण की सफलता का एहसास होता है। जब वे वर्षावन, यात्रा उद्यान, मंडल उद्यान, कृषि वानिकी और तालाब पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हैं तब उन्हें समझ में आता है कि वृक्षारोपण का मतलब केवल पौधे लगाना और पानी देना नहीं है; इसके लिए गहन समर्पण और वैज्ञानिक देखभाल की आवश्यकता होती है।

 

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अधिकांश आगंतुक ताज़ी ऑक्सीजन की एक ऊर्जित करने वाली श्वास, शांत हरे परिदृश्य और विविध फूलों की खुशबू का अनुभव करते हैं। उनका मुख्य प्रश्न यही रहता है - ये पौधे कितने पुराने हैं और आप इस तरह का वातावरण कैसे बनाए रखते हैं?

लोगों के लिए हमारा जवाब सरल है - सबसे पहले, हम एक भरोसेमंद जल स्रोत और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं। दूसरा, हम पानी को धारण करके रखने वाली काली कपास मिट्टी का उपयोग करते हैं, जिससे बार-बार सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है। तीसरा, बायोचार से मिट्टी के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। अंत में, हम अच्छे विकास को सुनिश्चित करने के लिए लंबे, अच्छी तरह से विकसित पौधे लगाते हैं। कान्हा में BBG का यही रहस्य है।

वर्ष 2025 के विश्व पर्यावरण दिवस के विषय ‘प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना’ के अनुरूप, फ़ॉरेस्ट बाई हार्टफुलनेस (FBH) उन संधारणीय पद्धतियों पर ज़ोर देता है जो पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करती हैं। हमारा नीला, काला और हरा (BBG) तरीके से न केवल हरे-भरे पारिस्थितिकी तंत्र बढ़ते है बल्कि प्लास्टिक पर आधारित कृषि उत्पादों पर निर्भरता भी कम हो जाती है। बायोचार, वर्मीकंपोस्ट और नीम पाउडर जैसे प्राकृतिक मृदा सुधारकों का उपयोग करने से अक्सर प्लास्टिक में पैक किए जाने वाले कृत्रिम उर्वरकों की आवश्यकता नहीं रहती। पर्यावरण के अनुकूल तरीकों के प्रति यह प्रतिबद्धता प्लास्टिक कचरे को कम करने और पृथ्वी को स्वस्थ बनाने के वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है।


आज लगाया गया एक पेड़ कल के लिए एक वादा है। BBG तरीके से हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हर पेड़ को सही देखभालसही मिट्टी और पनपने के लिए सही वातावरण मिले।


आज लगाया गया एक पेड़ कल के लिए एक वादा है। BBG तरीके से हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हर पेड़ को सही देखभाल, सही मिट्टी और पनपने के लिए सही वातावरण मिले। कान्हा शांतिवनम् में हम जो बदलाव देखते हैं, वह इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सजग वनरोपण की इस यात्रा में हमारे साथ जुड़ें - क्योंकि हम साथ मिलकर सिर्फ़ पेड़ नहीं उगा रहे हैं; हम एक हरा-भरा भविष्य उगा रहे हैं।

बी. रतिनासबापति एक पारिस्थितिकीविद् हैं, जिन्हें, संसाधनों की कमी के बावजूद, वन पुनर्स्थापन, संरक्षण अनुसंधान और पर्यावरणीय शिक्षा में 37 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने पश्चिमी घाट और शहरी इको-पार्कों सहित पूरे भारत में पारिस्थितिकी परियोजनाओं का नेतृत्व किया है। उनका काम वनीकरण, जैव विविधता निगरानी और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण पर केंद्रित है। वर्ष 2024 में उन्हें संरक्षण शिक्षा के लिए जगन्नाथ राव एंडोमेंट अवार्डसे भी सम्मानित किया गया था।

 

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डॉ. अनंतनेनी श्रीनाथ फॉरेस्ट्स बाई हार्टफुलनेस में संरक्षण वैज्ञानिक हैं। वे दुर्लभ पौधों के संरक्षण, वनीकरण और ऊतक संवर्धन जैसी उन्नत प्रसार तकनीकों में विशेषज्ञ हैं। वे कान्हा शांतिवनम् और अन्य वनीकरण स्थलों पर जैव विविधता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा संसाधनों की कमी के बावजूद संरक्षण अनुसंधान को आगे बढ़ाते हैं।


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